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जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मनीष बागरी के दुखद निधन पर मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
Bhupendra Rai दबंग इंडिया
जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मनीष बागरी के दुखद निधन पर मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
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- दमोह के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सैलवाड़ा में चोरों ने एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए एक कपड़ा व्यापारी के घर से लाखों रुपये के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ कर दिया है। क्षेत्र में लगातार हुई इस दूसरी चोरी की घटना से दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। अज्ञात चोर देर रात सैलवाड़ा निवासी विश्वकर्मा परिवार के घर में घुसकर सोने-चांदी के जेवरात और नकदी चोरी कर फरार हो गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, करीब 15 से 20 लाख रुपये के जेवर और नकदी चोरी होने की बात सामने आ रही है, हालांकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुल नुकसान 25 से 30 लाख रुपये तक हो सकता है। पुलिस द्वारा फिलहाल वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। गौरतलब है कि इसी गांव में करीब 20 दिन पहले भी चोरी की एक बड़ी वारदात हुई थी, जिसका अब तक कोई खुलासा नहीं हो सका है। पहली घटना का सुराग न लगने के बीच हुई इस दूसरी बड़ी चोरी ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि लगातार हो रही इन घटनाओं से चोरों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस की कार्रवाई का कोई असर नजर नहीं आ रहा। घटना की सूचना मिलते ही तेंदूखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चोरों की तलाश कर रही है। ग्रामीणों ने पुलिस से जल्द खुलासा कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।1
- जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मनीष बागरी के दुखद निधन पर मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।1
- दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी शिक्षकों से निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करने की अपील की है। इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए, विद्यालय में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए निरीक्षण और पोर्टल जांच में लापरवाही पाए जाने पर शासकीय प्राथमिक शाला बिजौरा की शिक्षिका प्रियंका बड़गैया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।1
- पन्ना जिले के रैपुरा थाने ने साइबर सुरक्षा फ्रॉड से संबंधित एक वीडियो तैयार किया है। इस वीडियो के माध्यम से, थाने ने नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के बारे में महत्वपूर्ण समझाइश दी है और उन्हें इस तरह के फ्रॉड से सावधान रहने के लिए जागरूक किया है।1
- सागर जिले के केसली ब्लॉक के डोमा स्थित नन्ही सैर मार्ग की बदहाली ने स्थानीय लोगों को गहरे संकट में डाल दिया है, जहाँ से निकलने वाले 40 परिवारों को बारिश के मौसम में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सड़क की दयनीय स्थिति को देखकर लोगों में भारी नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय निवासियों ने इस मार्ग के सुधार के लिए कई बार मांग की है, लेकिन हर बार उनकी सुनवाई केवल घोषणाओं तक ही सीमित रही और जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार की जा रही इस अनदेखी के कारण लोगों का गुस्सा अब उफान पर है। प्रतिनिधियों से कोई मदद न मिलने के बाद, अब जनता ने अपनी आवाज उठाने के लिए मीडिया का सहारा लिया है। वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब कोई जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर ध्यान देगा, या प्रशासन 'स्पेस टेक्नोलॉजी' से बनी सड़कों के दौर में भी इस मूलभूत समस्या पर मूक दर्शक बना रहेगा।1
- सागर जिले की बंडा तहसील के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक डॉक्टर पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगा है, जिसके चलते 19 महीने के मासूम बच्चे की आँखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है। पीड़ित पिता ने थाना बंडा में शिकायत दर्ज कराकर दोषी डॉक्टर और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, ग्राम भूसा कमलपुर निवासी इंद्रराज विश्वकर्मा 29 मई 2026 को अपने 1 वर्ष 7 महीने के बेटे विनय विश्वकर्मा को सर्दी और आँखों में लालिमा की शिकायत के बाद सिविल अस्पताल बंडा लेकर पहुंचे थे। ओपीडी पर्ची बनवाने के बाद बच्चे को ड्यूटी पर मौजूद शासकीय चिकित्सक को दिखाया गया। पीड़ित पिता का आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चे की जांच के बाद आँख में कफ साफ करने वाला ड्रॉप डाल दिया, साथ ही पैरासिटामोल सिरप, एक इंजेक्शन और अन्य दवाइयां दीं। परिजन 3 से 4 घंटे तक अस्पताल में रुके रहे, लेकिन बच्चे की हालत में सुधार होने के बजाय वह और बिगड़ती चली गई। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल जिला अस्पताल सागर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने मामले को गंभीर बताते हुए उच्च चिकित्सा संस्थान ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन बच्चे को एम्स भोपाल लेकर पहुंचे। एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के बाद सामने आया कि गलत इलाज या चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मासूम विनय की आँखों की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और बच्चा अब नेत्रहीन हो गया है। इस जानकारी ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। इंद्रराज विश्वकर्मा ने थाना बंडा में दिए आवेदन में बताया कि सिविल अस्पताल बंडा में ड्यूटी पर तैनात संबंधित डॉक्टर द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते उनके बेटे की दृष्टि चली गई। उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर को चेहरे से पहचानते हैं, लेकिन नाम नहीं जानते। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत आवेदन स्वीकार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- ढलती हुई शाम का अपना एक अनूठा अंदाज़ होता है, जिसमें हर रंग के भीतर कोई अनकहा रहस्य छिपा होता है। यह वह समय है जब दिल में बस जाने वाली यादें जीवन भर के लिए सबसे ख़ूबसूरत एहसास बन जाती हैं। सूरज के ढलने पर वातावरण में गहरा सुकून छा जाता है, और दिन भर का सारा शोर कहीं दूर बिखर जाता है। शाम चुपके से यादों का दीप जला देती है, जिससे मन किसी अपने के ख़्यालों में खो जाता है। शाम की ठंडी हवा जब छूकर गुज़रती है, तो वह बीती हुई हर बात को फिर से ताज़ा कर देती है। यह हवा कभी मुस्कानें लाती है, तो कभी आँखों में आँसू भी ले आती है, मगर हर शाम जीवन का एक नया और महत्वपूर्ण सबक़ सिखा जाती है।2
- दमोह में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में, हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी न होने से परेशान पीड़ित आज बुधवार दोपहर 3 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे। आवेदक देवेंद्र अहिरवाल और सीमा अहिरवाल ने पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी को एक ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। पीड़ितों ने अपने ज्ञापन में बताया कि वे 28 जुलाई 2025 से सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई सहित विभिन्न स्तरों पर इस मामले की शिकायत कर रहे हैं। इसके बाद, हाईकोर्ट ने रिट क्रमांक 5004/2026 पर 24 फरवरी 2026 को आरोपी शैलेन्द्र वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। हालांकि, 8 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, पीड़ितों का आरोप है कि न्यायालय के आदेशानुसार सभी आवश्यक धाराएं नहीं लगाई गईं। इस एफआईआर को दर्ज हुए अब 115 दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी लगातार जल्द कार्रवाई का आश्वासन देते रहे, मगर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे वे अत्यधिक परेशान हैं। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, आरोपी के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई हो और उनके लाखों रुपये वापस दिलाए जाएँ।1