छतरपुर जिले की जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची गौतम नगर निवासी लक्ष्मी लटौरिया भीषण गर्मी और उमस के कारण जनसुनवाई परिसर के बाहर बेहोश होकर गिर पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काफी देर तक कोई भी अधिकारी या जिम्मेदार कर्मचारी उनकी मदद के लिए नहीं पहुंचा। मौके पर मौजूद एक महिला पत्रकार ने उन्हें पानी पिलाकर संभाला, जिसके बाद उन्हें होश आया। होश में आने के बाद लक्ष्मी फूट-फूटकर रोने लगीं और अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने ज़रूरत के समय कुछ राशि उधार ली थी, जिसका बड़ा हिस्सा वे पहले ही चुका चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद उनसे भारी ब्याज की मांग की जा रही है। महिला का आरोप है कि ब्याज न देने पर उनके मकान पर ताला लगाकर कब्ज़ा कर लिया गया है, उनके किरायेदारों को भगा दिया गया है, और उनके परिवार को धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई है। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जनसुनवाई का मूल उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सुनना और तत्काल राहत प्रदान करना है, तब परिसर के बाहर बेहोश पड़ी एक फरियादी महिला तक प्रशासन की नज़र क्यों नहीं पहुंची। इससे यह प्रश्न भी उठता है कि क्या जनसुनवाई केवल ज्ञापन लेने तक ही सीमित होकर रह गई है। फिलहाल, महिला ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा, न्याय और अपने मकान का कब्ज़ा वापस दिलाने की मांग की है। इस मामले में अभी तक प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
छतरपुर जिले की जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची गौतम नगर निवासी लक्ष्मी लटौरिया भीषण गर्मी और उमस के कारण जनसुनवाई परिसर के बाहर बेहोश होकर गिर पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काफी देर तक कोई भी अधिकारी या जिम्मेदार कर्मचारी उनकी मदद के लिए नहीं पहुंचा। मौके पर मौजूद एक महिला पत्रकार ने उन्हें पानी पिलाकर संभाला, जिसके बाद उन्हें होश आया। होश में आने के बाद लक्ष्मी फूट-फूटकर रोने लगीं और अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने ज़रूरत के समय कुछ राशि उधार ली थी, जिसका बड़ा हिस्सा वे पहले ही चुका चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद उनसे भारी ब्याज की मांग की जा रही है। महिला का आरोप है कि ब्याज न देने पर उनके मकान पर ताला लगाकर कब्ज़ा कर लिया गया है, उनके किरायेदारों को भगा दिया गया है, और उनके परिवार को धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई है। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जनसुनवाई का मूल उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सुनना और तत्काल राहत प्रदान करना है, तब परिसर के बाहर बेहोश पड़ी एक फरियादी महिला तक प्रशासन की नज़र क्यों नहीं पहुंची। इससे यह प्रश्न भी उठता है कि क्या जनसुनवाई केवल ज्ञापन लेने तक ही सीमित होकर रह गई है। फिलहाल, महिला ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा, न्याय और अपने मकान का कब्ज़ा वापस दिलाने की मांग की है। इस मामले में अभी तक प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
- छतरपुर में जिला प्रशासन ने शुक्रवार सुबह पीडब्ल्यूडी के जीर्ण-शीर्ण भवनों को जमींदोज करने के लिए बुलडोजर कार्यवाही शुरू की थी, लेकिन केवल दो या तीन मकान गिराए जाने के बाद ही इसे रोकना पड़ा। मौके पर बड़ी संख्या में पहुंचे आक्रोशित हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने इस कार्यवाही का कड़ा विरोध किया। उनकी मांग थी कि प्रशासन पहले बड़े भू-माफियों पर बुलडोजर चलाए, उसके बाद ही इन गरीबों को हटाया जाए। बढ़ते विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने फिलहाल बुलडोजर की कार्यवाही को रोक दिया है। यह कार्यवाही ऐसे समय में हुई, जब बीते दिनों 4 तारीख को टौरिया मुहल्ले में एक परिवार के साथ हुई मामूली दुर्घटना के बाद आरोपियों द्वारा पीड़ित दंपति के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी, जिसके बाद जनसामान्य लगातार बुलडोजर एक्शन की मांग कर रहा था। इसी बीच, प्रशासन ने कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पुराने एसबीआई बैंक के पास करोड़ों की संपत्ति से कब्जा हटाने के उद्देश्य से चिन्हित 10 पीडब्ल्यूडी भवनों पर कार्यवाही शुरू की थी। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस, राजस्व, नगरपालिका और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद रहे। हिंदूवादी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में शनिवार को छतरपुर बंद का आह्वान भी किया है।4
- छतरपुर के टौरिया मोहल्ले में हुई एक घटना के विरोध में आज छतरपुर शहर पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान हिंदू संगठन ने घटना के आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग की है।1
- छतरपुर शहर के चौक बाजार सहित प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में छतरपुर बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है, जहाँ अधिकांश दुकानें बंद हैं। व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर इस बंद का समर्थन किया है। इस बंद के समर्थन में बड़ी संख्या में व्यापारी और नागरिक शामिल हुए हैं। यह बंद टौरिया कांड को लेकर हिंदूवादी संगठनों और व्यापारिक संगठनों के आह्वान पर आयोजित किया गया है। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था की गई है, और पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल, शहर में माहौल शांतिपूर्ण बना हुआ है, लेकिन पूरे शहर में बंद का असर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।1
- जानकारी मिली है कि कहीं से बदबू आ रही है।1
- छतरपुर में प्रेम विवाह करने वाले एक दंपती ने बुधवार, 12 जून को दोपहर करीब 3:30 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। महिला मोना ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि कुछ लोग उनके घर पहुंचकर गाली-गलौज कर रहे हैं और उन्हें घर खाली करने का दबाव बना रहे हैं। महिला के अनुसार, उसने और उसके पति जगदेव ने बालिग होने के बाद आपसी सहमति से कोर्ट मैरिज और हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है। दंपती का आरोप है कि दायल, बिरहा, रविन्द्र, मनीष और शनि नामक पांच लोग उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। दंपती ने एसपी से उन्हें सुरक्षा प्रदान करने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने दंपती के आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है, हालांकि, इन आरोपों की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।1
- छतरपुर, मध्य प्रदेश के गढ़ी मलहरा थाना क्षेत्र में एक गंभीर आपराधिक मामले के फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस और आरोपियों के परिजनों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई, जिसमें एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, अपराध क्रमांक 128/26 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत तुलाराम अहिरवार सहित कुल आठ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। यह मामला सेशन ट्रायल से संबंधित था। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को लगातार थाने में उपस्थित होने के लिए सूचित किया जा रहा था। आरोपियों द्वारा पहले 15 दिन का समय मांगा गया था और बाद में परिवार में शोक होने के कारण तेरहवीं संस्कार तक का समय भी पुलिस से लिया गया था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन तेरहवीं के बाद सभी आरोपी दिल्ली चले गए और फरार हो गए। इसी क्रम में शुक्रवार को मुख्य आरोपी तुलाराम अहिरवार अपने घर पर मौजूद मिला, जिसे हिरासत में लेने पुलिस पहुंची। पुलिस के अनुसार, आरोपी को थाने लाने के दौरान उसके परिजनों द्वारा अनावश्यक रूप से माहौल खराब करने का प्रयास किया गया। पुलिस का आरोप है कि कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर पुलिस टीम की घेराबंदी करते दिखाई दिए, जिसके चलते पुलिस को अपने बचाव में हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान, आरोपी के भाई रामू अहिरवार ने प्रधान आरक्षक बृजेश यादव पर हमला करने की नीयत से ईंट उठाई और उसे रोकने के दौरान प्रधान आरक्षक को लात मार दी। घटना के बाद पुलिस ने आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है। छतरपुर के एसपी रजत सकलेचा ने इस संबंध में अपनी बात रखी है।4
- छतरपुर स्थित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम के छात्रों को अंग्रेजी माध्यम का प्रश्न पत्र दिए जाने के विरोध में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान आज 12 जून को दोपहर करीब 4:00 बजे छात्र नेता सतेंद्र शर्मा अचानक बेहोश हो गए, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। सतेंद्र शर्मा की हालत गंभीर होने के बाद, उन्हें तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से छतरपुर जिला अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उन्हें पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा है। इस घटना के बाद, छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से इस पूरे मामले में उचित कार्रवाई करने और छात्रों के लिए भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने हेतु समुचित व्यवस्था प्रदान करने की मांग की है।1
- छतरपुर जिले के परा पट्टी गांव के बाहर एक पुल पर रात करीब 10:30 बजे एक युवक नशे की हालत में अपनी बाइक से गिर गया। गांव के लोग वहां से गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि युवक नशे में पुल के पास पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने तुरंत युवक की सहायता की, उसका मोबाइल निकालकर किसी नंबर पर कॉल किया, जिससे पता चला कि वह डेरी रोड पर रहता है और राय समाज से है। इसके बाद गांव के लोगों ने एकजुट होकर उस युवक को अस्पताल तक पहुंचाने में उसकी मदद की।1