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बेतला नेशनल पार्क को आगामी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए बंद किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान कुल तीन महीनों के लिए बंद रहेगा।
Sonu Ram
बेतला नेशनल पार्क को आगामी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए बंद किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान कुल तीन महीनों के लिए बंद रहेगा।
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- बेतला नेशनल पार्क को आगामी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए बंद किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान कुल तीन महीनों के लिए बंद रहेगा।1
- भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, रंका प्रखंड में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया है। सोमवार को रंका व्यापार मंडल परिसर स्थित बूथ संख्या-402 पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला तोपनो ने की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित बनाना है, जिसके लिए 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक पूरे प्रखंड में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत, प्रत्येक मतदान केंद्र क्षेत्र में बीएलओ एवं बीएलओ-2 घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस प्रक्रिया में पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, मृत अथवा स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, और नाम, पता या अन्य विवरणों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। बीडीओ ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव प्रक्रिया के लिए एक शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बीएलओ और बीएलओ-2 निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक प्रपत्र भरवाने, नए मतदाताओं का पंजीकरण कराने और त्रुटियों का सुधार करने का कार्य करेंगे। बीडीओ तोपनो ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब बीएलओ सत्यापन के लिए उनके घर पहुंचें तो वे पूरा सहयोग करें और आयु, पहचान तथा निवास से संबंधित आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए। उन्होंने उन लोगों से भी आवेदन करने का आग्रह किया है जिनकी आयु निर्धारित तिथि तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा लोगों को जागरूक करने की अपील की, और कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।1
- झारखंड के गढ़वा के जाने-माने और लोकप्रिय यूट्यूबर राजाराम प्रसाद की मेहनत आखिरकार रंग लाई है। सड़क पर ब्रेड बेचने से लेकर एक सफल डिजिटल क्रिएटर बनने तक के उनके संघर्षपूर्ण सफर के बाद, अब उन्होंने टाटा सियाराम कार खरीदी है, जो उनकी नई बुलंदी का प्रतीक है। राजाराम प्रसाद 'सिखे ऑल इन हिंदी' नामक एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिसके 37 लाख (3.7 मिलियन) से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। उनके चैनल पर मुख्य रूप से मोबाइल टिप्स, ट्रिक्स, इंटरनेट, सोशल मीडिया अपडेट्स और टेक्नोलॉजी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं। उनकी यह कहानी बेहद प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने सड़क पर ब्रेड बेचकर शुरुआत की थी और 15 साल की कड़ी मेहनत तथा हौसले के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। राजाराम प्रसाद की यह उपलब्धि कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और अथक प्रयास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।2
- लोगों को गरज-चमक के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बताया गया है कि जब बादल गरजें, तो किसी भी व्यक्ति को पेड़ों के आसपास नहीं रहना चाहिए ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।1
- पुरानडीह ग्राम की रहने वाली आदिम जनजाति विधवा महिला संचारिया देवी को आधार कार्ड न होने के कारण कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति की पुष्टि महुआडार प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार बैठा ने मंगलवार की सुबह 11:00 बजे की। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि संचारिया देवी को नियमित राशन तो मिल रहा है, लेकिन आधार कार्ड की कमी के कारण वह अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। इस समस्या के समाधान के लिए जिला आधार कार्ड समन्वयक से संपर्क स्थापित किया गया है, और जल्द ही संचारिया देवी का आधार कार्ड बनवाने तथा उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।1
- नशा मुक्ति के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक जागरूकता रथ निकाला है। उपायुक्त और अधिकारियों ने इस रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसका लक्ष्य नशा मुक्ति के प्रति लोगों को जागरूक करना है।1
- लातेहार जिले में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली, जहाँ झमाझम बारिश ने पूरे इलाके को ठंडा कर दिया। सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे, जिसके बाद दोपहर में तेज बारिश शुरू हो गई। इस बारिश से जिले का मौसम सुहाना हो गया और पिछले कई दिनों से पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिली। बारिश के बाद शहर और ग्रामीण इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की साँस ली। बाजारों और सड़कों पर भी लोगों के चेहरे खिल उठे। वहीं, इस बारिश से किसानों के चेहरे पर भी खुशी लौट आई है, क्योंकि जिले के किसान लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे थे ताकि धान की खेती और अन्य खरीफ फसलों की बुआई समय पर हो सके। किसानों का कहना है कि यह बारिश खेती के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी और खेतों में नमी बनी रहेगी, जिससे फसल की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों और किसानों को उम्मीद है कि मानसून का यह दौर खेती और जनजीवन के लिए फायदेमंद रहेगा।2
- गढ़वा जिले के रंका प्रखंड की कंचनपुर पंचायत अंतर्गत रबदा खुरा गाँव में आदिवासी सरना विकास परिषद, गढ़वा के तत्वावधान में मंगलवार को सरना ध्वज स्थापना और हुल दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए और “जय धर्मेश” के उद्घोष से पूरा गाँव गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत सरना स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना और सरना ध्वज की स्थापना के साथ हुई। हुल दिवस के अवसर पर, वर्ष 1855 के ऐतिहासिक संथाल हुल आंदोलन के महान शहीद सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू और भैरव मुर्मू सहित सभी वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इन महान क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनका यह बलिदान आज भी आदिवासी समाज को अपने अधिकार, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। आदिवासी सरना विकास परिषद के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र उरांव ने कहा कि रबदा खुरा गाँव में सरना ध्वज की स्थापना पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि हुल दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के संघर्ष, बलिदान और स्वाभिमान को याद करने का दिन है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक स्थलों की रक्षा करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न हुई और रंका अनुमंडल के विभिन्न गाँवों से आए आदिवासी समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर शहीदों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया, जिससे सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।1