जैसलमेर के पोकरण-रामदेवरा सड़क मार्ग पर करीब 300 गोवंश के अवशेष मिलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे आमजन और गोभक्तों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। इस मामले को लेकर लोगों ने जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। गोभक्त प्रदीप सेन ने दावा किया कि उन्होंने 28 मई को खुद अपने मोबाइल फोन से इन अवशेषों का वीडियो बनाया था। उनके अनुसार, यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में मौके पर पड़े गोवंश के शवों को दफनाने की कार्रवाई की गई। प्रदीप सेन ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए पास स्थित एक गौशाला के संचालकों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि गोवंश की मौत के वास्तविक कारणों और शवों को खुले में पड़े रहने देने के पीछे की वजहों का पता चल सके। इस वीडियो के सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों और गोभक्तों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और गोवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है।
जैसलमेर के पोकरण-रामदेवरा सड़क मार्ग पर करीब 300 गोवंश के अवशेष मिलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे आमजन और गोभक्तों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। इस मामले को लेकर लोगों ने जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। गोभक्त प्रदीप सेन ने दावा किया कि उन्होंने 28 मई को खुद अपने मोबाइल फोन से इन अवशेषों का वीडियो बनाया था। उनके अनुसार, यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में मौके पर पड़े गोवंश के शवों को दफनाने की कार्रवाई की गई। प्रदीप सेन ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए पास स्थित एक गौशाला के संचालकों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि गोवंश की मौत के वास्तविक कारणों और शवों को खुले में पड़े रहने देने के पीछे की वजहों का पता चल सके। इस वीडियो के सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों और गोभक्तों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और गोवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है।
- जैसलमेर के पोकरण-रामदेवरा सड़क मार्ग पर करीब 300 गोवंश के अवशेष मिलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे आमजन और गोभक्तों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। इस मामले को लेकर लोगों ने जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। गोभक्त प्रदीप सेन ने दावा किया कि उन्होंने 28 मई को खुद अपने मोबाइल फोन से इन अवशेषों का वीडियो बनाया था। उनके अनुसार, यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में मौके पर पड़े गोवंश के शवों को दफनाने की कार्रवाई की गई। प्रदीप सेन ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए पास स्थित एक गौशाला के संचालकों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि गोवंश की मौत के वास्तविक कारणों और शवों को खुले में पड़े रहने देने के पीछे की वजहों का पता चल सके। इस वीडियो के सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों और गोभक्तों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और गोवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है।1
- जैसलमेर जिले की भणियाणा तहसील के रातडिया गांव और आसपास के इलाकों में बीती रात धूल भरी आंधी का भीषण प्रकोप देखने को मिला है। इस तेज आंधी के गुबार ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, जिससे पेड़-पौधों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। आंधी के चलते सैकड़ों की संख्या में विद्युत पोल धराशायी हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप इन सभी प्रभावित गांवों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है।2
- फलोदी शहर के एक निजी अस्पताल में बच्चेदानी (यूटरस) निकालने के ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई है, जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल है। परिजनों ने निजी अस्पताल पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार, कानासरिया गांव निवासी सीमा नामक महिला का फलोदी स्थित जेएसके अस्पताल में बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन हुआ था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हुआ और उसकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल प्रशासन ने उसे उपचार के लिए जोधपुर रेफर कर दिया। हालांकि, जोधपुर ले जाते समय रास्ते में ही महिला की मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और मृतका के परिजन शव को फलोदी स्थित अस्पताल के बाहर रखकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। धरने पर बैठे लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। घटना की सूचना मिलने पर फलोदी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के साथ ही परिजनों से समझाइश का प्रयास किया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह मौत प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही के कारण हुई है और वे शव के साथ अस्पताल में धरने पर डटे हुए हैं। फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले की जानकारी जुटा रहे हैं और दोनों पक्षों से बातचीत जारी है।1
- राजस्थान के फायर ब्रांड नेता रविंद्र सिंह भाटी ने शिव में प्रदेश की सरकार को अनुष्ठान के माध्यम से जगाने का प्रयास किया है।1
- नेवर के अंदर तेज़ी से तूफान और बारिश का अनुभव किया गया है, जिसकी तीव्रता को 'कलयुग के जैसी आंधी' के समान बताया जा रहा है।1
- तिंवरी क्षेत्र में इस समय बहुत ही भयानक तूफान और बारिश का प्रकोप देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सभी से आग्रह किया गया है कि वे अपने घरों से बाहर न निकलें और अपने बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।1
- कोटा के तलवंडी स्थित आयुर्वेदिक महाविद्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल भारतीय साहित्य परिषद के 9वें प्रदेश महाधिवेशन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय साहित्य, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहित्य केवल ज्ञान का स्रोत नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने वाली एक सशक्त शक्ति है। बिरला ने भारतीय साहित्य को देश की संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों का मजबूत आधार बताया, साथ ही कहा कि साहित्यकारों और लेखकों ने अपनी लेखनी के माध्यम से विभिन्न कालखंडों में भारतीय संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि साहित्य राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली विरासत से जोड़ता है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि साहित्य हमारी पहचान और सभ्यता को जीवंत बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम है। वर्तमान समय में युवाओं को साहित्य से जुड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, बिरला ने कहा कि यह न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति में संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय साहित्य का अध्ययन कर जीवन के लिए सकारात्मक प्रेरणा प्राप्त करने का आह्वान किया। इस महाधिवेशन में प्रदेशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान भारतीय साहित्य, भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने साहित्य साधकों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।1
- सरहदी क्षेत्र में मानवता और वन्यजीव संरक्षण की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है, जहाँ एक परिवार ने जंगली कुत्तों से बचाई गई हिरणी के बच्चे को लगभग नौ महीने तक अपने परिवार के सदस्य की तरह पाला-पोसा। यह घटना नाचना गाँव से करीब 30 किलोमीटर दूर सातर फांटा स्थित चक 8 एनएलडी में खेतसिंह चौहान के परिवार के साथ हुई। जानकारी के अनुसार, परिवार को अपने खेतों के पास से किसी वन्यजीव के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। जब वे मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि जंगली कुत्तों ने एक हिरणी के बच्चे पर हमला कर रखा था। परिवार के सदस्यों ने तुरंत साहस दिखाते हुए कुत्तों को भगाया और घायल तथा असहाय हिरणी के बच्चे को सुरक्षित बचा लिया। इसके बाद, चौहान परिवार ने हिरणी के बच्चे को अपने घर लाकर उसकी देखभाल शुरू की, उसे अपने बच्चों की तरह स्नेह दिया और करीब 8-9 महीने तक उसका पालन-पोषण किया, जिससे वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया। हिरणी के स्वस्थ होने पर परिवार ने इसकी सूचना जीव प्रेमी धर्मेंद्र पुनिया को दी। सूचना मिलते ही धर्मेंद्र पुनिया वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुँचे और हिरणी का रेस्क्यू कर उसे वन विभाग के सुपुर्द किया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने चौहान परिवार की सराहना करते हुए कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में आमजन की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, क्षेत्र के लोगों ने भी परिवार की इस संवेदनशील पहल की प्रशंसा की और इसे वन्यजीव प्रेम एवं मानवता का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। परिवार को हिरणी के बच्चे को वन विभाग को सौंपते हुए भावुकता के कारण रोना आ गया।1