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भारत के विपक्ष को एक तीखी टिप्पणी में 'तिलचट्टों की पीठ पर सवार' बताया गया है, जो 'विजय पाने के सपने देख रहा है जो असम्भव है'। इस स्थिति की तुलना महाभारत काल से की गई है, जहाँ दुर्योधन ने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों के मारे जाने के बाद भी अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी थी। उस समय दुर्योधन ने शल्य को सेनापति बनाकर युद्ध जीतने के सपने देखे थे। ठीक इसी प्रकार, मौजूदा समय में भारत का विपक्ष भी 'तिलचट्टों की पीठ पर चढ़कर' जीत हासिल करने के सपने देख रहा है, जिसे पूरी तरह से 'असम्भव' बताया गया है।
दौलत राम शर्मा शास्त्री
भारत के विपक्ष को एक तीखी टिप्पणी में 'तिलचट्टों की पीठ पर सवार' बताया गया है, जो 'विजय पाने के सपने देख रहा है जो असम्भव है'। इस स्थिति की तुलना महाभारत काल से की गई है, जहाँ दुर्योधन ने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों के मारे जाने के बाद भी अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी थी। उस समय दुर्योधन ने शल्य को सेनापति बनाकर युद्ध जीतने के सपने देखे थे। ठीक इसी प्रकार, मौजूदा समय में भारत का विपक्ष भी 'तिलचट्टों की पीठ पर चढ़कर' जीत हासिल करने के सपने देख रहा है, जिसे पूरी तरह से 'असम्भव' बताया गया है।
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