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रायगढ में एक मीडिया संवाद का आयोजन किया गया, जो नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के ऐतिहासिक 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में था। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य इन 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालना था।
Raigarh Chhattisgarh
रायगढ में एक मीडिया संवाद का आयोजन किया गया, जो नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के ऐतिहासिक 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में था। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य इन 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालना था।
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- आज पूरे प्रदेश में शाला प्रवेश महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, जहाँ नए बच्चों का स्वागत हो रहा है, शिक्षा के महत्व पर भाषण दिए जा रहे हैं, और बच्चों को किताबें बांटी जा रही हैं। इस अवसर पर सरकार शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दे रही है। हालांकि, इन आयोजनों और बड़े-बड़े दावों के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है कि क्या सिर्फ महोत्सव मनाने से शिक्षा व्यवस्था वास्तव में मजबूत हो जाएगी? दरअसल, जब एक तरफ मंचों पर शिक्षा का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आज भी कई बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं जिनकी इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। इन स्कूलों की दीवारों में दरारें हैं, छत गिरने का खतरा बना हुआ है, और बच्चे जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही बच्चों की सुरक्षा पर हर दिन खतरा मंडरा रहा है। सारंगढ़ विकास खंड के शासकीय प्राथमिक शाला नौरगपूर की स्थिति भी जर्जर है, जहाँ पहली से पाँचवीं कक्षा तक के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें एक अतिरिक्त कमरे में बैठाया जा रहा है, जहाँ सभी बच्चे एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल प्रबंधन ने इस स्थिति को लेकर शासन-प्रशासन तक कई बार गुहार लगाई है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। यह स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि जब शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जाते हैं, तो फिर इन स्कूलों की तस्वीर क्यों नहीं बदल रही है? क्या शाला प्रवेश महोत्सव मात्र एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया है? यह गंभीर प्रश्न उठता है कि बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने से पहले उन्हें सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी क्यों नहीं है? जिन बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, वे आज भी खस्ताहाल भवनों में बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। यह सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की तस्वीर है जो शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताए जाने के सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। विकास के पोस्टर भले ही चमक रहे हों, लेकिन स्कूलों की दीवारें दरक रही हैं, और यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक खंडहरों में भविष्य गढ़ा जाएगा।1
- कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े डीजल चोर गिरोह के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। यह एक्शन क्षेत्र में सक्रिय डीजल चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई।1
- युवा कांग्रेस ने कोरबा टोल प्लाजा में कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांग सीजी 12 पासिंग वाहनों को टोल फ्री करना है। युवा कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे आंदोलन करेंगे।1
- जहाँगीर चांपा जिले के चांपा में स्थित ऐतिहासिक रामबंधा तालाब की सफाई एक बड़े भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है, जहाँ लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद तालाब में पानी कम और जलकुंभी का कचरा ज्यादा होने से यह अभियान एक मजाक बनकर रह गया है। कलेक्टर साहब ने स्वयं आकर इस सफाई कार्य का शुभारंभ किया था, जिससे तालाब की स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी थी। हालांकि, ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित 'जुगलबंदी' के कारण महीने भर बाद भी सफाई के नाम पर सिर्फ 'तमाशा' देखने को मिला है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि प्रकाश इंडस्ट्रीज द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) के तहत प्रदान किए गए लाखों रुपये के फंड का उपयोग जलकुंभी साफ करने में हुआ या किसी की 'जेब साफ' करने में। जमीनी हकीकत यह है कि तालाब से जलकुंभी निकालने के बाद, उसे दूर ठिकाने लगाने के बजाय चांपा के ठेकेदारों ने तालाब के किनारों पर ही सड़ने के लिए छोड़ दिया। इसका भयावह परिणाम यह हुआ कि पहले सिर्फ हरा दिखने वाला तालाब अब बदबू से भरा है, जिसने मोहल्ले वालों का जीना मुश्किल कर दिया है। आरोप है कि सफाई के नाम पर केवल चार दिन का 'नाटक' हुआ और उसके बाद भ्रष्टाचार का 'ताला' लग गया। नगर में 'सिंडिकेट ठेकेदारी' का एक नया खेल चल रहा है, जहाँ टेंडर बाद में पास होते हैं और 'मलाई' पहले ही बाँट ली जाती है। सियासतदानों और अधिकारियों की सरपरस्ती में ठेकेदारों ने आपस में काम बाँट रखे हैं, यही वजह है कि रामबंधा तालाब में पहले भी करोड़ों रुपये 'डुबोए' जा चुके हैं और आज फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा है। जनता यह सवाल पूछ रही है कि करोड़ों की राशि 'डकारने वाले' इन 'मगरमच्छों' पर लगाम कब लगेगी। नगर पालिका के पास इस 'बर्बादी' का कोई जवाब नहीं है, और खर्चे में पारदर्शिता के नाम पर 'सन्नाटा' पसरा हुआ है। यह भी पूछा जा रहा है कि कलेक्टर साहब की साख को दांव पर लगाकर, रामबंधा तालाब को 'भ्रष्टाचार का तालाब' बनाने पर तुले ये लोग आखिर किसके शह पर यह सब कर रहे हैं। हम नगर पालिका प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगते रहेंगे।1
- कुख्यात गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के राइट हैंड और बड़े ड्रग्स किंगपिन सलीम डोला मुंबई पहुँच गया है। इसके साथ ही, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की गिरफ्त में उस पर शिकंजा और कस गया है।1
- रायगढ में एक मीडिया संवाद का आयोजन किया गया, जो नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के ऐतिहासिक 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में था। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य इन 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालना था।1
- कोरबा, छत्तीसगढ़ में जिला प्रशासन द्वारा आज की प्रमुख खबरें जारी की गई हैं।1
- छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कथा वाचक कामता प्रसाद गेवरा खदान पहुंचे। यहाँ उन्होंने पहली बार इतने करीब से एक विशालकाय डंपर देखा।1
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक जंगली हाथी मालगाड़ी की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के चारमार गांव के समीप हुई, जहाँ घायल हाथी के एक पैर में गहरी चोट आई है और उसके शरीर से खून बहने की सूचना है। इस हादसे के बाद वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद घायल हाथी के साथ मौजूद पाँच अन्य हाथियों का दल भी मौके के आसपास जमा रहा। हाथियों का झुंड लगातार क्षेत्र में विचरण करता रहा, जिससे आसपास के गाँवों में दहशत फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर पहुँचने लगे, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की एक टीम तुरंत मौके पर पहुँची। विभाग द्वारा घायल हाथी की निगरानी, उपचार और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की मदद से हाथी की स्थिति का आकलन किया जा रहा है ताकि उसे जल्द से जल्द आवश्यक चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा सके। वन अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को घटनास्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है, क्योंकि घायल हाथी और उसके झुंड का व्यवहार किसी भी समय आक्रामक हो सकता है। यह उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों में रेल मार्गों से गुजरने वाले वन्यजीवों, खासकर हाथियों के साथ होने वाली दुर्घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं, और विशेषज्ञ संवेदनशील वन क्षेत्रों में ट्रेनों की गति नियंत्रित करने तथा वन्यजीव सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की माँग करते रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग की टीम मौके पर तैनात है और घायल हाथी की हालत पर लगातार नज़र रखी जा रही है, अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और हाथियों तथा स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, बड़े अधिकारी अक्सर फाइव स्टार होटलों में हाथियों को बचाने की योजनाओं पर लाखों खर्च करते हैं और उनके शावकों की मौत को बीमारी बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जिले के रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की बढ़ती संख्या और उनके शावकों की मौत के पीछे लगातार कटते जंगल, पानी और चारे की कमी जैसी वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है, जबकि अधिकारी ऐसी घटनाओं में हाथी को ही जंगल से निकलकर रेल लाइन की तरफ जाने और लापरवाही से चपेट में आने का दोषी ठहराते हैं।4