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कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।
Manoj shrivastav
कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।
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- कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।1
- मनेंद्रगढ़ कोतवाली पुलिस ने कठौतिया क्षेत्र में चोरी के संदेह में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 14 जून की रात ग्राम बिछली में राजकुमार गोंड और उनकी पत्नी प्रमिला गोंड को चोरी के शक में रोका गया था, जिसके बाद गजरूप सिंह, मनोज सिंह और कौशल सिंह ने उनके साथ मारपीट की थी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल राजकुमार को उपचार के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, जहां 18 जून को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद मामले में हत्या की धारा 103(1) बीएनएस जोड़ी गई। विवेचना के दौरान आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गजरूप सिंह और मनोज सिंह के कब्जे से घटना में प्रयुक्त डंडे भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में कोतवाली प्रभारी विवेक पाटले सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- आज अहमदाबाद से मिली ताजा खबर के अनुसार, शहर में एक डिवाइडर आम लोगों के लिए खतरे का सबब बन गया है। यह डिवाइडर जनता के लिए परेशानी और जोखिम बढ़ा रहा है। रिपोर्टिंग के लिए संपर्क नंबर 9424257566 दिया गया है।1
- SECL हॉस्पिटल कोतमा कोलियरी में पदस्थ एक्स-रे टेक्निशियन जयंत चक्रवर्ती के ज्येष्ठ पुत्र जैनिल चक्रवर्ती लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड का शिकार हो गए। इस दुखद घटना में जैनिल का निधन हो गया। अग्निकांड के बाद, उनके पार्थिव शरीर को उनके निज निवास अनूपपुर जिले के भालूमांडा लाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। इस मुश्किल घड़ी में भगवान से जैनिल की आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है।4
- अंबिकापुर स्थित बाल संप्रेषण गृह से एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है, जहाँ से 11 बच्चे खिड़की तोड़कर फरार हो गए हैं। इस ब्रेकिंग न्यूज़ ने स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि इतनी आसानी से इतने लोग एक साथ कैसे फरार हो गए और उस जगह किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। पोस्ट में इस स्थिति को सोचने योग्य बताया गया है, जो हर तरफ देखने को मिल रही लापरवाही को उजागर करती है। खबर साझा करने वाले ने इस पूरे मामले पर लोगों की राय जानने की अपेक्षा की है और पाठकों को हर खबर के लिए उनके चैनल से जुड़े रहने का धन्यवाद और आग्रह किया है।1
- कोरिया जिले में 23 जून, 2026 को शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने सभी पालकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से अपील की है कि अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालय से जोड़ा जाए और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। कलेक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार होने के साथ-साथ उसके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। उन्होंने सभी अभिभावकों से नए शैक्षणिक सत्र में अपने बच्चों का समय पर विद्यालय में प्रवेश कराने और उन्हें नियमित रूप से स्कूल भेजने का आग्रह किया। श्रीमती यादव ने स्पष्ट किया कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का आधार है, क्योंकि आज के बच्चे ही कल के जागरूक नागरिक और समाज के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और अभिभावकों से अपने आसपास ऐसे बच्चों की पहचान करने का आग्रह किया जो किसी कारणवश विद्यालय नहीं जा रहे हैं या पढ़ाई छोड़ चुके हैं, ताकि उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें। कलेक्टर ने शिक्षकों से विद्यालयों में सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायी वातावरण बनाने का आह्वान किया, जिससे बच्चों की सीखने में रुचि बढ़े। उन्होंने विद्यालय से बाहर या ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी बल दिया। अंत में, उन्होंने जिलेवासियों से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि कोरिया जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, हर बच्चा विद्यालय जाए, अपने सपनों को साकार करे और एक शिक्षित, जागरूक तथा समृद्ध समाज के निर्माण में सहभागी बने, क्योंकि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।1
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।4
- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड मुख्यालय में 22 जून 2026 को सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग और संयुक्त सामाजिक संगठनों के तत्वावधान में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के तहत प्रतापपुर थाना परिसर के समीप से एक रैली निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होते हुए कदमपारा चौक पहुँची। वहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया और सांकेतिक पुतला दहन भी किया। कार्यक्रम के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार बंछोर ने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की, अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन और एकता को अत्यंत आवश्यक बताया। सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने अपने संबोधन में बताया कि रायपुर में 6 जून 2026 को हुई आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर तैयार एक संयुक्त ज्ञापन 22 जून को महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को सौंपा गया। इसी क्रम में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में भी ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 'वनवासी' शब्द के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि इससे आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता आहत होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी हैं और प्रकृति के रक्षक हैं। अपनी पहचान, परंपरा और संस्कृति से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” इसके अतिरिक्त, बीपीएस पोया ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्रोच्चारण संबंधी निर्देशों पर भी सवाल उठाया, शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और समावेशी बनाने की वकालत करते हुए विज्ञान एवं पर्यावरण आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मांगों में स्थानीय भर्ती में प्राथमिकता एवं 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करना, निजीकरण का विरोध, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, भू-माफियाओं पर नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाना, आदिवासी धर्म कोड की मान्यता, परिसीमन से जुड़े मुद्दों का समाधान, ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, उद्योग-व्यापार एवं खनन में आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, नक्सल प्रभावित निर्दोष बंदियों की रिहाई, डीलिस्टिंग का विरोध, आस्था केंद्रों एवं देवगुड़ियों का संरक्षण, पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, तथा आदिवासी शिक्षा, मातृभाषा और पाँचवीं अनुसूची के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार एवं प्रशासन द्वारा इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर बिमला अगरिया, गौरीशंकर नेताम, विनय पावले, लक्ष्मण आर्मो, सफलाल, अमर बहादुर सिंह आयाम, बनवारी खलखो, राजू सिंह आयाम, जीतन सोनहा, रामचंद्र मांझी, अंजली आयाम, लक्ष्मी बैगा, इंद्रपाल सिंह चेरवा, प्रदीप सिंह, राजेश सिंह पोया, राम सिंह पोया (GSU जिलाध्यक्ष), त्रिभुवन सिंह टेकाम, मंजू मिंज (पूर्व जिला पंचायत सदस्य) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1