आज पूरे प्रदेश में शाला प्रवेश महोत्सव उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जहाँ नए बच्चों का स्वागत किया जा रहा है, शिक्षा के महत्व पर भाषण दिए जा रहे हैं और उन्हें किताबें बांटी जा रही हैं। इस अवसर पर सरकार शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दे रही है। हालांकि, इन तमाम आयोजनों और सरकारी दावों के बीच यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या सिर्फ महोत्सव मनाने से शिक्षा व्यवस्था वास्तव में मजबूत हो पाएगी, क्योंकि जमीनी हकीकत इन मंचों पर हो रहे उत्सव से बिल्कुल विपरीत है। प्रदेश में आज भी कई बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं जिनकी इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। इन भवनों की दीवारों में दरारें हैं, छत गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है और बच्चे जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही, बच्चों की सुरक्षा पर हर दिन खतरा मंडरा रहा है। सारंगढ़ जिले के शासकीय प्राथमिक शाला नौरगपूर की स्थिति भी बेहद खराब है, जहाँ पहली से पाँचवीं कक्षा तक के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा को देखते हुए, उन्हें एक अतिरिक्त कमरे में बैठाया जा रहा है, जहाँ सभी बच्चे एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल प्रबंधन ने इस संबंध में कई बार शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई है, लेकिन आज तक कोई सुध नहीं ली गई है। सबसे अहम सवाल यह है कि जब शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जाते हैं, तो फिर आखिर इन स्कूलों की तस्वीर क्यों नहीं बदल रही है। क्या शाला प्रवेश महोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया है? यह सरकार और प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है कि बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने से पहले उन्हें सुरक्षित और उचित भवन उपलब्ध कराए जाएं। जिन बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, वही बच्चे आज खस्ताहाल भवनों में बैठकर अपना भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं। यह तस्वीर केवल एक स्कूल की दुर्दशा नहीं दर्शाती, बल्कि व्यवस्था के उन दावों पर भी सवाल खड़े करती है जिनमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया जाता है, जहाँ स्कूल का पहला दिन ही बच्चों के लिए डर के साये में गुजर रहा है।
आज पूरे प्रदेश में शाला प्रवेश महोत्सव उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जहाँ नए बच्चों का स्वागत किया जा रहा है, शिक्षा के महत्व पर भाषण दिए जा रहे हैं और उन्हें किताबें बांटी जा रही हैं। इस अवसर पर सरकार शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दे रही है। हालांकि, इन तमाम आयोजनों और सरकारी दावों के बीच यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या सिर्फ महोत्सव मनाने से शिक्षा व्यवस्था वास्तव में मजबूत हो पाएगी, क्योंकि जमीनी हकीकत इन मंचों पर हो रहे उत्सव से बिल्कुल विपरीत है। प्रदेश में आज भी कई बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं जिनकी इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। इन भवनों की दीवारों में दरारें हैं, छत गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है और बच्चे जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही, बच्चों की सुरक्षा पर हर दिन खतरा मंडरा रहा है। सारंगढ़ जिले के शासकीय प्राथमिक शाला नौरगपूर की स्थिति भी बेहद खराब है, जहाँ पहली से पाँचवीं कक्षा तक के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा को देखते हुए, उन्हें एक अतिरिक्त कमरे में बैठाया जा रहा है, जहाँ सभी बच्चे एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल प्रबंधन ने इस संबंध में कई बार शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई है, लेकिन आज तक कोई सुध नहीं ली गई है। सबसे अहम सवाल यह है कि जब शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जाते हैं, तो फिर आखिर इन स्कूलों की तस्वीर क्यों नहीं बदल रही है। क्या शाला प्रवेश महोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया है? यह सरकार और प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है कि बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने से पहले उन्हें सुरक्षित और उचित भवन उपलब्ध कराए जाएं। जिन बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, वही बच्चे आज खस्ताहाल भवनों में बैठकर अपना भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं। यह तस्वीर केवल एक स्कूल की दुर्दशा नहीं दर्शाती, बल्कि व्यवस्था के उन दावों पर भी सवाल खड़े करती है जिनमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया जाता है, जहाँ स्कूल का पहला दिन ही बच्चों के लिए डर के साये में गुजर रहा है।
- रायगढ़ में संजय बघेल की बंदी मौत के मामले में, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने पुलिस का पक्ष सामने रखा है। यह पक्ष सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण पर आधारित है।1
- कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े डीजल चोर गिरोह के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। यह एक्शन क्षेत्र में सक्रिय डीजल चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई।1
- बलौदाबाजार में 16 जून, मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता गौरीशंकर अग्रवाल का जन्मदिन उत्साह, सम्मान और गरिमामय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिन्होंने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना की। इस भव्य समारोह में प्रदेश के राजस्व मंत्री, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, पूर्व विधायक एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सहित भाजपा जिला अध्यक्ष आनंद यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचना यादव एवं भाजपा के विभिन्न मंडलों के अध्यक्ष, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। वक्ताओं ने गौरीशंकर अग्रवाल के लंबे राजनीतिक जीवन, जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संगठन को मजबूत बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि अग्रवाल ने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा जनता के हितों को सर्वोपरि रखा और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर कार्य किए, जिससे भाजपा संगठन को मजबूती मिली और अनेक कार्यकर्ताओं को राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। समारोह के दौरान जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। जन्मदिन के उपलक्ष्य में केक काटकर खुशियां साझा की गईं और उपस्थित सभी लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य तथा निरंतर सक्रिय जनसेवा की कामना की। इस पूरे आयोजन में उत्साह, आत्मीयता, सौहार्द और संगठनात्मक एकजुटता का वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश रहा, जहाँ जन्मदिन समारोह के उपरांत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और समाज को हरित एवं स्वच्छ बनाने का संदेश दिया। यह समारोह न केवल एक वरिष्ठ जननेता के प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक बना, बल्कि इसने संगठन की एकजुटता, सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का भी प्रभावशाली संदेश दिया।2
- छत्तीसगढ़ सद्भाव पत्रकार संघ बिलासपुर (छ.ग.)............. छत्तीसगढ़ सद्भाव पत्रकार संघ बिलासपुर (छ.ग.)..........1
- रायगढ में एक मीडिया संवाद का आयोजन किया गया, जो नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के ऐतिहासिक 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में था। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य इन 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालना था।1
- कोरबा, छत्तीसगढ़ में जिला प्रशासन द्वारा आज की प्रमुख खबरें जारी की गई हैं।1
- युवा कांग्रेस ने कोरबा टोल प्लाजा में कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांग सीजी 12 पासिंग वाहनों को टोल फ्री करना है। युवा कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे आंदोलन करेंगे।1
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक जंगली हाथी मालगाड़ी की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के चारमार गांव के समीप हुई, जहाँ घायल हाथी के एक पैर में गहरी चोट आई है और उसके शरीर से खून बहने की सूचना है। इस हादसे के बाद वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद घायल हाथी के साथ मौजूद पाँच अन्य हाथियों का दल भी मौके के आसपास जमा रहा। हाथियों का झुंड लगातार क्षेत्र में विचरण करता रहा, जिससे आसपास के गाँवों में दहशत फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर पहुँचने लगे, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की एक टीम तुरंत मौके पर पहुँची। विभाग द्वारा घायल हाथी की निगरानी, उपचार और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की मदद से हाथी की स्थिति का आकलन किया जा रहा है ताकि उसे जल्द से जल्द आवश्यक चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा सके। वन अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को घटनास्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है, क्योंकि घायल हाथी और उसके झुंड का व्यवहार किसी भी समय आक्रामक हो सकता है। यह उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों में रेल मार्गों से गुजरने वाले वन्यजीवों, खासकर हाथियों के साथ होने वाली दुर्घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं, और विशेषज्ञ संवेदनशील वन क्षेत्रों में ट्रेनों की गति नियंत्रित करने तथा वन्यजीव सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की माँग करते रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग की टीम मौके पर तैनात है और घायल हाथी की हालत पर लगातार नज़र रखी जा रही है, अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और हाथियों तथा स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, बड़े अधिकारी अक्सर फाइव स्टार होटलों में हाथियों को बचाने की योजनाओं पर लाखों खर्च करते हैं और उनके शावकों की मौत को बीमारी बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जिले के रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की बढ़ती संख्या और उनके शावकों की मौत के पीछे लगातार कटते जंगल, पानी और चारे की कमी जैसी वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है, जबकि अधिकारी ऐसी घटनाओं में हाथी को ही जंगल से निकलकर रेल लाइन की तरफ जाने और लापरवाही से चपेट में आने का दोषी ठहराते हैं।4