धौलपुर के अधन्नपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति के सागर में सराबोर हो गया। कथाव्यास पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी मधुर वाणी से गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, राजा बलि प्रसंग और प्रभु श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का अत्यंत जीवंत और भावपूर्ण वर्णन किया। महाराज लोकेशानंद ने गजेंद्र मोक्ष और समुद्र मंथन की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि संकट के समय जब संसार के सभी रिश्ते-नाते साथ छोड़ देते हैं, तब केवल परमात्मा ही सच्चे रक्षक बनते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ने गजेंद्र की करुण पुकार सुनकर ग्राह का वध किया और उसे मोक्ष प्रदान किया। कथाव्यास ने मानव मन को समुद्र के समान बताते हुए विचारों के मंथन की तुलना की, जिसमें सफलता के लिए विकारों का विष त्यागकर गुणों का अमृत अपनाना आवश्यक है। वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने समझाया कि दान से मनुष्य का अहंकार दूर होता है, और राजा बलि के निस्वार्थ समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने स्वयं उनके द्वारपाल बनना स्वीकार किया। प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही, पूरा पंडाल 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' और 'भए प्रगट कृपाला' के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों की थाप पर भावविभोर होकर झूमने और नाचने लगे, जिससे पूरा माहौल गोकुल और अयोध्या धाम जैसा दिव्य प्रतीत हो रहा था। कथा के समापन पर मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला, भगवंत प्रसाद पीटीआई और उनके परिजनों ने व्यास पीठ की महाआरती की। इस भक्तिमय आयोजन में राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, संतोष, पुरुषोत्तम, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत, मुकेश सूतैल, संग्राम पंडित, सुभाष भारद्वाज, हरिनिवास प्रधान, श्यामसुंदर शर्मा, देवेश मरैया सहित भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और मातृशक्ति उपस्थित रही।
धौलपुर के अधन्नपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति के सागर में सराबोर हो गया। कथाव्यास पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी मधुर वाणी से गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, राजा बलि प्रसंग और प्रभु श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का अत्यंत जीवंत और भावपूर्ण वर्णन किया। महाराज लोकेशानंद ने गजेंद्र मोक्ष और समुद्र मंथन की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि संकट के समय जब संसार के सभी रिश्ते-नाते साथ छोड़ देते हैं, तब केवल परमात्मा ही सच्चे रक्षक बनते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ने गजेंद्र की करुण पुकार सुनकर ग्राह का
वध किया और उसे मोक्ष प्रदान किया। कथाव्यास ने मानव मन को समुद्र के समान बताते हुए विचारों के मंथन की तुलना की, जिसमें सफलता के लिए विकारों का विष त्यागकर गुणों का अमृत अपनाना आवश्यक है। वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने समझाया कि दान से मनुष्य का अहंकार दूर होता है, और राजा बलि के निस्वार्थ समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने स्वयं उनके द्वारपाल बनना स्वीकार किया। प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही, पूरा पंडाल 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' और 'भए
प्रगट कृपाला' के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों की थाप पर भावविभोर होकर झूमने और नाचने लगे, जिससे पूरा माहौल गोकुल और अयोध्या धाम जैसा दिव्य प्रतीत हो रहा था। कथा के समापन पर मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला, भगवंत प्रसाद पीटीआई और उनके परिजनों ने व्यास पीठ की महाआरती की। इस भक्तिमय आयोजन में राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, संतोष, पुरुषोत्तम, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत, मुकेश सूतैल, संग्राम पंडित, सुभाष भारद्वाज, हरिनिवास प्रधान, श्यामसुंदर शर्मा, देवेश मरैया सहित भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और मातृशक्ति उपस्थित रही।
- धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन, पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं, पूतना वध, विभिन्न राक्षसों के संहार और दिव्य गोवर्धन पूजा का अत्यंत रसपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान कथा मंडप में मौजूद श्रद्धालु इन लीलाओं को सुनकर भावविभोर हो गए और पूरा पंडाल 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। कथा के मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई रहे, जिनके साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र और कृष्णकांत सहित कई अन्य भक्तजनों ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। कथा व्यास लोकेशानंद महाराज ने 'माखन चोरी' की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि यह चोरी नहीं बल्कि भक्त लोगों द्वारा निकाला गया एक गलत अर्थ है, क्योंकि जगदीश्वर को किसी वस्तु को चुराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने साहित्यिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया कि प्रभु श्रीकृष्ण को गोपियों के मन यानी चित्त चुराने वाले 'चोर' के रूप में समझा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यह कंस द्वारा वसूले जाने वाले क्रूर करों और अत्याचारों के विरुद्ध बालकों की टीम द्वारा किया गया एक अहिंसक प्रतिरोध था, जिसका उद्देश्य गोकुल के उत्पाद को कंस के राज्य तक पहुंचने से रोकना था। महाराज श्री ने बताया कि कंस द्वारा भेजी गई भयानक राक्षसी पूतना जब कपटवेष धारण कर बाल कृष्ण को विषपान कराने आई, तो प्रभु ने उसके प्राण हर लिए; आध्यात्मिक रहस्य यह है कि पूतना अविद्या और कपट का प्रतीक है, और भगवान जब किसी के जीवन में आते हैं, तो सर्वप्रथम उसके भीतर के कपट और अज्ञान का नाश कर उसका उद्धार करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि देवराज इंद्र के अभिमान को चूर करने और ब्रजवासियों को प्रकृति की महत्ता समझाने के लिए बाल कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू कराई थी। व्यासपीठ से यह संदेश भी दिया गया कि गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, पर्यावरण, जल और गायों के संरक्षण की प्रेरणा देती है। भगवान ने यह संदेश दिया कि कर्म ही पूजा है और किसी अदृश्य भय से डरकर अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए।1
- राजाखेड़ा क्षेत्र के ग्राम रामसिंह का पुरा में श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत (ब्लॉक राजाखेड़ा) के तत्वावधान में दिल्ली के संस्थापक महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के बोर्ड का भव्य अनावरण किया गया। इस अवसर पर एक विशाल जनसभा का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षत्रिय समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने भारी संख्या में भागीदारी की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ रहे, जिन्होंने फीता काटकर विधिवत रूप से बोर्ड का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि “जहां श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के कार्यकर्ताओं का पसीना बहेगा, वहां कृष्णा परमार सैंपऊ का खून बहेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का प्रत्येक कार्यकर्ता समाज के मान-सम्मान के लिए सदैव तत्पर रहेगा। विशिष्ट अतिथियों में राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश सिंह सिकरवार, राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश प्रदेश मीडिया प्रभारी रामेश्वर सिंह तोमर, धौलपुर जिला अध्यक्ष सुखवेन्द्र सिंह परमार और आगरा जिला अध्यक्ष विश्वास सिंह परमार शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह तोमर ने किया, जबकि जिला प्रचारक धर्मेंद्र सिंह तोमर और ग्राम रामसिंह का पुरा के संगठन कार्यकर्ता इसके मुख्य आयोजक थे। इस महत्वपूर्ण अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र सिंह चौहान, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सत्यभान सिंह तोमर, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मनोज राघव, प्रदेश सलाहकार राजस्थान रिंकू सिंह तोमर, जिला सलाहकार आगरा गौरव चौहान, जिला प्रभारी आगरा राहुल धाकरे, जिला महासचिव जयपाल परमार, कृष्णकांत परमार, अजय सिकरवार, जिला प्रवक्ता अंकेश तोमर और ब्लॉक अध्यक्ष सैंपऊ बंटू सिसोदिया सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की व्यवस्था में ब्लॉक महामंत्री अशोक तोमर, ब्लॉक संयोजक बलवीर तोमर, ब्लॉक सचिव रोहित तोमर, ब्लॉक सलाहकार सौरभ तोमर, ग्राम अध्यक्ष रामू तोमर और ग्राम उपाध्यक्ष यतेंद्र तोमर का विशेष सहयोग रहा। इनके साथ ही, मुला सिंह तोमर, जगन्नाथ सिंह तोमर, लाखन तोमर, दीनदयाल तोमर, निहाल सिंह तोमर, मोती सिंह तोमर, उदय सिंह तोमर, बीरी सिंह तोमर, साहब सिंह तोमर, महेश तोमर, राजकुमार तोमर और सत्येंद्र सिंह तोमर सहित सैकड़ों संगठन कार्यकर्ता व ग्रामीण भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।2
- धौलपुर जिले के अधन्नपुर गाँव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति के सागर में सराबोर नजर आया। कथाव्यास पूज्य लोकेशानंद महाराज ने अपनी सुमधुर वाणी से गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, राजा बलि प्रसंग और प्रभु श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का अत्यंत जीवंत एवं भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। स्वामी लोकेशानंद महाराज ने गजेंद्र मोक्ष और समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि संकट के समय जब संसार के सभी रिश्ते-नाते साथ छोड़ देते हैं, तब केवल परमात्मा ही सच्चे रक्षक बनते हैं; भगवान ने गजेंद्र की करुण पुकार सुनकर ग्राह का वध किया और उसे मोक्ष प्रदान किया। उन्होंने बताया कि मानव मन ही समुद्र है, जिसमें विचारों का मंथन होता है, और जीवन में सफलता के लिए विकारों का विष त्यागकर गुणों का अमृत अपनाना जरूरी है। वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने दान से मनुष्य का अहंकार दूर होने की बात कही। उन्होंने बताया कि राजा बलि ने अपना सब कुछ भगवान वामन के चरणों में अर्पित कर दिया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान ने स्वयं उनके द्वारपाल बनना स्वीकार किया, यह प्रसंग हमें निस्वार्थ समर्पण की सीख देता है। जैसे ही प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग आया, पूरा पंडाल 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' और 'भए प्रगट कृपाला' के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों की थाप पर भावविभोर होकर झूमने और नाचने लगे, जिससे पूरा माहौल गोकुल और अयोध्या धाम जैसा दिव्य प्रतीत हो रहा था। कथा के समापन पर मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला, भगवंत प्रसाद पीटीआई और उनके परिजनों ने व्यास पीठ की महाआरती की। इस अवसर पर राजेश मरैया, बृजेश उपाध्याय, संतोष, पुरुषोत्तम, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत, मुकेश सूतैल, संग्राम पंडित, सुभाष भारद्वाज, हरिनिवास प्रधान, श्यामसुंदर शर्मा, देवेश मरैया सहित भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और मातृशक्ति उपस्थित रही।1
- धौलपुर जिले में 25 मई को बड़ी संख्या में पेंशनर्स ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर और उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिला पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष विशम्बरदयाल शर्मा और पुलिस कल्याण समिति के अध्यक्ष रवि कटारा के नेतृत्व में दिया गया। मीडिया प्रभारी सुरेश गोस्वामी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य विभिन्न मांगों पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। ज्ञापन में मुख्य रूप से चार मांगें रखी गईं। पहली मांग थी कि आर.जी.एच.एस. (RGHS) योजना को बीमा मोड पर न दिया जाए। दूसरी मांग में पेंशनर्स के लिए ओपीडी और आईपीडी की मौजूदा व्यवस्था को यथावत जारी रखने तथा मूल योजना में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने पर जोर दिया गया। तीसरी मांग यह थी कि अनुमोदित अस्पतालों और फार्मा स्टोर्स को समय पर नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए ताकि पेंशनर्स को बार-बार होने वाली परेशानियों से बचाया जा सके। चौथी और अंतिम मांग प्रदेश के निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा को पहले की तरह जारी रखने से संबंधित थी। पेंशनर्स समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी इन मांगों को नहीं माना गया, तो वे पूरे राजस्थान में एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने के लिए विवश होंगे। ज्ञापन सौंपने से पहले हुई एक सभा को विशम्बरदयाल शर्मा, यादवेंद्र शर्मा और राजेंद्र शंकर शर्मा ने संबोधित किया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया और पेंशनर्स समाज की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की। यह ज्ञापन राजस्थान पेंशनर्स समाज जयपुर के आह्वान पर पूरे प्रदेश में उपखंड अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापनों की श्रृंखला का हिस्सा था। इस अवसर पर जिला मंत्री अनवार अहमद, रमेश चंद माहौर, यज्ञपति शर्मा, सुरेश गोस्वामी, श्रवण कुमार पाठक, रमाकांत शर्मा, रमेश चंद्रभानु, देवेंद्र कुमार शर्मा, रामसेवक गौड, रामेश्वर दयाल, महेश गोस्वामी, विशाल गिरी, अनिल कुमार, विजय सिंह, दिवाकांत सक्सेना और भगवान सिंह सहित कई अन्य पेंशनर्स भी मौजूद रहे।2
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा और लगाव व्यक्त किया है। दिल्ली में मनाए जा रहे 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, राजदूत सर्जियो गोर ने उन्हें लाइव कनेक्ट किया था, तब ट्रंप ने कहा कि वे “प्रधानमंत्री मोदी से प्यार करते हैं”। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश पहले कभी भारत के इतने करीब नहीं रहे हैं और उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मोदी का “बहुत, बहुत बड़ा प्रशंसक” बताया।1
- आगरा जिले के तेहरा के पास एक गाँव में स्थित डाबर हॉट मिक्स प्लांट में आग लगने की घटना सामने आई है।1
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- धौलपुर जिले के बाबू मन्दिर एवं श्री चामुण्डा देवी मन्दिर, सैपऊ रोड माकरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा प्रवक्ता आचार्य श्री लेखराज कौशिक ने गज-ग्राह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। आचार्य कौशिक ने बताया कि जिस प्रकार गजराज ने गर्मी से परेशान होकर सरोवर का सहारा लिया, उसी प्रकार व्यक्ति भी माया रूपी गर्मी से बचने के लिए सत्संग रूपी सरोवर का आश्रय लेता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यक्ति का कल्याण सत्संग से ही संभव है। चतुर्थ दिवस के अंतर्गत समुद्र मंथन की कथा, सूर्य वंश के अंतर्गत श्रीराम प्राकट्योत्सव की कथा और चन्द्र वंश के अंतर्गत श्री कृष्ण प्राकट्योत्सव की दिव्य कथा का भी विस्तृत वर्णन किया गया। श्री कृष्ण प्राकट्योत्सव के पावन अवसर पर सभी भक्तों ने श्री बाबू महाराज एवं श्री चामुण्डा देवी की पावन भूमि से भावविभोर होकर धूमधाम से नंदोत्सव का आनंद लिया। परीक्षित श्री हरि सिंह भगत जी के साथ समस्त भक्त गणों ने पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम में अपनी भक्ति प्रकट की।4