आज, 07 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, विदिशा में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 25 से अधिक आवेदकों की शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना। उन्होंने प्राप्त प्रत्येक आवेदन पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित थाना प्रभारियों, शाखा प्रभारियों और अन्य अधिकारियों को निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में साइबर फ्रॉड, पारिवारिक विवाद, भूमि संबंधी प्रकरण, मारपीट और आपसी विवाद जैसे विभिन्न मामले सामने आए। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर तत्काल जांच और त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों और साइबर सेल को निर्देशित किया गया। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ताओं को साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सतर्कता और समय पर शिकायत दर्ज कराने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। जिन प्रकरणों का निराकरण मौके पर संभव था, उन्हें तत्काल सुलझाया गया, जबकि विस्तृत जांच वाले मामलों में अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक विदिशा ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायतकर्ता के साथ संवेदनशील, सम्मानजनक और पारदर्शी व्यवहार किया जाए, क्योंकि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण समाधान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्री काशवानी ने इस बात पर जोर दिया कि जनसुनवाई आमजन और पुलिस के बीच विश्वास को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है, और शिकायतों के त्वरित तथा निष्पक्ष समाधान से नागरिकों का भरोसा और अधिक सुदृढ़ होता है। विदिशा पुलिस आमजन की सुरक्षा, सेवा और विश्वास के संकल्प के साथ जनहितैषी, जवाबदेह एवं पारदर्शी पुलिसिंग के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
आज, 07 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, विदिशा में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 25 से अधिक आवेदकों की शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना। उन्होंने प्राप्त प्रत्येक आवेदन पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित थाना प्रभारियों, शाखा प्रभारियों और अन्य अधिकारियों को निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में साइबर फ्रॉड, पारिवारिक विवाद, भूमि संबंधी प्रकरण, मारपीट और आपसी विवाद जैसे विभिन्न मामले सामने आए। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर तत्काल जांच और त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों और साइबर सेल को निर्देशित किया गया। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ताओं को साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सतर्कता और समय पर शिकायत दर्ज कराने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। जिन प्रकरणों का निराकरण मौके पर संभव था, उन्हें तत्काल सुलझाया गया, जबकि विस्तृत जांच वाले मामलों में अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक विदिशा ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायतकर्ता के साथ संवेदनशील, सम्मानजनक और पारदर्शी व्यवहार किया जाए, क्योंकि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण समाधान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्री काशवानी ने इस बात पर जोर दिया कि जनसुनवाई आमजन और पुलिस के बीच विश्वास को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है, और शिकायतों के त्वरित तथा निष्पक्ष समाधान से नागरिकों का भरोसा और अधिक सुदृढ़ होता है। विदिशा पुलिस आमजन की सुरक्षा, सेवा और विश्वास के संकल्प के साथ जनहितैषी, जवाबदेह एवं पारदर्शी पुलिसिंग के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
- विदिशा जिला कलेक्ट्रेट में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में आज वार्ड क्रमांक 33 के कॉलोनीवासी अपनी समस्याओं को लेकर पहुँचे। उन्होंने विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नाम एक शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें अपनी कॉलोनी की बदहाल सड़कों की मरम्मत कार्य की माँग की गई। कॉलोनीवासियों ने कलेक्टर से उम्मीद जताई है कि वे उनकी शिकायत पर ध्यान देंगे। वहीं, शहर की अन्य कॉलोनियों और वार्डों-मोहल्लों में भी सड़कों की बदहाल स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण राहगीरों को आने-जाने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर महोदय इन शिकायतों पर कितना संज्ञान लेते हैं।1
- विदिशा में बेतवा नदी पर बने 176 वर्ष पुराने एक ऐतिहासिक पुल को बड़ी पानी की पाइपलाइन बिछाने के नाम पर जेसीबी मशीनों से खोदा जा रहा है, जिससे शहर की यह प्राचीन धरोहर खतरे में पड़ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कार्रवाई से पुल की मूल संरचना कमजोर हो रही है और उसे अपूरणीय क्षति पहुंचाई जा रही है। यह ऐतिहासिक पुल विदिशा-अशोकनगर मार्ग पर बढ वाले घाट के पास स्थित है, जिसका निर्माण सन 1850 में महाराजा जयाजीराव सिंधिया के शासनकाल में हुआ था। शहर की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का अहम हिस्सा होने के बावजूद, संबंधित अधिकारियों पर आरोप है कि वे इस खुदाई की अनुमति किस आधार पर दी गई, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या पुरातत्व विभाग या लोक निर्माण विभाग जैसी सक्षम अथॉरिटी से आवश्यक अनुमति ली गई थी, और यदि हाँ, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की आशंका है कि पाइपलाइन डालने के बाद की जा रही मरम्मत केवल औपचारिकता है, जिसमें न तो मजबूत आधार तैयार किया जा रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग हो रहा है। इससे पुल की नींव प्रभावित हो सकती है और भविष्य में यह गंभीर खतरे में पड़ सकता है। यह विदिशा में किसी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुँचाने का पहला मामला नहीं है; इससे पहले रंगई क्षेत्र के पुराने बेतवा पुल को भी इसी तरह क्षति पहुँचाई गई थी। इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए, जनभावना की ओर से मांग की गई है कि प्राचीन पुल पर चल रहे कार्य को तत्काल तकनीकी जांच होने तक रोका जाए। स्वतंत्र विशेषज्ञों से पुल की संरचनात्मक सुरक्षा का परीक्षण कराया जाए, यदि कोई अनुमति है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए एक स्थायी नीति बनाई जाए। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या हम विकास के नाम पर अपनी विरासत को स्वयं मिटा देंगे, और क्या आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास को केवल किताबों और तस्वीरों में ही खोजती रह जाएंगी।1
- उत्तर प्रदेश के बरेली से एक झकझोर कर रख देने वाला दृश्य सामने आया है, जहां एक लाचार बुजुर्ग को अपनी बीमार पत्नी को इलाज न मिलने पर हाथ ठेले पर लादकर जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा। यह घटना सरकारी वादों की पोल खोलती है और इसे हमारे स्वास्थ्य तंत्र का आईना बताया गया है। इस तस्वीर के अनुसार, जहां सरकारी विज्ञापनों में स्वास्थ्य सेवाएँ दौड़ती दिखती हैं, वहीं ज़मीन पर एम्बुलेंस केवल कागज़ों में ही सायरन बजाती हैं। इमरजेंसी वार्ड, जिसे जीवन की अंतिम उम्मीद बताया गया है, वहां घंटों तक कोई देखने वाला नहीं था। बुजुर्ग की काँपती आवाज़ में जब यह आशंका झलकी कि "अगर यहाँ रही तो मर जाएगी", तब यह सिर्फ एक मरीज का नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया। करोड़ों के बजट, बैठकों और दावों के बावजूद, अगर एक बुजुर्ग को अपनी पत्नी के लिए ठेले को ही एम्बुलेंस बनाना पड़े, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत और व्यवस्था की गहरी विफलता को दर्शाता है।1
- हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के साथ हुए एक विवाद और इसके कारण बढ़ते विरोध के बाद दिया गया है। जानकारी के अनुसार, रेणु भाटिया ने अपना त्यागपत्र मुख्यमंत्री को भेज दिया है और उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है।1
- बुरहानपुर जिले के लालबाग थाना क्षेत्र के सिंधिबस्ती इलाके से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष आज जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। वे एक स्थानीय युवक द्वारा बार-बार की जा रही झूठी शिकायतों की जाँच की मांग कर रहे थे। शिकायतकर्ता सोनम तुलसवानी ने बताया कि इसी क्षेत्र का युवक पवन आसवानी उनके पति नीतू तुलसवानी के खिलाफ लगातार झूठी शिकायतें दर्ज कराता रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पवन आसवानी के खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं, और उसकी इन हरकतों के कारण पूरे क्षेत्र के महिला-पुरुष भयभीत हैं। क्षेत्र की महिलाओं ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से इस मामले में न्याय दिलाने की गुहार लगाई है और संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।4
- विदिशा जिले के ग्यारसपुर के दहलवाड़ा में स्थित उद्यानकी विभाग में कार्यरत भगवान सिंह लोधी ने आज जनसुनवाई में अपने परिवार के साथ कलेक्टर से गुहार लगाई। उन्होंने शिकायत की कि वर्ष 2009 से नर्सरी में काम करने के बावजूद उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। भगवान सिंह लोधी ने बताया कि उनके पिता वर्ष 1981 से इसी विभाग की नर्सरी में काम करते थे, लेकिन वर्ष 2017 में कुछ लोगों द्वारा की गई झूठी शिकायत के बाद उन्हें हटा दिया गया था। भगवान सिंह ने खुद वर्ष 2009 से नर्सरी में काम करना शुरू किया और शुरुआत में उन्हें कुछ महीनों तक वेतन मिला, लेकिन उसके बाद से उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया है। वेतन न मिलने के कारण अब उनके सामने परिवार का पालन-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए वे पहले भी कई बार कलेक्टर से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अपनी परेशानी दोहराते हुए, उन्होंने कलेक्टर से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उनकी समस्या का समाधान करने की मांग की है।4
- विदिशा जिले में जिला लोधी समाज के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर को एक लिखित ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के जरिए उन्होंने सागर जिले के जिला पंचायत सदस्य और युवा लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सर्वजीत सिंह लोधी पर दर्ज एक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोधी समाज ने आरोप लगाया है कि सर्वजीत सिंह लोधी को एक पुराने मामले में बिना किसी जांच के गिरफ्तार करने की कार्रवाई द्वेषपूर्ण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव के कारण हुई है और इसीलिए वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।4
- कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया अस्पताल पहुंचीं। यह मामला एक डॉक्टर पर ओपीडी में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित गलत हरकत करने के आरोप से जुड़ा है। इस घटना को लेकर रेणु भाटिया ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल उठाया कि "बच्ची को डॉक्टर के पास अकेले कैसे छोड़ दिया गया?" मामले की गंभीरता को देखते हुए, नर्स और स्टाफ सहित कई लोगों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।1
- बरेली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, जिसके तहत उन्होंने चोरी की दो बड़ी घटनाओं का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने ₹16 लाख मूल्य के जेवर और एक बाइक बरामद की है।1