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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के भैसा मुड़ा गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बनी पुलिया पहली ही बारिश में भ्रष्टाचार की पोल खोलने लगी है। पहली ही बरसात का सामना करने में नाकाम रही इस पुलिया ने इसके निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।
SK Kashyapपत्रकार रींवापार
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के भैसा मुड़ा गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बनी पुलिया पहली ही बारिश में भ्रष्टाचार की पोल खोलने लगी है। पहली ही बरसात का सामना करने में नाकाम रही इस पुलिया ने इसके निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।
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- कोरबा में हरदी बाजार से नेवसा मार्ग पर बन रहे पुल का एप्रोच रोड नहीं बनाया गया है। एप्रोच रोड का निर्माण न होने के कारण भारी बारिश होने पर इस रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।1
- अमोरा गांव में एक 32 वर्षीय महिला द्वारा फांसी लगाने का मामला सामने आया है। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुट गई है।1
- सक्ति जिले के सक्ति ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंगनसरा में भारी बारिश के कारण बोराई नदी उफान पर आ गई है। नदी में उफान आने की वजह से सिंगनसरा डैम के ऊपर से पानी बह रहा है।1
- सक्ती जिले के आबकारी वृत्त डभरा की टीम ने ग्राम कुसमूल में छापेमार कार्रवाई कर 26 लीटर महुआ शराब के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। कलेक्टर के निर्देश और जिला आबकारी अधिकारी के मार्गदर्शन में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई के तहत यह कदम उठाया गया। आबकारी विभाग की टीम ने 35 वर्षीय सारनाथ कुर्रे के मकान की तलाशी ली। जांच के दौरान मकान के आंगन और बाड़ी में बनाए गए एक चेंबर में छिपाकर रखी गई 13 प्लास्टिक की बोतलों से कुल 26 लीटर महुआ शराब बरामद की गई, जिसमें प्रत्येक बोतल में 2-2 लीटर महुआ मदिरा भरी हुई थी। बरामद अवैध शराब के आधार पर आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया और न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में वृत्त प्रभारी कोमल प्रसाद सिदार और आबकारी स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।1
- पिछले सात वर्षों से अपनी लंबित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने एक बार फिर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने एकजुट होकर जिलाधीशों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और अपनी लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग रखी। स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि पुनरीक्षित वेतनमान, पदोन्नति, समयमान वेतनमान, जोखिम भत्ता, आवास सुविधा, संविदा कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन और रिक्त पदों पर भर्ती जैसी मांगें वर्षों से लंबित पड़ी हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के आंदोलन के दौरान मिले आश्वासन के बावजूद अब तक शासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके विरोध में कर्मचारियों को यह बड़ा प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है।1
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