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चंबा में कूड़ा संयंत्र का विरोध, धार्मिक स्थल के पास लगाने पर भड़के लोग
Surender Thakur
चंबा में कूड़ा संयंत्र का विरोध, धार्मिक स्थल के पास लगाने पर भड़के लोग
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- डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, हुजूरी क्षेत्र में स्थापित कूड़ा नियंत्रण केंद्र, नगर निगम हमीरपुर में ग्रामीणों, नगर निगम अधिकारियों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ पहुंचे और व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि नगर निगम के पास कूड़ा निस्तारण केंद्र हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अब छोटी गाड़ियों से बड़ी गाड़ियों में कूड़े का स्थानांतरण सीधे डंपिंग यार्ड के भीतर ही किया जाएगा, न कि सड़क किनारे या अन्य स्थानों पर। अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि पूर्व में लगभग 8 टन कूड़ा प्रतिदिन उत्पन्न होता था, जबकि नगर निगम बनने के बाद यह बढ़कर लगभग 30 टन प्रतिदिन हो गया है। वर्तमान कूड़ा केंद्र में उपलब्ध सुविधाएं अभी भी नगर परिषद स्तर की ही हैं, जो बढ़ते कचरे के अनुपात में अपर्याप्त हैं। बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि केंद्र का संचालन कर रही कंपनी यहां मैनपावर एवं मशीनरी में वृद्धि करेगी। साथ ही, कूड़ा निस्तारण के लिए नई उपयुक्त भूमि की तलाश भी की जाएगी। इस संदर्भ में डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने ग्रामीणों द्वारा सुझाए गए स्थल का नगर निगम अधिकारियों के साथ निरीक्षण भी किया। डॉ. वर्मा ने कहा कि कूड़ा प्रबंधन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी सामाजिक दायित्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग करके उसका उचित निस्तारण सुनिश्चित करें। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से अनुरोध करने की बात कही कि लगभग डेढ़ सौ कनाल उपलब्ध भूमि, जो आबादी से दूर स्थित है, को आगामी 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम को प्रदान किया जाए, ताकि शहर को वायु एवं जल प्रदूषण से सुरक्षित रखा जा सके। इस अवसर पर नगर निगम के अभियंता अश्विनी शर्मा, जूनियर अभियंता सूर्य, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा सहित ग्रामीण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।2
- रिपोर्ट 8 अप्रैल बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। मुख्य बिंदु: भव्य आयोजन: हिमाचल के रैला में मनाया गया पारंपरिक 'मूल उत्सव'। अटूट परंपरा: ढोल-नगाड़ों और देवगीतों के साथ निकली भगवान लक्ष्मी नारायण की शोभायात्रा। अनोखी मान्यता: हजारों श्रद्धालुओं ने निराहार व्रत रखकर लिया सुख-समृद्धि का आशीर्वाद। इतिहास: आज ही के दिन राजा बहादुर सिंह के सामने आटे के बकरे ने जीवित होकर हरी घास चरी थी, जिसके बाद से यह उत्सव मनाया जाता है। निष्कर्ष: आधुनिकता के शोर में भी हिमाचल की देव-संस्कृति की चमक बरकरार! सैंज, कुल्लू (हिमाचल) क्या आपने सुना है कि कभी आटे के बकरे ने घास चरी हो? 🧐 आज सैंज घाटी के रैला में इसी ऐतिहासिक चमत्कार की याद में भगवान लक्ष्मी नारायण का 'मूल उत्सव' धूमधाम से मनाया गया। देव-संस्कृति, परंपरा और अटूट विश्वास का ऐसा संगम सिर्फ देवभूमि में ही संभव है! 🙏1
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