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लोक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प संजावली प्रतियोगिता में गूँजे मालवी लोकगीत, गोबर से सजीं परंपराओं की कलाकृतियाँ मालवा की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार विभाग श्री गौतम टेटवाल की पहल पर सेवा सदन कार्यालय परिसर में संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों एवं विद्यालयों से आई छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संजा की पारंपरिक कलाकृतियों, मालवी लोकगीतों और लोकनृत्य के माध्यम से मालवा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि माताएँ-बहनें न होतीं तो हमारे तीज-त्योहारों और लोकपरंपराओं की सांस्कृतिक धारा को जीवित रखना कठिन हो जाता। हमारी माताओं, दादी-नानियों और बहनों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोकगीतों, पारंपरिक कलाओं, रीति-रिवाजों और संस्कारों को सहेजकर रखा है। संजावली जैसे आयोजन इसी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर जैसे शहर में विलुप्त होती लोकपरंपराओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि लोककला केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हमारी बेटियाँ अपनी दादी-नानी से लोकगीत सीखती हैं, अपने हाथों से संजा की आकृतियाँ बनाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेती हैं, तब एक पीढ़ी का अनुभव दूसरी पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनता है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं। *संजा बाई की परंपरा में समाहित है माँ पार्वती की आराधना का भाव* मालवा-निमाड़ अंचल में संजा अथवा संजावली का पर्व विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष के दौरान लगभग 16 दिनों तक किशोरियाँ घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से संजा के मांडने और विभिन्न आकृतियाँ बनाती हैं। इन्हें फूलों, पत्तियों और प्राकृतिक सामग्रियों से सजाकर प्रतिदिन पारंपरिक संजा गीत गाए जाते हैं। यह परंपरा बालिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक सहभागिता और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर उदाहरण है। लोकमान्यता के अनुसार, संजा पर्व को माँ पार्वती से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के एक प्रचलित रूप में माँ पार्वती के मायके आगमन और सखियों के साथ उनके स्नेहपूर्ण समय बिताने की कल्पना इस परंपरा से जुड़ी है। सखियाँ दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाकर उन्हें सजाती हैं और गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करती हैं। इसी प्रकार संजा से जुड़ी कुछ लोकमान्यताओं में कुंवारी कन्याओं की मनचाहे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के अलग-अलग रूप स्थानीय लोकजीवन और मौखिक परंपराओं में प्रचलित हैं। संजा की आकृतियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक स्नेह, प्रकृति से जुड़ाव और स्त्री-जीवन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। गोबर, फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से यह परंपरा हमें स्थानीय संसाधनों के महत्व और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। संजावली प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ भाग लिया। छात्राओं ने “कौड़ियों बामन सांझ को क्यों लेने आयो” और “नानी सी गाड़ी गुड़कती जाए, जेमे बैठी संजाबाई” जैसे पारंपरिक संजा गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मालवी लोकसंस्कृति की मिठास से परिचित कराया। लोकगीतों की सहज लय, पारंपरिक शब्दावली और छात्राओं के उत्साह ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। भ्याना, गुलावता, धनौरा, पचोर, पाड़ल्यामाता, आमलारोड़, पांदा और संडावता सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मालवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सांदीपनि विद्यालय की छात्राओं ने संजा गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। ग्रामीण अंचलों से आई बालिकाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति आज भी नई पीढ़ी के मन में जीवित है और उचित मंच मिलने पर वह अपनी प्रतिभा के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। *संजा मांडना और गीत गायन प्रतियोगिता में प्रतिभाओं का सम्मान* कार्यक्रम के अंत में संजा गीत गायन तथा गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को बैग और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गुलावता संकुल, द्वितीय स्थान उत्कृष्ट मॉडल स्कूल एवं तृतीय स्थान शासकीय विद्यालय, उड़नखेड़ी ने प्राप्‍त किया। इसी प्रकार गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय विद्यालय पासल्यामाता, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या विद्यालय सारंगपुर एवं तृतीय स्थान संदीपनी विद्यालय मऊ का रहा। इसके अतिरिक्त पाड़ल्यामाता, भ्याना, आमलारोड़ सहित अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया और उन्हें अपनी कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। सेवा सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम पिछले दो वर्षों से राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल की पहल पर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संजा जैसी पारंपरिक लोककलाओं को केवल घरों और आँगनों तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों, सार्वजनिक आयोजनों और नई पीढ़ी के बीच व्यापक पहचान दिलाना है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने इस अवसर पर लोकपरंपराओं को शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोककला, मालवी लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक हस्तकला से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आधुनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के जरिए भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शक्ति भी हैं। जब बेटियाँ शिक्षा, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों सशक्त होते हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने आयोजन में सहभागी सभी छात्राओं, शिक्षकों, माताओं-बहनों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी लोकसंस्कृति केवल अतीत की स्मृति बनकर न रह जाए, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की प्रेरणा बने। हमारी विरासत हमारा गौरव है, हमारी लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और हमारी बेटियाँ समृद्ध समाज की आधारशिला हैं। संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को दोहराने से नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाने से संभव है। संजा के मांडनों में उकेरी गई आकृतियाँ, मालवी लोकगीतों की गूँज और बालिकाओं की रचनात्मक भागीदारी मालवा की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।

15 hrs ago
user_Raja Yadav
Raja Yadav
पचोर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
15 hrs ago

लोक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प संजावली प्रतियोगिता में गूँजे मालवी लोकगीत, गोबर से सजीं परंपराओं की कलाकृतियाँ मालवा की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार विभाग श्री गौतम टेटवाल की पहल पर सेवा सदन कार्यालय परिसर में संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों एवं विद्यालयों से आई छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संजा की पारंपरिक कलाकृतियों, मालवी लोकगीतों और लोकनृत्य के माध्यम से मालवा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि माताएँ-बहनें न होतीं तो हमारे तीज-त्योहारों और लोकपरंपराओं की सांस्कृतिक धारा को जीवित रखना कठिन हो जाता। हमारी माताओं, दादी-नानियों और बहनों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोकगीतों, पारंपरिक कलाओं, रीति-रिवाजों और संस्कारों को सहेजकर रखा है। संजावली जैसे आयोजन इसी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर जैसे शहर में विलुप्त होती लोकपरंपराओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि लोककला केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हमारी बेटियाँ अपनी दादी-नानी से लोकगीत सीखती हैं, अपने हाथों से संजा की आकृतियाँ बनाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेती हैं, तब एक पीढ़ी का अनुभव दूसरी पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनता है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं। *संजा बाई की परंपरा में समाहित है माँ पार्वती की आराधना का भाव* मालवा-निमाड़ अंचल में संजा अथवा संजावली का पर्व विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष के दौरान लगभग 16 दिनों तक किशोरियाँ घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से संजा के मांडने और विभिन्न आकृतियाँ बनाती हैं। इन्हें फूलों, पत्तियों और प्राकृतिक सामग्रियों से सजाकर प्रतिदिन पारंपरिक संजा गीत गाए जाते हैं। यह परंपरा बालिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक सहभागिता और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर उदाहरण है। लोकमान्यता के अनुसार, संजा पर्व को माँ पार्वती से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के एक प्रचलित रूप में माँ पार्वती के मायके आगमन और सखियों के साथ उनके स्नेहपूर्ण समय बिताने की कल्पना इस परंपरा से जुड़ी है। सखियाँ दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाकर उन्हें सजाती हैं और गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करती हैं। इसी प्रकार संजा से जुड़ी कुछ लोकमान्यताओं में कुंवारी कन्याओं की मनचाहे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के अलग-अलग रूप स्थानीय लोकजीवन और मौखिक परंपराओं में प्रचलित हैं। संजा की आकृतियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक स्नेह, प्रकृति से जुड़ाव और स्त्री-जीवन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। गोबर, फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से यह परंपरा हमें स्थानीय संसाधनों के महत्व और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। संजावली प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ भाग लिया। छात्राओं ने “कौड़ियों बामन सांझ को क्यों लेने आयो” और “नानी सी गाड़ी गुड़कती जाए, जेमे बैठी संजाबाई” जैसे पारंपरिक संजा गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मालवी लोकसंस्कृति की मिठास से परिचित कराया। लोकगीतों की सहज लय, पारंपरिक शब्दावली और छात्राओं के उत्साह ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। भ्याना, गुलावता, धनौरा, पचोर, पाड़ल्यामाता, आमलारोड़, पांदा और संडावता सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मालवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सांदीपनि विद्यालय की छात्राओं ने संजा गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। ग्रामीण अंचलों से आई बालिकाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति आज भी नई पीढ़ी के मन में जीवित है और उचित मंच मिलने पर वह अपनी प्रतिभा के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। *संजा मांडना और गीत गायन प्रतियोगिता में प्रतिभाओं का सम्मान* कार्यक्रम के अंत में संजा गीत गायन तथा गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को बैग और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गुलावता संकुल, द्वितीय स्थान उत्कृष्ट मॉडल स्कूल एवं तृतीय स्थान शासकीय विद्यालय, उड़नखेड़ी ने प्राप्‍त किया। इसी प्रकार गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय विद्यालय पासल्यामाता, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या विद्यालय सारंगपुर एवं तृतीय स्थान संदीपनी विद्यालय मऊ का रहा। इसके अतिरिक्त पाड़ल्यामाता, भ्याना, आमलारोड़ सहित अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया और उन्हें अपनी कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। सेवा सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम पिछले दो वर्षों से राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल की पहल पर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संजा जैसी पारंपरिक लोककलाओं को केवल घरों और आँगनों तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों, सार्वजनिक आयोजनों और नई पीढ़ी के बीच व्यापक पहचान दिलाना है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने इस अवसर पर लोकपरंपराओं को शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोककला, मालवी लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक हस्तकला से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आधुनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के जरिए भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शक्ति भी हैं। जब बेटियाँ शिक्षा, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों सशक्त होते हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने आयोजन में सहभागी सभी छात्राओं, शिक्षकों, माताओं-बहनों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी लोकसंस्कृति केवल अतीत की स्मृति बनकर न रह जाए, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की प्रेरणा बने। हमारी विरासत हमारा गौरव है, हमारी लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और हमारी बेटियाँ समृद्ध समाज की आधारशिला हैं। संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को दोहराने से नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाने से संभव है। संजा के मांडनों में उकेरी गई आकृतियाँ, मालवी लोकगीतों की गूँज और बालिकाओं की रचनात्मक भागीदारी मालवा की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।

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राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर जैसे शहर में विलुप्त होती लोकपरंपराओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि लोककला केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हमारी बेटियाँ अपनी दादी-नानी से लोकगीत सीखती हैं, अपने हाथों से संजा की आकृतियाँ बनाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेती हैं, तब एक पीढ़ी का अनुभव दूसरी पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनता है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं। *संजा बाई की परंपरा में समाहित है माँ पार्वती की आराधना का भाव* मालवा-निमाड़ अंचल में संजा अथवा संजावली का पर्व विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष के दौरान लगभग 16 दिनों तक किशोरियाँ घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से संजा के मांडने और विभिन्न आकृतियाँ बनाती हैं। इन्हें फूलों, पत्तियों और प्राकृतिक सामग्रियों से सजाकर प्रतिदिन पारंपरिक संजा गीत गाए जाते हैं। यह परंपरा बालिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक सहभागिता और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर उदाहरण है। लोकमान्यता के अनुसार, संजा पर्व को माँ पार्वती से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के एक प्रचलित रूप में माँ पार्वती के मायके आगमन और सखियों के साथ उनके स्नेहपूर्ण समय बिताने की कल्पना इस परंपरा से जुड़ी है। सखियाँ दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाकर उन्हें सजाती हैं और गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करती हैं। इसी प्रकार संजा से जुड़ी कुछ लोकमान्यताओं में कुंवारी कन्याओं की मनचाहे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के अलग-अलग रूप स्थानीय लोकजीवन और मौखिक परंपराओं में प्रचलित हैं। संजा की आकृतियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक स्नेह, प्रकृति से जुड़ाव और स्त्री-जीवन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। गोबर, फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से यह परंपरा हमें स्थानीय संसाधनों के महत्व और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। संजावली प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ भाग लिया। छात्राओं ने “कौड़ियों बामन सांझ को क्यों लेने आयो” और “नानी सी गाड़ी गुड़कती जाए, जेमे बैठी संजाबाई” जैसे पारंपरिक संजा गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मालवी लोकसंस्कृति की मिठास से परिचित कराया। लोकगीतों की सहज लय, पारंपरिक शब्दावली और छात्राओं के उत्साह ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। भ्याना, गुलावता, धनौरा, पचोर, पाड़ल्यामाता, आमलारोड़, पांदा और संडावता सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मालवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सांदीपनि विद्यालय की छात्राओं ने संजा गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। ग्रामीण अंचलों से आई बालिकाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति आज भी नई पीढ़ी के मन में जीवित है और उचित मंच मिलने पर वह अपनी प्रतिभा के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। *संजा मांडना और गीत गायन प्रतियोगिता में प्रतिभाओं का सम्मान* कार्यक्रम के अंत में संजा गीत गायन तथा गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को बैग और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गुलावता संकुल, द्वितीय स्थान उत्कृष्ट मॉडल स्कूल एवं तृतीय स्थान शासकीय विद्यालय, उड़नखेड़ी ने प्राप्‍त किया। इसी प्रकार गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय विद्यालय पासल्यामाता, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या विद्यालय सारंगपुर एवं तृतीय स्थान संदीपनी विद्यालय मऊ का रहा। इसके अतिरिक्त पाड़ल्यामाता, भ्याना, आमलारोड़ सहित अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया और उन्हें अपनी कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। सेवा सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम पिछले दो वर्षों से राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल की पहल पर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संजा जैसी पारंपरिक लोककलाओं को केवल घरों और आँगनों तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों, सार्वजनिक आयोजनों और नई पीढ़ी के बीच व्यापक पहचान दिलाना है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने इस अवसर पर लोकपरंपराओं को शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोककला, मालवी लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक हस्तकला से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आधुनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के जरिए भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शक्ति भी हैं। जब बेटियाँ शिक्षा, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों सशक्त होते हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने आयोजन में सहभागी सभी छात्राओं, शिक्षकों, माताओं-बहनों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी लोकसंस्कृति केवल अतीत की स्मृति बनकर न रह जाए, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की प्रेरणा बने। हमारी विरासत हमारा गौरव है, हमारी लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और हमारी बेटियाँ समृद्ध समाज की आधारशिला हैं। संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को दोहराने से नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाने से संभव है। संजा के मांडनों में उकेरी गई आकृतियाँ, मालवी लोकगीतों की गूँज और बालिकाओं की रचनात्मक भागीदारी मालवा की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।
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राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर जैसे शहर में विलुप्त होती लोकपरंपराओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि लोककला केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हमारी बेटियाँ अपनी दादी-नानी से लोकगीत सीखती हैं, अपने हाथों से संजा की आकृतियाँ बनाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेती हैं, तब एक पीढ़ी का अनुभव दूसरी पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनता है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं।
*संजा बाई की परंपरा में समाहित है माँ पार्वती की आराधना का भाव* 
मालवा-निमाड़ अंचल में संजा अथवा संजावली का पर्व विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष के दौरान लगभग 16 दिनों तक किशोरियाँ घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से संजा के मांडने और विभिन्न आकृतियाँ बनाती हैं। इन्हें फूलों, पत्तियों और प्राकृतिक सामग्रियों से सजाकर प्रतिदिन पारंपरिक संजा गीत गाए जाते हैं। यह परंपरा बालिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक सहभागिता और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर उदाहरण है। लोकमान्यता के अनुसार, संजा पर्व को माँ पार्वती से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के एक प्रचलित रूप में माँ पार्वती के मायके आगमन और सखियों के साथ उनके स्नेहपूर्ण समय बिताने की कल्पना इस परंपरा से जुड़ी है। सखियाँ दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाकर उन्हें सजाती हैं और गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करती हैं। इसी प्रकार संजा से जुड़ी कुछ लोकमान्यताओं में कुंवारी कन्याओं की मनचाहे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के अलग-अलग रूप स्थानीय लोकजीवन और मौखिक परंपराओं में प्रचलित हैं।
संजा की आकृतियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक स्नेह, प्रकृति से जुड़ाव और स्त्री-जीवन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। गोबर, फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से यह परंपरा हमें स्थानीय संसाधनों के महत्व और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। संजावली प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ भाग लिया। छात्राओं ने “कौड़ियों बामन सांझ को क्यों लेने आयो” और “नानी सी गाड़ी गुड़कती जाए, जेमे बैठी संजाबाई” जैसे पारंपरिक संजा गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मालवी लोकसंस्कृति की मिठास से परिचित कराया। लोकगीतों की सहज लय, पारंपरिक शब्दावली और छात्राओं के उत्साह ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। भ्याना, गुलावता, धनौरा, पचोर, पाड़ल्यामाता, आमलारोड़, पांदा और संडावता सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मालवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सांदीपनि विद्यालय की छात्राओं ने संजा गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। ग्रामीण अंचलों से आई बालिकाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति आज भी नई पीढ़ी के मन में जीवित है और उचित मंच मिलने पर वह अपनी प्रतिभा के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
*संजा मांडना और गीत गायन प्रतियोगिता में प्रतिभाओं का सम्मान* 
कार्यक्रम के अंत में संजा गीत गायन तथा गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को बैग और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गुलावता संकुल, द्वितीय स्थान उत्कृष्ट मॉडल स्कूल एवं तृतीय स्थान शासकीय विद्यालय, उड़नखेड़ी ने प्राप्‍त किया। इसी प्रकार गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय विद्यालय पासल्यामाता, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या विद्यालय सारंगपुर एवं तृतीय स्थान संदीपनी विद्यालय मऊ का रहा। इसके अतिरिक्त पाड़ल्यामाता, भ्याना, आमलारोड़ सहित अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया और उन्हें अपनी कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
सेवा सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम पिछले दो वर्षों से राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल की पहल पर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संजा जैसी पारंपरिक लोककलाओं को केवल घरों और आँगनों तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों, सार्वजनिक आयोजनों और नई पीढ़ी के बीच व्यापक पहचान दिलाना है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने इस अवसर पर लोकपरंपराओं को शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोककला, मालवी लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक हस्तकला से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आधुनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के जरिए भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शक्ति भी हैं। जब बेटियाँ शिक्षा, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों सशक्त होते हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने आयोजन में सहभागी सभी छात्राओं, शिक्षकों, माताओं-बहनों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी लोकसंस्कृति केवल अतीत की स्मृति बनकर न रह जाए, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की प्रेरणा बने। हमारी विरासत हमारा गौरव है, हमारी लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और हमारी बेटियाँ समृद्ध समाज की आधारशिला हैं।
संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को दोहराने से नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाने से संभव है। संजा के मांडनों में उकेरी गई आकृतियाँ, मालवी लोकगीतों की गूँज और बालिकाओं की रचनात्मक भागीदारी मालवा की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।
    user_Raja Yadav
    Raja Yadav
    पचोर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • ओबीसी पर कैबिनेट मंत्री पहलाद पटेल का कांग्रेस पर बड़ा हमला कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल का कांग्रेस पर बडा.हमला {श्याम रानोलिया } 7049220386 ओबीसी आरक्षण एक बेहद संवेदनशील विषय है। आज जबलपुर हाईकोर्ट का जो फैसला आया है, उसमें कमलनाथ सरकार के आरक्षण संबंधी अध्यादेश को निरस्त किया गया है। भारतीय जनता पार्टी सदैव पिछड़ा वर्ग के हितों की समर्थक रही है। चाहे ओबीसी आरक्षण का विषय हो या ओबीसी आयोग को संवैधानिक मान्यता दिलाने की बात, भाजपा ने हमेशा जिम्मेदारी के साथ काम किया है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी। सभी दलों की सहमति से हम न्यायालय गए और इस मामले में अपना पक्ष रखा। कांग्रेस को किसी वर्ग के हितों से नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थों से प्रेम है। न्यायालय की टिप्पणियों से यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार राजनीतिक लाभ के लिए अध्यादेश लेकर आई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि अध्यादेश जल्दबाजी में लाया गया और उसमें ऐसी संवैधानिक त्रुटियां थीं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी है कि 50% आरक्षण की सीमा पार करने के लिए आवश्यक संवैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रदेश के लोगों, विशेषकर युवाओं को इस पूरे मामले को समझना चाहिए। मेरा कांग्रेस से सवाल है कि जब हम सब मिलकर पिछड़ा वर्ग के हितों की लड़ाई लड़ सकते थे, तब तत्कालीन सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं का पालन क्यों नहीं किया? उस समय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल चुका था, इसके बावजूद तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने आयोग से सहमति लेना उचित नहीं समझा। आज की स्थिति के लिए यही एक प्रमुख कारण है। इस फैसले में वर्ष 2019 से 2022 के बीच नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को नौकरी से नहीं हटाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। यह राहत देने वाला पहलू है। हालांकि, आगे उनके समायोजन को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं। मध्यप्रदेश सरकार इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखेगी। पहले भी सरकार ने इस मामले में पूरी जवाबदेही के साथ अपनी बात रखी है और आगे भी रखेगी। कांग्रेस ने 50% आरक्षण की सीमा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की और राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाया। आज न्यायालय ने उस अध्यादेश को निरस्त कर दिया है। हालांकि, यह हमारे लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में भी अपना पक्ष रखेगी। इस पूरे मामले में सरकार लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन कांग्रेस जबरन इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देना होगा कि संवैधानिक प्रावधानों और मर्यादाओं का पालन क्यों नहीं किया गया। मेरा आरोप है कि कांग्रेस किसी वर्ग की हितैषी नहीं है, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए काम करती है। -
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    ओबीसी पर कैबिनेट मंत्री पहलाद पटेल का कांग्रेस पर बड़ा हमला 
कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल का कांग्रेस पर बडा.हमला
{श्याम रानोलिया }
7049220386
ओबीसी आरक्षण एक बेहद संवेदनशील विषय है। आज जबलपुर हाईकोर्ट का जो फैसला आया है, उसमें कमलनाथ सरकार के आरक्षण संबंधी अध्यादेश को निरस्त किया गया है। भारतीय जनता पार्टी सदैव पिछड़ा वर्ग के हितों की समर्थक रही है। चाहे ओबीसी आरक्षण का विषय हो या ओबीसी आयोग को संवैधानिक मान्यता दिलाने की बात, भाजपा ने हमेशा जिम्मेदारी के साथ काम किया है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी। सभी दलों की सहमति से हम न्यायालय गए और इस मामले में अपना पक्ष रखा।
कांग्रेस को किसी वर्ग के हितों से नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थों से प्रेम है। न्यायालय की टिप्पणियों से यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार राजनीतिक लाभ के लिए अध्यादेश लेकर आई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि अध्यादेश जल्दबाजी में लाया गया और उसमें ऐसी संवैधानिक त्रुटियां थीं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी है कि 50% आरक्षण की सीमा पार करने के लिए आवश्यक संवैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रदेश के लोगों, विशेषकर युवाओं को इस पूरे मामले को समझना चाहिए।
मेरा कांग्रेस से सवाल है कि जब हम सब मिलकर पिछड़ा वर्ग के हितों की लड़ाई लड़ सकते थे, तब तत्कालीन सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं का पालन क्यों नहीं किया? उस समय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल चुका था, इसके बावजूद तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने आयोग से सहमति लेना उचित नहीं समझा। आज की स्थिति के लिए यही एक प्रमुख कारण है।
इस फैसले में वर्ष 2019 से 2022 के बीच नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को नौकरी से नहीं हटाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। यह राहत देने वाला पहलू है। हालांकि, आगे उनके समायोजन को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं। मध्यप्रदेश सरकार इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखेगी। पहले भी सरकार ने इस मामले में पूरी जवाबदेही के साथ अपनी बात रखी है और आगे भी रखेगी। कांग्रेस ने 50% आरक्षण की सीमा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की और राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाया। आज न्यायालय ने उस अध्यादेश को निरस्त कर दिया है। हालांकि, यह हमारे लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में भी अपना पक्ष रखेगी।
इस पूरे मामले में सरकार लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन कांग्रेस जबरन इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देना होगा कि संवैधानिक प्रावधानों और मर्यादाओं का पालन क्यों नहीं किया गया। मेरा आरोप है कि कांग्रेस किसी वर्ग की हितैषी नहीं है, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए काम करती है।
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    user_Shyam Ranoliya
    Shyam Ranoliya
    Local News Reporter राजगढ़, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • *#sarangpur ​संस्कृति और संस्कार का महाकुंभ: राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल की पहल पर सजी संजावली, बेटियों ने सहेजी परंपराएँ।*
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    *#sarangpur ​संस्कृति और संस्कार का महाकुंभ: राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल की पहल पर सजी संजावली, बेटियों ने सहेजी परंपराएँ।*
    user_पत्रकार सऊद खान
    पत्रकार सऊद खान
    सारंगपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • पीट के प्रशंसक को राहुल गांधी के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पीट दिया देखिए क्या है पूरा सच। पीट के प्रशंसक को राहुल गांधी के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पीट दिया देखिए पूरा सच क्या है
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    पीट के प्रशंसक को राहुल गांधी के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पीट दिया देखिए क्या है पूरा सच।
पीट के प्रशंसक को राहुल गांधी के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पीट दिया देखिए पूरा सच क्या है
    user_BS Mandloi The News Today
    BS Mandloi The News Today
    Court reporter जीरापुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया। नवरात्रि एवं दीपावली पर्व को देखते हुए दतिया शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी ने शहर का भ्रमण कर चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने बाजार और प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और हाथ ठेला संचालकों को हटने की हिदायत दी। फल विक्रेताओं को भी फुटपाथ खाली रखने के निर्देश दिए, ताकि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसी दौरान राजगढ़ चौराहे पर एक बाइक पर चार लोग सवार होकर गुजरते मिले। ट्रैफिक प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त कर थाने भिजवा दी। अभियान से वाहन चालकों और ठेला संचालकों में हलचल देखी गई। यातायात सुधारने के लिए की जा रही कार्रवाई की शहरवासियों ने सराहना की।
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    दतिया: दतिया में  नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई।
दतिया: दतिया में  नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई।
दतिया। नवरात्रि एवं दीपावली पर्व को देखते हुए दतिया शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी ने शहर का भ्रमण कर चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने बाजार और प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और हाथ ठेला संचालकों को हटने की हिदायत दी। फल विक्रेताओं को भी फुटपाथ खाली रखने के निर्देश दिए, ताकि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसी दौरान राजगढ़ चौराहे पर एक बाइक पर चार लोग सवार होकर गुजरते मिले। ट्रैफिक प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त कर थाने भिजवा दी। अभियान से वाहन चालकों और ठेला संचालकों में हलचल देखी गई। यातायात सुधारने के लिए की जा रही कार्रवाई की शहरवासियों ने सराहना की।
    user_सतेन्द्र अहिरवार
    सतेन्द्र अहिरवार
    Local News Reporter बडोनी, दतिया, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • शुजालपुर के हनुखेड़ी में कृष्णमृगों को रेस्क्यू करने के लिए बोमा बनाने का काम शुरू! 🦌 दक्षिण अफ्रीका से आई 14 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम की मदद से हेलीकॉप्टर के जरिए को भोमा तक हांका लगाकर लाया जाएगा। इस अभियान में 2 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का लक्ष्य है। हनुखेड़ी में तैयार हो रहा बोमा बना अभियान का मुख्य केंद्र। शुजालपुर के हनुखेड़ी में कृष्णमृगों को रेस्क्यू करने के लिए बोमा बनाने का काम शुरू! 🦌 दक्षिण अफ्रीका से आई 14 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम की मदद से हेलीकॉप्टर के जरिए कृष्णमृगों को भोमा तक हांका लगाकर लाया जाएगा। इस अभियान में 2 हजार कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का लक्ष्य है। हनुखेड़ी में तैयार हो रहा बोमा बना अभियान का मुख्य केंद्र। #हनुखेड़ी #शुजालपुर #बोमा #कृष्णमृग #हिरणरेस्क्यू #Shujalpur #MadhyaPradeshNews #MPNews #WildlifeRescue #वनविभाग #दक्षिणअफ्रीका #BreakingNews
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    शुजालपुर के हनुखेड़ी में कृष्णमृगों को रेस्क्यू करने के लिए बोमा बनाने का काम शुरू! 🦌

दक्षिण अफ्रीका से आई 14 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम की मदद से हेलीकॉप्टर के जरिए  को भोमा तक हांका लगाकर लाया जाएगा। इस अभियान में 2  कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का लक्ष्य है।

हनुखेड़ी में तैयार हो रहा बोमा बना अभियान का मुख्य केंद्र।
शुजालपुर के हनुखेड़ी में कृष्णमृगों को रेस्क्यू करने के लिए बोमा बनाने का काम शुरू! 🦌
दक्षिण अफ्रीका से आई 14 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम की मदद से हेलीकॉप्टर के जरिए कृष्णमृगों को भोमा तक हांका लगाकर लाया जाएगा। इस अभियान में 2 हजार कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का लक्ष्य है।
हनुखेड़ी में तैयार हो रहा बोमा बना अभियान का मुख्य केंद्र।
#हनुखेड़ी #शुजालपुर #बोमा #कृष्णमृग #हिरणरेस्क्यू #Shujalpur #MadhyaPradeshNews #MPNews #WildlifeRescue #वनविभाग #दक्षिणअफ्रीका #BreakingNews
    user_Anil Sharma
    Anil Sharma
    Local News Reporter कालापीपल, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • **रिपोर्टर देवेंद्र सिंह मीना** **सच तक न्यूज़ | मध्य प्रदेश, जिला सीहोर** **कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी ने शिविर का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश** **सीहोर।** मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत ग्राम बरखेड़ा हसन में आयोजित शिविर एवं भ्रमण कार्यक्रम में भोपाल संभाग के कमिश्नर कर्मवीर शर्मा, सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद कर शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान सीहोर विधायक सुदेश राय ने भी ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने बरखेड़ा हसन की छात्राओं से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि छात्राओं की समस्याओं का निराकरण किया जा सके। विधायक सुदेश राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने ग्रामीणों से शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की। कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले पात्र हितग्राहियों की समस्याओं का यथासंभव मौके पर ही निराकरण किया जाए। साथ ही, पात्र लोगों को संबंधित योजनाओं का लाभ सरलता और सुगमता से उपलब्ध कराया जाए। शिविर में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं एवं आवश्यकताओं से जुड़े आवेदन भी प्रस्तुत किए। अभियान के माध्यम से प्रशासन ने ग्रामीणों तक शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के निराकरण पर जोर दिया।
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    **रिपोर्टर देवेंद्र सिंह मीना**
**सच तक न्यूज़ | मध्य प्रदेश, जिला सीहोर**
**कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी ने शिविर का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश**
**सीहोर।** मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत ग्राम बरखेड़ा हसन में आयोजित शिविर एवं भ्रमण कार्यक्रम में भोपाल संभाग के कमिश्नर कर्मवीर शर्मा, सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद कर शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी ली।
कार्यक्रम के दौरान सीहोर विधायक सुदेश राय ने भी ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने बरखेड़ा हसन की छात्राओं से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि छात्राओं की समस्याओं का निराकरण किया जा सके।
विधायक सुदेश राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने ग्रामीणों से शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की।
कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले पात्र हितग्राहियों की समस्याओं का यथासंभव मौके पर ही निराकरण किया जाए। साथ ही, पात्र लोगों को संबंधित योजनाओं का लाभ सरलता और सुगमता से उपलब्ध कराया जाए।
शिविर में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं एवं आवश्यकताओं से जुड़े आवेदन भी प्रस्तुत किए। अभियान के माध्यम से प्रशासन ने ग्रामीणों तक शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के निराकरण पर जोर दिया।
    user_रिपोर्टर देवेन्द्र सिंह मीना
    रिपोर्टर देवेन्द्र सिंह मीना
    Local News Reporter सीहोर•
    4 hrs ago
  • *राजगढ़ में 'सेवा ही संकल्प, सेवा ही साधना': पीएम मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर राजगढ़ में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संकल्प!*
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    *राजगढ़ में 'सेवा ही संकल्प, सेवा ही साधना': पीएम मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर राजगढ़ में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संकल्प!*
    user_पत्रकार सऊद खान
    पत्रकार सऊद खान
    सारंगपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
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