सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में एक 55 वर्षीय वृद्ध मसत राम की तीन एकड़ ज़मीन की कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई है। इस मामले में वृद्ध ने न्याय की उम्मीद में 23 जून को सरगुजा कलेक्टर के समक्ष जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरा मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम चांदो का है, जहाँ मसत राम आत्मज विरतिया की तीन एकड़ भूमि को सीतापुर निवासी पंकज लकड़ा और उनकी पत्नी नेहा लकड़ा ने एक ज़मीन दलाल, लखनपुर निवासी कयामुद्दीन अंसारी के साथ मिलकर धोखाधड़ी से अपने नाम करवा लिया। मसत राम ने अपने आवेदन में बताया है कि पंकज लकड़ा और नेहा लकड़ा, कयामुद्दीन अंसारी के साथ ज़मीन खरीदने-बेचने के लिए उनके पास आए थे। वृद्ध के कम पढ़े-लिखे होने और जानकारी के अभाव का फायदा उठाते हुए, आनन-फानन में ज़मीन के साथ उनका फोटो खींचकर फर्जी तरीके से तीन एकड़ ज़मीन अपने नाम करा ली गई। जबकि बात केवल एक एकड़ भूमि के सौदे की हुई थी, और वृद्ध को मात्र 1 लाख रुपए की राशि दी गई थी। आवेदन के अनुसार, पंकज लकड़ा और उनकी पत्नी नेहा लकड़ा का कलेक्टर कार्यालय की राजस्व शाखा सहित विभिन्न शाखाओं में कर्मचारी रह चुके होने या वर्तमान में पदस्थ होने का उल्लेख भी किया गया है, जिससे उन्हें राजस्व संबंधी सभी छोटी-बड़ी बातों का भलीभांति ज्ञान है। वृद्ध मसत राम ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व पंकज लकड़ा उसी ज़मीन पर खेती कराने पहुंचा था, जहाँ वृद्ध द्वारा रोके जाने पर उसने कहा कि ज़मीन अब उसके नाम हो चुकी है और उसे कब्जा छोड़ देना चाहिए। इस फर्जीवाड़े के बाद ज़मीन पंकज लकड़ा के नाम पर दर्ज हो चुकी है और नक्शा सुधार का कार्य भी किया जा चुका है, जिससे वृद्ध अब स्वयं को ठगा हुआ और मायूस महसूस कर रहा है। इस घटना के बाद, सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दी एक आदिवासी व्यक्ति की ज़मीन की सारी कागजी कार्यवाही बिना उसकी पूरी जानकारी के कैसे पूरी हो गई। यह स्पष्ट रूप से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जो एक गरीब व्यक्ति की ज़मीन को इतनी तेजी से दूसरे के नाम होने देने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। मसत राम ने कलेक्टर सरगुजा से अपनी ज़मीन वापस दिलाने, और फर्जी तरीके से उसकी ज़मीन अपने नाम करने वाले व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्यवाही करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरगुजा कलेक्टर इस फर्जी खरीद-बिक्री मामले में किस तरह की कार्यवाही करते हैं और क्या इस वृद्ध को उसकी ज़मीन वापस मिल पाएगी, जो न्याय के लिए अब कलेक्टर के दर पर पहुंचा है।
सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में एक 55 वर्षीय वृद्ध मसत राम की तीन एकड़ ज़मीन की कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई है। इस मामले में वृद्ध ने न्याय की उम्मीद में 23 जून को सरगुजा कलेक्टर के समक्ष जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरा मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम चांदो का है, जहाँ मसत राम आत्मज विरतिया की तीन एकड़ भूमि को सीतापुर निवासी पंकज लकड़ा और उनकी पत्नी नेहा लकड़ा ने एक ज़मीन दलाल, लखनपुर निवासी कयामुद्दीन अंसारी के साथ मिलकर धोखाधड़ी से अपने नाम करवा लिया। मसत राम ने अपने आवेदन में बताया है कि पंकज लकड़ा और नेहा लकड़ा, कयामुद्दीन अंसारी के साथ ज़मीन खरीदने-बेचने के लिए उनके पास आए थे। वृद्ध के कम पढ़े-लिखे होने और जानकारी के अभाव का फायदा उठाते हुए, आनन-फानन में ज़मीन के साथ उनका फोटो खींचकर फर्जी तरीके से तीन एकड़ ज़मीन अपने नाम करा ली गई। जबकि बात केवल एक एकड़ भूमि के सौदे की हुई थी, और वृद्ध को मात्र 1 लाख रुपए की राशि दी गई थी। आवेदन के अनुसार, पंकज लकड़ा और उनकी पत्नी नेहा लकड़ा का कलेक्टर कार्यालय की राजस्व शाखा सहित विभिन्न शाखाओं में कर्मचारी रह चुके होने या वर्तमान में पदस्थ होने का उल्लेख भी किया गया है, जिससे उन्हें राजस्व संबंधी सभी छोटी-बड़ी बातों का भलीभांति ज्ञान है। वृद्ध मसत राम ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व पंकज लकड़ा उसी ज़मीन पर खेती कराने पहुंचा था, जहाँ वृद्ध द्वारा रोके जाने पर उसने कहा कि ज़मीन अब उसके नाम हो चुकी है और उसे कब्जा छोड़ देना चाहिए। इस फर्जीवाड़े के बाद ज़मीन पंकज लकड़ा के नाम पर दर्ज हो चुकी है और नक्शा सुधार का कार्य भी किया जा चुका है, जिससे वृद्ध अब स्वयं को ठगा हुआ और मायूस महसूस कर रहा है। इस घटना के बाद, सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दी एक आदिवासी व्यक्ति की ज़मीन की सारी कागजी कार्यवाही बिना उसकी पूरी जानकारी के कैसे पूरी हो गई। यह स्पष्ट रूप से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जो एक गरीब व्यक्ति की ज़मीन को इतनी तेजी से दूसरे के नाम होने देने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। मसत राम ने कलेक्टर सरगुजा से अपनी ज़मीन वापस दिलाने, और फर्जी तरीके से उसकी ज़मीन अपने नाम करने वाले व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्यवाही करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरगुजा कलेक्टर इस फर्जी खरीद-बिक्री मामले में किस तरह की कार्यवाही करते हैं और क्या इस वृद्ध को उसकी ज़मीन वापस मिल पाएगी, जो न्याय के लिए अब कलेक्टर के दर पर पहुंचा है।
- कोरिया जिले में 23 जून, 2026 को शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने सभी पालकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से अपील की है कि अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालय से जोड़ा जाए और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। कलेक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार होने के साथ-साथ उसके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। उन्होंने सभी अभिभावकों से नए शैक्षणिक सत्र में अपने बच्चों का समय पर विद्यालय में प्रवेश कराने और उन्हें नियमित रूप से स्कूल भेजने का आग्रह किया। श्रीमती यादव ने स्पष्ट किया कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का आधार है, क्योंकि आज के बच्चे ही कल के जागरूक नागरिक और समाज के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और अभिभावकों से अपने आसपास ऐसे बच्चों की पहचान करने का आग्रह किया जो किसी कारणवश विद्यालय नहीं जा रहे हैं या पढ़ाई छोड़ चुके हैं, ताकि उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें। कलेक्टर ने शिक्षकों से विद्यालयों में सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायी वातावरण बनाने का आह्वान किया, जिससे बच्चों की सीखने में रुचि बढ़े। उन्होंने विद्यालय से बाहर या ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी बल दिया। अंत में, उन्होंने जिलेवासियों से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि कोरिया जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, हर बच्चा विद्यालय जाए, अपने सपनों को साकार करे और एक शिक्षित, जागरूक तथा समृद्ध समाज के निर्माण में सहभागी बने, क्योंकि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।1
- अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने आज एक कथित ऑडियो सुनने के बाद थाने आकर मीडिया के सामने रोते हुए अपना बयान दर्ज कराया।1
- आज अहमदाबाद से मिली ताजा खबर के अनुसार, शहर में एक डिवाइडर आम लोगों के लिए खतरे का सबब बन गया है। यह डिवाइडर जनता के लिए परेशानी और जोखिम बढ़ा रहा है। रिपोर्टिंग के लिए संपर्क नंबर 9424257566 दिया गया है।1
- रायगढ़ जिले में एक आंगनबाड़ी सहायिका पर शराब के लिए पैसे न देने पर उसके पति ने प्राणघातक हमला कर दिया, जिसके बाद घरघोड़ा पुलिस ने आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देश पर महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई करते हुए यह गिरफ्तारी की गई है। यह घटना 21 जून 2026 को सामने आई, जब पीड़ित सत्यवती राठिया (30 वर्ष) के चचेरे भाई पवन राठिया (25 वर्ष) ने थाना घरघोड़ा में रिपोर्ट दर्ज कराई। पवन ने बताया कि उसकी चचेरी बहन सत्यवती ग्राम देवगढ़ में आंगनबाड़ी सहायिका है और उसका पति इंद्रजीत राठिया राजमिस्त्री का काम करता है। सत्यवती अक्सर पति द्वारा शराब के नशे में विवाद और मारपीट की जानकारी देती थी, जिस पर परिजनों की समझाइश का कोई असर नहीं हुआ था। 21 जून की दोपहर, सत्यवती ने बताया कि उसके पति इंद्रजीत राठिया ने लगभग 1 बजे शराब पीने के लिए पैसे मांगे। पैसे देने से इनकार करने पर आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी और बांस के डंडे से उसके सिर और दोनों हाथों पर प्राणघातक हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सत्यवती को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रायगढ़ रेफर किया गया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना घरघोड़ा में आरोपी इंद्रजीत राठिया के खिलाफ अपराध क्रमांक 200/2026 धारा 119(1), 296, 351(3), 109(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने टीम गठित कर आरोपी इंद्रजीत राठिया (32 वर्ष), निवासी ग्राम देवगढ़ बाजारपारा को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा भी बरामद किया गया। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने इस मामले पर कड़ा संदेश दिया है कि रायगढ़ पुलिस महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, घरेलू प्रताड़ना और जानलेवा हमले जैसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति पर कार्य कर रही है, और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने समाज से महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहने और ऐसे मामलों की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील भी की है।1
- बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत विश्रामनगर के धनेशपुर में स्थित लुत्ती जलाशय बांध बाढ़ आपदा में टूटने के बाद भी अब तक सुधारा नहीं जा सका है। इस गंभीर स्थिति के कारण धनेशपुर, विश्रामनगर और सारंगपुर के ग्रामीणों के सामने सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लगभग 300-400 किसान इस समस्या से बेहद चिंतित हैं। ग्रामीणों और सरपंच द्वारा 26 फरवरी 2026 को ही प्रशासन को आवेदन सौंपे जाने के बावजूद, इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और फाइल ठंडे बस्ते में धूल खा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल भी इसी बांध के टूटने से कई घर उजड़ गए थे और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभाग पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। बांध का पानी बह जाने से पूरे इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। अब ग्रामीण जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।1
- कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।1
- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन के तहत छत्तीसगढ़ लगातार विकास की राह पर है। राज्य में पीएम जनमन आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के सपनों को साकार कर रही है। इस योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति के हितग्राहियों को अपने आवास का सपना पूरा करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए सरगुजा में लाभार्थियों ने शासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है, जो दर्शाता है कि मुख्यमंत्री साय की सुशासन सरकार छत्तीसगढ़ के हर वर्ग, विशेषकर वंचित समुदायों के कल्याण और उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है।1
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।4
- मनेंद्रगढ़ कोतवाली पुलिस ने कठौतिया क्षेत्र में चोरी के संदेह में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 14 जून की रात ग्राम बिछली में राजकुमार गोंड और उनकी पत्नी प्रमिला गोंड को चोरी के शक में रोका गया था, जिसके बाद गजरूप सिंह, मनोज सिंह और कौशल सिंह ने उनके साथ मारपीट की थी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल राजकुमार को उपचार के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, जहां 18 जून को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद मामले में हत्या की धारा 103(1) बीएनएस जोड़ी गई। विवेचना के दौरान आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गजरूप सिंह और मनोज सिंह के कब्जे से घटना में प्रयुक्त डंडे भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में कोतवाली प्रभारी विवेक पाटले सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1