logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

भुवाखेड़ी में आध्यात्मिक चेतना का संगम: खाटूश्याम मंदिर में आचार्य कन्हैया भारद्वाज की सत्संग सभा सम्पन्न। *भुवाखेड़ी खाटूश्याम धाम में दिव्य सत्संग: वेदों के ज्ञान से ही सनातन की रक्षा संभव - आचार्य भारद्वाज।* छबड़ा:(बारां)कस्बे के निकट ग्राम भुवाखेड़ी स्थित श्री बाबा खाटूश्याम मंदिर परिसर में रविवार, 20 सितंबर 2026 को भव्य सत्संग सभा का आयोजन हुआ। अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र एवं श्री हनुमान सिद्ध साधनाश्रम अमीरपुरखेड़ी के संस्थापक तथा ओशो आशीष ध्यान केंद्र भुवाखेड़ी के संचालक एस.एल.नागर (स्वामी ध्यान गगन) ने बताया कि रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक चली इस सत्संग सभा में योगाचार्य आचार्य श्री कन्हैया भारद्वाज ने वेद, पुराण, उपनिषद एवं शास्त्रों के गूढ़ रहस्यों पर सारगर्भित प्रवचन दिया।सत्संग का शुभारंभ बाबा खाटूश्याम जी के विधिवत पूजन-अर्चन एवं श्रीचरणों में पुष्पहार अर्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन स्वामी ध्यान गगन ने किया। इस अवसर पर खाटूश्याम गौशाला अध्यक्ष रमेश धाकड़ और मंदिर कार्यकारिणी अध्यक्ष रामनिवास नागर द्वारा योग केंद्र की ओर से आचार्य श्री का तिलक, चंदन, माल्यार्पण, साफा बंधन एवं श्रीफल भेंट कर भव्य स्वागत किया गया। अपने ओजस्वी उद्बोधन में आचार्य श्री कन्हैया भारद्वाज ने कहा कि "केवल कथा, भागवत और मंदिरों के निर्माण से हिन्दू धर्म नहीं बचेगा, जब तक हर हिन्दू इनमें निहित यथार्थ ज्ञान को आत्मसात नहीं करेगा।" उन्होंने बाबा खाटूश्याम जी के दिव्य जन्म की कथा, उनकी अलौकिक भक्ति और शक्ति पर विस्तार से प्रकाश डाला।आचार्य श्री ने आह्वान किया कि हर सनातनी घर में वेद, उपनिषद, पुराण और शास्त्रों का नित्य पठन-पाठन होना चाहिए, ताकि हमारी भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ सके। उन्होंने वेदोक्त शिक्षा के लिए गुरुकुल पद्धति के विद्यालयों की स्थापना पर भी जोर दिया।सत्संग सभा में मंदिर कमेटी सदस्य, यज्ञाचार्य परमानंद शर्मा (भीलवाड़ा नीचा) मंदिर पुजारी ललित वैष्णव, इंजीनियर अनिल तोमर, आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रभु दयाल शर्मा, योगाचार्य जगदीश चंद्र शर्मा, सतीश शर्मा आंचोली सहित समस्त श्याम भक्तों का तिलक-माला से स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्राम भुवाखेड़ी के पटेल बाबूलाल धाकड़ के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।सत्संग का समापन ध्यान अभ्यास और आभार के साथ हुआ।

19 hrs ago
user_Alakh Jyoti Yog Present
Alakh Jyoti Yog Present
Yoga instructor Chhabra, Baran•
19 hrs ago

भुवाखेड़ी में आध्यात्मिक चेतना का संगम: खाटूश्याम मंदिर में आचार्य कन्हैया भारद्वाज की सत्संग सभा सम्पन्न। *भुवाखेड़ी खाटूश्याम धाम में दिव्य सत्संग: वेदों के ज्ञान से ही सनातन की रक्षा संभव - आचार्य भारद्वाज।* छबड़ा:(बारां)कस्बे के निकट ग्राम भुवाखेड़ी स्थित श्री बाबा खाटूश्याम मंदिर परिसर में रविवार, 20 सितंबर 2026 को भव्य सत्संग सभा का आयोजन हुआ। अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र एवं श्री हनुमान सिद्ध साधनाश्रम अमीरपुरखेड़ी के संस्थापक तथा ओशो आशीष ध्यान केंद्र भुवाखेड़ी के संचालक एस.एल.नागर (स्वामी ध्यान गगन) ने बताया कि रात्रि

b02e3b88-858a-4750-9693-5c93f867c3bd

8 बजे से 11 बजे तक चली इस सत्संग सभा में योगाचार्य आचार्य श्री कन्हैया भारद्वाज ने वेद, पुराण, उपनिषद एवं शास्त्रों के गूढ़ रहस्यों पर सारगर्भित प्रवचन दिया।सत्संग का शुभारंभ बाबा खाटूश्याम जी के विधिवत पूजन-अर्चन एवं श्रीचरणों में पुष्पहार अर्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन स्वामी ध्यान गगन ने किया। इस अवसर पर खाटूश्याम गौशाला अध्यक्ष रमेश धाकड़ और मंदिर कार्यकारिणी अध्यक्ष रामनिवास नागर द्वारा योग केंद्र की ओर से आचार्य श्री का तिलक, चंदन, माल्यार्पण, साफा बंधन एवं श्रीफल भेंट कर भव्य

eebfae61-6549-4f7f-ab2b-af3acd8085f9

स्वागत किया गया। अपने ओजस्वी उद्बोधन में आचार्य श्री कन्हैया भारद्वाज ने कहा कि "केवल कथा, भागवत और मंदिरों के निर्माण से हिन्दू धर्म नहीं बचेगा, जब तक हर हिन्दू इनमें निहित यथार्थ ज्ञान को आत्मसात नहीं करेगा।" उन्होंने बाबा खाटूश्याम जी के दिव्य जन्म की कथा, उनकी अलौकिक भक्ति और शक्ति पर विस्तार से प्रकाश डाला।आचार्य श्री ने आह्वान किया कि हर सनातनी घर में वेद, उपनिषद, पुराण और शास्त्रों का नित्य पठन-पाठन होना चाहिए, ताकि हमारी भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़

ae79efe0-9f08-4878-a5c7-b9278491c33e

सके। उन्होंने वेदोक्त शिक्षा के लिए गुरुकुल पद्धति के विद्यालयों की स्थापना पर भी जोर दिया।सत्संग सभा में मंदिर कमेटी सदस्य, यज्ञाचार्य परमानंद शर्मा (भीलवाड़ा नीचा) मंदिर पुजारी ललित वैष्णव, इंजीनियर अनिल तोमर, आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रभु दयाल शर्मा, योगाचार्य जगदीश चंद्र शर्मा, सतीश शर्मा आंचोली सहित समस्त श्याम भक्तों का तिलक-माला से स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्राम भुवाखेड़ी के पटेल बाबूलाल धाकड़ के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।सत्संग का समापन ध्यान अभ्यास और आभार के साथ हुआ।

More news from Baran and nearby areas
  • निर्दलीयों ने किया जनता से दोखा,भाजपा के पक्ष में दिखाई मेहरबानी,कोंग्रेस अपने ही कर्मों की गलतियों का खामयाजा भोग रही। छबड़ा:,कहते है कि लोकतंत्र में किसी का भी सितारा चमक सकता है,ऐसा ही हुआ छबड़ा की नगर पालिका में 21 सितम्बर ओर 21 वोट ने चमकाई रीना सुमन की तकदीर, जिन वार्डों से जीते उम्मीदवार उन निर्दलीयों ने किया जनता के मतदान से दोखा,कोंग्रेस को छोड़ा और भाजपा के पक्ष में दिखाई मेहरबानी,कोंग्रेस ने अपने ही वृद्ध नेताओ के कर्मों की गलतियों का खामयाजा भोगा अब उपाध्यक्ष भी नही बना पायेगी। भाजपा में जीत के बाद जश्न का माहौल
    2
    निर्दलीयों ने किया जनता से दोखा,भाजपा के पक्ष में दिखाई मेहरबानी,कोंग्रेस अपने ही कर्मों की गलतियों का खामयाजा भोग रही।
छबड़ा:,कहते है कि लोकतंत्र में किसी का भी सितारा चमक सकता है,ऐसा ही हुआ छबड़ा की नगर पालिका में 21 सितम्बर ओर 21 वोट ने चमकाई रीना सुमन की तकदीर, जिन वार्डों से जीते उम्मीदवार उन निर्दलीयों ने किया जनता के मतदान से दोखा,कोंग्रेस को छोड़ा और भाजपा के पक्ष में दिखाई मेहरबानी,कोंग्रेस ने अपने ही वृद्ध नेताओ के कर्मों की गलतियों का खामयाजा भोगा अब उपाध्यक्ष भी नही बना पायेगी। भाजपा में जीत के बाद जश्न का माहौल
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    7 hrs ago
  • संस्कृति महोत्सव में केलखेड़ी का परचम, सात विधाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान संस्कृति महोत्सव में केलखेड़ी का परचम, सात विधाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान छीपाबड़ौद / बारां विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मन्दिर उच्च माध्यमिक विद्यालय केलखेड़ी ने जिला स्तरीय संस्कृति महोत्सव में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। विद्यालय ने लोकनृत्य, प्रश्न मंच, कविता, सुगम संगीत, कथा कथन, आशु भाषण एवं अन्त्याक्षरी — सभी सात प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। विद्यालय की संगीत प्रमुख कुमकुम कुशवाह एवं सुल्तान गुर्जर ने बताया कि भैया-बहिनों ने विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया। *विजेताओं की सूची इस प्रकार रही :* *कविता -* तन्मय नागर - प्रथम *सुगम संगीत -* तन्वी मालव एवं हर्षिता नागर - प्रथम *कथा कथन -* नीति सुमन एवं पूनम नागर - प्रथम *आशु भाषण -* हर्षिता अहीर - प्रथम *प्रश्न मंच -* ईशान्त नागर, वन्दना गुर्जर, निकिता चौधरी, गोविन्द अहीर, आराध्या मालव, नक्ष नागर, शोदान मीणा, अन्नू नागर, हंसिका नागर, चरिता मालव, अनुष्का मालव, पूनम मालव - प्रथम *अन्त्याक्षरी -* आर्यन जाट, चन्दन पांचाल, गर्वित मालव, मयंक नागर, लोकेश बंजारा एवं प्रिन्स सुमन - प्रथम *लोकनृत्य -* मधु नागर, हर्षिता नागर, प्रियंका नागर, तन्वी मीणा, वन्दना नागर, तन्वी मालव, आदित्य शर्मा, सोनाक्षी मालव, प्रतिभा मीणा, लक्षिता नामदेव, तनिशा मीणा, दीपिका जिन्दल, वर्षा नागर, अंजली मालव एवं कृष्णा मालव - प्रथम इस ऐतिहासिक सफलता से विद्यालय परिसर में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण है। विद्यालय परिवार ने सभी विजेता भैया-बहिनों, उनके अभिभावकों तथा अथक तैयारी करवाने वाले आचार्य एवं दीदी जी को हार्दिक बधाई दी। *एक मंच, सात विधाएँ और हर विधा में प्रथम — केलखेड़ी ने साबित कर दिया कि प्रतिभा, संस्कार और परिश्रम साथ हों तो सफलता स्वयं कदम चूमती है।* ये सभी विजेता भैया-बहिन 26 सितंबर से माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में होने वाली प्रान्त स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।
    4
    संस्कृति महोत्सव में केलखेड़ी का परचम, सात विधाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान

संस्कृति महोत्सव में केलखेड़ी का परचम, सात विधाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान
छीपाबड़ौद / बारां
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मन्दिर उच्च माध्यमिक विद्यालय केलखेड़ी ने जिला स्तरीय संस्कृति महोत्सव में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। विद्यालय ने लोकनृत्य, प्रश्न मंच, कविता, सुगम संगीत, कथा कथन, आशु भाषण एवं अन्त्याक्षरी — सभी सात प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का गौरव बढ़ाया।
विद्यालय की संगीत प्रमुख कुमकुम कुशवाह एवं सुल्तान गुर्जर ने बताया कि भैया-बहिनों ने विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
*विजेताओं की सूची इस प्रकार रही :*
*कविता -* तन्मय नागर - प्रथम
*सुगम संगीत -* तन्वी मालव एवं हर्षिता नागर - प्रथम
*कथा कथन -* नीति सुमन एवं पूनम नागर - प्रथम
*आशु भाषण -* हर्षिता अहीर - प्रथम
*प्रश्न मंच -* ईशान्त नागर, वन्दना गुर्जर, निकिता चौधरी, गोविन्द अहीर, आराध्या मालव, नक्ष नागर, शोदान मीणा, अन्नू नागर, हंसिका नागर, चरिता मालव, अनुष्का मालव, पूनम मालव - प्रथम
*अन्त्याक्षरी -* आर्यन जाट, चन्दन पांचाल, गर्वित मालव, मयंक नागर, लोकेश बंजारा एवं प्रिन्स सुमन - प्रथम
*लोकनृत्य -* मधु नागर, हर्षिता नागर, प्रियंका नागर, तन्वी मीणा, वन्दना नागर, तन्वी मालव, आदित्य शर्मा, सोनाक्षी मालव, प्रतिभा मीणा, लक्षिता नामदेव, तनिशा मीणा, दीपिका जिन्दल, वर्षा नागर, अंजली मालव एवं कृष्णा मालव - प्रथम
इस ऐतिहासिक सफलता से विद्यालय परिसर में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण है। विद्यालय परिवार ने सभी विजेता भैया-बहिनों, उनके अभिभावकों तथा अथक तैयारी करवाने वाले आचार्य एवं दीदी जी को हार्दिक बधाई दी।
*एक मंच, सात विधाएँ और हर विधा में प्रथम — केलखेड़ी ने साबित कर दिया कि प्रतिभा, संस्कार और परिश्रम साथ हों तो सफलता स्वयं कदम चूमती है।*
ये सभी विजेता भैया-बहिन 26 सितंबर से माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में होने वाली प्रान्त स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।
    user_JITENDRA KUSHWAH
    JITENDRA KUSHWAH
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • भीलवाड़ा के गुलामपुरा गौ तश्करो का विख्यात दार्शनिक स्थल नगर पालिका चुनाव में धन-बल धोखा हि मिला धनराज जी गुर्जर को समर्पित गुलाबपुरा की माटी का दर्द: जब सियासत जीत जाती है और जनता हार जाती है यह सिर्फ एक नगर पालिका चुनाव की कहानी नहीं है, यह उस आम आदमी के #भरोसे की कहानी है जो हर बार लोकतंत्र के महापर्व में अपनी उम्मीदों की आहुति देता है। गुलाबपुरा की गलियों में, चाय की थड़ियों पर और चौपालों पर आज एक ही सवाल तैर रहा है—"अगर आख़िर में हाथ और कमल को एक ही थाली में खाना था, तो चुनावी मैदान में दुश्मनी का यह स्वांग क्यों रचा गया?" धूप की वो लंबी कतारें और ठगा सा महसूस करता वोटरचुनाव के दिन याद कीजिए। सुबह की गुनगुनी धूप में लाठी टेकते बुजुर्ग, गोद में बच्चा थामे मांएं और पहली बार वोट देने की उमंग से लबरेज़ वो नौजवान... सब एक ही उम्मीद में कतारों में खड़े थे कि उनका एक वोट गुलाबपुरा की तकदीर बदलेगा।जनता ने भाजपा और कांग्रेस की विचारधारा की जंग को सच मान लिया। दो पड़ोसियों ने आपस में बहस कर ली, दोस्तों ने पार्टियों की खातिर दूरियां बढ़ा लीं, और पूरी जनता इस उम्मीद में रही कि वे अपने शहर का भविष्य चुन रहे हैं। बंद कमरों का गणित और लोकतंत्र का तमाशा भाजपा को 14 सीटें, कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को 10 सीटें। गुलाबपुरा का यह खंडित जनादेश नेताओं के लिए किसी 'बिजनेस डील' जैसा बन गया। जो नेता कल तक एक-दूसरे की कमियां गिनाते नहीं थकते थे, जो एक-दूसरे को शहर की बदहाली का जिम्मेदार बताते थे, वे आज बंद कमरों में मुस्कुराते हुए हाथ मिला रहे हैं।जब सत्ता की मलाई बांटने के लिए 'हाथ' और 'कमल' एक हो जाते हैं, तो उस समय सबसे ज्यादा बेबस वो भोली-भाली जनता होती है, जिसने इन्हें सचमुच का प्रतिद्वंद्वी समझा था। राजनीति के इस खेल ने साबित कर दिया कि नेताओं के लिए कोई दुश्मन या दोस्त नहीं होता, उनके लिए सिर्फ और सिर्फ 'कुर्सी' ही आखिरी सच है। क्यों भोली जनता को परेशान करती हैं ये पार्टियां?जनता का यह गुस्सा जायज है कि जब तुम्हें मिलकर ही सरकार चलानी थी, तो करोड़ों रुपये फूंक कर यह चुनावी तमाशा क्यों किया? क्यों आम जनता को रैलियों, वादों और भाषणों के मायाजाल में उलझाया गया?जवाब कड़वा है पर सच है। इन्हें चुनाव इसलिए कराना पड़ता है क्योंकि लोकतंत्र का मुखौटा पहनना इनकी कानूनी मजबूरी है। लेकिन इस मुखौटे के पीछे की हकीकत यह है कि चुनाव सिर्फ जनता को यह भ्रम देने के लिए है कि "फैसला आपका है।" हकीकत में फैसला हमेशा वही होता है जो चंद रसूखदार और सत्ता के भूखे नेता बंद कमरों में बैठकर तय करते हैं। इसे ही हम आज की भाषा में 'रिज़ॉर्ट पॉलिटिक्स' और 'जोड़-तोड़ की राजनीति' कहते हैं। #एक गहरी टीस: कब जागेगी जनता?#गुलाबपुरा की #राजनीति का यह मोड़ हमें एक बड़ा सबक देता है। यह सिखाता है कि #नेताओं के खोखले वादों और पार्टी के सिंबल पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ना होगा। जब तक जनता नेताओं को भगवान मानकर पूजती रहेगी, तब तक नेता जनता को इसी तरह इस्तेमाल करते रहेंगे।"#सियासत की इस बिसात पर मोहरे #हम और #आप हैं,जीत किसी की भी हो, #हारती सिर्फ जनता की आस है।वो हाथ मिलाकर मुस्कुरा रहे हैं अपनी कामयाबी पर,और हम आज भी ढूंढ रहे हैं कि हमारा विकास कहाँ है? "#गुलाबपुरा की जनता आज भले ही ठगी हुई महसूस कर रही हो, लेकिन यह दर्द बेकार नहीं जाना चाहिए। अगली बार जब कोई नेता आपके दरवाजे पर वोट मांगने आए, तो उससे पार्टी का नाम नहीं, बल्कि पिछले पांच सालों का हिसाब मांगिएगा। क्योंकि जब तक जनता सवाल पूछना नहीं सीखेगी, तब तक राजनीति के ये सौदागर यूँ ही हमारे वोटों का व्यापार करते रहेंगे।
    1
    भीलवाड़ा के गुलामपुरा गौ तश्करो का विख्यात दार्शनिक स्थल नगर पालिका चुनाव में धन-बल धोखा हि मिला 
धनराज जी गुर्जर को समर्पित
गुलाबपुरा की माटी का दर्द: जब सियासत जीत जाती है और जनता हार जाती है यह सिर्फ एक नगर पालिका चुनाव की कहानी नहीं है, यह उस आम आदमी के #भरोसे की कहानी है जो हर बार लोकतंत्र के महापर्व में अपनी उम्मीदों की आहुति देता है। गुलाबपुरा की गलियों में, चाय की थड़ियों पर और चौपालों पर आज एक ही सवाल तैर रहा है—"अगर आख़िर में हाथ और कमल को एक ही थाली में खाना था, तो चुनावी मैदान में दुश्मनी का यह स्वांग क्यों रचा गया?"
धूप की वो लंबी कतारें और ठगा सा महसूस करता वोटरचुनाव के दिन याद कीजिए। सुबह की गुनगुनी धूप में लाठी टेकते बुजुर्ग, गोद में बच्चा थामे मांएं और पहली बार वोट देने की उमंग से लबरेज़ वो नौजवान... सब एक ही उम्मीद में कतारों में खड़े थे कि उनका एक वोट गुलाबपुरा की तकदीर बदलेगा।जनता ने भाजपा और कांग्रेस की विचारधारा की जंग को सच मान लिया। दो पड़ोसियों ने आपस में बहस कर ली, दोस्तों ने पार्टियों की खातिर दूरियां बढ़ा लीं, और पूरी जनता इस उम्मीद में रही कि वे अपने शहर का भविष्य चुन रहे हैं। 
बंद कमरों का गणित और लोकतंत्र का तमाशा भाजपा को 14 सीटें, कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को 10 सीटें। गुलाबपुरा का यह खंडित जनादेश नेताओं के लिए किसी 'बिजनेस डील' जैसा बन गया। जो नेता कल तक एक-दूसरे की कमियां गिनाते नहीं थकते थे, जो एक-दूसरे को शहर की बदहाली का जिम्मेदार बताते थे, वे आज बंद कमरों में मुस्कुराते हुए हाथ मिला रहे हैं।जब सत्ता की मलाई बांटने के लिए 'हाथ' और 'कमल' एक हो जाते हैं, तो उस समय सबसे ज्यादा बेबस वो भोली-भाली जनता होती है, जिसने इन्हें सचमुच का प्रतिद्वंद्वी समझा था। राजनीति के इस खेल ने साबित कर दिया कि नेताओं के लिए कोई दुश्मन या दोस्त नहीं होता, उनके लिए सिर्फ और सिर्फ 'कुर्सी' ही आखिरी सच है।
क्यों भोली जनता को परेशान करती हैं ये पार्टियां?जनता का यह गुस्सा जायज है कि जब तुम्हें मिलकर ही सरकार चलानी थी, तो करोड़ों रुपये फूंक कर यह चुनावी तमाशा क्यों किया? क्यों आम जनता को रैलियों, वादों और भाषणों के मायाजाल में उलझाया गया?जवाब कड़वा है पर सच है। इन्हें चुनाव इसलिए कराना पड़ता है क्योंकि लोकतंत्र का मुखौटा पहनना इनकी कानूनी मजबूरी है। लेकिन इस मुखौटे के पीछे की हकीकत यह है कि चुनाव सिर्फ जनता को यह भ्रम देने के लिए है कि "फैसला आपका है।" हकीकत में फैसला हमेशा वही होता है जो चंद रसूखदार और सत्ता के भूखे नेता बंद कमरों में बैठकर तय करते हैं। इसे ही हम आज की भाषा में 'रिज़ॉर्ट पॉलिटिक्स' और 'जोड़-तोड़ की राजनीति' कहते हैं। 
#एक गहरी टीस: कब जागेगी जनता?#गुलाबपुरा की #राजनीति का यह मोड़ हमें एक बड़ा सबक देता है। यह सिखाता है कि #नेताओं के खोखले वादों और पार्टी के सिंबल पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ना होगा। जब तक जनता नेताओं को भगवान मानकर पूजती रहेगी, तब तक नेता जनता को इसी तरह इस्तेमाल करते रहेंगे।"#सियासत की इस बिसात पर मोहरे #हम और #आप हैं,जीत किसी की भी हो, #हारती सिर्फ जनता की आस है।वो हाथ मिलाकर मुस्कुरा रहे हैं अपनी कामयाबी पर,और हम आज भी ढूंढ रहे हैं कि हमारा विकास कहाँ है?
"#गुलाबपुरा की जनता आज भले ही ठगी हुई महसूस कर रही हो, लेकिन यह दर्द बेकार नहीं जाना चाहिए। अगली बार जब कोई नेता आपके दरवाजे पर वोट मांगने आए, तो उससे पार्टी का नाम नहीं, बल्कि पिछले पांच सालों का हिसाब मांगिएगा। क्योंकि जब तक जनता सवाल पूछना नहीं सीखेगी, तब तक राजनीति के ये सौदागर यूँ ही हमारे वोटों का व्यापार करते रहेंगे।
    user_जितेंद्र सिंह (पंवार)राजपूत
    जितेंद्र सिंह (पंवार)राजपूत
    मनोहर थाना, झालावाड़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • तेजादशमी: वीर तेजाजी महाराज के थानक पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, जयकारों से गूंजा सूमर सूमर। कस्बे सहित ग्रामीण अंचल में भाद्रपद शुक्ल दशमी पर लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज का निर्वाण दिवस सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। तेजादशमी के पावन पर्व पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही।
    1
    तेजादशमी: वीर तेजाजी महाराज के थानक पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, जयकारों से गूंजा सूमर

सूमर। कस्बे सहित ग्रामीण अंचल में भाद्रपद शुक्ल दशमी पर लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज का निर्वाण दिवस सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। तेजादशमी के पावन पर्व पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही।
    user_Rakesh Kumar Nagar
    Rakesh Kumar Nagar
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • फतेहगढ़ में धूमधाम से मनी तेजाजी दशमी, वीर तेजाजी महाराज के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब फतेहगढ़। कस्बे में सोमवार को वीर तेजाजी महाराज की तेजादशमी श्रद्धा, भक्ति और लोक आस्था के साथ धूमधाम से मनाई गई। सीएम राइज स्कूल के पास स्थित वीर तेजाजी महाराज के स्थान पर प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार भव्य मेले का आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर समिति द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गईं। तेजादशमी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित फतेहगढ़ कस्बे से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का रंग दिखाई दिया। लोकदेवता तेजाजी—वचन, वीरता और गौ-रक्षा के प्रतीक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मालवा-चंबल सहित कई क्षेत्रों में वीर तेजाजी को लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। लोकगाथाओं और तेजाजी से संबंधित पारंपरिक ग्रंथों में उनके जीवन का मूल संदेश सत्य, वचन-पालन, साहस, गौ-रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने से जुड़ा दिखाई देता है। लोकमान्यता के अनुसार तेजाजी ने अपने वचन को सर्वोपरि माना। कथाओं में वर्णित है कि एक ओर संकटग्रस्त गायों की रक्षा का दायित्व था, वहीं दूसरी ओर नागदेवता से किया हुआ वचन निभाना था। तेजाजी ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना दोनों दायित्व पूरे करने का प्रयास किया। इसी कारण लोक परंपरा में उन्हें वचन के पक्के वीर और गौ-रक्षक लोकदेवता के रूप में विशेष स्थान मिला। तेजाजी की लोकगाथा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही माना जाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दिया हुआ वचन, धर्म और कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए। यही कारण है कि सदियों बाद भी ग्रामीण अंचलों में तेजाजी की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी आस्था के रूप में कायम है। मेले में दिखी परंपरा और आस्था की झलक फतेहगढ़ में आयोजित तेजादशमी मेले में भी इसी लोक आस्था की झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के स्थान पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। समिति की ओर से मेले की भव्य सजावट और व्यवस्थाएं की गईं। दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से आयोजन स्थल भक्तिमय माहौल में नजर आया। स्थानीय लोगों के लिए तेजादशमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। मेले के माध्यम से नई पीढ़ी भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनके आदर्शों से जुड़ रही है। फतेहगढ़ में तेजादशमी का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि लोकदेवताओं से जुड़ी आस्था आज भी गांव-कस्बों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत हिस्सा है।
    1
    फतेहगढ़ में धूमधाम से मनी तेजाजी दशमी, वीर तेजाजी महाराज के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब
फतेहगढ़। कस्बे में सोमवार को वीर तेजाजी महाराज की तेजादशमी श्रद्धा, भक्ति और लोक आस्था के साथ धूमधाम से मनाई गई। सीएम राइज स्कूल के पास स्थित वीर तेजाजी महाराज के स्थान पर प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार भव्य मेले का आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर समिति द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गईं।
तेजादशमी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित फतेहगढ़ कस्बे से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का रंग दिखाई दिया।
लोकदेवता तेजाजी—वचन, वीरता और गौ-रक्षा के प्रतीक
राजस्थान और मध्यप्रदेश के मालवा-चंबल सहित कई क्षेत्रों में वीर तेजाजी को लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। लोकगाथाओं और तेजाजी से संबंधित पारंपरिक ग्रंथों में उनके जीवन का मूल संदेश सत्य, वचन-पालन, साहस, गौ-रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने से जुड़ा दिखाई देता है।
लोकमान्यता के अनुसार तेजाजी ने अपने वचन को सर्वोपरि माना। कथाओं में वर्णित है कि एक ओर संकटग्रस्त गायों की रक्षा का दायित्व था, वहीं दूसरी ओर नागदेवता से किया हुआ वचन निभाना था। तेजाजी ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना दोनों दायित्व पूरे करने का प्रयास किया। इसी कारण लोक परंपरा में उन्हें वचन के पक्के वीर और गौ-रक्षक लोकदेवता के रूप में विशेष स्थान मिला।
तेजाजी की लोकगाथा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही माना जाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दिया हुआ वचन, धर्म और कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए। यही कारण है कि सदियों बाद भी ग्रामीण अंचलों में तेजाजी की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी आस्था के रूप में कायम है।
मेले में दिखी परंपरा और आस्था की झलक
फतेहगढ़ में आयोजित तेजादशमी मेले में भी इसी लोक आस्था की झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के स्थान पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। समिति की ओर से मेले की भव्य सजावट और व्यवस्थाएं की गईं। दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से आयोजन स्थल भक्तिमय माहौल में नजर आया।
स्थानीय लोगों के लिए तेजादशमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। मेले के माध्यम से नई पीढ़ी भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनके आदर्शों से जुड़ रही है।
फतेहगढ़ में तेजादशमी का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि लोकदेवताओं से जुड़ी आस्था आज भी गांव-कस्बों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत हिस्सा है।
    user_Deepak ojha
    Deepak ojha
    Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बागोद में तेजाजी महाराज का तेजा गायन, भक्ति में झूमे श्रद्धालु पनवाड़ क्षेत्र के बागोद गांव के तेजाजी मंदिर परिसर में वीर तेजाजी महाराज का तेजा गायन आयोजित किया गया। तेजा गायकों ने केसरिया बाने में सज-धज कर तेजाजी महाराज के जन्म से लेकर गौ-रक्षा और बलिदान तक की पूरी कथा का सजीव मंचन किया। ढोलक-हारमोनियम की थाप पर गायकों ने जैसे ही _"तेजल थारो गावणो..."_ भजन शुरू किया, पांडाल में बैठे ग्रामीण झूम उठे। देर रात तक चले गायन में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। मान्यता है कि तेजा गायन सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सर्प भय दूर होता है।
    3
    बागोद में तेजाजी महाराज का तेजा गायन, भक्ति में झूमे श्रद्धालु 
पनवाड़ क्षेत्र के बागोद गांव के तेजाजी मंदिर परिसर में वीर तेजाजी महाराज का तेजा गायन आयोजित किया गया।
तेजा गायकों ने केसरिया बाने में सज-धज कर तेजाजी महाराज के जन्म से लेकर गौ-रक्षा और बलिदान तक की पूरी कथा का सजीव मंचन किया। ढोलक-हारमोनियम की थाप पर गायकों ने जैसे ही _"तेजल थारो गावणो..."_ भजन शुरू किया, पांडाल में बैठे ग्रामीण झूम उठे।
देर रात तक चले गायन में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। मान्यता है कि तेजा गायन सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सर्प भय दूर होता है।
    user_Ram raj Nagar
    Ram raj Nagar
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • राजस्व विभाग आपके द्वारा घर-घर अभियान किसानों के लिए बहुत ही सुनहरा मौका फार्मर आईडी बनवाई राजस्थान में पटवारी साहब घर-घर जाकर कितनों की फार्मर आईडी बनवा रहे हैं समय रहते सभी किसान भाई अपनी-अपनी फार्मर आईडी बनवा लेवे अन्यथा लाइनों में लगकर धक्के खाने पड़ेंगे लाइनों में ना लगे समय बर्बाद ना हो परेशानी से बचें इसलिए घर बैठे ही फार्मर आईडी बनवाले
    4
    राजस्व विभाग आपके द्वारा घर-घर अभियान किसानों के लिए बहुत ही सुनहरा मौका फार्मर आईडी बनवाई
राजस्थान में पटवारी साहब घर-घर जाकर कितनों की फार्मर आईडी बनवा रहे हैं समय रहते सभी किसान भाई अपनी-अपनी फार्मर आईडी बनवा लेवे अन्यथा लाइनों में लगकर धक्के खाने पड़ेंगे लाइनों में ना लगे समय बर्बाद ना हो परेशानी से बचें इसलिए घर बैठे ही फार्मर आईडी बनवाले
    user_Hd Rajput
    Hd Rajput
    मनोहर थाना, झालावाड़, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • छबड़ा में पर्युषण पर्व का छठा दिन: संयम ही जीवन की सच्ची सुगंध है - आयुष शास्त्री। छबड़ा(बारां) जीवन में अनंत इच्छाओं और इंद्रियों के वशीभूत होकर मनुष्य बाहरी आडंबरों में फंसकर जीवन को कष्टमय बना लेता है, जबकि इच्छाओं एवं इंद्रियों को वश में कर संयम से जीवन जीने वाला व्यक्ति भगवान की भक्ति के साथ सन्मार्ग पर चलकर भव-भव के कष्टों से मुक्ति पा सकता है।यह सद्-प्रवचन स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के छठे दिन 'संयम धर्म' विषय पर बोलते हुए सांगानेर से पधारे विद्वान भैया जी आयुष शास्त्री ने व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि संयम से जीवन जीने वाला व्यक्ति संसार में सदा सुखी रहता है तथा उस पर भगवान की कृपा भी बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति ज्यादा परिग्रह से दूर रहता है और थोड़े में भी संतुष्ट रहता है। संयम ही जीवन की सच्ची सुगंध है, जो आत्मा को शुद्ध, शांत एवं प्रकाशमय बनाता है।समाज अध्यक्ष प्रकाश चन्द जैन लुहाड़िया एवं महिला मण्डल अध्यक्ष निधि पाटनी ने बताया कि स्थानीय दिगंबर जैन समाज द्वारा पर्वराज पर्युषण पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिर जी में नित्य प्रतिदिन भगवान का अभिषेक, शांति धारा के साथ ही नित्य-नियम पूजा, दस लक्षण विधान सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का संगीतमय आयोजन हो रहा है।पर्व के छठे दिन सुबह जिनेंद्र भगवान की अभिषेक शांति धारा हुई। इसके बाद भैया जी आयुष शास्त्री के सानिध्य में नित्य नियम पूजा के अंतर्गत नव देवता, शीतलनाथ भगवान, महावीर स्वामी, सोलह कारण जी एवं दस लक्षण धर्म में संयम धर्म की पूजा हुई, तत्पश्चात दस लक्षण विधान की पूजा संपन्न हुई।शांति धारा करने का सौभाग्य 8100 रुपये की बोली लगाकर पूर्व चेयरमैन कैलाश चन्द, राकेश कुमार, चेतन कुमार ने प्राप्त किया। वहीं रविवार को आरती करने का सौभाग्य ऋषभ चन्द, नरेंद्र कुमार, गौरव कुमार, सौरभ कुमार पाटनी ने बोली लगाकर प्राप्त किया। रात्रि में महाआरती का आयोजन हुआ।रात्रि में नेहा पाटनी द्वारा 'स्वयं खेलो-स्वयं जीतो' प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम स्थान अंशुल पाटनी, द्वितीय स्थान रोशनी सेठी एवं तृतीय स्थान रजनी जैन भारिल्ल ने प्राप्त किया।
    3
    छबड़ा में पर्युषण पर्व का छठा दिन: संयम ही जीवन की सच्ची सुगंध है - आयुष शास्त्री।

छबड़ा(बारां) जीवन में अनंत इच्छाओं और इंद्रियों के वशीभूत होकर मनुष्य बाहरी आडंबरों में फंसकर जीवन को कष्टमय बना लेता है, जबकि इच्छाओं एवं इंद्रियों को वश में कर संयम से जीवन जीने वाला व्यक्ति भगवान की भक्ति के साथ सन्मार्ग पर चलकर भव-भव के कष्टों से मुक्ति पा सकता है।यह सद्-प्रवचन स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के छठे दिन 'संयम धर्म' विषय पर बोलते हुए सांगानेर से पधारे विद्वान भैया जी आयुष शास्त्री ने व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि संयम से जीवन जीने वाला व्यक्ति संसार में सदा सुखी रहता है तथा उस पर भगवान की कृपा भी बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति ज्यादा परिग्रह से दूर रहता है और थोड़े में भी संतुष्ट रहता है। संयम ही जीवन की सच्ची सुगंध है, जो आत्मा को शुद्ध, शांत एवं प्रकाशमय बनाता है।समाज अध्यक्ष प्रकाश चन्द जैन लुहाड़िया एवं महिला मण्डल अध्यक्ष निधि पाटनी ने बताया कि स्थानीय दिगंबर जैन समाज द्वारा पर्वराज पर्युषण पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिर जी में नित्य प्रतिदिन भगवान का अभिषेक, शांति धारा के साथ ही नित्य-नियम पूजा, दस लक्षण विधान सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का संगीतमय आयोजन हो रहा है।पर्व के छठे दिन सुबह जिनेंद्र भगवान की अभिषेक शांति धारा हुई। इसके बाद भैया जी आयुष शास्त्री के सानिध्य में नित्य नियम पूजा के अंतर्गत नव देवता, शीतलनाथ भगवान, महावीर स्वामी, सोलह कारण जी एवं दस लक्षण धर्म में संयम धर्म की पूजा हुई, तत्पश्चात दस लक्षण विधान की पूजा संपन्न हुई।शांति धारा करने का सौभाग्य 8100 रुपये की बोली लगाकर पूर्व चेयरमैन कैलाश चन्द, राकेश कुमार, चेतन कुमार ने प्राप्त किया। वहीं रविवार को आरती करने का सौभाग्य ऋषभ चन्द, नरेंद्र कुमार, गौरव कुमार, सौरभ कुमार पाटनी ने बोली लगाकर प्राप्त किया। रात्रि में महाआरती का आयोजन हुआ।रात्रि में नेहा पाटनी द्वारा 'स्वयं खेलो-स्वयं जीतो' प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम स्थान अंशुल पाटनी, द्वितीय स्थान रोशनी सेठी एवं तृतीय स्थान रजनी जैन भारिल्ल ने प्राप्त किया।
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    10 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.