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बिहार में सिर्फ सरकार का ऐलान करना है लेकिन ये भ्रष्ट अधिकारी काम नहीं करना चाहते ये सिर्फ मलाई चाटने के लिए बैठा है इन लोगों को सिर्फ मलाई से मतलब है इसीलिए तो ऐसा हालत है बिहार के सरकारी स्कूलों का सरकार बोल रही है कि प्राइवेट स्कूल बंद होगा लेकिन जैसे सरकारी स्कूल की ऐसा हालत रहेगा
BN Chitranjan
बिहार में सिर्फ सरकार का ऐलान करना है लेकिन ये भ्रष्ट अधिकारी काम नहीं करना चाहते ये सिर्फ मलाई चाटने के लिए बैठा है इन लोगों को सिर्फ मलाई से मतलब है इसीलिए तो ऐसा हालत है बिहार के सरकारी स्कूलों का सरकार बोल रही है कि प्राइवेट स्कूल बंद होगा लेकिन जैसे सरकारी स्कूल की ऐसा हालत रहेगा
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- बेतिया में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, देवनगर में जलजमाव से बढ़ी परेशानी बेतिया: शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। करीब दो घंटे तक हुई तेज बारिश से रेलवे यात्रियों, आम लोगों और किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ा, जहां शादी समारोह की तैयारियां चल रही थीं। कई जगहों पर लग्न मंडप और पंडाल भीगकर खराब हो गए, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर आयोजित कार्यक्रम भी बारिश की भेंट चढ़ गया। मझौलिया थाना परिसर, अंचल कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग परिसर में जलजमाव की स्थिति बन गई। वहीं, मौसम में बढ़ी नमी के कारण ठंडक भी महसूस की गई। स्थानीय निवासी एवं चीनी मिल कर्मी विक्रम प्रसाद चौरसिया ने बताया कि उनके घर बारात आनी थी, लेकिन मूसलाधार बारिश से तैयारियों को काफी नुकसान पहुंचा है। नगर निगम क्षेत्र के बानूछापर स्थित देवनगर मोहल्ले में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। वार्ड-29 के निवासियों ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक संपत्ति कर वसूली के बावजूद अब तक सड़क और नाली का निर्माण नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों—अरुण कुमार सिंह, सुमन श्रीवास्तव, मृत्युंजय उपाध्याय, गुड्डू श्रीवास्तव, नागेंद्र सिंह एवं अधिवक्ता रंजीत रमन—ने महापौर गरिमा देवी सिकारिया से इस समस्या में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। बेतिया से सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट।1
- आज मजदूर दिवस के दिन मेरे बड़े बेटे मृत्यंजय राज का जन्मदिन घर परिवार में बहुत सुन्दर ढंग से मनाया गया। 01.05.2026.1
- पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित बलिराम भवन के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर एक भव्य और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां श्रमिक एकता, सम्मान और संघर्ष का सशक्त संदेश देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद वेदी पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसमें मजदूर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद मजदूरों और नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पूरे सभागार में सम्मान और गर्व का वातावरण व्याप्त रहा। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों को उनके समर्पण, जिम्मेदारी और श्रम के प्रति निष्ठा के लिए सम्मानित किया गया। फूलमाला और अंगवस्त्र देकर उन्हें मंच से सम्मानित किया गया, जिससे श्रमिकों का मनोबल और उत्साह बढ़ा। सम्मान पाने वालों में रिक्शा मजदूर सुभाष महतो, कृष्णा साह, गनेश राम, किरित चौधरी, जहुर मियाँ, नगीना प्रसाद, रसोईया नेत्री सुनिता देवी, सीमा देवी, रबेया खातून, खेत मजदूर सुबह मियाँ, पोलदार संघ के भूटकुन महतो, रसोईया संघ के नेता लालबाबु राम, रामाश्रय हजरा, शंभु नाथ मिश्र, खेत मजदूर नेता वीरन यादव और जिले के प्रसिद्ध कवि अरुण गोपाल शामिल रहे। इन सभी को सम्मानित कर यह संदेश दिया गया कि समाज के निर्माण में मजदूरों की भूमिका सबसे अहम है और उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण नन्दन सिंह ने की, जबकि एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति ने अपने संबोधन में मजदूर दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में मजदूर संगठनों के सामने खड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में श्रमिकों के अधिकारों पर कई तरह के दबाव बन रहे हैं और नए कानूनों के जरिए मजदूरों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत जैसे देश में, जहां मजदूरों ने अपने संघर्ष और बलिदान से आजादी की नींव रखी है, वहां का मजदूर कभी भी कारपोरेट ताकतों या उनके समर्थक तंत्र के सामने झुकने वाला नहीं है। ओम प्रकाश क्रांति ने मजदूर संगठनों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए जुझारू संघर्ष करें और हर स्तर पर मजदूरों की आवाज को बुलंद करें। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में गिरफ्तार मजदूर नेताओं की रिहाई की मांग को भी जोरदार तरीके से उठाया और सरकार से श्रमिक संगठनों के साथ सम्मानजनक वार्ता करने की अपील की। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रमिक एकता, अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष का संकल्प दोहराया गया। यह आयोजन न सिर्फ मजदूर दिवस का उत्सव बना, बल्कि आने वाले समय में श्रमिक आंदोलन को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ, जहां हर मजदूर ने अपने हक के लिए लड़ने और समाज के नव निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।1
- Hamare gaw jo road hai ushka ishati bhut kharab hai ushe thik Kara dijiye bhanachak word no 124
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