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उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम कथित तौर पर एक महिला सिपाही के हंगामे के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही अमर ट्रेवल्स की बस में सीट को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जब बस पूरी तरह से भरी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर दे रही थी, जबकि बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही। आरोप है कि सीट न मिलने पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और उसने पुलिसिया रौब दिखाया। इसके बाद, उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा यात्रियों से अभद्रता किए जाने के भी आरोप लगे हैं। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा। इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।

2 hrs ago
user_JANTA DARPAN
JANTA DARPAN
Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम कथित तौर पर एक महिला सिपाही के हंगामे के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही अमर ट्रेवल्स की बस में सीट को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जब बस पूरी तरह से भरी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर दे रही थी, जबकि बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही। आरोप है कि सीट न मिलने पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और उसने पुलिसिया रौब दिखाया। इसके बाद, उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा यात्रियों से अभद्रता किए जाने के भी आरोप लगे हैं। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा। इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।

  • user_Vikas Kumar
    Vikas Kumar
    सिकटी, अररिया, बिहार
    ☝️☝️☝️☝️☝️☝️🙏
    2 hrs ago
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  • देश में चल रहे 'अमृत काल' पर कटाक्ष करते हुए, नीति-निर्माताओं पर यह आरोप लगाया गया है कि वे शायद 'सोमरस या विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी का काढ़ा' पीकर नियम-कानून बना रहे हैं, जिसके चलते ज़मीन पर 'दिव्य नौटंकी' देखने को मिल रही है, जिससे 'बड़े-बड़े सर्कस वाले' भी शरमा जाएं। इस पूरे घटनाक्रम को एक 'महान ड्रामा' के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस 'ड्रामा' के पहले दृश्य में पश्चिम बंगाल के 'वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट' का उल्लेख है, जिसके तहत 14 साल या 'टूटी-फूटी, लंगड़ी-लूली, स्थायी रूप से अपाहिज' गाय को काटा जा सकता है। हालाँकि, इसके लिए सरकारी डॉक्टर और म्युनिसिपैलिटी अधिकारी से 'फिट-फॉर-स्लॉटर' का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पोस्ट में इस पर व्यंग्य करते हुए कहा गया है कि जो गरीब किसान अपनी बीमार गाय के इलाज का खर्च नहीं उठा सकता, उसे अब अफसरों से यह मनुहार करनी पड़ेगी कि उसकी गाय 'पर्याप्त रूप से लंगड़ी' हो चुकी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जानवर भले ही तड़पता रहे, लेकिन पहले नौकरशाही की फाइलें पूरी होनी चाहिए, और कोर्ट का आदेश है कि सब कुछ बंद बूचड़खानों में ही होगा। दूसरे दृश्य में देश के दो अलग-अलग कोनों में दिख रहे विरोधाभास को सामने रखा गया है। जहाँ सड़क पर मुसलमान भाईचारा और कानून बचाने के लिए गोवंश को न छूने और किसी और जानवर की कुर्बानी देने की बात कर रहे हैं, वहीं सड़क पर हिंदू व्यापारी चिंतित हैं कि अगर वे बूढ़ी और दूध न देने वाली गायों को नहीं बेचेंगे, तो अपने बच्चों को क्या खिलाएंगे और नई दुधारू गायें कहाँ से लाएंगे। आरोप है कि ए.सी. कमरों में बैठकर सिर्फ भावनाओं के आधार पर नीतियां बनाने वाले यह भूल गए हैं कि भारत का ग्रामीण पशु व्यापार 'किसान की जेब के अर्थशास्त्र' से चलता है, न कि 'किसी धर्म की किताब' से। जब तक गाय दूध देती है, वह माता होती है; दूध देना बंद करने पर वह गरीब किसान के लिए एक 'अनुत्पादक जिम्मेदारी' बन जाती है, और उसे न बेचना किसान की आजीविका पर सीधा प्रहार है। तीसरे दृश्य में 'संवर्धन' के नाम पर 'आवारा पशुओं का आतंक' दर्शाया गया है। भावनाओं के उबाल में बिना सोचे-समझे गोवंश के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद से देश के खेतों और सड़कों पर 'गोमाता' का नया अवतार, यानी 'आवारा पशु' देखने को मिल रहे हैं। चारे की भारी कमी है, और 'संरक्षण' के नाम पर लाखों जानवर सड़कों पर प्लास्टिक खा रहे हैं, किसानों की फसलें तबाह कर रहे हैं, और हाईवे पर गाड़ियों से टकराकर खुद भी मर रहे हैं और इंसानों की भी जान ले रहे हैं। इसे 'अंधेर नगरी, चौपट राजा' की स्थिति बताया गया है, जहाँ ऐसा 'संरक्षण' हुआ है कि जानवर और किसान दोनों सड़क पर आ गए हैं। पोस्ट में इस 'नौटंकी' से इतर, कड़वी सच्चाई यह बताई गई है कि एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और डेयरी उद्योग के लिए पशुओं का वैज्ञानिक संरक्षण और संवर्धन जितना आवश्यक है, अनुपयोगी हो चुके पशुओं का व्यावहारिक प्रबंधन (कटान सहित) भी उतना ही अनिवार्य है। पशुधन को 'सजावट की वस्तु' न मानकर एक 'आर्थिक चक्र' बताया गया है, और चेतावनी दी गई है कि पुराने और बीमार पशुओं को हटाने की तार्किक व्यवस्था न होने पर स्वस्थ पशुओं के हिस्से का चारा और चिकित्सा भी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि 'दुनिया का कोई भी विकसित समाज केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि विज्ञान और व्यावहारिक संतुलन से चलता है'। अंत में नीति-निर्माताओं से सवाल पूछा गया है कि वे कब तक पशुधन प्रबंधन को 'केवल वोट बैंक और मजहबी चश्मे' से देखते रहेंगे, और उनसे 'भांग का नशा उतरने' के बाद एक व्यावहारिक राष्ट्रीय नीति बनाने का आग्रह किया गया है, जो धार्मिक सौहार्द, किसान की आजीविका और मूक जानवरों को सड़कों पर तड़पने से रोके। यह पोस्ट सैय्यद अली हसनैन आब्दी फ़ैज़ द्वारा लिखी गई है।
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    देश में चल रहे 'अमृत काल' पर कटाक्ष करते हुए, नीति-निर्माताओं पर यह आरोप लगाया गया है कि वे शायद 'सोमरस या विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी का काढ़ा' पीकर नियम-कानून बना रहे हैं, जिसके चलते ज़मीन पर 'दिव्य नौटंकी' देखने को मिल रही है, जिससे 'बड़े-बड़े सर्कस वाले' भी शरमा जाएं। इस पूरे घटनाक्रम को एक 'महान ड्रामा' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस 'ड्रामा' के पहले दृश्य में पश्चिम बंगाल के 'वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट' का उल्लेख है, जिसके तहत 14 साल या 'टूटी-फूटी, लंगड़ी-लूली, स्थायी रूप से अपाहिज' गाय को काटा जा सकता है। हालाँकि, इसके लिए सरकारी डॉक्टर और म्युनिसिपैलिटी अधिकारी से 'फिट-फॉर-स्लॉटर' का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पोस्ट में इस पर व्यंग्य करते हुए कहा गया है कि जो गरीब किसान अपनी बीमार गाय के इलाज का खर्च नहीं उठा सकता, उसे अब अफसरों से यह मनुहार करनी पड़ेगी कि उसकी गाय 'पर्याप्त रूप से लंगड़ी' हो चुकी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जानवर भले ही तड़पता रहे, लेकिन पहले नौकरशाही की फाइलें पूरी होनी चाहिए, और कोर्ट का आदेश है कि सब कुछ बंद बूचड़खानों में ही होगा।

दूसरे दृश्य में देश के दो अलग-अलग कोनों में दिख रहे विरोधाभास को सामने रखा गया है। जहाँ सड़क पर मुसलमान भाईचारा और कानून बचाने के लिए गोवंश को न छूने और किसी और जानवर की कुर्बानी देने की बात कर रहे हैं, वहीं सड़क पर हिंदू व्यापारी चिंतित हैं कि अगर वे बूढ़ी और दूध न देने वाली गायों को नहीं बेचेंगे, तो अपने बच्चों को क्या खिलाएंगे और नई दुधारू गायें कहाँ से लाएंगे। आरोप है कि ए.सी. कमरों में बैठकर सिर्फ भावनाओं के आधार पर नीतियां बनाने वाले यह भूल गए हैं कि भारत का ग्रामीण पशु व्यापार 'किसान की जेब के अर्थशास्त्र' से चलता है, न कि 'किसी धर्म की किताब' से। जब तक गाय दूध देती है, वह माता होती है; दूध देना बंद करने पर वह गरीब किसान के लिए एक 'अनुत्पादक जिम्मेदारी' बन जाती है, और उसे न बेचना किसान की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

तीसरे दृश्य में 'संवर्धन' के नाम पर 'आवारा पशुओं का आतंक' दर्शाया गया है। भावनाओं के उबाल में बिना सोचे-समझे गोवंश के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद से देश के खेतों और सड़कों पर 'गोमाता' का नया अवतार, यानी 'आवारा पशु' देखने को मिल रहे हैं। चारे की भारी कमी है, और 'संरक्षण' के नाम पर लाखों जानवर सड़कों पर प्लास्टिक खा रहे हैं, किसानों की फसलें तबाह कर रहे हैं, और हाईवे पर गाड़ियों से टकराकर खुद भी मर रहे हैं और इंसानों की भी जान ले रहे हैं। इसे 'अंधेर नगरी, चौपट राजा' की स्थिति बताया गया है, जहाँ ऐसा 'संरक्षण' हुआ है कि जानवर और किसान दोनों सड़क पर आ गए हैं।

पोस्ट में इस 'नौटंकी' से इतर, कड़वी सच्चाई यह बताई गई है कि एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और डेयरी उद्योग के लिए पशुओं का वैज्ञानिक संरक्षण और संवर्धन जितना आवश्यक है, अनुपयोगी हो चुके पशुओं का व्यावहारिक प्रबंधन (कटान सहित) भी उतना ही अनिवार्य है। पशुधन को 'सजावट की वस्तु' न मानकर एक 'आर्थिक चक्र' बताया गया है, और चेतावनी दी गई है कि पुराने और बीमार पशुओं को हटाने की तार्किक व्यवस्था न होने पर स्वस्थ पशुओं के हिस्से का चारा और चिकित्सा भी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि 'दुनिया का कोई भी विकसित समाज केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि विज्ञान और व्यावहारिक संतुलन से चलता है'। अंत में नीति-निर्माताओं से सवाल पूछा गया है कि वे कब तक पशुधन प्रबंधन को 'केवल वोट बैंक और मजहबी चश्मे' से देखते रहेंगे, और उनसे 'भांग का नशा उतरने' के बाद एक व्यावहारिक राष्ट्रीय नीति बनाने का आग्रह किया गया है, जो धार्मिक सौहार्द, किसान की आजीविका और मूक जानवरों को सड़कों पर तड़पने से रोके। यह पोस्ट सैय्यद अली हसनैन आब्दी फ़ैज़ द्वारा लिखी गई है।
    user_सैय्यद अली हसनैन आब्दी
    सैय्यद अली हसनैन आब्दी
    सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    26 min ago
  • अहमदाबाद में दिनांक 24 मई 2026 को नरेंद्र मोदी विचार मंच द्वारा नारनपुरा पुलिस स्टेशन और वाडज पुलिस स्टेशन के स्टाफ दोस्तों के लिए एक निःशुल्क चिकित्सा स्वास्थ्य जांच शिविर और स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में नारनपुरा पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री के.एस. सक्सेना साहेब और वाडज पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री एच.पी. गरासिया साहेब विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी विचार मंच के कई प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें नारनपुरा नरेंद्र मोदी विचार मंच के गुजरात प्रदेश मंत्री श्री पंकजभाई पितलिया, गुजरात प्रदेश सचिव श्री विपुलभाई पटेल, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री जयकिशन जानी, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री योगेशभाई दोशी, अहमदाबाद जिला मार्गदर्शन मंत्री श्री गिरीशचंद्र पटेल, और नरेंद्र मोदी विचार मंच के अहमदाबाद शहर जिला मीडिया कन्वीनर श्री जयमीनभाई गज्जर प्रमुख थे। यह शिविर और सेमिनार बहुत अच्छे से व्यवस्थित किया गया था।
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    अहमदाबाद में दिनांक 24 मई 2026 को नरेंद्र मोदी विचार मंच द्वारा नारनपुरा पुलिस स्टेशन और वाडज पुलिस स्टेशन के स्टाफ दोस्तों के लिए एक निःशुल्क चिकित्सा स्वास्थ्य जांच शिविर और स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में नारनपुरा पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री के.एस. सक्सेना साहेब और वाडज पुलिस स्टेशन के पी.आई. श्री एच.पी. गरासिया साहेब विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी विचार मंच के कई प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें नारनपुरा नरेंद्र मोदी विचार मंच के गुजरात प्रदेश मंत्री श्री पंकजभाई पितलिया, गुजरात प्रदेश सचिव श्री विपुलभाई पटेल, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री जयकिशन जानी, गुजरात प्रदेश मंत्री श्री योगेशभाई दोशी, अहमदाबाद जिला मार्गदर्शन मंत्री श्री गिरीशचंद्र पटेल, और नरेंद्र मोदी विचार मंच के अहमदाबाद शहर जिला मीडिया कन्वीनर श्री जयमीनभाई गज्जर प्रमुख थे। यह शिविर और सेमिनार बहुत अच्छे से व्यवस्थित किया गया था।
    user_क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    Court reporter Sadar, Lucknow•
    1 hr ago
  • उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम कथित तौर पर एक महिला सिपाही के हंगामे के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही अमर ट्रेवल्स की बस में सीट को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जब बस पूरी तरह से भरी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर दे रही थी, जबकि बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही। आरोप है कि सीट न मिलने पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और उसने पुलिसिया रौब दिखाया। इसके बाद, उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा यात्रियों से अभद्रता किए जाने के भी आरोप लगे हैं। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा। इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।
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    उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम कथित तौर पर एक महिला सिपाही के हंगामे के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही अमर ट्रेवल्स की बस में सीट को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जब बस पूरी तरह से भरी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर दे रही थी, जबकि बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही।

आरोप है कि सीट न मिलने पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और उसने पुलिसिया रौब दिखाया। इसके बाद, उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा यात्रियों से अभद्रता किए जाने के भी आरोप लगे हैं। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा।

इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।
    user_JANTA DARPAN
    JANTA DARPAN
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • लखनऊ में मोहन भागवत ने एक बयान में कहा है कि जातियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। यह जानकारी संवाददाता आशीष मिश्रा ने दी।
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    लखनऊ में मोहन भागवत ने एक बयान में कहा है कि जातियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। यह जानकारी संवाददाता आशीष मिश्रा ने दी।
    user_आशीष कुमार मिश्रा
    आशीष कुमार मिश्रा
    Court reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • लखनऊ के सुभाष नगर में नगर सहकारी बैंक के अध्यक्ष और पूर्व पार्षद हरसरन लाल गुप्ता ने एक विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस अवसर पर पूर्व मेयर संयुक्ता भाटिया, वरिष्ठ पत्रकार विनय मिश्रा, तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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    लखनऊ के सुभाष नगर में नगर सहकारी बैंक के अध्यक्ष और पूर्व पार्षद हरसरन लाल गुप्ता ने एक विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस अवसर पर पूर्व मेयर संयुक्ता भाटिया, वरिष्ठ पत्रकार विनय मिश्रा, तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_आप बीती जग बीती न्यूज़
    आप बीती जग बीती न्यूज़
    सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • देश की जनता इस समय महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और टूटती आर्थिक व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। इसके बावजूद, टीवी डिबेट्स का एजेंडा अक्सर “सड़क पर नमाज़”, “बकरीद पर कुर्बानी” और “मस्जिद के नीचे मंदिर” जैसे मुद्दों में देश को उलझा रहा है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इन बहसें से जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है? रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन प्राइम टाइम पर जनता की जेब से जुड़े मुद्दों की बजाय, धर्म पर आधारित बहसें दिखाई जाती हैं। इसी बीच, एक टीवी डिबेट में जब एंकर चित्रा त्रिपाठी ने पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को “7 रुपये ज्यादा महंगा नहीं हुआ” कहा, तो उन्हीं के चैनल की एंकर प्रतिमा मिश्रा ने आम जनता की आवाज़ उठाते हुए महंगाई और लोगों की परेशानियों पर जोरदार सवाल उठाए। आज देश पूछ रहा है कि क्या मीडिया का काम जनता के असली मुद्दे उठाना है या सिर्फ टीआरपी बटोरने वाली बहसें दिखाना है।
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    देश की जनता इस समय महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और टूटती आर्थिक व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। इसके बावजूद, टीवी डिबेट्स का एजेंडा अक्सर “सड़क पर नमाज़”, “बकरीद पर कुर्बानी” और “मस्जिद के नीचे मंदिर” जैसे मुद्दों में देश को उलझा रहा है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इन बहसें से जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है?

रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन प्राइम टाइम पर जनता की जेब से जुड़े मुद्दों की बजाय, धर्म पर आधारित बहसें दिखाई जाती हैं। इसी बीच, एक टीवी डिबेट में जब एंकर चित्रा त्रिपाठी ने पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को “7 रुपये ज्यादा महंगा नहीं हुआ” कहा, तो उन्हीं के चैनल की एंकर प्रतिमा मिश्रा ने आम जनता की आवाज़ उठाते हुए महंगाई और लोगों की परेशानियों पर जोरदार सवाल उठाए।

आज देश पूछ रहा है कि क्या मीडिया का काम जनता के असली मुद्दे उठाना है या सिर्फ टीआरपी बटोरने वाली बहसें दिखाना है।
    user_Sameer Safder naqvi
    Sameer Safder naqvi
    Video Creator सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव का एक पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अखिलेश यादव एक पुलिस अधिकारी, जिन्हें एडिशनल एसपी बताया गया है, को अपने पास बुलाकर मुस्कुराते हुए बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वे अधिकारी से पूछते हैं, 'एडिशनल साहब, मैंने आपकी बात मानी कि नहीं मानी?' इसके बाद वे मीडिया की ओर देखते हुए कहते हैं कि वे उनका 'पुराना परिचय' और 'पुरानी पोस्टिंग' भी जानते हैं। यह वीडियो 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान वाले दिन का बताया जा रहा है, जब अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। मतदान के दौरान सपा कार्यकर्ताओं द्वारा कई बूथों पर धांधली और गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के बाद, अखिलेश यादव खुद कन्नौज पहुंचे थे। उन्होंने छिबरामऊ इलाके के कई मतदान केंद्रों का दौरा करने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने से रोक दिया। जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव जब लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से कन्नौज की ओर जा रहे थे, तभी तालग्राम क्षेत्र स्थित फॉरेंसिक लैब के पास पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया था। इसके बाद वे वहीं फॉरेंसिक लैब परिसर में बैठकर मीडिया से बातचीत करने लगे थे, और इसी दौरान यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था। वायरल वीडियो में अखिलेश यादव जिस पुलिस अधिकारी से बातचीत कर रहे हैं, उनका नाम डॉ. संसार सिंह बताया गया है। वे मूल रूप से बिजनौर के निवासी हैं और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कन्नौज में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात थे। इससे पहले, वे 2019 से 2022 तक रामपुर में भी एडिशनल एसपी के रूप में कार्यरत रहे थे। रामपुर में उनकी तैनाती के समय सपा नेता आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां हुई थीं। माना जा रहा है कि वीडियो में अखिलेश यादव द्वारा 'पुरानी पोस्टिंग' का जिक्र इसी संदर्भ में किया गया था। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लोग इसे अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों में देखते हुए इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
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    समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव का एक पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अखिलेश यादव एक पुलिस अधिकारी, जिन्हें एडिशनल एसपी बताया गया है, को अपने पास बुलाकर मुस्कुराते हुए बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वे अधिकारी से पूछते हैं, 'एडिशनल साहब, मैंने आपकी बात मानी कि नहीं मानी?' इसके बाद वे मीडिया की ओर देखते हुए कहते हैं कि वे उनका 'पुराना परिचय' और 'पुरानी पोस्टिंग' भी जानते हैं। यह वीडियो 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान वाले दिन का बताया जा रहा है, जब अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे।

मतदान के दौरान सपा कार्यकर्ताओं द्वारा कई बूथों पर धांधली और गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के बाद, अखिलेश यादव खुद कन्नौज पहुंचे थे। उन्होंने छिबरामऊ इलाके के कई मतदान केंद्रों का दौरा करने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने से रोक दिया। जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव जब लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से कन्नौज की ओर जा रहे थे, तभी तालग्राम क्षेत्र स्थित फॉरेंसिक लैब के पास पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया था। इसके बाद वे वहीं फॉरेंसिक लैब परिसर में बैठकर मीडिया से बातचीत करने लगे थे, और इसी दौरान यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था।

वायरल वीडियो में अखिलेश यादव जिस पुलिस अधिकारी से बातचीत कर रहे हैं, उनका नाम डॉ. संसार सिंह बताया गया है। वे मूल रूप से बिजनौर के निवासी हैं और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कन्नौज में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात थे। इससे पहले, वे 2019 से 2022 तक रामपुर में भी एडिशनल एसपी के रूप में कार्यरत रहे थे। रामपुर में उनकी तैनाती के समय सपा नेता आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां हुई थीं। माना जा रहा है कि वीडियो में अखिलेश यादव द्वारा 'पुरानी पोस्टिंग' का जिक्र इसी संदर्भ में किया गया था।

यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लोग इसे अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों में देखते हुए इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    user_राघव द्विवेदी
    राघव द्विवेदी
    लखनऊ यूनिवर्सिटी छात्र नेता Lucknow•
    16 hrs ago
  • माहेश्वरी खोजी खबर द्वारा साझा की गई एक पोस्ट के अनुसार, बांग्लादेश सीमा पर जारी गतिविधियों को देखकर समझा जा सकता है कि क्यों कुछ खास 'कॉकरोच' इतने सक्रिय हो गए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल की हार ने कई बड़े प्लांस पर पानी फेर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ये तत्व 'नालियों से निकलकर' पूरे देश में फैल रहे हैं। पोस्ट इस बात पर सवाल उठाती है कि कोई यह क्यों नहीं पूछेगा कि 'ममता' ने केंद्र सरकार को जमीन क्यों नहीं दी थी। इसी बीच, बांग्लादेश बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पिलर की मार्किंग शुरू कर दी है, जिसके आधार पर जल्द ही फेंसिंग का काम शुरू किया जाएगा। यह कार्य जलपाईगुड़ी के चांगराबांधा इलाके में जारी है। पोस्ट में यह भी बताया गया है कि 55 साल से चली आ रही एक समस्या 10 दिनों के भीतर खत्म होनी शुरू हो गई है। आज BSF ने बांग्लादेश बॉर्डर पर चार बांग्लादेशियों को 'लुढ़का दिया', जो धमकी दे रहे थे और पत्थरबाजी कर रहे थे। पोस्ट अंत में दोहराती है कि बांग्लादेश बॉर्डर के वर्तमान हालात यह समझाने के लिए पर्याप्त हैं कि वे 'कॉकरोच' इतने सक्रिय क्यों हैं।
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    माहेश्वरी खोजी खबर द्वारा साझा की गई एक पोस्ट के अनुसार, बांग्लादेश सीमा पर जारी गतिविधियों को देखकर समझा जा सकता है कि क्यों कुछ खास 'कॉकरोच' इतने सक्रिय हो गए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल की हार ने कई बड़े प्लांस पर पानी फेर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ये तत्व 'नालियों से निकलकर' पूरे देश में फैल रहे हैं। पोस्ट इस बात पर सवाल उठाती है कि कोई यह क्यों नहीं पूछेगा कि 'ममता' ने केंद्र सरकार को जमीन क्यों नहीं दी थी।

इसी बीच, बांग्लादेश बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पिलर की मार्किंग शुरू कर दी है, जिसके आधार पर जल्द ही फेंसिंग का काम शुरू किया जाएगा। यह कार्य जलपाईगुड़ी के चांगराबांधा इलाके में जारी है। पोस्ट में यह भी बताया गया है कि 55 साल से चली आ रही एक समस्या 10 दिनों के भीतर खत्म होनी शुरू हो गई है। आज BSF ने बांग्लादेश बॉर्डर पर चार बांग्लादेशियों को 'लुढ़का दिया', जो धमकी दे रहे थे और पत्थरबाजी कर रहे थे।

पोस्ट अंत में दोहराती है कि बांग्लादेश बॉर्डर के वर्तमान हालात यह समझाने के लिए पर्याप्त हैं कि वे 'कॉकरोच' इतने सक्रिय क्यों हैं।
    user_क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    Court reporter Sadar, Lucknow•
    1 hr ago
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