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उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई दिनों से मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए और उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए। हमारे शहर में बुजुर्ग, बीमार और अस्पताल में भर्ती मरीज भी हैं। उनके स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण की जिम्मेदारी हम सभी की है। कृपया जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करें।
पत्रकारिता
उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई दिनों से मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए और उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए। हमारे शहर में बुजुर्ग, बीमार और अस्पताल में भर्ती मरीज भी हैं। उनके स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण की जिम्मेदारी हम सभी की है। कृपया जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करें।
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- उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई दिनों से मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए और उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए। हमारे शहर में बुजुर्ग, बीमार और अस्पताल में भर्ती मरीज भी हैं। उनके स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण की जिम्मेदारी हम सभी की है। कृपया जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करें।2
- उमरिया बाजार में रही भीड़भाड़ पुलिस प्रशासन की व्यवस्था में रही कड़ी नजर मध्य प्रदेश, उमरिया। दीपावली के पावन पर्व को लेकर उमरिया नगर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। त्योहार के अवसर पर खरीदारी करने के लिए बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के मुख्य बाजारों सहित कपड़ा, सराफा, बर्तन, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक और सजावट की दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की चहल-पहल बनी रही। दीपावली को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में बाजार पहुंचकर अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी करते नजर आए। दुकानों पर रंग-बिरंगी झालरें, दीपक, मोमबत्तियां, पूजा सामग्री, मिठाइयां, पटाखे और आकर्षक सजावटी सामान लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। त्योहार के चलते बाजारों में कई जगह खचाखच भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों के चेहरों पर भी अच्छी बिक्री की उम्मीद से खुशी नजर आई। वहीं, भीड़ के कारण मुख्य मार्गों और बाजार क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित होता रहा। दीपावली के इस उत्सवी माहौल में पूरा उमरिया नगर रोशनी और खुशियों के रंग में रंगा नजर आया। लोगों ने अपने परिवार के साथ खरीदारी कर दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। कुल मिलाकर दीपावली के अवसर पर उमरिया का बाजार देर रात तक रौनक से गुलजार रहा।4
- तेज रफ्तार कार ने खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को मारी जोरदार टक्कर, क्षतिग्रस्त चंदिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, वाहन पर लिखा था वन विभाग (डिप्टी) तेज रफ्तार कार ने खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को मारी जोरदार टक्कर, क्षतिग्रस्त चंदिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, वाहन पर लिखा था वन विभाग (डिप्टी) उमरिया। जिले में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार चंदिया की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार कार mp54zb3719 ने रानी दुर्गावती चौक उमरिया में रात लगभग 2:00 बजे के आसपास सड़क किनारे खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद सामने आए वीडियो में दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की हालत साफ दिखाई दे रही है। जिस वाहन को टक्कर लगी है, उस पर वन विभाग (डिप्टी) लिखा हुआ नजर आ रहा है। वहीं टक्कर मारने वाली कार का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। फिलहाल दुर्घटना के कारणों और घटना के समय वाहन में मौजूद लोगों के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के बाद क्षेत्र में घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। अब यह जांच का विषय है कि तेज रफ्तार कार के चालक से वाहन अनियंत्रित कैसे हुआ और दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई2
- उमरिया जिले के पाली में दीपावली के मद्देनजर देखते हुए जहां एक दिन का शुष्क दिवस में शराब दुकानों को बंद किया जाएगा वहीं शराब ठेकेदार आबकारी विभाग से सौ कदम आगे चले गए पहले ही पैकारी के माध्यम से ढावो और गांव गांव शराब पहुंचा दी गई है। शराब का खेल - दुकान बंद होने का दिखावा, दिन में गांव-गांव पहुंच गई शराब पाली क्षेत्र में दीपावली त्योहार पर शराब ठेकेदार की मनमानी, दुकान बंद होने के पहले खूब हुई पैकारी होटल-ढाबों में हो हुई खुलेआम सप्लाई बिरसिंहपुर- पाली क्षेत्र में दीपावली त्योहार के मौके पर शराब के अवैध कारोबार का बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि शराब ठेकेदार द्वारा दिन में पांच बजे लाइसेंसी दुकान बंद होने का सिर्फ दिखावा किया जा रहा है, लेकिन दुकान बंद होने से पहले ही गांव-गांव, होटल और ढाबों में शराब पहुंचा दी गई है। सूत्रों के अनुसार त्योहार के 2 दिन पहले से ही ठेकेदार के गुर्गे मोटर साइकिल में पेटियों में भरकर शराब गांवों में पहुंचा दी गई है सवाल यह है कि इस अवैध सप्लाई पर अंकुश कब लगेगा? *दुकान बंद, सप्लाई चालू* नियम के अनुसार दीपावली जैसे त्योहार पर प्रशासन द्वारा शराब दुकानों को बंद रखने के आदेश दिए जाते हैं, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। पाली में भी आदेश के बाद लाइसेंसी दुकान पर ताला लगा दिखा, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान के पीछे से ही शराब की सप्लाई हो रही थी। गांवों में रहने वाले लोगों ने बताया कि त्योहार के दिन शाम होते ही गांव के हर मोहल्ले में शराब आसानी से मिल रही थी। होटल और ढाबों पर तो खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। एक ग्रामीण ने कहा, "दुकान बंद है, यह तो सिर्फ कागजों में है। असली दुकान तो हमारे गांव के ढाबे पर चल रही है। 200 रुपये की बोतल 400 में मिल रही है।" *होटल-ढाबे बन गए अवैध अड्डे* पाली-उमरिया मार्ग, पाली-बिरसिंहपुर मार्ग और पाली-शहडोल मार्ग पाली बन्नैदा मार्ग पर बने कई होटल और ढाबे किराना दुकान पान के टपरे शराब के अवैध अड्डे बन गए हैं। यहां ट्रक ड्राइवरों से लेकर स्थानीय युवाओं तक को शराब पिलाई जा रही है। ढाबा मालिकों को ठेकेदार की ओर से पहले ही स्टॉक पहुंचा दिया जाता है और मुनाफा आपस में बांट लिया जाता है। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम इन ढाबों पर कभी जांच करने नहीं पहुंचती। *सागर हादसे से भी नहीं लिया सबक* कुछ दिन पहले सागर में शराब के नशे में हुए बड़े हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। उस हादसे में कई मासूम जानें गई थीं। लेकिन पाली क्षेत्र के प्रशासन ने उससे कोई सबक नहीं लिया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या पाली प्रशासन भी सागर जैसे हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी की जान जाने के बाद ही यहां कार्रवाई होगी? एक तरफ देश के गृह मंत्री अमित शाह जी नशामुक्ति को लेकर अभियान चलाने और शराबबंदी की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाली में खुलेआम शराब की अवैध बिक्री हो रही है। यह दोहरा रवैया जनता को समझ नहीं आ रहा। *युवाओं में बढ़ रहा नशा* दीपावली के त्योहार पर गांवों में युवाओं में शराब पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। नशे में मारपीट, झगड़े और सड़क हादसों की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। महिलाओं का कहना है कि त्योहार के दिन उनके घरों में शांति नहीं रहती, शराब पीकर लोग गाली-गलौज करते हैं। *जनता की मांग* पाली क्षेत्र में शराब ठेकेदार के स्टॉक की तत्काल जांच हो, दुकान बंद होने के बाद शराब कहां गई, इसका हिसाब लिया जाए। गांव-गांव में शराब पहुंचाने वाले होटल-ढाबों पर छापा मारकर कार्रवाई हो। आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर रात में गश्त बढ़ाई जाए। अवैध शराब बेचने वालों पर एफआईआर दर्ज हो, सिर्फ जुर्माना लगाकर न छोड़ा जाए। पाली की जनता अब पूछ रही है - *जब दुकान बंद है तो गांव में शराब कहां से आ रही है?* अगर प्रशासन ने समय रहते इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया तो दीपावली की खुशियां किसी परिवार के लिए मातम में बदल सकती हैं।4
- नगर पालिका क्षेत्र के सागरा तालाब में सब्जी दुकान पटाखे की दुकान लगी एक साथ हादसे का कर रहे हैं इंतजार *सागर तालाब के ऊपर मौत का बाजार - पटाखा दुकानों के बीच में लगवाई गई सब्जी की दुकान, प्रशासन की बड़ी लापरवाही* बिरसिंहपुर पाली नगर पालिका क्षेत्र में शासन-प्रशासन की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण सागरा तालाब के ऊपर देखने को मिल रहा है। त्योहार के नाम पर नगर पालिका ने सागर तालाब के ऊपर और उसके किनारे की सड़क पर ही पटाखों की दुकानें लगवा दी हैं और उन्हीं पटाखा दुकानों के बीच में सब्जी की दुकानें भी लगवा दी गई हैं। एक तरफ बारूद से भरे पटाखे हैं, तो दूसरी तरफ भीड़ वाली सब्जी मंडी। अगर एक भी चिंगारी भड़की तो पूरा बाजार आग की लपटों में घिर जाएगा। सवाल यही है - अगर कोई हादसा होता है तो इसके जिम्मेदार कौन होगा? *वीडियो में कैद हुई हकीकत* स्थानीय नागरिकों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ दिख रहा है कि सागरा तालाब के ऊपर बनी सड़क के दोनों तरफ दुकानें लगी हैं। एक तरफ पीले तिरपाल के नीचे सब्जी, फल, माला और खिलौनों की दुकानें हैं, जहां महिलाएं और बच्चे खरीदारी कर रहे हैं। ठीक उसके बगल में, सटकर ही नारंगी और गुलाबी टेंट में पटाखों की दुकानें सजी हैं। दुकानों में पटाखों की लड़ियां खुलेआम लटक रही हैं। बीच की पतली सी सड़क पर ही लोग पैदल, साइकिल और बाइक से गुजर रहे हैं। तालाब के ऊपर का डिवाइडर भी दुकानों के सामान से ढक गया है। सागरा तालाब पाली का सबसे व्यस्त इलाका है। यहां सुबह से शाम तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। तालाब के ऊपर से ही पाली-उमरिया मुख्य मार्ग गुजरता है। ऐसे संवेदनशील स्थान पर पटाखा बाजार लगाना ही नियमों के खिलाफ है। *नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां* पटाखा दुकानों के लिए विस्फोटक अधिनियम के तहत सख्त नियम हैं। नियम के अनुसार - पटाखा दुकानें आबादी और तालाब जैसे सार्वजनिक स्थान से दूर खुले मैदान में होनी चाहिए। दो दुकानों के बीच कम से कम 15 फीट की दूरी होनी चाहिए। हर दुकान पर बालू के बोरे, पानी के ड्रम और फायर एक्सटिंग्विशर होना अनिवार्य है। दुकान के पास बीड़ी-सिगरेट जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन सागरा तालाब पर इनमें से एक भी नियम का पालन नहीं हो रहा है। दुकानें सटकर लगी हैं, कहीं बालू-पानी का इंतजाम नहीं है। सब्जी खरीदने आई भीड़ पटाखा दुकानों के सामने ही खड़ी रहती है। बाइक के साइलेंसर से निकलने वाली चिंगारी ही काफी है बड़े हादसे के लिए। *सब्जी विक्रेताओं की मजबूरी* सब्जी बेचने वाली महिलाओं का कहना है, "हमें नगर पालिका ने ही यहां बैठने को कहा है। हम कहां जाएं हमारे लिए कोई हाट बाजार की जगह नहीं है।" उनकी बात भी सही है। गरीब सब्जी विक्रेताओं को सुरक्षित जगह देना नगर पालिका का काम था, लेकिन नगर पालिका ने उन्हें सीधे मौत के मुंह में बैठा दिया है। *अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग* जन जागृति सेवा संस्थान समिति और स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की जान के साथ खिलवाड़ है। मांग है कि - सागरा तालाब के ऊपर से पटाखा बाजार और सब्जी बाजार को तत्काल हटाकर सुरक्षित खुले मैदान में शिफ्ट किया जाए। इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार नगर पालिका पाली के सीएमओ, अतिक्रमण प्रभारी पाली पर लापरवाही का मामला दर्ज हो। जिन अधिकारियों ने बिना फायर सेफ्टी जांच के पटाखा दुकानों को अनुमति दी है, उनकी जांच हो। सब्जी विक्रेताओं के लिए तालाब से दूर स्थाई हाट बाजार की व्यवस्था की जाए। पाली की जनता अब पूछ रही है - क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या इंदौर-उज्जैन जैसे पटाखा बाजार हादसों से भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया अगर सागर तालाब पर कोई हादसा हुआ तो उसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका पाली और स्थानीय प्रशासन की होगी। समय रहते कार्रवाई की मांग1
- # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद यातायात व्यवस्था बदहाल ### अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की उठी मांग **आशुतोष त्रिपाठी-जनचिंगारी/उमरिया।** नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी बन चुका है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख तिराहे-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। अव्यवस्थित यातायात के कारण स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, राहगीरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक मानपुर की जनता इस समस्या से जूझती रहेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब स्थायी समाधान की पहल करेगा? मानपुर केवल नगर परिषद क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों का प्रमुख व्यापारिक एवं बाजार केंद्र भी है। यहां बैंक, तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में अपने कामकाज के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक पहुंचते हैं। यही वजह है कि मुख्य बाजार और प्रमुख सड़कों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। ### आपातकालीन सेवाओं के लिए भी बन सकता है खतरा जाम की समस्या अब केवल आवागमन की परेशानी तक सीमित नहीं रह गई है। यातायात बाधित होने से अस्पताल की एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के दौरान जाम में फंसना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है। प्रशासन को इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए समय रहते प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए। ### पुलिस के प्रयासों के बावजूद अतिरिक्त बल की जरूरत मानपुर पुलिस द्वारा समय-समय पर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन सीमित पुलिस बल और कानून-व्यवस्था की अन्य जिम्मेदारियों के चलते प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी कर पाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग की जा रही है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार सहित प्रमुख तिराहे-चौराहों पर नियमित पुलिसकर्मियों की तैनाती हो सके। विशेषकर बाजार के व्यस्त समय में यातायात पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण, वाहनों की आवाजाही सुचारु करने और जाम की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। ### स्थायी बस स्टैंड निर्माण के बिना कैसे सुधरेगी व्यवस्था? जिला प्रशासन और नगर परिषद मानपुर को भी स्थायी बस स्टैंड निर्माण की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। बसों के खड़े होने के लिए निर्धारित स्थान, यात्रियों के बैठने की सुविधा, पार्किंग और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होने से मुख्य बाजार पर वाहनों का अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र के लिए स्थायी यातायात प्रबंधन योजना तैयार करना भी जरूरी है। ### व्यापारी भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी यातायात व्यवस्था सुधारने में स्थानीय व्यापारियों का सहयोग भी बेहद आवश्यक है। व्यापारियों को अपनी दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान फैलाने से बचना चाहिए। ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग भी व्यवस्थित ढंग से कराने में सहयोग करना चाहिए, ताकि बाजार की सड़कों पर आवागमन बाधित न हो। प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। ### क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा प्रशासन? जब मानपुर आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तब भी यातायात व्यवस्था की बदहाली समझ से परे है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस समस्या के समाधान के लिए जवाबदेही तय करनी होगी। आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम का दंश झेलती रहेगी? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी के बाद ही जागेंगे? क्या अपनी जायज मांगों के लिए नागरिकों को जनआंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ेगा? अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। मानपुर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण, अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण और बाजार क्षेत्र में प्रभावी यातायात प्रबंधन समय की मांग है। जनता को राहत देने के लिए जिम्मेदार विभागों को अब धरातल पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।1
- ट्रैवल संचालक और कोतमा के परिवार के बीच हुई तथाकथित मारपीट के मामले में दूसरा पक्ष बॉबी ट्रेवल्स के संचालक सुनील लांबा ने क्या कहा,,, दूसरा पक्ष भी जानिए,,, #shahdol #videos ट्रैवल संचालक और कोतमा के परिवार के बीच हुई तथाकथित मारपीट के मामले में दूसरा पक्ष बॉबी ट्रेवल्स के संचालक सुनील लांबा ने क्या कहा,,, दूसरा पक्ष भी जानिए,,, #shahdol #videos1
- रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन,, *रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन* *50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का मुख्यालय होने के बावजूद यातायात व्यवस्था बदहाल, अतिरिक्त पुलिस बल और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की उठी मांग* मध्य प्रदेश मानपुर (उमरिया)। नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और बाजार के तिराहे-चौराहों पर आए दिन वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं। इस अव्यवस्थित यातायात के कारण स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, राहगीरों और बाहर से आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक मानपुर की जनता इस समस्या से जूझती रहेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाएगा? मानपुर केवल एक नगर परिषद क्षेत्र नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों का प्रमुख बाजार भी है। इसके अलावा मानपुर में बैंक, तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक शासकीय विभागों के कार्यालय संचालित हैं। इन विभागों का मुख्यालय होने के कारण प्रतिदिन आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक अपने जरूरी शासकीय एवं निजी कार्यों के लिए मानपुर पहुंचते हैं। इस कारण मुख्य बाजार और प्रमुख सड़कों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। *आपातकालीन सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती* जाम की समस्या केवल आम नागरिकों की परेशानी तक सीमित नहीं है। यातायात बाधित होने की स्थिति में अस्पताल की एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के वाहनों के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है। प्रशासनिक अधिकारियों को भी कई बार इसी यातायात अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में किसी आपातकालीन परिस्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसलिए यातायात व्यवस्था को केवल सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। *मानपुर पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी, लेकिन अतिरिक्त बल की जरूरत* मानपुर पुलिस द्वारा समय-समय पर यातायात व्यवस्था बनाने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन सीमित पुलिस बल और अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों के चलते प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी कर पाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार के प्रमुख तिराहे-चौराहों पर नियमित रूप से पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित हो सके। विशेषकर बाजार के व्यस्त समय में पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य है। यदि इन स्थानों पर नियमित पुलिस बल तैनात रहता है तो वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने, अव्यवस्थित पार्किंग रोकने और जाम की स्थिति से निपटने में काफी मदद मिल सकती है। पुलिस प्रशासन के प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त बल उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। *स्थायी बस स्टैंड निर्माण की जरूरत* जिला प्रशासन और नगर परिषद मानपुर को भी इस समस्या की गंभीरता समझते हुए जल्द से जल्द स्थायी बस स्टैंड निर्माण की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। बसों के लिए निर्धारित स्थान, यात्रियों के बैठने की सुविधा, पार्किंग और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि मुख्य बाजार की सड़कों पर अनावश्यक वाहनों का दबाव कम किया जा सके। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में यातायात प्रबंधन की स्थायी कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। *यातायात सुधारने में व्यापारियों का सहयोग भी जरूरी* मानपुर में जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के साथ स्थानीय व्यापारियों का सहयोग भी बेहद आवश्यक है। व्यापारियों से अपील है कि वे अपनी दुकानों के बाहर सड़क अथवा फुटपाथ पर अतिरिक्त दुकानें न लगाएं और न ही सामान फैलाकर आवागमन बाधित करें। ग्राहकों के वाहनों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा कराने में भी सहयोग करें। बाजार की सड़कों को आवागमन के लिए खुला रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारी और आम नागरिक मिलकर प्रयास करें तो यातायात व्यवस्था में निश्चित रूप से सुधार हो सकता है। *क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा प्रशासन* जब मानपुर आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तो यातायात व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभाग गंभीर क्यों नहीं हैं? क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद, स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम की परेशानी झेलती रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी के बाद ही जागेगा? क्या अपनी जायज मांगों को लेकर जनता को अब जनआंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ेगा? अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देने के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई करें। मानपुर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण और व्यापारियों एवं नागरिकों का सहयोग सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।1