'कैनविज' के मायाजाल में फंसा गोंडा: करोड़ों डकार कर ठगों ने फेरा मुंह, अब कप्तानी चौखट पर न्याय की गुहार गोंडा। सुनहरे भविष्य का सपना और पैसा दोगुना करने का लालच... बस यही वो हथियार थे जिनसे 'कैनविज' नाम के गिरोह ने मासूम ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल दिया। जिले में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का एक ऐसा काला सच सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और कंपनी के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। बुधवार को जब ठगी के शिकार दर्जनों ग्रामीण आंखों में आंसू और हाथ में फर्जी कागजात लेकर पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के पास पहुंचे, तो जिले में सक्रिय ठगों के सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खुल गया। 3 साल में दोगुना... और फिर 'गायब' हो गया जमाना ठगी का खेल इतना शातिर था कि लोग आसानी से जाल में फंस गए। ‘कैनविज इंफ्रा कॉर्पोरेशन इंडिया’ और ‘कैनविज इंडस्ट्रीज’ के कर्ता-धर्ताओं—कन्हैया गुलाटी और राधिका गुलाटी—ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर ऐसी स्कीमें पेश कीं जो बैंक और शेयर बाजार को भी मात दे रही थीं। स्कीम 1: ₹16,000 जमा करो, 3 साल में ₹32,000 ले जाओ। स्कीम 2: ₹24,000 निवेश करो और 30 महीनों तक ₹2,000 की पेंशन (रिटर्न) पाओ। कागजी नहीं, 'करोड़ों' का है खेल यह ठगी केवल हजारों की नहीं, बल्कि करोड़ों की है। पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है और उनके निवेश के आंकड़े चौंकाने वाले हैं: सुरेंद्र कुमार, जय प्रकाश और राम किशन यादव: इन तीनों ने ₹36-36 लाख की भारी-भरकम राशि कंपनी के हवाले कर दी। सुरेंद्र प्रताप सिंह: ₹5 लाख गंवाए। संजय वर्मा: ₹12 लाख का चूना लगा। रेनू सिंह और राधेश्याम वर्मा: क्रमशः ₹1.51 लाख और ₹6 लाख की चपत लगी। इसके अलावा, जिले के सैकड़ों छोटे निवेशकों ने ₹16-16 हजार की छोटी पूंजी लगाई थी, जो अब डूबती नजर आ रही है। बाउंस चेक और जान से मारने की धमकी जब निवेशकों ने अपना पैसा मांगना शुरू किया, तो कंपनी का असली चेहरा सामने आया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जो चेक दिए गए, वे बैंक पहुंचते ही 'रद्दी के टुकड़े' साबित हुए। अब आरोपियों ने फोन बंद कर लिए हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़ितों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क की कोशिश की, तो उन्हें न केवल भद्दी गालियां दी गईं, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी गई। "यह महज एक जिले का मामला नहीं है। कन्हैया गुलाटी और उसकी टीम ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना जाल फैला रखा है। यह एक संगठित अपराध है।" — एक पीड़ित निवेशक एक्शन में कप्तान: अब होगी 'कुर्की' वाली कार्रवाई? मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विनीत जायसवाल ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने पीड़ितों से निवेश के साक्ष्य, बाउंस चेक और धमकी के रिकॉर्ड मांगे हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस अब इन कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने और आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने की तैयारी में है। बड़ा सवाल: क्या सफेदपोश ठगों के हाथ कानून की पहुंच तक पहुंच पाएंगे? या फिर 'कैनविज' जैसे गिरोह नाम बदलकर किसी और जिले में नया जाल बुनना शुरू कर देंगे? अजीत मिश्रा (खोजी)
'कैनविज' के मायाजाल में फंसा गोंडा: करोड़ों डकार कर ठगों ने फेरा मुंह, अब कप्तानी चौखट पर न्याय की गुहार गोंडा। सुनहरे भविष्य का सपना और पैसा दोगुना करने का लालच... बस यही वो हथियार थे जिनसे 'कैनविज' नाम के गिरोह ने मासूम ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल दिया। जिले में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का एक ऐसा काला सच सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और कंपनी के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। बुधवार को जब ठगी के शिकार दर्जनों ग्रामीण आंखों में आंसू और हाथ में फर्जी कागजात लेकर पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के पास पहुंचे, तो जिले में सक्रिय ठगों के सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खुल गया। 3 साल में दोगुना... और फिर 'गायब' हो गया जमाना ठगी का खेल इतना शातिर था कि लोग आसानी से जाल में फंस गए। ‘कैनविज इंफ्रा कॉर्पोरेशन इंडिया’ और ‘कैनविज इंडस्ट्रीज’ के कर्ता-धर्ताओं—कन्हैया गुलाटी और राधिका गुलाटी—ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर ऐसी स्कीमें पेश कीं जो बैंक और शेयर बाजार को भी मात दे रही थीं। स्कीम 1: ₹16,000 जमा करो, 3 साल में ₹32,000 ले जाओ। स्कीम 2: ₹24,000 निवेश करो और 30 महीनों तक ₹2,000 की पेंशन (रिटर्न) पाओ। कागजी नहीं, 'करोड़ों' का है खेल यह ठगी केवल हजारों की नहीं, बल्कि करोड़ों की है। पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है और उनके निवेश के आंकड़े चौंकाने वाले हैं: सुरेंद्र कुमार, जय प्रकाश और राम किशन यादव: इन तीनों ने ₹36-36 लाख की भारी-भरकम राशि कंपनी के हवाले कर दी। सुरेंद्र प्रताप सिंह: ₹5 लाख गंवाए। संजय वर्मा:
₹12 लाख का चूना लगा। रेनू सिंह और राधेश्याम वर्मा: क्रमशः ₹1.51 लाख और ₹6 लाख की चपत लगी। इसके अलावा, जिले के सैकड़ों छोटे निवेशकों ने ₹16-16 हजार की छोटी पूंजी लगाई थी, जो अब डूबती नजर आ रही है। बाउंस चेक और जान से मारने की धमकी जब निवेशकों ने अपना पैसा मांगना शुरू किया, तो कंपनी का असली चेहरा सामने आया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जो चेक दिए गए, वे बैंक पहुंचते ही 'रद्दी के टुकड़े' साबित हुए। अब आरोपियों ने फोन बंद कर लिए हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़ितों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क की कोशिश की, तो उन्हें न केवल भद्दी गालियां दी गईं, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी गई। "यह महज एक जिले का मामला नहीं है। कन्हैया गुलाटी और उसकी टीम ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना जाल फैला रखा है। यह एक संगठित अपराध है।" — एक पीड़ित निवेशक एक्शन में कप्तान: अब होगी 'कुर्की' वाली कार्रवाई? मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विनीत जायसवाल ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने पीड़ितों से निवेश के साक्ष्य, बाउंस चेक और धमकी के रिकॉर्ड मांगे हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस अब इन कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने और आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने की तैयारी में है। बड़ा सवाल: क्या सफेदपोश ठगों के हाथ कानून की पहुंच तक पहुंच पाएंगे? या फिर 'कैनविज' जैसे गिरोह नाम बदलकर किसी और जिले में नया जाल बुनना शुरू कर देंगे? अजीत मिश्रा (खोजी)
- प्रदर्शन कार्यों की मांग है की मौलाना को फांसी दी जाए अधिक जानकारी के लिए मौलाना के बारे में जाना जाए2
- Post by Dinesh yadav1
- बस्ती। उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावों की पोल एक बार फिर बस्ती जनपद में खुल गई है। यहाँ बड़ेबन पुलिस चौकी से महज 30 मीटर की दूरी पर आधा दर्जन बेखौफ गुंडों ने एक पत्रकार के साथ न केवल बदसलूकी की, बल्कि उनकी जान लेने की कोशिश और असलहा छीनने का दुस्साहस भी किया। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि बस्ती में अब गुंडों को न तो कानून का डर है और न ही वर्दी का खौफ। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के मुताबिक, पत्रकार ने जब देखा कि कुछ दबंग एक छोटे दुकानदार के साथ गाली-गलौज और अभद्रता कर रहे हैं, तो उन्होंने अपने पेशेवर धर्म का पालन करते हुए वीडियो बनाना शुरू किया। बस यही बात उन 'सफेदपोश' गुंडों को नागवार गुजरी। पुलिस की नाक के नीचे तांडव हैरानी की बात यह है कि जहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले पुलिस की मौजूदगी महसूस करता है, वहाँ चौकी से चंद कदमों की दूरी पर: आधा दर्जन गुंडों ने पत्रकार को घेर लिया। हाथों से मोबाइल छीनकर साक्ष्य (वीडियो) डिलीट कराया गया। पत्रकार का असलहा छीनने का प्रयास किया गया। सरेराह गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। बड़ा सवाल: क्या बस्ती की पुलिस इतनी लाचार हो गई है कि उसकी चौखट पर पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं? अगर बीच सड़क पर एक सजग पत्रकार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या? चौकी इंचार्ज और कप्तान साहब ध्यान दें यह हमला सिर्फ पत्रकार पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। वीडियो डिलीट करा देना इस बात का प्रमाण है कि हमलावर पेशेवर अपराधी हैं और उन्हें साक्ष्य मिटाने की तकनीक बखूबी पता है। पत्रकार के साथ हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक चुनौती है। क्या इन गुंडों पर बुलडोजर वाली कार्रवाई होगी या फिर पुलिस 'जांच जारी है' का रटा-रटाया जुमला बोलकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगी? सम्पादकीय टिप्पणी: पत्रकारिता का गला घोंटने की कोशिश करने वाले ये तत्व समाज के लिए कैंसर हैं। अगर समय रहते इन पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो बस्ती की गलियों में कलम की आवाज दब जाएगी और गुंडाराज का उदय होगा।1
- 🙏😊1
- Pramod Kumar Goswami. 10/03/20261
- डीएम व एसपी द्वारा उ0प्र0 उ0नि0 (UPSI) परीक्षा-2026 के सकुशल संपादन हेतु ड्यूटी में लगे पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ परीक्षा की शुचिता व सुरक्षा सुनिश्चित करने के दृष्टिगत की गई समीक्षा बैठक, दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश। संतकबीरनगर । जिलाधिकारी आलोक कुमार व पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा द्वारा उत्तर प्रदेश उपनिरीक्षक (UPSI) भर्ती परीक्षा-2026 को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के दृष्टिगत ड्यूटी में लगे पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में समीक्षा बैठक करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व) जयप्रकाश व अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों/पुलिस जवानों को निर्देशित किया गया कि परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पूर्व अभ्यर्थियों की सघन तलाशी (Frisking) सुनिश्चित की जाए। किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या प्रतिबंधित सामग्री को अंदर ले जाना पूर्णतः वर्जित रहेगा। सभी पुलिसकर्मी और केंद्र व्यवस्थापक निर्धारित समय से पूर्व अपने केंद्रों पर उपस्थिति दर्ज कराएं। परीक्षा केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ एकत्रित न होने दी जाए तथा यातायात व्यवस्था को सुचारू रखा जाए। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या नकल कराने वाले गिरोहों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए। ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेटों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने तथा पल-पल की रिपोर्ट कंट्रोल रूम को प्रेषित करने हेतु निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, सभी अधिकारी और कर्मचारी 'टीम भावना' के साथ कार्य करें ताकि अभ्यर्थी एक भयमुक्त वातावरण में परीक्षा दे सकें। इस अवसर पर पुलिस क्षेत्राधिकारी मेहदावल सर्वदवन सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अमित कुमार सहित थानों के SO/SHO तथा परीक्षा ड्यूटी में तैनात अन्य पुलिसकर्मी आदि उपस्थित रहे।4
- Panchayat Karma Kala se suarvada hatwane ke sambandh mein jald se jald karvai karne ki kripa Karen ramkesh Putra Birju Ne suar bara palkar sarkari jameen mein kabja kiye hue hain Sarkar se nivedan hai ki jald se jald karvai kar Gram Panchayat Karma Kala se 3 kilometer dur swar bade ko transfer kiya jaaye ha1
- ईरान इजरायल अमेरिका मेडलिस्ट में बढ़ रहे तनाव से अभी हमारे इंडिया में भी असर दिखने लगा है घरेलू गैस का यह हाल है क्योंकि सप्लाई वहीं से सब आता है अभी तो पेट्रोल का हाल बाकि है1