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बिहार के अरवल में 9 नंबर स्लुइस महेंद्र शोरूम के पास स्थित नहर वाले रास्ते पर कई सालों से बरसात के मौसम में लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है। स्थानीय राहगीरों को इस मार्ग से गुजरने में लंबे समय से बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसों से चली आ रही इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब लोगों ने इस रास्ते को बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियों से बचाने का प्रयास करने की गुहार लगाई है, ताकि लोगों का आवागमन सुगम हो सके।
Asif Azam
बिहार के अरवल में 9 नंबर स्लुइस महेंद्र शोरूम के पास स्थित नहर वाले रास्ते पर कई सालों से बरसात के मौसम में लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है। स्थानीय राहगीरों को इस मार्ग से गुजरने में लंबे समय से बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसों से चली आ रही इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब लोगों ने इस रास्ते को बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियों से बचाने का प्रयास करने की गुहार लगाई है, ताकि लोगों का आवागमन सुगम हो सके।
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- बिहार के अरवल सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद भड़की घटना को भाकपा–माले ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पार्टी ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। भाकपा-माले का आरोप है कि इस दुखद घटना की आड़ में पूर्व विधायक का. महानंद सिंह को झूठे मुकदमे में फंसाने की राजनीतिक साजिश रची जा रही है, जो पूरी तरह तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण है। पार्टी के अनुसार, महिला की मृत्यु की सूचना मिलने पर पूर्व विधायक का. महानंद सिंह शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने सिविल सर्जन से फोन पर चर्चा के लिए आने का आग्रह किया था, लेकिन सिविल सर्जन अपने कक्ष के बजाय सीधे आक्रोशित भीड़ के बीच पहुंच गए। इसी अफरा-तफरी के दौरान भीड़ में मौजूद कुछ अराजक और असामाजिक तत्वों ने सिविल सर्जन को धक्का दे दिया, जिससे वे गिर पड़े और उन्हें चोटें आईं। भाकपा–माले ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि इस घटना से पूर्व विधायक या उनके समर्थकों का कोई लेना-देना नहीं है। वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि महानंद सिंह भीड़ को शांत कराने और संयम बरतने की अपील कर रहे थे। भाकपा–माले का कहना है कि भाजपा के इशारे पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर जनप्रतिनिधियों और जनआंदोलनों को दबाया जा रहा है। इसके अलावा, पार्टी ने अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर करते हुए बताया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के प्रभारी को 15 दिन पहले कार्यमुक्त कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक प्रभार नहीं सौंपा था, जिससे समन्वय और चिकित्सकीय व्यवस्था प्रभावित हुई। पार्टी ने महिला की मौत की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अस्पताल कर्मचारियों पर कार्रवाई, पूर्व विधायक पर दर्ज झूठा मुकदमा वापस लेने और सिविल सर्जन को धक्का देने वाले असली आरोपी की पहचान करने की मांग की है। इस संबंध में जल्द ही वामपंथी और महागठबंधन नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रशासन से मुलाकात करेगा। संवाददाता सम्मेलन को पार्टी के जोन प्रभारी कुमार परवेज, पूर्व विधायक का. महानंद सिंह, जिला सचिव जितेंद्र यादव और युवा नेता सुएब आलम ने संबोधित किया।1
- Post by CHANDAN KUMAR1
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- दिल्ली में सोनम वांगचुक के साथ हुए पुलिसिया व्यवहार की तस्वीरों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शांतिपूर्ण आंदोलन करने और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतंत्र की असली पहचान है, लेकिन सत्ता के घमंड में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, जनता की इस आवाज को दबाया जरूर जा सकता है, लेकिन इसे कभी खत्म नहीं किया जा सकता। अब देश में अति हो चुकी है और लोकतंत्र के भीतर सवाल पूछने वालों को दबाने के बजाय उनकी बात को सुना जाना चाहिए। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या अब लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाना भी कोई गुनाह बन गया है?1
- Post by CHANDAN KUMAR1