भिड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम ररुआ नं 2 में खेतों से होकर गुजर रही हाइटेंशन बिजली लाइन किसानों के लिए जानलेवा खतरा बन गई है। इन दिनों हंकाई और जुताई की तैयारी शुरू होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेतों में झूल रहे बिजली के तारों के चलते खेती कार्य के दौरान कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या के बारे में आलमपुर जेइ और लाइनमैन को सूचित किया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। ररुआ निवासी उदय वीर सिंह ने विशेष रूप से बताया कि उनके खेत से गुजर रही 11 केवी की बिजली लाइन के तार जमीन से करीब पांच फीट ऊपर लटक रहे हैं, जिससे ट्रैक्टर से हंकाई और जुताई करते समय करंट लगने का खतरा रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर इन बिजली लाइनों को दुरुस्त करने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित बड़े हादसे से बचा जा सके।
भिड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम ररुआ नं 2 में खेतों से होकर गुजर रही हाइटेंशन बिजली लाइन किसानों के लिए जानलेवा खतरा बन गई है। इन दिनों हंकाई और जुताई की तैयारी शुरू होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेतों में झूल रहे बिजली के तारों के चलते खेती कार्य के दौरान कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या के बारे में आलमपुर जेइ और लाइनमैन को सूचित किया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। ररुआ निवासी उदय वीर सिंह ने विशेष रूप से बताया कि उनके खेत से गुजर रही 11 केवी की बिजली लाइन के तार जमीन से करीब पांच फीट ऊपर लटक रहे हैं, जिससे ट्रैक्टर से हंकाई और जुताई करते समय करंट लगने का खतरा रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर इन बिजली लाइनों को दुरुस्त करने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित बड़े हादसे से बचा जा सके।
- जब शासन-प्रशासन की व्यवस्था में कमी दिखाई देती है, तो किसान अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए स्वयं पहल कर रहे हैं। इसी क्रम में किसानों ने अपनी एक पंचायत आयोजित की, जहाँ उन्होंने आपसी बातचीत के माध्यम से कई उदाहरण देते हुए मुद्दों को निपटाने का प्रयास किया। यह दर्शाता है कि किसान एकजुट होकर अपने हितों के लिए स्वयं समाधान खोजने में जुटे हैं।1
- महिला एवं बाल विकास विभाग के बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावों के विपरीत, ग्राम पंचायत डिरोलीपार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-02 की जमीनी हकीकत बेहद दयनीय और बदहाल है। केंद्र की स्थिति इतनी खराब है कि यहां आने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही गंभीर खतरे में हैं। परिसर चारों ओर से झाड़-झंखाड़ और घास-फूस से भरा है, जो जंगल का रूप ले चुका है, जिससे सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़े-मकोड़ों का खतरा हमेशा बना रहता है। केंद्र की बाउंड्री वॉल भी जर्जर और क्षतिग्रस्त है, जिससे परिसर सुरक्षित नहीं है और आवारा पशुओं व असामाजिक तत्वों का प्रवेश कभी भी हो सकता है। सबसे शर्मनाक स्थिति पेयजल व्यवस्था को लेकर है, जहां बच्चों के लिए पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, और वे भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि साफ-सफाई, बाउंड्री निर्माण और पेयजल व्यवस्था की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे निरीक्षणों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। इस गंभीर मामले में पक्ष जानने के लिए परियोजना अधिकारी हरनौत शर्मा से कई बार दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका। ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल केंद्र क्रमांक-02 डिरोलीपार की जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि परिसर की साफ-सफाई, झाड़-झंखाड़ हटाने, बाउंड्री वॉल का निर्माण और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि जब आंगनबाड़ी जैसे संवेदनशील केंद्रों में बच्चों को स्वच्छ परिसर, सुरक्षित वातावरण और पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, तब महिला एवं बाल विकास विभाग आखिर किस विकास की तस्वीर पेश कर रहा है।3
- भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जालौन विकास खंड के मांडरी गांव में एक रात्रि जन चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान उरई सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक गौरी शंकर वर्मा देर शाम गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर उनकी समस्याओं को सुना। चौपाल के दौरान विधायक ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, जहाँ लोगों ने सड़क, आवास, अतिक्रमण और अन्य स्थानीय मुद्दों से जुड़ी अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। विधायक ने स्वयं कई शिकायतों को नोट किया और संबंधित अधिकारियों को उन पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए। इसी क्रम में उन्होंने गांव में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, जैसे निर्माणाधीन सड़क और बारातघर, का निरीक्षण किया। पात्र लाभार्थियों को आवास की चाबियां वितरित की गईं और कई विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया गया। विधायक गौरी शंकर वर्मा ने घोषणा की कि ग्राम मांडरी में लगभग 25 से 35 लाख रुपये की लागत से एक सामुदायिक मिलन घर बनाया जाएगा। इसके अलावा, ग्राम पंचायत मांडरी में गौशाला से लेकर पंचायत भवन तक की जर्जर सड़क के लिए 52 लाख रुपये का टेंडर स्वीकृत हो चुका है, और विधायक ने आश्वासन दिया कि सड़क निर्माण कार्य आगामी दो महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान विधायक गांव में ही रुके, उन्होंने ग्रामीणों के साथ समय बिताया और एक ग्रामीण परिवार के घर भोजन भी किया। इस रात्रि प्रवास के माध्यम से उन्होंने गांव की वास्तविक समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास किया। मीडिया से बातचीत में विधायक ने बताया कि 5 जून से लेकर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक जालौन विकास खंड के सभी गांवों में जनसंपर्क अभियान और जन चौपालें आयोजित की जाएंगी। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी सीधे जनता तक पहुंचाई जाएगी और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। हालांकि, जब मीडियाकर्मियों ने गांव में अतिक्रमण की समस्या पर सवाल उठाया, तो विधायक ने इसे लेखपाल और सचिव के अधिकार क्षेत्र का विषय बताकर जवाब दिया। इस सबके बीच, जनता के मन में कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं। क्या सरकार की लाभकारी योजनाएं सिर्फ कागजों और भूमिपूजन तक सीमित रहेंगी या उनका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचेगा? क्या चौपालों में किए गए वादे निर्धारित समय सीमा में पूरे होंगे और विकास कार्यों की घोषणाएं केवल शिलापट्टों और फाइलों तक ही रहेंगी या धरातल पर भी दिखेंगी? एक बड़ा सवाल यह भी है कि विधायक गौरी शंकर वर्मा के लगभग 6 वर्षों के कार्यकाल में जनपद जालौन का बस स्टैंड आज भी अधूरा क्यों पड़ा है? जनता भी जवाब मांग रही है, क्योंकि बातों, वादों और वास्तविकता में फर्क होता है। फिलहाल, मांडरी गांव में आयोजित यह रात्रि जन चौपाल और विधायक का रात्रि प्रवास पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे जनता के बीच पहुंचने और समस्याओं को समझने की सकारात्मक पहल मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के रूप में देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चौपाल में सुनी गई समस्याएं कितनी जल्दी हल होती हैं और जनता को विकास कार्यों का लाभ कब तक मिल पाता है।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में 'इंसानियत ग्रुप' नामक एक संगठन गरीब और असहाय लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरा है। यह ग्रुप अपने अच्छे कार्यों के लिए जाना जाता है और जालौन में कार्यरत है। ग्रुप के ऐसे ही कार्यों में से एक, 700 किलोमीटर दूर से अपने घर पहुंचे दिव्यांग नीलू विश्वकर्मा की कहानी है।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच में स्वयं सहायता समूह से फर्जी तरीके से पैसे निकालने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मामले को लेकर स्थानीय महिलाओं ने उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) से विस्तृत जांच कराने की मांग की है।1
- सेंवढ़ा में मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से थाना परिसर में एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता थाना प्रभारी सुनील बनौरिया ने की, जिसमें मुस्लिम और हिंदू समाज के प्रतिनिधियों सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बैठक के दौरान मोहर्रम जुलूस, ताजिया मार्ग, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। थाना प्रभारी सुनील बनौरिया ने सभी उपस्थित लोगों से भाईचारे और सद्भाव के साथ पर्व मनाने की अपील करते हुए अफवाहों से दूर रहने का संदेश दिया। समाज के वरिष्ठजनों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने और मोहर्रम पर्व को परंपरागत एवं शांतिपूर्ण ढंग से मनाने का भरोसा दिलाया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सभी समुदायों के बीच समन्वय स्थापित कर मोहर्रम पर्व को सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना रहा। पुलिस प्रशासन और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने मिलकर सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया, ताकि यह पर्व आपसी एकता के साथ मनाया जा सके।1
- भिड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम ररुआ नं 2 में खेतों से होकर गुजर रही हाइटेंशन बिजली लाइन किसानों के लिए जानलेवा खतरा बन गई है। इन दिनों हंकाई और जुताई की तैयारी शुरू होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेतों में झूल रहे बिजली के तारों के चलते खेती कार्य के दौरान कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या के बारे में आलमपुर जेइ और लाइनमैन को सूचित किया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। ररुआ निवासी उदय वीर सिंह ने विशेष रूप से बताया कि उनके खेत से गुजर रही 11 केवी की बिजली लाइन के तार जमीन से करीब पांच फीट ऊपर लटक रहे हैं, जिससे ट्रैक्टर से हंकाई और जुताई करते समय करंट लगने का खतरा रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर इन बिजली लाइनों को दुरुस्त करने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित बड़े हादसे से बचा जा सके।1