छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना
के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन
गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष
उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।
- अनूपपुर के बिजुरी थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बाइक की डिग्गी से ₹50,000 की चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय शातिर आरोपी ओमप्रकाश सिसोदिया उर्फ बच्चा कंजर को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना बिजुरी अस्पताल के पास हुई थी। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी किए गए ₹47,500 नकद और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद की है। पूछताछ के दौरान, आरोपी ने बिजुरी के साथ-साथ थाना रामनगर क्षेत्र में भी इसी तरह की वारदातें करने की बात स्वीकार की है। ओमप्रकाश सिसोदिया के खिलाफ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चोरी, लूट, नकबजनी और आर्म्स एक्ट के तहत 15 से अधिक मामले दर्ज हैं। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी विकास सिंह और उनकी टीम की भूमिका सराहनीय रही। अनूपपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे अपने वाहनों में नगदी, कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज असुरक्षित न छोड़ें, तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।2
- सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में एक 55 वर्षीय वृद्ध मसत राम की तीन एकड़ ज़मीन की कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई है। इस मामले में वृद्ध ने न्याय की उम्मीद में 23 जून को सरगुजा कलेक्टर के समक्ष जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरा मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम चांदो का है, जहाँ मसत राम आत्मज विरतिया की तीन एकड़ भूमि को सीतापुर निवासी पंकज लकड़ा और उनकी पत्नी नेहा लकड़ा ने एक ज़मीन दलाल, लखनपुर निवासी कयामुद्दीन अंसारी के साथ मिलकर धोखाधड़ी से अपने नाम करवा लिया। मसत राम ने अपने आवेदन में बताया है कि पंकज लकड़ा और नेहा लकड़ा, कयामुद्दीन अंसारी के साथ ज़मीन खरीदने-बेचने के लिए उनके पास आए थे। वृद्ध के कम पढ़े-लिखे होने और जानकारी के अभाव का फायदा उठाते हुए, आनन-फानन में ज़मीन के साथ उनका फोटो खींचकर फर्जी तरीके से तीन एकड़ ज़मीन अपने नाम करा ली गई। जबकि बात केवल एक एकड़ भूमि के सौदे की हुई थी, और वृद्ध को मात्र 1 लाख रुपए की राशि दी गई थी। आवेदन के अनुसार, पंकज लकड़ा और उनकी पत्नी नेहा लकड़ा का कलेक्टर कार्यालय की राजस्व शाखा सहित विभिन्न शाखाओं में कर्मचारी रह चुके होने या वर्तमान में पदस्थ होने का उल्लेख भी किया गया है, जिससे उन्हें राजस्व संबंधी सभी छोटी-बड़ी बातों का भलीभांति ज्ञान है। वृद्ध मसत राम ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व पंकज लकड़ा उसी ज़मीन पर खेती कराने पहुंचा था, जहाँ वृद्ध द्वारा रोके जाने पर उसने कहा कि ज़मीन अब उसके नाम हो चुकी है और उसे कब्जा छोड़ देना चाहिए। इस फर्जीवाड़े के बाद ज़मीन पंकज लकड़ा के नाम पर दर्ज हो चुकी है और नक्शा सुधार का कार्य भी किया जा चुका है, जिससे वृद्ध अब स्वयं को ठगा हुआ और मायूस महसूस कर रहा है। इस घटना के बाद, सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दी एक आदिवासी व्यक्ति की ज़मीन की सारी कागजी कार्यवाही बिना उसकी पूरी जानकारी के कैसे पूरी हो गई। यह स्पष्ट रूप से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जो एक गरीब व्यक्ति की ज़मीन को इतनी तेजी से दूसरे के नाम होने देने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। मसत राम ने कलेक्टर सरगुजा से अपनी ज़मीन वापस दिलाने, और फर्जी तरीके से उसकी ज़मीन अपने नाम करने वाले व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्यवाही करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरगुजा कलेक्टर इस फर्जी खरीद-बिक्री मामले में किस तरह की कार्यवाही करते हैं और क्या इस वृद्ध को उसकी ज़मीन वापस मिल पाएगी, जो न्याय के लिए अब कलेक्टर के दर पर पहुंचा है।1
- छत्तीसगढ़ के नागरिकों से उन बच्चों की मदद के लिए आगे आने की मार्मिक अपील की गई है जो काम की तलाश में बाहर गए हैं। इस गुहार में विशेष रूप से 'किसी की बेटी' का जिक्र किया गया है और सभी बच्चों के लिए सहायता मांगी गई है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे इस संदेश को सभी गांवों में यथासंभव साझा करें और इन बच्चों की सहायता करें, क्योंकि यह संभावना है कि इनमें से कोई अपना या संबंधी हो।1
- कबीरधाम जिले के ग्राम दामापुर बाजार निवासी 108 वर्षीय गजानंद सिंह परिहार आज के दौर में प्रेरणा के बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं, जिसका श्रेय वे पिछले 70 वर्षों से कर रहे नियमित योगाभ्यास को देते हैं। गजानंद सिंह आज भी योग के कठिन आसन और प्राणायाम बेहद सहजता के साथ कर लेते हैं, जो लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है। उनकी जीवनशैली इतनी अनुशासित है कि 108 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन सुबह-शाम 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। उनका दावा है कि योग और सात्विक दिनचर्या के बल पर ही उन्होंने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर जीवन की जंग जीती है। गजानंद सिंह का मानना है कि दीर्घायु और निरोग रहने के लिए संतुलित खान-पान और सकारात्मक सोच का होना अनिवार्य है। गजानंद सिंह ने आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यदि युवा आज से ही योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लें, तो वे भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। एक लंबी उम्र जीने के बाद भी उनकी सक्रियता समाज के लिए स्वस्थ जीवन जीने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के हरदीबाजार में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। इस घटना में एक युवक की ट्रेलर की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई।1
- लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड हादसे में दिवंगत हुए जयनिल का शव उनके पैतृक घर भालूमाड़ा पहुंच गया है। इस दुखद अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे और सभी ने नम आंखों से जयनिल को अंतिम विदाई दी।1
- एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के भरतपुर विकासखंड में स्थित रमदाहा जलप्रपात में नहाने गए एक व्यक्ति की डूबने से मृत्यु हो गई है।1
- लखनऊ अग्निकांड में काल कलवित हुए अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा निवासी जयनिल चक्रवर्ती का पार्थिव शरीर आज उनके गृह ग्राम भालूमाड़ा पहुंचा। इस दुखद घड़ी में पूरे माहौल में शोक व्याप्त था, और जयनिल चक्रवर्ती का अंतिम संस्कार अत्यंत गमगीन वातावरण में संपन्न हुआ।1
- अंबिकापुर में महापौर मंजूषा भगत और भाजपा जिला अध्यक्ष भरत सिंह सिसोदिया के नाम से सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल होने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। 21 जून को सामने आए इस ऑडियो में 'मीना बाजार' लगाने के बदले पैसों के लेन-देन की चर्चा सुनाई दे रही है, जिसे महापौर ने सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक बताया है। इस मामले में महापौर ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपी अनुराग मिश्रा और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मीडिया से बातचीत के दौरान महापौर मंजूषा भगत भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू भर आए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह उनके और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की एक गहरी साजिश है, जिससे उनका पूरा परिवार मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है। महापौर ने प्रशासन से आग्रह किया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित व्यक्ति ही जिम्मेदार होगा।1