दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय खराड़ी में रानी चंद्रावती द्वारा दान की गई जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। विद्यालय परिसर में बहेड़ी अंचलाधिकारी (सीओ) की मौजूदगी में ग्रामीणों, विद्यालय प्रशासन और रानी चंद्रावती के वंशजों ने संबंधित जमीन पर अपना-अपना दावा पेश किया। इस दौरान सीओ ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी ग्रामीणों की बैठक में इस दान की गई भूमि पर रानी चंद्रावती स्मारक और प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है। मामले में ग्रामीण एवं भाजपा नेता राजीव सिंह ने आरोप लगाया कि जब भी इस जमीन पर विकास कार्यों की बात होती है, उसे रोक दिया जाता है। उन्होंने तालाब की खुदाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मिट्टी काटे जाने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। दूसरी ओर, रानी चंद्रावती के वंशज अमित सिंह का कहना है कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वर्ष 2023 में स्कूल छोड़कर खाली पड़ी जमीन पर उन्होंने कोर्ट में दावा दायर किया था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन ने खाली पड़ी जमीन और बगान की नीलामी (डाक) के लिए उन्हें बुलाया था, लेकिन अमित सिंह के विरोध के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए मांग की है कि इस विवाद का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि समाधान होने से विद्यालय का समुचित रखरखाव, तालाब का सौंदर्यीकरण और छठ घाट के निर्माण जैसे विकास कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।
दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय खराड़ी में रानी चंद्रावती द्वारा दान की गई जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। विद्यालय परिसर में बहेड़ी अंचलाधिकारी (सीओ) की मौजूदगी में ग्रामीणों, विद्यालय प्रशासन और रानी चंद्रावती के वंशजों ने संबंधित जमीन पर अपना-अपना दावा पेश किया। इस दौरान सीओ ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी ग्रामीणों की बैठक में इस दान की गई भूमि पर रानी चंद्रावती स्मारक और प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है। मामले में ग्रामीण एवं भाजपा नेता राजीव सिंह ने आरोप लगाया कि जब भी इस जमीन पर विकास कार्यों की बात होती है, उसे रोक दिया जाता है। उन्होंने तालाब की खुदाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मिट्टी काटे जाने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। दूसरी ओर, रानी चंद्रावती के वंशज अमित सिंह का कहना है कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वर्ष 2023 में स्कूल छोड़कर खाली पड़ी जमीन पर उन्होंने कोर्ट में दावा दायर किया था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन ने खाली पड़ी जमीन और बगान की नीलामी (डाक) के लिए उन्हें बुलाया था, लेकिन अमित सिंह के विरोध के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए मांग की है कि इस विवाद का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि समाधान होने से विद्यालय का समुचित रखरखाव, तालाब का सौंदर्यीकरण और छठ घाट के निर्माण जैसे विकास कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।
- दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय खराड़ी में रानी चंद्रावती द्वारा दान की गई जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। विद्यालय परिसर में बहेड़ी अंचलाधिकारी (सीओ) की मौजूदगी में ग्रामीणों, विद्यालय प्रशासन और रानी चंद्रावती के वंशजों ने संबंधित जमीन पर अपना-अपना दावा पेश किया। इस दौरान सीओ ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी ग्रामीणों की बैठक में इस दान की गई भूमि पर रानी चंद्रावती स्मारक और प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है। मामले में ग्रामीण एवं भाजपा नेता राजीव सिंह ने आरोप लगाया कि जब भी इस जमीन पर विकास कार्यों की बात होती है, उसे रोक दिया जाता है। उन्होंने तालाब की खुदाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मिट्टी काटे जाने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। दूसरी ओर, रानी चंद्रावती के वंशज अमित सिंह का कहना है कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वर्ष 2023 में स्कूल छोड़कर खाली पड़ी जमीन पर उन्होंने कोर्ट में दावा दायर किया था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन ने खाली पड़ी जमीन और बगान की नीलामी (डाक) के लिए उन्हें बुलाया था, लेकिन अमित सिंह के विरोध के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए मांग की है कि इस विवाद का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि समाधान होने से विद्यालय का समुचित रखरखाव, तालाब का सौंदर्यीकरण और छठ घाट के निर्माण जैसे विकास कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।1
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर दरभंगा में जश्न का माहौल देखने को मिला है। इसे एक बड़ी जीत बताते हुए कांग्रेस नेता डॉ. मुन्ना खान ने खुशी में मिठाई बांटी।1
- मिथिला में दुबई की 2 बड़ी कंपनियों में नौकरी पाने का सुनहरा मौका आया है। इसके लिए 29 जुलाई और 1 अगस्त को सकरी में डायरेक्ट क्लाइंट इंटरव्यू का आयोजन किया जा रहा है। विदेश में रोजगार की चाहत रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए सकरी में होने वाला यह सीधे क्लाइंट से साक्षात्कार का कार्यक्रम एक बेहतरीन अवसर है।1
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 2:18 बजे अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा। धर्मेंद्र प्रधान का यह फैसला नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा को लेकर उठे विवाद और छात्रों के लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की इस खबर के सामने आने के बाद अब Gen - Z में खुशी की लहर है।4
- समस्तीपुर जिले के ताजपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, कथित अनियमितताओं और छात्र आंदोलन पर पुलिसिया दमन के विरोध में आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार राजभवन मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने हाथों में झंडे और तख्तियां लेकर जुलूस निकाला। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचे और सड़क जाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा। प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही जंतर-मंतर और बिहार राजभवन मार्च के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों और युवाओं को तत्काल रिहा करने तथा उन पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने नीट (NEET) को भंग करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को रद्द करने और उच्च शिक्षा विधेयक को वापस लेने की भी मांग की। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं से देश के लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है और सरकार इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने में विफल रही है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि सरकार को छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई करने के बजाय परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने बिहार बंद को सफल बनाने की अपील की और संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।1
- जीवन में प्रभु द्वारा जो कुछ भी दिया गया है, उसी में खुश रहना सीखना चाहिए। लालच का कभी कोई अंत नहीं होता, जबकि संतोष को ही सबसे बड़ा धन माना गया है। इसी विचार और संतोष के महत्व को रेखांकित करते हुए 'राधे-राधे' का संदेश साझा किया गया है।1
- विधानसभा में 'भूमिहार ब्राह्मण' को केवल 'भूमिहार' लिखे जाने के मुद्दे पर ज़बरदस्त बवाल मच गया है। इस मामले को लेकर सदन के भीतर भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा और विशाल प्रशांत पूरी ताक़त से दहाड़े हैं। दोनों विधायकों ने विधानसभा के अंदर इस विषय पर अपनी बात रखते हुए जमकर विरोध जताया और हंगामा किया।1
- जंतर-मंतर के आंदोलन को दरभंगा का समर्थन मिला है। इस दौरान मुख्य रूप से पेपर लीक रोकने की मांग उठाई गई। आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताने और इस मांग को लेकर एक तिरंगा यात्रा भी निकाली गई।1