गंगा सिर्फ नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं सामाजिक जीवन की जीवन रेखा है -श्यामलाल पाल कुम्भ मेला क्षेत्र स्थित समाजवादी चिंतन शिविर में गंगा, पर्यावरण और समाजवाद पर विचार गोष्ठीआयोजित- प्रयागराज। कुम्भ मेला क्षेत्र में आयोजित समाजवादी चिंतन शिविर के उद्घाटन अवसर पर आज “गंगा, पर्यावरण और समाजवाद” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में समाजवादी चिंतनधारा, पर्यावरण संरक्षण और गंगा की अविरलता–निर्मलता लेकर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनिल यादव नेकिया।विषय प्रवर्तन श्री अवधेश आनंद संयोजक ने किया। मुख्य अतिथि सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक जीवन की जीवनरेखा है, जिसका संरक्षण समाजवादी मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। श्यामलाल पाल ने डॉ. लोहिया के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाजवाद को केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे प्रकृति, संस्कृति और समाज के संतुलन से जोड़ा। डॉ. लोहिया का मानना था कि अंधाधुंध औद्योगीकरण और पूंजीवादी विकास मॉडल प्रकृति का शोषण करता है, जिसका सीधा असर समाज के अंतिम व्यक्ति पर पड़ता है। एमएलसी डॉ मानसिंह यादव ने कहा कि गंगा का प्रदूषण केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय का भी प्रतीक है। गंगा के किनारे रहने वाले मछुआरे, किसान, नाविक और श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, जबकि निर्णय और लाभ बड़े पूंजीपतियों के हाथों में सिमट जाते हैं। यह स्थिति डॉ. लोहिया के “सप्त क्रांति” के विचारों के विरुद्ध है, जिसमें उन्होंने आर्थिक विषमता और प्रकृति के शोषण के खिलाफ संघर्ष की बात कही थी। वरिष्ठ नेता,विधायक डॉ संग्राम सिंह यादव ने कहा कि समाजवाद का मूल उद्देश्य संसाधनों का समान वितरण और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब विकास की नीतियों में जनहित और प्रकृति को केंद्र में रखा जाए। डॉ. लोहिया का यह विचार आज भी प्रासंगिक है कि विकास का पैमाना केवल उत्पादन और मुनाफा नहीं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरण की सुरक्षा होनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि कुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का महापर्व है, जहां करोड़ों लोग गंगा के साथ अपने भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध को व्यक्त करते हैं। ऐसे में कुम्भ क्षेत्र में समाजवादी चिंतन शिविर का आयोजन यह संदेश देता है कि सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि समाजवादी कार्यकर्ता और आम नागरिक गंगा संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और समाजवादी मूल्यों के प्रचार–प्रसार के लिए मिलकर कार्य करेंगे। डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को आत्मसात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति के बिना समाजवाद अधूरा है और समाजवाद के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव। गोष्ठी का समापन “ समाजवाद बचेगा, तभी समाज बचेगा” के उद्घोष के साथ हुआ। कार्यक्रम के संयोजक अवधेश आनंद ने अगतुको के प्रति आभार व्यक्त किया तथा संचालन सह संयोजक अनंत बहादुर यादव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिनव प्रकाश ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से सर्व श्री श्यामलाल पाल,डॉ संग्राम सिंह यादव, अनिल यादव, डॉ मान सिंह यादव, श्रीमती विजमा यादव,सैयद इफ़्तेख़ार हुसैन, पप्पू लाल निषाद,रविन्द्र यादव, सत्य वीर मुन्ना,बासुदेव यादव,रमाकांत पटेल, कृष्ण मूर्ति सिंह,कामरेड हरिश्चंद्र द्विवेदी,दान बहादुर मधुर, हेमंत टुन्नू,अनंत बहादुर यादव, राघवेंद्र यादव, अमरनाथ मौर्य, संजय मौर्य,शांति प्रकाश पटेल, दूधनाथ पटेल, रमाकांत पटेल, वजीर खान, आर एन यादव, सचिन श्रीवास्तव,मुलायम यादव, जगदीश, खिन्नी लाल पासी, नाटे चौधरी, राम प्रताप,राजेश यादव, सुशील श्रीवास्तव,आदिल हमजा, संगीता पटेल, अचल सिंह, मुन्नाजी, योगेंद्र पाण्डेय, वी वी तिवारी, नरेन्दद्र सिंह, मकबूल अहमद,आसुतोष, नन्दलाल पटेल, संतलाल वर्मा, जय सिंह यादव, रूप नाथ, डॉ हरिप्रकाश यादव,संतोष, देवीलाल, प्रदीप निषाद,आदि ने अपने विचार रखे। पवनदेव,लोकप्रिय,टीवी पत्रकार,प्रयागराज।
गंगा सिर्फ नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं सामाजिक जीवन की जीवन रेखा है -श्यामलाल पाल कुम्भ मेला क्षेत्र स्थित समाजवादी चिंतन शिविर में गंगा, पर्यावरण और समाजवाद पर विचार गोष्ठीआयोजित- प्रयागराज। कुम्भ मेला क्षेत्र में आयोजित समाजवादी चिंतन शिविर के उद्घाटन अवसर पर आज “गंगा, पर्यावरण और समाजवाद” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में समाजवादी चिंतनधारा, पर्यावरण संरक्षण और गंगा की अविरलता–निर्मलता लेकर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनिल यादव नेकिया।विषय प्रवर्तन श्री अवधेश आनंद संयोजक ने किया। मुख्य अतिथि सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक जीवन की जीवनरेखा है, जिसका संरक्षण समाजवादी मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। श्यामलाल पाल ने डॉ. लोहिया के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाजवाद को केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे प्रकृति, संस्कृति और समाज के संतुलन से जोड़ा। डॉ. लोहिया का मानना था कि अंधाधुंध औद्योगीकरण और पूंजीवादी विकास मॉडल प्रकृति का शोषण करता है, जिसका सीधा असर समाज के अंतिम व्यक्ति पर पड़ता है। एमएलसी डॉ मानसिंह यादव ने कहा कि गंगा का प्रदूषण केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय का भी प्रतीक है। गंगा के किनारे रहने वाले मछुआरे, किसान, नाविक और श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, जबकि निर्णय और लाभ बड़े पूंजीपतियों के हाथों में सिमट जाते हैं। यह स्थिति डॉ. लोहिया के “सप्त क्रांति” के विचारों के विरुद्ध है, जिसमें उन्होंने आर्थिक विषमता और प्रकृति के शोषण के खिलाफ संघर्ष की बात कही थी। वरिष्ठ नेता,विधायक डॉ संग्राम सिंह यादव ने कहा कि समाजवाद का मूल उद्देश्य संसाधनों का समान वितरण और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब विकास की नीतियों में जनहित और प्रकृति को केंद्र में रखा जाए। डॉ. लोहिया का यह विचार आज भी प्रासंगिक है कि विकास का पैमाना केवल उत्पादन और मुनाफा नहीं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरण की सुरक्षा होनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि कुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का महापर्व है, जहां करोड़ों लोग गंगा के साथ अपने भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध को व्यक्त करते हैं। ऐसे में कुम्भ क्षेत्र में समाजवादी चिंतन शिविर का आयोजन यह संदेश देता है कि सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि समाजवादी कार्यकर्ता और आम नागरिक गंगा संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और समाजवादी मूल्यों के प्रचार–प्रसार के लिए मिलकर कार्य करेंगे। डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को आत्मसात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति के बिना समाजवाद अधूरा है और समाजवाद के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव। गोष्ठी का समापन “ समाजवाद बचेगा, तभी समाज बचेगा” के उद्घोष के साथ हुआ। कार्यक्रम के संयोजक अवधेश आनंद ने अगतुको के प्रति आभार व्यक्त किया तथा संचालन सह संयोजक अनंत बहादुर यादव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिनव प्रकाश ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से सर्व श्री श्यामलाल पाल,डॉ संग्राम सिंह यादव, अनिल यादव, डॉ मान सिंह यादव, श्रीमती विजमा यादव,सैयद इफ़्तेख़ार हुसैन, पप्पू लाल निषाद,रविन्द्र यादव, सत्य वीर मुन्ना,बासुदेव यादव,रमाकांत पटेल, कृष्ण मूर्ति सिंह,कामरेड हरिश्चंद्र द्विवेदी,दान बहादुर मधुर, हेमंत टुन्नू,अनंत बहादुर यादव, राघवेंद्र यादव, अमरनाथ मौर्य, संजय मौर्य,शांति प्रकाश पटेल, दूधनाथ पटेल, रमाकांत पटेल, वजीर खान, आर एन यादव, सचिन श्रीवास्तव,मुलायम यादव, जगदीश, खिन्नी लाल पासी, नाटे चौधरी, राम प्रताप,राजेश यादव, सुशील श्रीवास्तव,आदिल हमजा, संगीता पटेल, अचल सिंह, मुन्नाजी, योगेंद्र पाण्डेय, वी वी तिवारी, नरेन्दद्र सिंह, मकबूल अहमद,आसुतोष, नन्दलाल पटेल, संतलाल वर्मा, जय सिंह यादव, रूप नाथ, डॉ हरिप्रकाश यादव,संतोष, देवीलाल, प्रदीप निषाद,आदि ने अपने विचार रखे। पवनदेव,लोकप्रिय,टीवी पत्रकार,प्रयागराज।
- *न्यूज/प्रयागराज* *रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू, मनोज सोनी खबरें उत्तर प्रदेश* *पुलिस कमिश्नर जोगेन्द्र कुमार ने मकर संक्रांति स्नान पर्व पर संगम क्षेत्र का भ्रमण कर, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा...* *प्रयागराज : माघ मेला-2026 के मुख्य स्नान पर्व एकादशी व मकर संक्रांति के दृष्टिगत पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार व अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था डा० अजय पाल, पुलिस अधीक्षक माघ मेला मनीष कुमार पांडेय एवं अन्य अधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र में निरन्तर निरीक्षण/भ्रमण किया जा रहा है एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिये जा रहे है।*1
- गंगा सिर्फ नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं सामाजिक जीवन की जीवन रेखा है -श्यामलाल पाल कुम्भ मेला क्षेत्र स्थित समाजवादी चिंतन शिविर में गंगा, पर्यावरण और समाजवाद पर विचार गोष्ठीआयोजित- प्रयागराज। कुम्भ मेला क्षेत्र में आयोजित समाजवादी चिंतन शिविर के उद्घाटन अवसर पर आज “गंगा, पर्यावरण और समाजवाद” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में समाजवादी चिंतनधारा, पर्यावरण संरक्षण और गंगा की अविरलता–निर्मलता लेकर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनिल यादव नेकिया।विषय प्रवर्तन श्री अवधेश आनंद संयोजक ने किया। मुख्य अतिथि सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक जीवन की जीवनरेखा है, जिसका संरक्षण समाजवादी मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। श्यामलाल पाल ने डॉ. लोहिया के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने समाजवाद को केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे प्रकृति, संस्कृति और समाज के संतुलन से जोड़ा। डॉ. लोहिया का मानना था कि अंधाधुंध औद्योगीकरण और पूंजीवादी विकास मॉडल प्रकृति का शोषण करता है, जिसका सीधा असर समाज के अंतिम व्यक्ति पर पड़ता है। एमएलसी डॉ मानसिंह यादव ने कहा कि गंगा का प्रदूषण केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय का भी प्रतीक है। गंगा के किनारे रहने वाले मछुआरे, किसान, नाविक और श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, जबकि निर्णय और लाभ बड़े पूंजीपतियों के हाथों में सिमट जाते हैं। यह स्थिति डॉ. लोहिया के “सप्त क्रांति” के विचारों के विरुद्ध है, जिसमें उन्होंने आर्थिक विषमता और प्रकृति के शोषण के खिलाफ संघर्ष की बात कही थी। वरिष्ठ नेता,विधायक डॉ संग्राम सिंह यादव ने कहा कि समाजवाद का मूल उद्देश्य संसाधनों का समान वितरण और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब विकास की नीतियों में जनहित और प्रकृति को केंद्र में रखा जाए। डॉ. लोहिया का यह विचार आज भी प्रासंगिक है कि विकास का पैमाना केवल उत्पादन और मुनाफा नहीं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरण की सुरक्षा होनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि कुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का महापर्व है, जहां करोड़ों लोग गंगा के साथ अपने भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध को व्यक्त करते हैं। ऐसे में कुम्भ क्षेत्र में समाजवादी चिंतन शिविर का आयोजन यह संदेश देता है कि सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि समाजवादी कार्यकर्ता और आम नागरिक गंगा संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और समाजवादी मूल्यों के प्रचार–प्रसार के लिए मिलकर कार्य करेंगे। डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को आत्मसात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति के बिना समाजवाद अधूरा है और समाजवाद के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव। गोष्ठी का समापन “ समाजवाद बचेगा, तभी समाज बचेगा” के उद्घोष के साथ हुआ। कार्यक्रम के संयोजक अवधेश आनंद ने अगतुको के प्रति आभार व्यक्त किया तथा संचालन सह संयोजक अनंत बहादुर यादव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिनव प्रकाश ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से सर्व श्री श्यामलाल पाल,डॉ संग्राम सिंह यादव, अनिल यादव, डॉ मान सिंह यादव, श्रीमती विजमा यादव,सैयद इफ़्तेख़ार हुसैन, पप्पू लाल निषाद,रविन्द्र यादव, सत्य वीर मुन्ना,बासुदेव यादव,रमाकांत पटेल, कृष्ण मूर्ति सिंह,कामरेड हरिश्चंद्र द्विवेदी,दान बहादुर मधुर, हेमंत टुन्नू,अनंत बहादुर यादव, राघवेंद्र यादव, अमरनाथ मौर्य, संजय मौर्य,शांति प्रकाश पटेल, दूधनाथ पटेल, रमाकांत पटेल, वजीर खान, आर एन यादव, सचिन श्रीवास्तव,मुलायम यादव, जगदीश, खिन्नी लाल पासी, नाटे चौधरी, राम प्रताप,राजेश यादव, सुशील श्रीवास्तव,आदिल हमजा, संगीता पटेल, अचल सिंह, मुन्नाजी, योगेंद्र पाण्डेय, वी वी तिवारी, नरेन्दद्र सिंह, मकबूल अहमद,आसुतोष, नन्दलाल पटेल, संतलाल वर्मा, जय सिंह यादव, रूप नाथ, डॉ हरिप्रकाश यादव,संतोष, देवीलाल, प्रदीप निषाद,आदि ने अपने विचार रखे। पवनदेव,लोकप्रिय,टीवी पत्रकार,प्रयागराज।1
- Post by Ashok kumar1
- प्रयागराज के माघ मेला 2026 में लगी भीषण आग, नारायण शुक्ला धाम शिविर जलकर राख प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-5 में भीषण आग लग गई है. ये आग नारायण शुक्ला धाम के शिविर में लगी है. फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने में जुटी है. टेंट समेत अन्य समान जलकर राख हो गया है. प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-5 में भीषण आग लग गई है. ये आग नारायण शुक्ला धाम के शिविर में लगी है. फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने में जुटी है. टेंट समेत अन्य समान जलकर राख हो गया है. बताया जा रहा है कि घटना के समय शिविर में 50 से अधिक लोग मौजूद थे. आनन-फानन में सभी गेट से बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया. फिलहाल फायर ब्रिगेड की टीम रेस्क्यू ऑपेरशन में जुटी है. शिविर में 15 टेंट लगे थे, जो जलकर राख हो गए. नारायण शुक्ला धाम शिविर में लगी आग1
- Post by JGE News1
- ब्लॉक होलागढ़ में आता है सर्व गुहान उर्फ सिंहगढ़ प्रयागराज जिला उत्तर प्रदेश इस गांव के रास्ते की हालत बहुत खराब है सरकार से और जो यहां के विधायक हैं मंत्री हैं उनसे मेरा अनुरोध है एक बार इस गांव का सर्वेक्षण कारण और इस पर 500 मीटर कीआईसीसी की मेरी मांग है हरिजन और ऐसीकी बस्ती है यह सरकार से मेरा अनुरोध है कि इस पर कृपया करके कम करें सभी पदाधिकारी को बिना राम-राम और यहां के प्रधान वगैरा कोई भी विकास नहीं करता है1
- #तालाब में शव मिलने से #परिजनों ने जताई #हत्या की आशंका चारो एक ही परिवार के सगे भाई। एक परिवार के दो चिराग बुझने से गांव में मचा #कोहराम। रिपोर्ट सुनील कुमार आर्य Sunil Kumar Indian National News " सच की खोज " ( भारतीय राष्ट्रीय समाचार ) किसी भी प्रकार कि घटनाएं होने पर एवं खबर चलवाने के लिए संपर्क करें - 7388108188 प्रयागराज जनपद के पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र के कुसुवां फाटक के पास बुधवार सुबह दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक गहरे तालाबनुमा गड्ढे से चार सगे व चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई। जैसे ही बच्चों के शव पानी में उतराते दिखे, हुसैनपुर पावन गांव में चीख-पुकार मच गई और मातम पसर गया। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे घर से खेलने निकले 👉 प्रिंस (10) 👉 प्रतीक (12) 👉 करण (19) 👉 प्रियांशु (11) शाम तक घर नहीं लौटे। परिजनों ने पूरी रात तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बुधवार सुबह खेतों की ओर गए ग्रामीणों की नजर जब गांव से करीब 200 मीटर दूर स्थित गहरे गड्ढे पर पड़ी, तो वहां बच्चों के शव पानी में तैरते मिले। यह मंजर देख हर किसी की रूह कांप उठी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से चारों शव बाहर निकलवाए। पुलिस के अनुसार, नहाने के दौरान गहराई का अंदाजा न लग पाने और एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में यह हादसा हुआ। 💔 दो परिवार उजड़ गए प्रिंस और प्रतीक सगे भाई थे। वहीं प्रियांशु पहले ही पिता को खो चुका था। इस हादसे ने परिजनों को पूरी तरह तोड़ दिया है। गांव की हर आंख नम है। 👮♂️ पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। 📢 ग्रामीणों ने प्रशासन से खुले और गहरे गड्ढों को तत्काल भरवाने की मांग की है। ⚠️ यह हादसा चेतावनी है— लापरवाही बन सकती है मौत की वजह। #प्रयागराज #दर्दनाक_हादसा #चार_मासूम #तालाब_बना_मौत_का_कुआं #HeartBreaking #JusticeForChildren1
- प्रयागराज के पुरामुफ़्ती थाना क्षेत्र मे कुसुवां रेलवे फाटक के पास इसी तालाब नुमा गड्ढे मे डूबने से हुयी 4 बालकों की मौत। बुधवार की सुबह चारों बालकों का शव तालाब मे उतराता देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। बच्चों के परिजनों ने मंगलवार की शाम थाने मे दर्ज करवाई थी चारों बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट,क्या पता था की उनके बच्चे इस हालत मे मिलेंगे,मृतक बालकों की पहचान प्रिंस सोनकर (10 वर्ष), प्रतीक सोनकर (12 वर्ष) पुत्रगण प्रदीप सोनकर, करण सोनकर (19 वर्ष) पुत्र राजेश सोनकर तथा प्रियांशु सोनकर (11 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय संदीप सोनकर के रूप में हुई है ।1