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आज भागवत कथा का चौथा दिन है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं। इस विशाल धार्मिक आयोजन में विभासतापक की महत्वपूर्ण सहभागिता रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है।
Rahul kaurav
आज भागवत कथा का चौथा दिन है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं। इस विशाल धार्मिक आयोजन में विभासतापक की महत्वपूर्ण सहभागिता रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है।
- Rahul kauravमुरैना, मुरैना, मध्य प्रदेश👏👏🙏1 hr ago
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- धौलपुर में भीषण गर्मी और नौतपा की प्रचंड तपिश के बीच, जब आम जनजीवन प्रभावित है, तब बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा और भी बढ़ गई है। इसी स्थिति को समझते हुए धौलपुर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए बेजुबान जीवों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी में पक्षियों के सूखते गले और पानी की तलाश में भटकते आवारा पशुओं को राहत प्रदान करना है। इस अभियान के तहत, शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर पक्षियों के लिए मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें प्रतिदिन ताजा पानी भरा जाता है। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गायों, कुत्तों और बंदरों जैसे जानवरों के लिए लोगों ने खुद की ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी नियमित रूप से पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस दौरान कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, पर प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है। उन्होंने नौतपा में एक बर्तन पानी रखने को भी सबसे बड़ा पुण्य का काम बताते हुए अधिवक्ता समुदाय से इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा हो जाता है तब ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने एडवोकेट, पत्रकार एवं आमजन के इस संयुक्त प्रयास को पूरे समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आग्रह किया। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के दौरान धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में पानी से भरा एक मिट्टी का बर्तन रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता और पत्रकार एवं आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। नौतपा की इस तपिश में यह सामाजिक सरोकार न सिर्फ पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान है, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल भी है। इस अभियान में प्रशांत हुंडावाल के साथ रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा, भानु शर्मा सहित कई लोग सक्रिय रूप से मौजूद रहे।4
- धौलपुर जिले के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं, बल्कि मनुष्य को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी देती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों में प्रकृति को ईश्वर का साक्षात रूप बताया। महाराज श्री ने प्रकृति दर्शन, परीक्षित मोक्ष, उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी, पर्वत, वृक्ष और पशु-पक्षी सभी भगवान के विराट स्वरूप का अभिन्न हिस्सा हैं। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि यह हमें प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण करने की सीख देता है। परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल है, परंतु ईश्वर भक्ति से इसका भय समाप्त हो जाता है, जैसा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी के मुख से कथा सुनकर परम पद प्राप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान कृष्ण ने जब अपने मित्र उद्धव को ब्रज भेजा, तो गोपियों के निश्छल और अनन्य प्रेम को देखकर उद्धव का ज्ञान का अहंकार टूट गया और उन्होंने भक्ति मार्ग को ज्ञान से श्रेष्ठ माना। संगीत कलाकारों के भजनों के माध्यम से जब कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का प्रसंग सुनाया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि सच्चे भाव और प्रेम के भूखे हैं। इस अवसर पर कथा आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई के साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत एवं अन्य श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा का समापन महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।4
- राजाखेड़ा क्षेत्र के खोड़ गाँव, पंचायत बरेठा में दो दिन पहले हुई एक भीषण आगजनी की घटना में एक परिवार को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस हादसे में कप्तान सिंह पुत्र रामचरण कुशवाह के घर में बंधी चार भैंस, एक बकरा, अनाज और पूरा घरेलू सामान जलकर खाक हो गया, जिससे परिवार के सामने एक गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा पीड़ित परिवार से मिलने गाँव पहुँचे। उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही, विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात की और उन्हें निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और उन्हें हर संभव मदद दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इस दौरान, ग्रामीणों ने भी पीड़ित परिवार को सहायता मुहैया कराने की मांग उठाई।2
- धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का अंतिम दिन था, जहाँ गुफाधाम जारौली टीला वाले पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भागवत कथा केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का एक जीवंत संदेश भी देती है। श्रीमद्भागवत महापुराण में प्रकृति को ईश्वर का ही साक्षात रूप माना गया है। महाराज ने प्रकृति दर्शन, परीक्षित मोक्ष, उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र जैसे प्रसंगों पर विस्तार से बताया। उन्होंने नदियों, पर्वतों, वृक्षों और पशु-पक्षियों को भगवान के विराट स्वरूप का हिस्सा बताया। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराने का जिक्र करते हुए उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के सम्मान और संरक्षण का महत्व समझाया। परीक्षित मोक्ष प्रसंग में उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने तक्षक नाग के डसने से पूर्व शुकदेव जी के मुख से कथा सुनकर परम पद प्राप्त किया, जो यह सिद्ध करता है कि ईश्वर भक्ति से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। भगवान कृष्ण ने जब अपने परम ज्ञानी मित्र उद्धव को ब्रज भेजा, तो गोपियों के निश्छल प्रेम को देखकर उद्धव का ज्ञान का अहंकार चूर हो गया और उन्होंने भक्ति को ज्ञान से श्रेष्ठ माना। संगीत कलाकारों के भजनों के माध्यम से जब कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का प्रसंग सुनाया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि सच्चे भाव और प्रेम के भूखे हैं। कथा के आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई सहित राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र और कृष्णकांत जैसे श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा के समापन पर महाआरती की गई और महाप्रसाद का वितरण किया गया।4
- जौरा रोड स्थित मुंगावली पेट्रोल पंप पर कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जहाँ बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों में धड़ल्ले से पेट्रोल और डीजल भरा जा रहा है। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने हाल ही में एक टीएल बैठक में यह आदेश जारी किया था कि कोई भी पेट्रोल पंप संचालक नंबर प्लेट विहीन वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराएगा। इस आदेश को प्रशासन द्वारा समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक भी किया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेट्रोल पंप संचालक लगातार बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में ईंधन भर रहे हैं और वाहनों की कोई जाँच-पड़ताल भी नहीं की जा रही है। जानकारों का कहना है कि ऐसे वाहन कई बार अवैध कार्यों में इस्तेमाल होते हैं, जिससे इस तरह नियमों की अनदेखी न केवल प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकती है। यह स्थिति संबंधित पेट्रोल पंप संचालक की मनमानी को उजागर करती है। अब यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि कलेक्टर के स्पष्ट आदेशों के बावजूद नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा है, और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद, लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।1
- धौलपुर के बाड़ी उपखंड और तहसील कार्यालयों पर 26 मई को कर्मचारियों ने अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के आह्वान पर एक घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राजस्थान सरकार द्वारा कर्मचारी हितों पर किए जा रहे कथित कुठाराघात के विरोध में था, जिसमें कर्मचारियों का तीखा आक्रोश देखने को मिला। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं पर लगातार चोट कर रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकना, बीमा कंपनियों के प्रवेश को रोकना और समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, महासंघ के 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करने की भी मांग की गई है। कर्मचारियों ने दुख व्यक्त किया कि उन्हें अपने स्वयं के जीपीएफ से पैसा निकालने के लिए 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिसे उन्होंने कर्मचारियों के साथ कुठाराघात बताया। इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। इनमें जिला अध्यक्ष चंद्रभान चौधरी, कर्मचारी नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव (जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष), गोपाल कृष्ण शर्मा (आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष), टीकम सिंह जाट (शिक्षक संघ महामंत्री), आईएलआर सुनील कुमार परमार, जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीएलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा, कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा, और अध्यापक अशोक कुमार मीणा जैसे अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया और कर्मचारियों की आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एकजुट होकर सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की घोर निंदा की। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि वह जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाए और 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करे। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।1
- सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को सिरे से नकारते हुए चुनाव आयोग के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर राहुल गांधी के झूठे दावों की पोल खोल दी है।1
- पूर्वी राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के विरोध में बुधवार को बाड़ी उपखंड कार्यालय पर युवाओं एवं विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया और उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए, पूर्वी राजस्थान की भाषाई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की मांग की है। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने इस दौरान कहा कि पूर्वी राजस्थान में लंबे समय से हिंदी एवं बृज भाषा का प्रचलन है, ऐसे में सम्पूर्ण राजस्थान में एक ही भाषा को लागू करना इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इससे बृज भाषा के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है। गुर्जर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हजारों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, और भाषा परिवर्तन का सीधा असर उनकी शिक्षा व परीक्षा परिणामों पर पड़ेगा। शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) और 350A का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय भाषाई परिस्थितियों का अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू करना विद्यार्थियों के हित में नहीं होगा, क्योंकि ये अनुच्छेद नागरिकों को उनकी भाषा के संरक्षण का अधिकार और मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान देने की बात करते हैं। समरथ गुर्जर एवं मनोज राजावत ने मांग की कि धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर एवं दौसा जिलों की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मारवाड़ी भाषा अनिवार्य रूप से लागू की गई तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं एवं सरकारी नौकरियों में पिछड़ सकते हैं। मानवेंद्र बैंसला एवं देशराज कंसाना ने बृज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के समय से ही बृज भाषा के प्रचलन और कवियों द्वारा इसके उपयोग का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में हिंदी एवं बृज भाषा की परंपरा को बनाए रखने की वकालत की। ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीणा, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमंत, कांता शर्मा, पायल सहित बड़ी संख्या में युवा एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।1
- धौलपुर में नौतपा की प्रचंड गर्मी और आग उगलती दोपहर के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश की है। मई-जून की तपती गर्मी में पक्षियों के सूखते गले और पानी की तलाश में भटकते आवारा पशुओं के लिए इन लोगों ने पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल के तहत, शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें प्रतिदिन ताजा पानी भरा जा रहा है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। इसके साथ ही, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए बड़ी पानी की टंकियां रखवाई गई हैं, जिनमें नियमित रूप से पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायालय में इंसानों के अधिकारों की बात होती है, पर प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रखना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने भी कानून द्वारा सिखाई गई दया और करुणा का जिक्र करते हुए कहा कि यह संयुक्त प्रयास पूरे समाज को नई दिशा देगा और हर नागरिक को अपने स्तर पर एक परिंडा जरूर लगाना चाहिए। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे ज्यादा होता है, जिससे जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। इस दौरान प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वो इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता और पत्रकार एवं आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडों और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं। यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा, भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो इसे बेजुबानों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बना रहा है।1