Shuru
Apke Nagar Ki App…
Pramod Kumar Goswami. 10/03/2026
Pramod Kumar Goswami
Pramod Kumar Goswami. 10/03/2026
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- Pramod Kumar Goswami. 10/03/20261
- अभी जिस हिसाब से ईरान अमेरिका इजरायल फुल स्क्रीन वार कर रहे हैं इस हिसाब से दुनिया में बहुत ही भयानक तबाही आने वाली है और सबसे पहले जितने भी हमारे मेडलिस्ट में इंडियन भाई हैं सरकार से निवेदन है कि जल्द से जल्द उनको इंडिया बुलवाया जाए जय हिंद 🇮🇳2
- बस्ती। उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावों की पोल एक बार फिर बस्ती जनपद में खुल गई है। यहाँ बड़ेबन पुलिस चौकी से महज 30 मीटर की दूरी पर आधा दर्जन बेखौफ गुंडों ने एक पत्रकार के साथ न केवल बदसलूकी की, बल्कि उनकी जान लेने की कोशिश और असलहा छीनने का दुस्साहस भी किया। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि बस्ती में अब गुंडों को न तो कानून का डर है और न ही वर्दी का खौफ। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के मुताबिक, पत्रकार ने जब देखा कि कुछ दबंग एक छोटे दुकानदार के साथ गाली-गलौज और अभद्रता कर रहे हैं, तो उन्होंने अपने पेशेवर धर्म का पालन करते हुए वीडियो बनाना शुरू किया। बस यही बात उन 'सफेदपोश' गुंडों को नागवार गुजरी। पुलिस की नाक के नीचे तांडव हैरानी की बात यह है कि जहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले पुलिस की मौजूदगी महसूस करता है, वहाँ चौकी से चंद कदमों की दूरी पर: आधा दर्जन गुंडों ने पत्रकार को घेर लिया। हाथों से मोबाइल छीनकर साक्ष्य (वीडियो) डिलीट कराया गया। पत्रकार का असलहा छीनने का प्रयास किया गया। सरेराह गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। बड़ा सवाल: क्या बस्ती की पुलिस इतनी लाचार हो गई है कि उसकी चौखट पर पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं? अगर बीच सड़क पर एक सजग पत्रकार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या? चौकी इंचार्ज और कप्तान साहब ध्यान दें यह हमला सिर्फ पत्रकार पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। वीडियो डिलीट करा देना इस बात का प्रमाण है कि हमलावर पेशेवर अपराधी हैं और उन्हें साक्ष्य मिटाने की तकनीक बखूबी पता है। पत्रकार के साथ हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक चुनौती है। क्या इन गुंडों पर बुलडोजर वाली कार्रवाई होगी या फिर पुलिस 'जांच जारी है' का रटा-रटाया जुमला बोलकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगी? सम्पादकीय टिप्पणी: पत्रकारिता का गला घोंटने की कोशिश करने वाले ये तत्व समाज के लिए कैंसर हैं। अगर समय रहते इन पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो बस्ती की गलियों में कलम की आवाज दब जाएगी और गुंडाराज का उदय होगा।1
- अब नहीं होगी गैस की किल्लत, भक्तों के पॉपॉ ने बता दिया उपाय1
- 🙏😊1
- Post by A news 881
- सैनिकों के परिवारों को शिक्षा में सहयोग, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज ने भारतीय सेना से किया समझौता अयोध्या ।टेस्ट प्रिपरेशन सेवाओं की अग्रणी संस्था आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल) ने भारतीय सेना के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य सेना के सेवारत और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों को शैक्षणिक सहायता और कल्याणकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। समझौते के तहत देशभर में एईएसएल के सभी केंद्रों पर सेना से जुड़े विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और विशेष रियायतें दी जाएंगी। इसमें सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरता पुरस्कार विजेताओं, दिव्यांग कर्मियों और ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को लाभ मिलेगा।एमओयू पर भारतीय सेना की ओर से कर्नल, सेरेमोनियल एंड वेलफेयर 3&4 तथा एईएसएल की ओर से चीफ अकैडमिक एंड बिजनेस हेड (दिल्ली-एनसीआर) डॉ. यश पाल ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सैनिकों के बच्चों को रजिस्ट्रेशन फीस छोड़कर बाकी सभी फीस में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। 20 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले कर्मियों और वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के बच्चों की ट्यूशन फीस भी पूरी तरह माफ होगी। वहीं सेवारत और सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों को ट्यूशन फीस में 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।एईएसएल के एमडी और सीईओ चंद्र शेखर गरिसा रेड्डी ने कहा कि शिक्षा उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। भारतीय सेना के साथ यह साझेदारी सैनिकों के परिवारों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान विद्यार्थियों को शैक्षणिक व करियर से संबंधित मेंटरिंग और काउंसलिंग भी वर्चुअल तथा ऑफलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। एईएसएल देशभर में 415 से अधिक केंद्रों के माध्यम से मेडिकल (नीट) और इंजीनियरिंग (जेईई) सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता है।1
- आदरणीय नेताजी की दूरअंदेशी आज भी रास्ता दिखाती है संसद में आदरणीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी का एक पुराना बयान आज फिर याद आ रहा है। उस वक्त उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा था “पता नहीं अमेरिका से इतना डरते क्यों हैं… क्या है अमेरिका वक़्त गुज़रता गया, हालात बदलते गए… मगर आज जब दुनिया की सियासत को देखते हैं तो एहसास होता है कि आदरणीय नेताजी की बातों में कितनी दूरअंदेशी और सच्चाई छुपी हुई थी। उन्होंने हमेशा हिंदुस्तान की ख़ुद्दारी, आत्मसम्मान और आज़ाद फैसलों की वकालत की। आदरणीय नेताजी एक ऐसी सोच के रहनुमा थे जो मुल्क को किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपने दम और अपनी शर्तों पर खड़ा देखना चाहते थे आज उनका यह बयान सुनकर दिल यही कहता है कि सच्चे लीडर वही होते हैं जो आने वाले वक़्त को पहले ही पढ़ लेते हैं। नेताजी की सियासी दूरअंदेशी को सलाम। आदरणीय नेताजी और उनके विचार सदा अमर रहे1