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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) परीक्षा 03 और 04 जून 2026 को आजमगढ़ जनपद में होगी। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह से नकलविहीन, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी; पहली पाली सुबह 09:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक चलेगी। आजमगढ़ जनपद में कुल 14 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ 22,236 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। आगामी टीजीटी परीक्षा के सफल संचालन के लिए जनपद का प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और अलर्ट है।

11 hrs ago
user_Arun Pandey
Arun Pandey
आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) परीक्षा 03 और 04 जून 2026 को आजमगढ़ जनपद में होगी। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह से नकलविहीन, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी; पहली पाली सुबह 09:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक चलेगी। आजमगढ़ जनपद में कुल 14 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ 22,236 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। आगामी टीजीटी परीक्षा के सफल संचालन के लिए जनपद का प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और अलर्ट है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • आजमगढ़ के लालगंज क्षेत्र में स्थित सुमन हॉस्पिटल एंड चाइल्ड केयर सेंटर को स्वास्थ्य विभाग ने एक प्रसूता की मृत्यु के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सील कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. एन.आर. वर्मा के निर्देश पर की गई। डिप्टी सीएमओ एवं नोडल निजी चिकित्सा प्रतिष्ठान डॉ. आलेन्द्र कुमार ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस जांच में प्रसूता की मृत्यु और नवजात को गंभीर हालत में रेफर किए जाने की पुष्टि हुई। निरीक्षण के दौरान, अस्पताल में फायर सेफ्टी, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक उपकरण और अभिलेखों में गंभीर कमियां पाई गईं, जिससे स्पष्ट हुआ कि अस्पताल मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था। डिप्टी सीएमओ ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा में लापरवाही एक गंभीर विषय है, जिसके चलते अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है और विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सीएमओ ने यह भी कहा कि अवैध और मानकविहीन अस्पतालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    आजमगढ़ के लालगंज क्षेत्र में स्थित सुमन हॉस्पिटल एंड चाइल्ड केयर सेंटर को स्वास्थ्य विभाग ने एक प्रसूता की मृत्यु के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सील कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. एन.आर. वर्मा के निर्देश पर की गई।

डिप्टी सीएमओ एवं नोडल निजी चिकित्सा प्रतिष्ठान डॉ. आलेन्द्र कुमार ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस जांच में प्रसूता की मृत्यु और नवजात को गंभीर हालत में रेफर किए जाने की पुष्टि हुई। निरीक्षण के दौरान, अस्पताल में फायर सेफ्टी, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक उपकरण और अभिलेखों में गंभीर कमियां पाई गईं, जिससे स्पष्ट हुआ कि अस्पताल मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था।

डिप्टी सीएमओ ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा में लापरवाही एक गंभीर विषय है, जिसके चलते अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है और विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सीएमओ ने यह भी कहा कि अवैध और मानकविहीन अस्पतालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_शैलेन्द्र पत्रकार
    शैलेन्द्र पत्रकार
    आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • आजमगढ़ जिले में बकरीद के त्योहार के मद्देनज़र पुलिस ने फ्लैग मार्च किया। इस अवसर पर, एसएसपी ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
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    आजमगढ़ जिले में बकरीद के त्योहार के मद्देनज़र पुलिस ने फ्लैग मार्च किया। इस अवसर पर, एसएसपी ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
    user_24News उत्तर प्रदेश
    24News उत्तर प्रदेश
    Azamgarh, Uttar Pradesh•
    6 hrs ago
  • प्रदेश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा लाइनमैन आज भी असुरक्षित माहौल और बदहाल व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं। गाँव से लेकर शहर तक बिजली आपूर्ति बहाल रखने की अहम जिम्मेदारी इन्हीं कर्मियों के कंधों पर होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ जोखिम, अत्यधिक दबाव और उपेक्षा ही मिलती है। ये संविदा लाइनमैन भीषण गर्मी, बारिश, आँधी या रात के अंधेरे जैसी हर विपरीत परिस्थिति में बिजली के फॉल्ट ठीक करने के लिए खंभों पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। कई बार उन्हें करंट लगने से गंभीर हादसों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाते हैं और न ही स्थायी सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते हैं। जानकारी के अनुसार, अधिकांश लाइनमैनों को मात्र 9 से 10 हजार रुपये का मासिक मानदेय मिलता है, और उनकी ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं होता। जब तक क्षेत्र का फॉल्ट ठीक नहीं हो जाता, उन्हें लगातार काम करना पड़ता है, कई बार तो पूरी रात बिजली बहाल करने में बीत जाती है। संविदा कर्मियों का कहना है कि विभागीय संसाधनों की कमी, अधिकारियों का दबाव और जनता की नाराजगी का सबसे अधिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता है, क्योंकि बिजली कटौती होने पर सबसे पहले उन्हें ही लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था काफी हद तक इन संविदा कर्मियों पर निर्भर है; यदि ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम न करें, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इन सबके बावजूद, दुर्घटना होने पर कई मामलों में उन्हें न तो पर्याप्त मुआवजा मिलता है और न ही उनके परिवार को उचित सहायता। क्षेत्र के लोगों और संविदा कर्मियों ने सरकार से यह माँग की है कि उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, एक सम्मानजनक वेतन और स्थायीकरण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। उनका तर्क है कि जो कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान खतरे में डालकर जनता को रोशनी दे रहे हैं, उन्हें भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन फ्रंटलाइन कर्मियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या बिजली व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले इन संविदा लाइनमैनों को वास्तव में वह सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं।
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    प्रदेश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा लाइनमैन आज भी असुरक्षित माहौल और बदहाल व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं। गाँव से लेकर शहर तक बिजली आपूर्ति बहाल रखने की अहम जिम्मेदारी इन्हीं कर्मियों के कंधों पर होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ जोखिम, अत्यधिक दबाव और उपेक्षा ही मिलती है।

ये संविदा लाइनमैन भीषण गर्मी, बारिश, आँधी या रात के अंधेरे जैसी हर विपरीत परिस्थिति में बिजली के फॉल्ट ठीक करने के लिए खंभों पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। कई बार उन्हें करंट लगने से गंभीर हादसों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाते हैं और न ही स्थायी सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते हैं। जानकारी के अनुसार, अधिकांश लाइनमैनों को मात्र 9 से 10 हजार रुपये का मासिक मानदेय मिलता है, और उनकी ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं होता। जब तक क्षेत्र का फॉल्ट ठीक नहीं हो जाता, उन्हें लगातार काम करना पड़ता है, कई बार तो पूरी रात बिजली बहाल करने में बीत जाती है।

संविदा कर्मियों का कहना है कि विभागीय संसाधनों की कमी, अधिकारियों का दबाव और जनता की नाराजगी का सबसे अधिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता है, क्योंकि बिजली कटौती होने पर सबसे पहले उन्हें ही लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था काफी हद तक इन संविदा कर्मियों पर निर्भर है; यदि ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम न करें, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इन सबके बावजूद, दुर्घटना होने पर कई मामलों में उन्हें न तो पर्याप्त मुआवजा मिलता है और न ही उनके परिवार को उचित सहायता।

क्षेत्र के लोगों और संविदा कर्मियों ने सरकार से यह माँग की है कि उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, एक सम्मानजनक वेतन और स्थायीकरण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। उनका तर्क है कि जो कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान खतरे में डालकर जनता को रोशनी दे रहे हैं, उन्हें भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन फ्रंटलाइन कर्मियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या बिजली व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले इन संविदा लाइनमैनों को वास्तव में वह सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं।
    user_SHATRUGHAN DEVPURIA
    SHATRUGHAN DEVPURIA
    पत्रकार Azamgarh, Uttar Pradesh•
    8 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) परीक्षा 03 और 04 जून 2026 को आजमगढ़ जनपद में होगी। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह से नकलविहीन, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी; पहली पाली सुबह 09:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक चलेगी। आजमगढ़ जनपद में कुल 14 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ 22,236 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। आगामी टीजीटी परीक्षा के सफल संचालन के लिए जनपद का प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और अलर्ट है।
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    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) परीक्षा 03 और 04 जून 2026 को आजमगढ़ जनपद में होगी। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह से नकलविहीन, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

यह परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी; पहली पाली सुबह 09:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक चलेगी। आजमगढ़ जनपद में कुल 14 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ 22,236 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। आगामी टीजीटी परीक्षा के सफल संचालन के लिए जनपद का प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और अलर्ट है।
    user_Arun Pandey
    Arun Pandey
    आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • आजमगढ़ के हरबंशपुर स्थित चिल्ड्रेन कॉलेज में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के अंतर्गत एक जिला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अखिलेश मिश्रा गुड्डू की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण शिविर के दौरान एक आर्केस्ट्रा कार्यक्रम भी कराया गया, जिसका वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और जमकर वायरल हो रहा है।
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    आजमगढ़ के हरबंशपुर स्थित चिल्ड्रेन कॉलेज में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के अंतर्गत एक जिला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अखिलेश मिश्रा गुड्डू की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण शिविर के दौरान एक आर्केस्ट्रा कार्यक्रम भी कराया गया, जिसका वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और जमकर वायरल हो रहा है।
    user_ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    Voice of people आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • आजमगढ़ जिले की मार्टिनगंज तहसील एक बार फिर कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। तहसील में तैनात कानूनगो रामबचन यादव का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इस मामले को लेकर तहसील परिसर और क्षेत्रीय लोगों के बीच तरह-तरह की बातें चल रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमि, खतौनी, दाखिल-खारिज सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए बिना लेन-देन के फाइलों का समय पर निस्तारण नहीं किया जाता। यह भी चर्चा है कि मामला सामने आने के बाद सख्त कार्रवाई करने के बजाय, कथित तौर पर 'पैसे वापस कर मामला शांत' करने का प्रयास किया गया। गौरतलब है कि मार्टिनगंज तहसील पहले भी विवादों में रही है। इससे पूर्व कानूनगो जयप्रकाश यादव को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था, वहीं कानूनगो जुल्फेकार अहमद का एक कथित वीडियो भी चर्चा का विषय बना था। इसके अतिरिक्त, लेखपाल वैभव आनंद सिंह पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अब पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय लोगों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों का निपटारा केवल समझौते और पैसे की वापसी तक ही सीमित रहेगा, तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाना बेहद मुश्किल होगा।
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    आजमगढ़ जिले की मार्टिनगंज तहसील एक बार फिर कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। तहसील में तैनात कानूनगो रामबचन यादव का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इस मामले को लेकर तहसील परिसर और क्षेत्रीय लोगों के बीच तरह-तरह की बातें चल रही हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमि, खतौनी, दाखिल-खारिज सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए बिना लेन-देन के फाइलों का समय पर निस्तारण नहीं किया जाता। यह भी चर्चा है कि मामला सामने आने के बाद सख्त कार्रवाई करने के बजाय, कथित तौर पर 'पैसे वापस कर मामला शांत' करने का प्रयास किया गया।

गौरतलब है कि मार्टिनगंज तहसील पहले भी विवादों में रही है। इससे पूर्व कानूनगो जयप्रकाश यादव को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था, वहीं कानूनगो जुल्फेकार अहमद का एक कथित वीडियो भी चर्चा का विषय बना था। इसके अतिरिक्त, लेखपाल वैभव आनंद सिंह पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अब पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

क्षेत्रीय लोगों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों का निपटारा केवल समझौते और पैसे की वापसी तक ही सीमित रहेगा, तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाना बेहद मुश्किल होगा।
    user_VOD LIVE NEWS
    VOD LIVE NEWS
    Media house Sagri, Azamgarh•
    13 hrs ago
  • अंबेडकर नगर में आगामी ईद-उल-अजहा के पर्व के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधिकारियों ने शहर के मुख्य बाजारों के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और फ्लैग मार्च किया।
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    अंबेडकर नगर में आगामी ईद-उल-अजहा के पर्व के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधिकारियों ने शहर के मुख्य बाजारों के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और फ्लैग मार्च किया।
    user_BALRAM
    BALRAM
    पत्रकार Allapur, Ambedkar Nagar•
    9 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित टीजीटी परीक्षा 03 और 04 जून को आजमगढ़ जनपद के 14 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में संपन्न होगी। इस महत्वपूर्ण परीक्षा में कुल 22,236 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी ढंग से आयोजित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने बैठक में सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, बिजली आपूर्ति, जनरेटर सुविधा, पेयजल, ओआरएस (ORS) और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अभ्यर्थियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिसके तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और प्रमुख चौराहों पर रूट चार्ट और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में धारा-163 लागू रहेगी और मोबाइल फोन तथा आईटी गैजेट्स का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्येक केंद्र पर सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट के साथ पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया जाएगा।
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    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित टीजीटी परीक्षा 03 और 04 जून को आजमगढ़ जनपद के 14 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में संपन्न होगी। इस महत्वपूर्ण परीक्षा में कुल 22,236 अभ्यर्थी शामिल होंगे।

परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी ढंग से आयोजित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने बैठक में सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, बिजली आपूर्ति, जनरेटर सुविधा, पेयजल, ओआरएस (ORS) और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अभ्यर्थियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिसके तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और प्रमुख चौराहों पर रूट चार्ट और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में धारा-163 लागू रहेगी और मोबाइल फोन तथा आईटी गैजेट्स का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्येक केंद्र पर सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट के साथ पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया जाएगा।
    user_शैलेन्द्र पत्रकार
    शैलेन्द्र पत्रकार
    आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
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