भट्टा मोहल्ला में भूजल पर हमला! इंडियन कॉफी हाउस के पीछे खदान को मलबे से भरने का खेल, प्रशासनिक आदेशों की उड़ाई धज्जियां कटनी। भट्टा मोहल्ला स्थित इंडियन कॉफी हाउस के पीछे मौजूद पुरानी खदान को सीवर लाइन खुदाई से निकले मलबे से भरा जा रहा है, जबकि प्रशासन द्वारा स्पष्ट आदेश जारी हैं कि खदानों को पाटना पूर्णतः प्रतिबंधित है। कारण साफ है—ये खदानें वॉटर चार्जिंग जोन के रूप में कार्य करती हैं और भूजल संचयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद नगर निगम क्षेत्र में खुलेआम खनन स्थल को डंपिंग यार्ड में तब्दील किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आने वाले समय में जल संकट को भी न्योता दे सकता है। ⚠️ भूजल संचयन खत्म करने की साजिश? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खदानें वर्षा जल को धरती में समाहित कर जलस्तर बनाए रखने में सहायक होती हैं। इन्हें मलबे से भरना सीधे तौर पर भूजल स्रोतों की हत्या के समान है। 🤝 नगर निगम–नेता गठजोड़ की बू? स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवर लाइन खुदाई से निकले मलबे को जानबूझकर खदान में डलवाया जा रहा है, जो नगर निगम के कुछ अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यदि प्रशासन के आदेश स्पष्ट हैं, तो फिर यह कार्य किसकी अनुमति से हो रहा है—यह बड़ा सवाल है। ❓ प्रशासन की चुप्पी क्यों? क्या पर्यावरण नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या खदान भरने के बदले किसी प्रकार का लाभ लिया जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा? 📢 जनहित में तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल हस्तक्षेप, मलबा डालने पर तुरंत रोक और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा पूरे शहर को जल संकट के रूप में भुगतना पड़ेगा।
भट्टा मोहल्ला में भूजल पर हमला! इंडियन कॉफी हाउस के पीछे खदान को मलबे से भरने का खेल, प्रशासनिक आदेशों की उड़ाई धज्जियां कटनी। भट्टा मोहल्ला स्थित इंडियन कॉफी हाउस के पीछे मौजूद पुरानी खदान को सीवर लाइन खुदाई से निकले मलबे से भरा जा रहा है, जबकि प्रशासन द्वारा स्पष्ट आदेश जारी हैं कि खदानों को पाटना पूर्णतः प्रतिबंधित है। कारण साफ है—ये खदानें वॉटर चार्जिंग जोन के रूप में कार्य करती हैं और भूजल संचयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद नगर निगम क्षेत्र में खुलेआम खनन स्थल को डंपिंग यार्ड में तब्दील किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आने वाले समय में जल संकट को भी न्योता दे सकता है। ⚠️ भूजल संचयन खत्म करने की साजिश? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खदानें वर्षा जल को धरती में समाहित कर जलस्तर बनाए रखने में सहायक होती हैं। इन्हें मलबे से भरना सीधे तौर पर भूजल स्रोतों की हत्या के समान है। 🤝 नगर निगम–नेता गठजोड़ की बू? स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवर लाइन खुदाई से निकले मलबे को जानबूझकर खदान में डलवाया जा रहा है, जो नगर निगम के कुछ अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यदि प्रशासन के आदेश स्पष्ट हैं, तो फिर यह कार्य किसकी अनुमति से हो रहा है—यह बड़ा सवाल है। ❓ प्रशासन की चुप्पी क्यों? क्या पर्यावरण नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या खदान भरने के बदले किसी प्रकार का लाभ लिया जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा? 📢 जनहित में तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल हस्तक्षेप, मलबा डालने पर तुरंत रोक और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा पूरे शहर को जल संकट के रूप में भुगतना पड़ेगा।
- भट्टा मोहल्ला में भूजल पर हमला! इंडियन कॉफी हाउस के पीछे खदान को मलबे से भरने का खेल, प्रशासनिक आदेशों की उड़ाई धज्जियां कटनी। भट्टा मोहल्ला स्थित इंडियन कॉफी हाउस के पीछे मौजूद पुरानी खदान को सीवर लाइन खुदाई से निकले मलबे से भरा जा रहा है, जबकि प्रशासन द्वारा स्पष्ट आदेश जारी हैं कि खदानों को पाटना पूर्णतः प्रतिबंधित है। कारण साफ है—ये खदानें वॉटर चार्जिंग जोन के रूप में कार्य करती हैं और भूजल संचयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद नगर निगम क्षेत्र में खुलेआम खनन स्थल को डंपिंग यार्ड में तब्दील किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आने वाले समय में जल संकट को भी न्योता दे सकता है। ⚠️ भूजल संचयन खत्म करने की साजिश? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खदानें वर्षा जल को धरती में समाहित कर जलस्तर बनाए रखने में सहायक होती हैं। इन्हें मलबे से भरना सीधे तौर पर भूजल स्रोतों की हत्या के समान है। 🤝 नगर निगम–नेता गठजोड़ की बू? स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवर लाइन खुदाई से निकले मलबे को जानबूझकर खदान में डलवाया जा रहा है, जो नगर निगम के कुछ अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यदि प्रशासन के आदेश स्पष्ट हैं, तो फिर यह कार्य किसकी अनुमति से हो रहा है—यह बड़ा सवाल है। ❓ प्रशासन की चुप्पी क्यों? क्या पर्यावरण नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या खदान भरने के बदले किसी प्रकार का लाभ लिया जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा? 📢 जनहित में तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल हस्तक्षेप, मलबा डालने पर तुरंत रोक और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा पूरे शहर को जल संकट के रूप में भुगतना पड़ेगा।1
- मेरठ के कपसाड के पीड़ित परिवार से मिले बगैर हमारे नेता बड़े चन्द्रशेखर आजाद जी जाने वाले नहीं हैं। टोल पर बैठकर न्याय की आवाज बुलंद कर रहे हैं। यूपी सरकार में डर का माहौल है। आजाद को कैसे कैद कर सकते हो । हो उड़ता हुआ बाज है।1
- चैनल आज तक24×7 कटनी से संवाददाता मुकेश कुमार यादव की कलम से लोकेशन जिला कटनी शासकीय उच्चतर मूल्य मर्यादित प्रियदर्शनी सहकारिता समिति बिजरावगढ़ केंद्र बरही प्रभारी कपिल करेला केंद्र प्रभारी(m.k) के द्वारा खुलेआम किसानों को लूट रहे हैं सरकारी मानक रिकॉर्ड में 40 किलोग्राम बोरियों में पैकिंग करने का आदेश है जिसमें प्रभारी के द्वारा 41 किलो 500 ग्राम की भर्ती कराई जा रही है जिसमें भी किसानों को 39 किलो ग्राम की ही रसीद दी जाती है जिन किसानों की स्लॉट की डेट खत्म होने को है पर उनके वजह व्यापारियों की हजारों क्विंटल धान मोटी रकम लेकर वेयरहाउस गोदाम में शिफ्ट किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर किसानों के बोलने पर उनसे अभद्रता से बात कर मारपीट किया जा रहा है जबकि देश का ही अन्नदाता है किसान देश की अर्थव्यवस्था इन्हीं किसानों से चलती है फिर भी किसानों को ही चारों तरफ से घसीटा जा रहा है और भ्रष्टाचारीयों का ही बोलबाला है फिर भी इनके खिलाफकोई भी विभागीय कार्यवाही नहीं हो रही और यह लोग करोड़ों रुपए का हेरा फेरी कर अपने निजी प्रॉपर्टी बना रहे हैं किसान यूनिटी यूनियन की भी कोई सुनने वाला नहीं आपको दिखा रहे हैं आंखों देखा हाल सभी क्षेत्र वासियों और किसानों के साथ किसानों को न्याय मिले यही है प्रशासन से सवाल ना चले भ्रष्टाचारियों का राज2
- जिले में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाये जाने के उपलक्ष्य में कृषि रथ का संचालन 11 जनवरी, 2026 से प्रारम्भ उमरिया/कृषि उपसंचालक संग्राम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में वर्ष 2026 को 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश' के रूप में कृषि वर्ष मनाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों को नई तकनीक, योजनाओं (जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आदि) और नवाचारों की जानकारी देने के लिए कृषि रथ का संचालन 11 जनवरी, 2026 से प्रारम्भ किया जा रहा है। जो उमरिया जिले के अंतर्गत सभी विकासखण्डो के ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर कृषि को लाभकारी बनाने के लिए कृषको के बीच जागरूकता फैलाएगा और इसके लिए जिला व ब्लॉक स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। कृषि रथ संचालन के मुख्य उद्देश्यः किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार सृजित करना, और कृषि को टिकाऊ व तकनीकी रूप से उन्नत बनाना। गतिविधियाँ: कृषि रथ जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, उन्नत बीज, कीट-रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता और पराली प्रबंधन जैसी जानकारी देगा। रबी सीजन के दौरान प्रत्येक विकासखंड में एक माह तक रथों का संचालन होगा और प्रतिदिन तीन ग्राम पंचायतों में भ्रमण किया जाएगा। कलेक्टर महोदय की अध्यक्षता में जिला स्तरीय और एसडीएम की अध्यक्षता में ब्लॉक स्तरीय समितियां बनाई गई हैं, और प्रत्येक रथ के साथ कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम होगी जो ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर कृषि को लाभकारी बनाने के लिए जागरूकता फैलाऐंगे।1
- अनुभूति कार्यक्रम मे छात्रों ने जंगल की सैर और वन की सुरक्षा का कर्तव्य निभाएंगे कुम्हारी - वन विभाग के द्वारा अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन सलैया वन चौकी मे हुआ जिसमें छात्र-छात्राओं ने जंगल में 5 किलोमीटर तक पेड़ पौधे जंगली जानवर पेड़ों की प्रजाति आदि से जुड़ी हुई जानकारी वन विभाग की टीम के द्वारा उन्हें बताई गई वन हमारे लिए जीवन देने वाले मानव सभ्यता में वन की अहम भूमिका है | वन से ही पर्यावरण वर्षा निर्भर होती है वनों की सुरक्षा का दायित्व हमारा मुख्य उद्देश्य होता है अधिक से अधिक हम पौधे लगाए और उनकी देखभाल करे ताकि पर्यावरण का संतुलन सही रहे अनुभूति कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर बी एल रोहित रिटायर्ड शिक्षक जिन्हें 2013 में राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुरस्कार दोनों से सम्मानित जिन्होंने छात्र-छात्राओं को वन सभ्यता से जुड़ी जानकारी और वातावरण को दूषित करने में प्लास्टिक की अहम भूमिका होती है जो 400 वर्षों तक जीवित रहती है जो हमारी मिट्टी को भी दूषित करती है उसका उपयोग हम बिल्कुल भी ना करें1
- https://youtu.be/9slbnEpTuxs?si=mgCiy73z7CaCFuPM पूरा वीडियो यूट्यूब चैनल पर... 1 से 3 लाख रुपए तक की यह फसल प्रति एकड़ में निकलती है।1
- सतना।हनुमान नगर नईबस्ती में पुलिस पार्टी पर पथराव करने और खदेड़ने बाले चार आरोपियों की कार्रवाई के सम्बंध में जानकारी देते सीएसपी देवेन्द्र प्रताप सिंह चौहान1
- जिसके नाम में ही “आज़ाद” हो… उसे ज़ंजीरों में कौन रोक सकता है?1