घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा ब्लॉक अंतर्गत छांजा गांव की एक बुजुर्ग महिला का दर्द बयां करता एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पिछले वर्ष बारिश के मौसम में उनका घर ढह गया था, जिससे उनके सभी जरूरी कागजात भी दबकर खराब हो गए। इस घटना के बाद से बुजुर्ग दादी को न तो राशन मिल पा रहा है और न ही उन्हें अब तक किसी सरकारी योजना का लाभ मिला है। घर टूटने के बाद से उनके पास रहने की कोई जगह नहीं है और उन्हें खाने के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आस-पड़ोस के लोग जब खाना खिला देते हैं तो वह खा लेती हैं, अन्यथा उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है। यह स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की कोई जवाबदेही नहीं बनती कि एक बेसहारा बुजुर्ग महिला, जिसका कोई सहारा नहीं है, उसका जीवन यापन कैसे होगा। बुजुर्ग दादी की यह दास्तां सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं।
घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा ब्लॉक अंतर्गत छांजा गांव की एक बुजुर्ग महिला का दर्द बयां करता एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पिछले वर्ष बारिश के मौसम में उनका घर ढह गया था, जिससे उनके सभी जरूरी कागजात भी दबकर खराब हो गए। इस घटना के बाद से बुजुर्ग दादी को न तो राशन मिल पा रहा है और न ही उन्हें अब तक किसी सरकारी योजना का लाभ मिला है। घर टूटने के बाद से उनके पास रहने की कोई जगह नहीं है और उन्हें खाने के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आस-पड़ोस के लोग जब खाना खिला देते हैं तो वह खा लेती हैं, अन्यथा उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है। यह स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की कोई जवाबदेही नहीं बनती कि एक बेसहारा बुजुर्ग महिला, जिसका कोई सहारा नहीं है, उसका जीवन यापन कैसे होगा। बुजुर्ग दादी की यह दास्तां सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं।
- कानपुर के घाटमपुर-साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में सांड के हमले से एक किसान की मौत हो गई है। मृतक की पहचान 62 वर्षीय राम रतन पाल, पुत्र स्वर्गीय भागीरथ के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि राम रतन पाल अपने खेत में जानवर चरा रहे थे, तभी एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। हमले के बाद वे खेतों में लगे ब्लेड वाले तारों पर गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में राम रतन पाल को घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने के बावजूद, खबर लिखे जाने तक पुलिस मौके पर नहीं पहुँची थी। मृतक का शव अभी भी घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा हुआ है और परिजन कई घंटों से पुलिस के आने तथा आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में जब साढ़ थाना प्रभारी अवनीश कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस घटना के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। सांड के इस हमले से किसान की हुई मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।1
- घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा ब्लॉक अंतर्गत छांजा गांव की एक बुजुर्ग महिला का दर्द बयां करता एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पिछले वर्ष बारिश के मौसम में उनका घर ढह गया था, जिससे उनके सभी जरूरी कागजात भी दबकर खराब हो गए। इस घटना के बाद से बुजुर्ग दादी को न तो राशन मिल पा रहा है और न ही उन्हें अब तक किसी सरकारी योजना का लाभ मिला है। घर टूटने के बाद से उनके पास रहने की कोई जगह नहीं है और उन्हें खाने के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आस-पड़ोस के लोग जब खाना खिला देते हैं तो वह खा लेती हैं, अन्यथा उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है। यह स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की कोई जवाबदेही नहीं बनती कि एक बेसहारा बुजुर्ग महिला, जिसका कोई सहारा नहीं है, उसका जीवन यापन कैसे होगा। बुजुर्ग दादी की यह दास्तां सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं।1
- हमीरपुर में आए भयंकर तूफान ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे आम और जायद की फसलों को तगड़ा झटका लगा है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण हजारों की संख्या में आम, नीम, महुआ, पीपल, लभेरा और शीशम जैसे पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए हैं। विशेष रूप से, आम की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इसके साथ ही, फैक्ट्री एरिया में भी तूफान का असर देखने को मिला है, जहाँ कई कंपनियों के टीनशेड जमींदोज हो गए हैं। किसानों की खेतों में रखी मूंग की फसल भी तूफान की भेंट चढ़ गई। जानकारी के अनुसार, बंडा के किसान संजय सिंह की पाँच बीघा, कमल सिंह की सात बीघा और बांक के छोटे लाल की 12 बीघा मूंग की फसल तूफान से उड़ गई है। मानवीय क्षति के अलावा, इस तूफान ने जीव-जंतुओं पर भी कहर बरपाया है; फैक्ट्री एरिया में दो दर्जन से अधिक तोतों की मौत हो गई, और ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई मवेशी इसकी चपेट में आकर मारे गए हैं।1
- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जहाँ कुरारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बेतवा नदी पर बन रहे कंडौर-मोराकांदर पुल पर रात के समय एक भीषण हादसा हो गया। मौसम विभाग द्वारा आंधी-पानी का अलर्ट जारी होने के बावजूद पुल का निर्माण कार्य रात में भी लगातार जारी था। इसी दौरान अचानक आए तेज आंधी-तूफान के कारण निर्माणाधीन पुल की सटरिंग पूरी तरह ढह गई। सटरिंग गिरने के साथ ही पुल की भारी-भरकम स्लैब और कोठी भी नीचे आ गिरी, जिससे वहाँ काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। इस दर्दनाक हादसे में 6 लोगों की मौके पर ही मौत होने की पुष्टि हुई है, जबकि मलबे के नीचे अभी भी कई अन्य मजदूरों के दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम, सीओ व कई थानों की पुलिस फोर्स तुरंत मौके पर पहुँच गई। राहत और बचाव कार्य को तेज करने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी काम पर लगाया गया है, और मलबे को हटाने के लिए कई जेसीबी मशीनें लगातार कार्यरत हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे के पूरी तरह साफ होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हमीरपुर के जिलाधिकारी (DM) अभिषेक गोयल और एडीजी ज्योति नारायण ने घटनास्थल पर राहत कार्य का जायजा लेते हुए बताया कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुँचाना है, जिसके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। वहीं, भाजपा की जिला अध्यक्ष शकुंतला निषाद ने भी मौके पर पहुँचकर पीड़ित परिवारों को ढाँढस बंधाया और सरकार की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमीरपुर में हुए इस हादसे का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों को ₹5-5 लाख रुपये और घायलों के इलाज के लिए ₹50-50 हजार रुपये की त्वरित आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करने और घायलों को तत्काल मुफ्त व उच्च स्तरीय इलाज मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की भी जाँच कर सकता है कि आंधी-तूफान के आधिकारिक अलर्ट के बावजूद रात के समय निर्माण कार्य क्यों जारी रखा गया था।3
- कानपुर के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने नहर और बरई गढ़ झील का निरीक्षण किया। इस दौरान, एक अभियंता ने नहर को फतेहपुर डिवीजन से जोड़ने का सुझाव दिया। वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि पहले पानी नहर पुल के बगल से आता था। इसी क्रम में, नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता ने भी बरई गढ़ झील का निरीक्षण किया।1
- रूसी विशेष बलों ने डोनेट्स्क दिशा में एक सैन्य कार्रवाई की, जहाँ उन्होंने एक यूक्रेनी हमले वाले मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) को सफलतापूर्वक मार गिराया। इस ऑपरेशन में रूसी सेना ने एक विशेष 'हथगोला योल्का गतिज अवरोधक ड्रोन' का प्रयोग किया।1
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफ़नी ट्रंप और उनके पति माइकल बुलोस हाल ही में उत्तर प्रदेश के आगरा पहुंचे, जहाँ उन्होंने दुनिया की सबसे मशहूर ऐतिहासिक इमारतों में से एक ताजमहल का दीदार किया। ताजमहल पहुँचने पर इस दंपति ने खूबसूरत स्मारक को करीब से देखा और इसकी अनुपम वास्तुकला की जमकर तारीफ की। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे। टिफ़नी ट्रंप और माइकल बुलोस के आगमन की खबर मिलते ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला, और कई लोगों ने इस खास अवसर की तस्वीरें और वीडियो अपने कैमरों में कैद किए। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ताजमहल को भारत की पहचान माना जाता है और यह हर साल लाखों विदेशी पर्यटकों को आगरा आकर्षित करता है। ट्रंप परिवार के सदस्य के इस दौरे ने एक बार फिर ताजमहल को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। फिलहाल, इस यादगार विजिट की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही हैं।1
- घाटमपुर क्षेत्र की एक पुरानी मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय विधायक सरोज कुरील ने घाटमपुर चीनी मिल को फिर से शुरू करने के प्रयासों में तेजी ला दी है। उन्होंने इस संबंध में प्रमुख सचिव, औद्योगिक विकास से व्यक्तिगत मुलाकात कर मिल के दोबारा संचालन पर विस्तार से चर्चा की और शासन स्तर पर दबाव बढ़ाया। विधायक कुरील ने प्रमुख सचिव को घाटमपुर क्षेत्र की जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र कभी गन्ना बेल्ट के रूप में जाना जाता था और आज भी बड़ी संख्या में किसान गन्ना उगाते हैं। मिल बंद होने के कारण किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। इसके साथ ही, मिल के बंद होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर काफी कम हो गए हैं, जिससे युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन बढ़ा है। छोटे व्यापारी और मजदूर परिवार भी इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, और मिल बंद होने का क्षेत्र की समग्र अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है। सरोज कुरील ने जोर देकर कहा कि मिल के संबंध में कोई भी सर्वेक्षण केवल लखनऊ या कानपुर में बैठकर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अधिकारी स्वयं क्षेत्र में आकर किसानों और व्यापारियों से सीधे बात करें और वास्तविक स्थिति का आकलन करें, क्योंकि घाटमपुर आज भी गन्ना खेती के लिए एक मजबूत आधार है। विधायक ने आरोप लगाया कि यह मिल पिछली सपा-बसपा सरकारों के 'किसान विरोधी' फैसलों के कारण बंद हुई थी, जिसका खामियाजा किसान और युवा आज भी भुगत रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह किसानों के हित में एक ठोस निर्णय लेकर मिल को दोबारा चालू करे। क्षेत्रीय जनता और किसान संगठनों ने विधायक सरोज कुरील के इन सक्रिय प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि उनके लगातार संघर्ष के परिणामस्वरूप जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और घाटमपुर चीनी मिल का पुनः संचालन संभव हो पाएगा।1