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लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड हादसे में दिवंगत हुए जयनिल का शव उनके पैतृक घर भालूमाड़ा पहुंच गया है। इस दुखद अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे और सभी ने नम आंखों से जयनिल को अंतिम विदाई दी।
पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड हादसे में दिवंगत हुए जयनिल का शव उनके पैतृक घर भालूमाड़ा पहुंच गया है। इस दुखद अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे और सभी ने नम आंखों से जयनिल को अंतिम विदाई दी।
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- SECL हॉस्पिटल कोतमा कोलियरी में पदस्थ एक्स-रे टेक्निशियन जयंत चक्रवर्ती के ज्येष्ठ पुत्र जैनिल चक्रवर्ती लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड का शिकार हो गए। इस दुखद घटना में जैनिल का निधन हो गया। अग्निकांड के बाद, उनके पार्थिव शरीर को उनके निज निवास अनूपपुर जिले के भालूमांडा लाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। इस मुश्किल घड़ी में भगवान से जैनिल की आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है।4
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में व्यवहारी पुलिस ने अवैध कोयले के भंडारण पर बड़ी कार्रवाई करते हुए, अब तक की अपनी सबसे बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया है। व्यवहारी थाना अंतर्गत ग्राम टिहकी स्थित एक कोयला यार्ड, जो खनिज माफिया का अवैध गढ़ बन चुका था, पर पुलिस टीम ने अचानक छापा मारा। इस दौरान पुलिस ने वहाँ संग्रहित लगभग 1000 टन अवैध कोयला जब्त कर लिया। इस विशाल कार्रवाई से कोयले का अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है। मौके पर मौजूद कोल यार्ड के मैनेजर, 42 वर्षीय भूपेंद्र तिवारी से जब पुलिस ने इस बड़े भंडारण के मालिकाना हक और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मांगे, तो उनके पास सिर्फ़ मौखिक दावों के अलावा कोई कागजात नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने तत्काल नए कानूनी आपराधिक प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर पूरे जब्त माल को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस द्वारा इस मामले में आगे की जांच की जा रही है। यह थाना व्यवहारी पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।2
- कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।1
- मनेंद्रगढ़ कोतवाली पुलिस ने कठौतिया क्षेत्र में चोरी के संदेह में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 14 जून की रात ग्राम बिछली में राजकुमार गोंड और उनकी पत्नी प्रमिला गोंड को चोरी के शक में रोका गया था, जिसके बाद गजरूप सिंह, मनोज सिंह और कौशल सिंह ने उनके साथ मारपीट की थी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल राजकुमार को उपचार के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, जहां 18 जून को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद मामले में हत्या की धारा 103(1) बीएनएस जोड़ी गई। विवेचना के दौरान आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गजरूप सिंह और मनोज सिंह के कब्जे से घटना में प्रयुक्त डंडे भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में कोतवाली प्रभारी विवेक पाटले सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- कटनी नगर में स्थित रानी माँ जालपा के दरबार में भक्तों की अटूट आस्था उमड़ती है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि माँ की कृपा से उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। भक्त माँ जालपा से प्रार्थना करते हैं कि वे सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।1
- कटनी जिले में विजयराघवगढ़ पुलिस ने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की है।1
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।4
- आज विदिशा शहर में चार परीक्षा केंद्रों पर री-नीट परीक्षा का आयोजन किया गया था। गर्ल्स कॉलेज स्थित एक परीक्षा केंद्र पर तीन छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गईं। इनमें से दो छात्राएं निर्धारित समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं कर सकीं, जबकि तीसरी छात्रा के परिजन पहले हुई परीक्षा का प्रवेश पत्र लेकर पहुंचे थे। इस घटना के दौरान विदिशा में री-नीट एग्जाम में एक बहुत ही भावुक दृश्य देखने को मिला।1
- कटनी जिले में स्थित बहोरीबंद जलाशय, जिसे 'भूता' के नाम से भी जाना जाता है, अपनी जल लहरों से लोगों को आकर्षित करता है। इस जलाशय की पानी की लहरें समुद्री लहरों से कम नहीं लगतीं, जिसके कारण यह लोगों को अपनी ओर खींचता है। इतनी प्राकृतिक सुंदरता और आकर्षण के बावजूद, इस बहोरीबंद जलाशय के लिए पर्यटन के क्षेत्र में कोई भी विकास योजना नहीं बनाई गई है।1