किसान भाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जिसमें 1 जून से यूरिया को लेकर बड़े बदलावों की चर्चा की जा रही है। खेती करने वाले सभी किसानों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि यूरिया खरीदने से पहले उन्हें किन नई बातों का ध्यान रखना होगा। इन बदलावों में किसान ID (Farmer ID) की अनिवार्यता, ज़मीन के हिसाब से यूरिया की मात्रा का निर्धारण, और एक नए कोटा सिस्टम का क्रियान्वयन शामिल है। इसके साथ ही, यूरिया गोल्ड की नई 45 किलो और 40 किलो की पैकिंग भी बाजार में आएगी। यूरिया खरीदने की प्रक्रिया में भी बदलाव हो रहा है, अब खाद लेने के लिए OTP और Iris Scan का इस्तेमाल करना होगा। यदि कोई ओवररेटिंग की समस्या आती है, तो उसकी शिकायत कैसे करनी है, इसकी जानकारी भी दी गई है, जिसके लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 भी उपलब्ध कराया गया है। सभी किसानों को सलाह दी गई है कि अगर उन्होंने अभी तक अपनी फसल पंजीकरण या किसान आईडी अपडेट नहीं की है, तो वे संबंधित जानकारी को समय पर जांच लें और उसे अपडेट करा लें। यह जानकारी उन किसानों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जो किराए या बटाई पर खेती करते हैं। सभी किसान भाइयों से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने गांव, रिश्तेदारों और अन्य किसान भाइयों तक ज़रूर शेयर करें ताकि सही जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। यह पोस्ट राजस्थान निष्पक्ष न्यूज़ (RNN) द्वारा साझा की गई है, जो किसानों को ऐसी अहम सूचनाओं से अवगत कराती है। जय जवान, जय किसान!
किसान भाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जिसमें 1 जून से यूरिया को लेकर बड़े बदलावों की चर्चा की जा रही है। खेती करने वाले सभी किसानों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि यूरिया खरीदने से पहले उन्हें किन नई बातों का ध्यान रखना होगा। इन बदलावों में किसान ID (Farmer ID) की अनिवार्यता, ज़मीन के हिसाब से यूरिया की मात्रा का निर्धारण, और एक नए कोटा सिस्टम का क्रियान्वयन शामिल है। इसके साथ ही, यूरिया गोल्ड की नई 45 किलो और 40 किलो की पैकिंग भी बाजार में आएगी। यूरिया खरीदने की प्रक्रिया में भी बदलाव हो रहा है, अब खाद लेने के लिए OTP और Iris Scan का इस्तेमाल करना होगा। यदि कोई ओवररेटिंग की समस्या आती है, तो उसकी शिकायत कैसे करनी है, इसकी जानकारी भी दी गई है, जिसके लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 भी उपलब्ध कराया गया है। सभी किसानों को सलाह दी गई है कि अगर उन्होंने अभी तक अपनी फसल पंजीकरण या किसान आईडी अपडेट नहीं की है, तो वे संबंधित जानकारी को समय पर जांच लें और उसे अपडेट करा लें। यह जानकारी उन किसानों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जो किराए या बटाई पर खेती करते हैं। सभी किसान भाइयों से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने गांव, रिश्तेदारों और अन्य किसान भाइयों तक ज़रूर शेयर करें ताकि सही जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। यह पोस्ट राजस्थान निष्पक्ष न्यूज़ (RNN) द्वारा साझा की गई है, जो किसानों को ऐसी अहम सूचनाओं से अवगत कराती है। जय जवान, जय किसान!
- किसान भाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जिसमें 1 जून से यूरिया को लेकर बड़े बदलावों की चर्चा की जा रही है। खेती करने वाले सभी किसानों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि यूरिया खरीदने से पहले उन्हें किन नई बातों का ध्यान रखना होगा। इन बदलावों में किसान ID (Farmer ID) की अनिवार्यता, ज़मीन के हिसाब से यूरिया की मात्रा का निर्धारण, और एक नए कोटा सिस्टम का क्रियान्वयन शामिल है। इसके साथ ही, यूरिया गोल्ड की नई 45 किलो और 40 किलो की पैकिंग भी बाजार में आएगी। यूरिया खरीदने की प्रक्रिया में भी बदलाव हो रहा है, अब खाद लेने के लिए OTP और Iris Scan का इस्तेमाल करना होगा। यदि कोई ओवररेटिंग की समस्या आती है, तो उसकी शिकायत कैसे करनी है, इसकी जानकारी भी दी गई है, जिसके लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 भी उपलब्ध कराया गया है। सभी किसानों को सलाह दी गई है कि अगर उन्होंने अभी तक अपनी फसल पंजीकरण या किसान आईडी अपडेट नहीं की है, तो वे संबंधित जानकारी को समय पर जांच लें और उसे अपडेट करा लें। यह जानकारी उन किसानों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जो किराए या बटाई पर खेती करते हैं। सभी किसान भाइयों से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने गांव, रिश्तेदारों और अन्य किसान भाइयों तक ज़रूर शेयर करें ताकि सही जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। यह पोस्ट राजस्थान निष्पक्ष न्यूज़ (RNN) द्वारा साझा की गई है, जो किसानों को ऐसी अहम सूचनाओं से अवगत कराती है। जय जवान, जय किसान!1
- उदयपुर जिले के वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाणुन्द में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। क्षेत्र के विधायक उदय लाल डांगी ने यहाँ नवनिर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का विधिवत लोकार्पण किया। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए लोकार्पण समारोह में भारी संख्या में क्षेत्रवासी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। विधायक उदय लाल डांगी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह नया स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की जनता को उनके घर के पास ही बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।1
- गोभक्ति, सेवा और समर्पण का एक प्रेरणादायी दृश्य रविवार को श्री महावीर एलवा मां गौशाला एवं कमल तीर्थ, डूंगला में देखने को मिला। बड़ीसादड़ी निवासी एक गौभक्त भामाशाह परिवार ने गौशाला पहुंचकर गोमाता की पूजा-अर्चना की और गोसेवा का पुण्य लाभ अर्जित किया। इस परिवार ने एक टेंपो भरकर ताजे फल एवं हरी सब्जियां गौशाला में पहुंचाईं, जिसके बाद गोवंश को श्रद्धा और स्नेहपूर्वक ये फल-सब्जियां खिलाई गईं। परिवार की गोमाता के प्रति गहरी आस्था और सेवा भावना को देखकर उपस्थित लोगों ने इसकी हृदय से सराहना की। इस अवसर पर गौभक्तों ने गोसेवा को भारतीय संस्कृति में सबसे श्रेष्ठ बताया, इसे केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक भी कहा। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से आग्रह किया कि वे समय-समय पर गौशालाओं में सहयोग कर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें। पूजा-अर्चना और गोसेवा के पश्चात गोवंश के सुख, समृद्धि और संरक्षण की कामना की गई, जिससे गौशाला परिसर में श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला और उपस्थित जन भावविभोर हो गए। सेवा कार्य के दौरान वातावरण भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। श्री महावीर एलवा मां गौशाला एवं कमल तीर्थ डूंगला परिवार की ओर से भामाशाह परिवार का अभिनंदन करते हुए उनके इस सराहनीय योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया। गौशाला प्रबंधन ने जोर दिया कि ऐसे सेवा कार्य समाज में गोसंवर्धन और गोसंरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रेरित करते हैं।3
- कपासन में स्थानीय लोगों ने सरकार के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि सरकार उनकी दुकानों और क्षेत्र की खराब स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। लोगों ने साफ शब्दों में कहा है कि सड़कें पूरी तरह से टूटी हुई हैं, लेकिन सरकार को इस समस्या की कोई परवाह नहीं है और वह केवल अपनी ही खुशी में व्यस्त है।1
- उदयपुर शहर में तेज़ आंधी और तूफानी बारिश का दौर देखा गया, जहाँ हवाएँ 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से चलीं। इस गंभीर मौसम परिवर्तन के मद्देनजर, मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी।1
- राजसमंद जिले के रेलमगरा कस्बे में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली, जहाँ नींबू के आकार के ओले गिरने के साथ मूसलाधार बारिश हुई। दिनभर की उमस और तेज गर्मी के बाद, शाम करीब 5 बजे तेज हवाएँ चलीं, जिसके बाद आसमान में घने बादल छा गए। बादलों की तेज गर्जना और आकाशीय बिजली की चमक के बीच शुरू हुई बूंदाबांदी देखते ही देखते भारी बारिश में बदल गई। बारिश के साथ उपखंड क्षेत्र के कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई, जिसमें रेलमगरा कस्बे में नींबू के आकार के ओले गिरने से लोग हैरान रह गए। ओलावृष्टि काफी देर तक जारी रही, जिससे सड़कों और खुले स्थानों पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई। मौसम के इस अचानक बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से काफी राहत मिली, और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस तेज बारिश और ओलावृष्टि से तैयार खड़ी फसलों, सब्जियों और फलों को नुकसान पहुँचने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, किसानों का एक वर्ग इस बारिश को खरीफ सीजन के लिए बेहद लाभकारी मान रहा है। किसानों के अनुसार, इस बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी, जिससे आगामी खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनेंगी और भूजल स्तर को भी लाभ मिलेगा। बारिश के कारण कस्बे के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। खासकर रेलमगरा बस स्टैंड क्षेत्र में उचित जल निकासी व्यवस्था न होने के कारण गटर का पानी सड़कों पर फैल गया। सड़क पर गंदा पानी भर जाने से वाहन चालकों और राहगीरों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, और कई लोगों को मजबूरी में इसी पानी से होकर गुजरना पड़ा। इस मौसमी बदलाव से जहाँ आमजन को गर्मी से राहत मिली, वहीं जलभराव और ओलावृष्टि ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ भी बढ़ा दी हैं।4
- यह रिपोर्ट न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर नंदलाल पुरबिया द्वारा नांदोली, राजसमंद, राजस्थान से प्रस्तुत की गई है।1
- उदयपुर जिले के मावली उपखंड के सिन्दू सहित आस-पास के गांवों में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने भारी तबाही मचाई है। क्षेत्र में आए बेमौसम तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। तेज हवाओं के वेग से कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए और बिजली के पोल भी उखड़कर नीचे गिर गए। इस आंधी-तूफान के कारण बिजली के पोल गिरने और तार टूटने से सिन्दू व आस-पास के ग्रामीण इलाकों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। इसके साथ ही, किसानों की फसलें भी आड़ी पड़ गईं।1