शाहजहाँपुर की ऐतिहासिक होली: जब सड़कों पर निकला 'बड़े लाट साहब' का कारवां शाहजहाँपुर की होली पूरे भारत में अपनी अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहाँ का 'लाट साहब का जुलूस' सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आक्रोश के प्रतीक के रूप में उभरा एक ऐतिहासिक आयोजन है। शाहजहाँपुर। रंगों के उत्सव होली पर आज शाहजहाँपुर की सड़कें एक बार फिर इतिहास की गवाह बनीं। शहर के हृदय स्थल कोतवाली से भारी सुरक्षा व्यवस्था और जयकारों के बीच 'बड़े लाट साहब' का पारंपरिक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस केवल गुलाल उड़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उस अटूट परंपरा का हिस्सा है जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग उमड़ पड़ते हैं। 🏛️ परंपरा का रोचक इतिहास कहा जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी। स्थानीय लोग अंग्रेज अफसरों के अत्याचार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रतीकात्मक रूप से 'लाट साहब' का जुलूस निकालते थे। आज भी इस परंपरा को उसी जोश के साथ निभाया जाता है, जहाँ: लाट साहब का चयन: एक व्यक्ति को 'लाट साहब' बनाया जाता है। भैंसा गाड़ी की सवारी: लाट साहब को भैंसा गाड़ी पर बिठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता है। अनोखा विरोध: लोग प्रतीकात्मक रूप से 'जूता मार' परंपरा का पालन करते हैं, जो उस समय के अंग्रेजी शासन के प्रति जनता के आक्रोश का प्रतीक था। 🛡️ चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था जुलूस की संवेदनशीलता और भव्यता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। कोतवाली से लेकर चौक और शहर के मध्य मुख्य रास्तों तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई ताकि सद्भाव और भाईचारे के साथ यह ऐतिहासिक उत्सव संपन्न हो सके। 🌈 जनसैलाब और उत्साह शहर की गलियां 'होली है' के उद्घोष से गूंज उठीं। छतों पर खड़े लोगों ने लाट साहब के जुलूस पर रंगों की बौछार की। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग—हर कोई इस अद्भुत और रोमांचकारी नजारे का हिस्सा बनने को
शाहजहाँपुर की ऐतिहासिक होली: जब सड़कों पर निकला 'बड़े लाट साहब' का कारवां शाहजहाँपुर की होली पूरे भारत में अपनी अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहाँ का 'लाट साहब का जुलूस' सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आक्रोश के प्रतीक के रूप में उभरा एक ऐतिहासिक आयोजन है। शाहजहाँपुर। रंगों के उत्सव होली पर आज शाहजहाँपुर की सड़कें एक बार फिर इतिहास की गवाह बनीं। शहर के हृदय स्थल कोतवाली से भारी सुरक्षा व्यवस्था और जयकारों के बीच 'बड़े लाट साहब' का पारंपरिक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस केवल गुलाल उड़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उस अटूट परंपरा का हिस्सा है जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग उमड़ पड़ते हैं। 🏛️ परंपरा का रोचक इतिहास कहा जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी। स्थानीय लोग अंग्रेज अफसरों के अत्याचार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रतीकात्मक रूप से 'लाट साहब' का जुलूस निकालते थे। आज भी इस परंपरा को उसी जोश के साथ निभाया जाता है, जहाँ: लाट साहब का चयन: एक व्यक्ति को 'लाट साहब' बनाया जाता है। भैंसा गाड़ी की सवारी: लाट साहब को भैंसा गाड़ी पर बिठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता है। अनोखा विरोध: लोग प्रतीकात्मक रूप से 'जूता मार' परंपरा का पालन करते हैं, जो उस समय के अंग्रेजी शासन के प्रति जनता के आक्रोश का प्रतीक था। 🛡️ चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था जुलूस की संवेदनशीलता और भव्यता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। कोतवाली से लेकर चौक और शहर के मध्य मुख्य रास्तों तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई ताकि सद्भाव और भाईचारे के साथ यह ऐतिहासिक उत्सव संपन्न हो सके। 🌈 जनसैलाब और उत्साह शहर की गलियां 'होली है' के उद्घोष से गूंज उठीं। छतों पर खड़े लोगों ने लाट साहब के जुलूस पर रंगों की बौछार की। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग—हर कोई इस अद्भुत और रोमांचकारी नजारे का हिस्सा बनने को
- उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली के मौके पर पुरानी रंजिश खूनी संघर्ष में बदल गई। गांव के कोटेदार पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।1
- शाहजहांपुर में दबंगों ने आधी रात को सड़क पर जमकर हंगामा किया और एक परिवार पर हमला कर दिया। इस दौरान कई राउंड फायरिंग भी की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पीड़ित परिवार के सदस्यों ने घर में छिपकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि किसी को गोली नहीं लगी1
- *रिजर्व पुलिस लाइन शाहजहाँपुर में होली मिलन समारोह आयोजित, अधिकारियों व कर्मचारियों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर दी शुभकामनाएँ ।* जनपद शाहजहाँपुर में होली पर्व को सकुशल एवं शान्तिपूर्ण रूप से सम्पन्न कराने के उपरांत आज दिनांक 05.03.2026 को रिजर्व पुलिस लाइन, शाहजहाँपुर में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमान जिलाधिकारी महोदय शाहजहाँपुर एवं श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय जनपद शाहजहाँपुर की उपस्थिति में जनपद के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा कर्मचारियों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में होली मिलन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक नगर, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, समस्त क्षेत्राधिकारीगण, प्रतिसार निरीक्षक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। होली मिलन समारोह के दौरान सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक-दूसरे को रंग व गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं तथा आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों द्वारा जनपद में होली पर्व को शान्तिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सकुशल सम्पन्न कराने में पुलिस बल द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की गई तथा सभी को भविष्य में भी इसी प्रकार कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। *कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस परिवार के मध्य आपसी समन्वय, सौहार्द एवं उत्साह को बढ़ावा देना रहा, जिससे पुलिस बल जनपद में कानून-व्यवस्था को प्रभावी रूप से बनाए रखने हेतु सदैव तत्पर रह सके।*4
- शाहजहाँपुर: पुलिस लाइन में धूमधाम से मनाई गई होली, अधिकारियों ने दी शुभकामनाएँ शाहजहाँपुर। होली के पावन पर्व पर पुलिस लाइन परिसर में बुधवार को होली मिलन समारोह का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं और आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश दिया।1
- होली के रंग में घुला भेदभाव! वाल्मीकि समाज को “आखत” से रोका, मिर्जापुर थाने में तहरीर के बाद भी कार्रवाई नहीं शाहजहांपुर। रंगों के पर्व होली के दिन शाहजहांपुर के थाना मिर्जापुर क्षेत्र से सामाजिक सौहार्द को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। वाल्मीकि समाज के लोगों ने आरोप लगाया है कि होली मिलन के दौरान उन्हें यह कहकर अलग कर दिया गया— “तुम लोग वाल्मीकि हो, हमारे साथ आखत नहीं डाल सकते।” पीड़ितों के अनुसार 4 मार्च को गांव में होली के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह घटना हुई। इस व्यवहार से आहत वाल्मीकि समाज के लोगों ने इसे छुआछूत की मानसिकता का उदाहरण बताते हुए थाना मिर्जापुर में लिखित तहरीर दी है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस घटना से समाज में आक्रोश फैल गया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ उनके सम्मान पर आघात नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे को भी चोट पहुंचाने वाली घटना है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शिकायत के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला अब प्रशासन के लिए भी परीक्षा बनता जा रहा है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी गंभीरता से कदम उठाता है। समाज के लिए बड़ा सवाल जब दुनिया तकनीक, विज्ञान और विकास की नई ऊंचाइयों को छू रही है, तब भी यदि समाज में छुआछूत जैसी सोच जिंदा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। होली रंगों और मेल-मिलाप का पर्व है, लेकिन अगर इसी दिन किसी को जाति के आधार पर अलग कर दिया जाए तो यह हमारे सामाजिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है। सनातन परंपरा का मूल संदेश समरसता, करुणा और समानता का रहा है। ऐसे में समाज को जाति के आधार पर बांटने वाली सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी विरासत छोड़ रही है, यह विचार करने का समय है। होली के रंग तभी सच्चे होंगे, जब मन के रंग भी एक जैसे हों।1
- Post by Asha Rani1
- Post by Krish mishra1
- उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर से होली के दिन भेदभाव का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि होली मिलन के दौरान वाल्मीकि समाज के लोगों को यह कहकर अलग कर दिया गया कि “तुम लोग वाल्मीकि हो, हमारे साथ आखत नहीं डाल सकते।” इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने इसे छुआछूत और सामाजिक भेदभाव बताते हुए पुलिस में शिकायत दी है।1