*ब्रेकिंग न्यूज़ | इटावा* इटावा जनपद के वन विभाग में तैनाती को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। लखना रेंज में स्थानांतरित किए गए वन दरोगा ज्ञानेश कुमार का ड्यूटी से कोई लेना-देना नजर नहीं आ रहा है। बसरेहर रेंज से ट्रांसफर होने के बाद भी वह लखना रेंज के फील्ड में दिखाई नहीं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वन दरोगा ज्ञानेश कुमार वर्षों से बसरेहर रेंज के अंतर्गत ही जमे हुए हैं। विभागीय आदेश के तहत उनका फेरबदल कर लखना रेंज किया गया, लेकिन इसके बावजूद न तो उन्होंने नया चार्ज संभाला और न ही निर्धारित क्षेत्र में ड्यूटी निभा रहे हैं। आरोप है कि उच्चाधिकारियों के आदेशों को भी दरोगा खुलेआम नजरअंदाज कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की फेस योजना के तहत प्रत्येक वन दरोगा को संबंधित रेंज में आवास आवंटित किया जाता है, ताकि वह वहीं रहकर अपने कार्यों का सुचारू रूप से संचालन कर सके। लेकिन बसरेहर रेंज में वर्षों से आवंटित सरकारी आवास को छोड़ने को दरोगा तैयार नहीं हैं। लखना रेंज के फेस-2 आवास में रहने से भी वह कतरा रहे हैं। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का आरोप है कि एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनाती के चलते दरोगा की क्षेत्रीय माफियाओं से सांठ-गांठ हो गई है। कमाई पर लगाम लगने के डर से वह नया कार्यक्षेत्र और आवास छोड़ना नहीं चाहते। यही वजह है कि लखना रेंज के अंतर्गत उनकी मौजूदगी शून्य बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रांसफर के कई महीनों बाद भी चार्ज न संभालने और ड्यूटी से गायब रहने वाले ऐसे कर्मचारी पर आखिर विभाग कब और क्या कार्रवाई करेगा? अब निगाहें उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाए जाते हैं।
*ब्रेकिंग न्यूज़ | इटावा* इटावा जनपद के वन विभाग में तैनाती को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। लखना रेंज में स्थानांतरित किए गए वन दरोगा ज्ञानेश कुमार का ड्यूटी से कोई लेना-देना नजर नहीं आ रहा है। बसरेहर रेंज से ट्रांसफर होने के बाद भी वह लखना रेंज के फील्ड में दिखाई नहीं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वन दरोगा ज्ञानेश कुमार वर्षों से बसरेहर रेंज के अंतर्गत ही जमे हुए हैं। विभागीय आदेश के तहत उनका फेरबदल कर लखना रेंज किया गया, लेकिन इसके बावजूद न तो उन्होंने नया चार्ज संभाला और न ही निर्धारित क्षेत्र में ड्यूटी निभा रहे हैं। आरोप है कि उच्चाधिकारियों के आदेशों को भी दरोगा खुलेआम नजरअंदाज कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की फेस योजना के तहत प्रत्येक वन दरोगा को संबंधित रेंज में आवास आवंटित किया जाता है, ताकि वह वहीं रहकर अपने कार्यों का सुचारू रूप से संचालन कर सके। लेकिन बसरेहर रेंज में वर्षों से आवंटित सरकारी आवास को छोड़ने को दरोगा तैयार नहीं हैं। लखना रेंज के फेस-2 आवास में रहने से भी वह कतरा रहे हैं। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का आरोप है कि एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनाती के चलते दरोगा की क्षेत्रीय माफियाओं से सांठ-गांठ हो गई है। कमाई पर लगाम लगने के डर से वह नया कार्यक्षेत्र और आवास छोड़ना नहीं चाहते। यही वजह है कि लखना रेंज के अंतर्गत उनकी मौजूदगी शून्य बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रांसफर के कई महीनों बाद भी चार्ज न संभालने और ड्यूटी से गायब रहने वाले ऐसे कर्मचारी पर आखिर विभाग कब और क्या कार्रवाई करेगा? अब निगाहें उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाए जाते हैं।
- Post by Devendra singh Bhadauriya1
- *यूपी – मुंबई में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर फायरिंग करने वाले 7 शूटर गिरफ्तार। मुख्य शूटर दीपक चंद्र है। उसके साथी विष्णु कुशवाहा, जतिन भारद्वाज, विशाल, सोनू, रितिक, सनी भी पकड़े गए। ये सभी आगरा, नोएडा, इटावा के रहने वाले हैं। सिर्फ दहशत फैलाने के लिए फायरिंग की गई। STF UP और हरियाणा को सफलता मिली। सभी आरोपियों को मुंबई ले जाया गया।*1
- दलीप नगर मढैयन तहसील चकर नगर इटावा उ प्र मदद मागो तो मुझे बंद मारपीट करते है शादी की हुई पत्नी को नही रहने देते रोते बिलखते परिवार की कोई मदद नही करते है पुलिस पतनी का मेटर बनाने के लिए मेरी ही लूटपाट करवा दी अपराधियो को बचाने लिये यही सिलसिला 40वर्ष से चल रहा है ,सतेन्द्र केवट1
- अजीतमल कोतवाली पुलिस, सर्विलांस और SOG की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। संयुक्त टीम ने कोतवाली क्षेत्र के अमावता गांव में हुई किसान हत्या की घटना का लगभग 72 घंटे में सफल अनावरण कर दिया। चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि खेतों पर रखवाली करने गए किसान अर्जुन सिंह की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसकी बहन के दोस्त ने ही की थी। अपर पुलिस अधीक्षक औरैया आलोक मिश्रा ने बताया कि अभियुक्त मृतक की बहन से बातचीत करता था। जब इसकी जानकारी अर्जुन सिंह को हुई तो उसने इसका विरोध किया, बहन को डांटा और उसका मोबाइल फोन छीन लिया था। इसी बात से नाराज होकर अभियुक्त ने सुनियोजित तरीके से किसान अर्जुन सिंह की हत्या कर दी। पुलिस ने आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी कर अभियुक्त को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता की सराहना की जा रही है।1
- Post by Monu Rajput2
- ग्राम गंसरा में भव्य कुश्ती दंगल, सामाजिक एकता का बना प्रतीक..। भरथना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गंसरा में पारंपरिक कुश्ती दंगल का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रभर से आए पहलवानों ने अपने दमखम और शानदार दांव-पेंच से दर्शकों का दिल जीत लिया। गांव के इस खेल महोत्सव में भारी जनसमूह उमड़ा और पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह का माहौल बना रहा। दंगल का शुभारंभ वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं प्रदेश संरक्षक, भारतीय किसान यूनियन धरतीपुत्र इंजीनियर सुघर सिंह दोहरे द्वारा फीता काटकर किया गया। इस अवसर पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। बताया गया कि इंजीनियर सुघर सिंह दोहरे लगातार क्षेत्र में सामाजिक, शैक्षिक और जनकल्याणकारी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना, किसानों और आम जनता की समस्याओं को उठाना तथा सामाजिक एकता को मजबूत करना उनके कार्यों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। कार्यक्रम में पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं राष्ट्रीय संरक्षक, भारतीय किसान यूनियन धरतीपुत्र डॉ. रामयस सिंह यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव यादव, जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा उर्मेंद्र पुष्कर, ब्लॉक अध्यक्ष चकरनगर आदित्य त्यागी, प्रसिद्ध जय पहलवान तथा समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण अंचल में ऐसे आयोजनों से प्रतिभाओं को मंच मिलता है और युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। अंत में विजेता एवं उपविजेता पहलवानों को सम्मानित किया गया और खेल भावना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।1
- जसवंतनगर:हरदोई जिले में 65 साल पहले डकैतों द्वारा अगवा की गई एक महिला आखिरकार अपने मायके लौट आईं। आज उनकी उम्र करीब 80 वर्ष है, लेकिन जब उन्होंने अपने गांव की मिट्टी को पहचाना तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो उठा। बताया जाता है कि 1961-62 में डकैती के दौरान 15 वर्ष की उम्र में ‘रामश्री’ को डकैत उठा ले गए थे। बाद में उन्हें छुड़ाया गया और उन्होंने नई जिंदगी बसा ली, लेकिन मायके की याद कभी नहीं भूलीं। उनकी बेटी सीमा की कोशिशों से आखिरकार 65 साल बाद मां अपने रिश्तेदारों से मिल सकीं। आंसुओं और भावनाओं से भरा यह मिलन लोगों को हैरान भी कर रहा है और भावुक भी.1
- vapi Gujarat to bharatpur JN3