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दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया। नवरात्रि एवं दीपावली पर्व को देखते हुए दतिया शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी ने शहर का भ्रमण कर चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने बाजार और प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और हाथ ठेला संचालकों को हटने की हिदायत दी। फल विक्रेताओं को भी फुटपाथ खाली रखने के निर्देश दिए, ताकि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसी दौरान राजगढ़ चौराहे पर एक बाइक पर चार लोग सवार होकर गुजरते मिले। ट्रैफिक प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त कर थाने भिजवा दी। अभियान से वाहन चालकों और ठेला संचालकों में हलचल देखी गई। यातायात सुधारने के लिए की जा रही कार्रवाई की शहरवासियों ने सराहना की।

16 hrs ago
user_सतेन्द्र अहिरवार
सतेन्द्र अहिरवार
Local News Reporter बडोनी, दतिया, मध्य प्रदेश•
16 hrs ago

दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया। नवरात्रि एवं दीपावली पर्व को देखते हुए दतिया शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी ने शहर का भ्रमण कर चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने बाजार और प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और

हाथ ठेला संचालकों को हटने की हिदायत दी। फल विक्रेताओं को भी फुटपाथ खाली रखने के निर्देश दिए, ताकि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसी दौरान राजगढ़ चौराहे पर एक बाइक पर चार लोग सवार होकर गुजरते मिले। ट्रैफिक प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त कर थाने भिजवा दी। अभियान से वाहन चालकों और ठेला संचालकों में हलचल देखी गई। यातायात सुधारने के लिए की जा रही कार्रवाई की शहरवासियों ने सराहना की।

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  • दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया: दतिया में नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई। दतिया। नवरात्रि एवं दीपावली पर्व को देखते हुए दतिया शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी ने शहर का भ्रमण कर चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने बाजार और प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और हाथ ठेला संचालकों को हटने की हिदायत दी। फल विक्रेताओं को भी फुटपाथ खाली रखने के निर्देश दिए, ताकि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसी दौरान राजगढ़ चौराहे पर एक बाइक पर चार लोग सवार होकर गुजरते मिले। ट्रैफिक प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त कर थाने भिजवा दी। अभियान से वाहन चालकों और ठेला संचालकों में हलचल देखी गई। यातायात सुधारने के लिए की जा रही कार्रवाई की शहरवासियों ने सराहना की।
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    दतिया: दतिया में  नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई।
दतिया: दतिया में  नवरात्रि-दीपावली से पहले यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने उतरे हिमांशु तिवारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई।
दतिया। नवरात्रि एवं दीपावली पर्व को देखते हुए दतिया शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्रभारी हिमांशु तिवारी ने शहर का भ्रमण कर चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने बाजार और प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और हाथ ठेला संचालकों को हटने की हिदायत दी। फल विक्रेताओं को भी फुटपाथ खाली रखने के निर्देश दिए, ताकि सड़क पर जाम की स्थिति न बने। इसी दौरान राजगढ़ चौराहे पर एक बाइक पर चार लोग सवार होकर गुजरते मिले। ट्रैफिक प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त कर थाने भिजवा दी। अभियान से वाहन चालकों और ठेला संचालकों में हलचल देखी गई। यातायात सुधारने के लिए की जा रही कार्रवाई की शहरवासियों ने सराहना की।
    user_सतेन्द्र अहिरवार
    सतेन्द्र अहिरवार
    Local News Reporter बडोनी, दतिया, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • *#shajapur के #sunera सनसनीखेज वारदात का खुलासा।* *सोते समय महिला के गले से मंगलसूत्र लूटने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दबोचा शातिर चोर।*
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    *#shajapur के #sunera सनसनीखेज वारदात का खुलासा।*

*सोते समय महिला के गले से मंगलसूत्र लूटने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दबोचा शातिर चोर।*
    user_पत्रकार सऊद खान
    पत्रकार सऊद खान
    सारंगपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    31 min ago
  • मोहन बड़ोदिया में शांति समिति की बैठक संपन्न, दशहरा दहन की जगह पर बना असमंजस, डीजे पर रहेगा प्रतिबंध आगामी प्रमुख त्योहार नवरात्रि, दशहरा और दीपावली सहित अन्य पर्वों को शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के उद्देश्य से मोहन बड़ोदिया थाना परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नायब तहसीलदार मुकेश गुप्ता ने की। बैठक में थाना प्रभारी मनीषा शर्मा ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों एवं समाजजनों को त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति के साथ पर्व मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मूर्ति स्थापना एवं गरबा पांडालों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संख्या में वालेंटियर्स तैनात किए जाएं तथा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएं। नायब तहसीलदार मुकेश गुप्ता ने ग्राम पंचायत को त्योहारों के दौरान निकलने वाली यात्राओं के मार्गों को दुरुस्त करने, साफ-सफाई सुनिश्चित करने और स्ट्रीट लाइट चालू रखने के निर्देश दिए। वहीं, विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को त्योहारों के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने तथा नवरात्रि के दौरान विद्युत मेंटेनेंस नहीं करने के निर्देश दिए गए। बैठक में डीजे का उपयोग नहीं करने की हिदायत दी गई। थाना प्रभारी मनीषा शर्मा ने स्पष्ट किया कि डीजे बजाने पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए उसे जब्त किया जाएगा। उन्होंने शांति समिति के सदस्यों एवं समाजजनों से अपील की कि वे त्योहारों, जुलूसों, चल समारोह और चुनर यात्राओं के दौरान डीजे का उपयोग नहीं करने के लिए नागरिकों को जागरूक करें तथा प्रशासन का सहयोग करें। इस दौरान दशहरा दहन की जगह निजी जगह होने से भूमि स्वामी ने आपत्ति दर्ज की, जिस पर रावण दहन की जगह पर असमंजस बना, मौके पर नयाब तहसीलदार ने समाधान का आश्वासन किया । बैठक में विद्युत विभाग के कनिष्ठ यंत्री पवन पाटीदार सहित दशहरा उत्सव समिति, मां शेरावाली नवयुवक मंडल बस स्टैंड मोहन बड़ोदिया, कालाजी नवयुवक मंडल, ढोलितारा गरबा उत्सव समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
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    मोहन बड़ोदिया में शांति समिति की बैठक संपन्न, दशहरा दहन की जगह पर बना असमंजस, डीजे पर रहेगा प्रतिबंध
आगामी प्रमुख त्योहार नवरात्रि, दशहरा और दीपावली सहित अन्य पर्वों को शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के उद्देश्य से मोहन बड़ोदिया थाना परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नायब तहसीलदार मुकेश गुप्ता ने की।
बैठक में थाना प्रभारी मनीषा शर्मा ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों एवं समाजजनों को त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति के साथ पर्व मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मूर्ति स्थापना एवं गरबा पांडालों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संख्या में वालेंटियर्स तैनात किए जाएं तथा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएं।
नायब तहसीलदार मुकेश गुप्ता ने ग्राम पंचायत को त्योहारों के दौरान निकलने वाली यात्राओं के मार्गों को दुरुस्त करने, साफ-सफाई सुनिश्चित करने और स्ट्रीट लाइट चालू रखने के निर्देश दिए। वहीं, विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को त्योहारों के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने तथा नवरात्रि के दौरान विद्युत मेंटेनेंस नहीं करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में डीजे का उपयोग नहीं करने की हिदायत दी गई। थाना प्रभारी मनीषा शर्मा ने स्पष्ट किया कि डीजे बजाने पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए उसे जब्त किया जाएगा। उन्होंने शांति समिति के सदस्यों एवं समाजजनों से अपील की कि वे त्योहारों, जुलूसों, चल समारोह और चुनर यात्राओं के दौरान डीजे का उपयोग नहीं करने के लिए नागरिकों को जागरूक करें तथा प्रशासन का सहयोग करें। इस दौरान दशहरा दहन की जगह निजी जगह होने से भूमि स्वामी ने आपत्ति दर्ज की, जिस पर रावण दहन की जगह पर असमंजस बना, मौके पर नयाब तहसीलदार ने समाधान का आश्वासन किया ।
बैठक में विद्युत विभाग के कनिष्ठ यंत्री पवन पाटीदार सहित दशहरा उत्सव समिति, मां शेरावाली नवयुवक मंडल बस स्टैंड मोहन बड़ोदिया, कालाजी नवयुवक मंडल, ढोलितारा गरबा उत्सव समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
    user_Govind kumbhkar
    Govind kumbhkar
    पत्रकार शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • नलखेड़ा में अपर कलेक्टर डॉ. श्रीवास्तव नवरात्रि व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण
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    नलखेड़ा में अपर कलेक्टर डॉ. श्रीवास्तव नवरात्रि व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण
    user_Manoj Kumar
    Manoj Kumar
    Court reporter सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • 🐝 सुसनेर में पूजा के दौरान मधुमक्खियों का अचानक हमला! 🐝 सुसनेर में पूजा के दौरान मधुमक्खियों का अचानक हमला!
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    🐝 सुसनेर में पूजा के दौरान मधुमक्खियों का अचानक हमला!
🐝 सुसनेर में पूजा के दौरान मधुमक्खियों का अचानक हमला!
    user_हर खबर आपके साथ
    हर खबर आपके साथ
    News Anchor सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • लोक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प संजावली प्रतियोगिता में गूँजे मालवी लोकगीत, गोबर से सजीं परंपराओं की कलाकृतियाँ मालवा की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार विभाग श्री गौतम टेटवाल की पहल पर सेवा सदन कार्यालय परिसर में संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों एवं विद्यालयों से आई छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संजा की पारंपरिक कलाकृतियों, मालवी लोकगीतों और लोकनृत्य के माध्यम से मालवा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि माताएँ-बहनें न होतीं तो हमारे तीज-त्योहारों और लोकपरंपराओं की सांस्कृतिक धारा को जीवित रखना कठिन हो जाता। हमारी माताओं, दादी-नानियों और बहनों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोकगीतों, पारंपरिक कलाओं, रीति-रिवाजों और संस्कारों को सहेजकर रखा है। संजावली जैसे आयोजन इसी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर जैसे शहर में विलुप्त होती लोकपरंपराओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि लोककला केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हमारी बेटियाँ अपनी दादी-नानी से लोकगीत सीखती हैं, अपने हाथों से संजा की आकृतियाँ बनाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेती हैं, तब एक पीढ़ी का अनुभव दूसरी पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनता है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं। *संजा बाई की परंपरा में समाहित है माँ पार्वती की आराधना का भाव* मालवा-निमाड़ अंचल में संजा अथवा संजावली का पर्व विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष के दौरान लगभग 16 दिनों तक किशोरियाँ घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से संजा के मांडने और विभिन्न आकृतियाँ बनाती हैं। इन्हें फूलों, पत्तियों और प्राकृतिक सामग्रियों से सजाकर प्रतिदिन पारंपरिक संजा गीत गाए जाते हैं। यह परंपरा बालिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक सहभागिता और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर उदाहरण है। लोकमान्यता के अनुसार, संजा पर्व को माँ पार्वती से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के एक प्रचलित रूप में माँ पार्वती के मायके आगमन और सखियों के साथ उनके स्नेहपूर्ण समय बिताने की कल्पना इस परंपरा से जुड़ी है। सखियाँ दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाकर उन्हें सजाती हैं और गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करती हैं। इसी प्रकार संजा से जुड़ी कुछ लोकमान्यताओं में कुंवारी कन्याओं की मनचाहे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के अलग-अलग रूप स्थानीय लोकजीवन और मौखिक परंपराओं में प्रचलित हैं। संजा की आकृतियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक स्नेह, प्रकृति से जुड़ाव और स्त्री-जीवन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। गोबर, फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से यह परंपरा हमें स्थानीय संसाधनों के महत्व और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। संजावली प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ भाग लिया। छात्राओं ने “कौड़ियों बामन सांझ को क्यों लेने आयो” और “नानी सी गाड़ी गुड़कती जाए, जेमे बैठी संजाबाई” जैसे पारंपरिक संजा गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मालवी लोकसंस्कृति की मिठास से परिचित कराया। लोकगीतों की सहज लय, पारंपरिक शब्दावली और छात्राओं के उत्साह ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। भ्याना, गुलावता, धनौरा, पचोर, पाड़ल्यामाता, आमलारोड़, पांदा और संडावता सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मालवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सांदीपनि विद्यालय की छात्राओं ने संजा गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। ग्रामीण अंचलों से आई बालिकाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति आज भी नई पीढ़ी के मन में जीवित है और उचित मंच मिलने पर वह अपनी प्रतिभा के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। *संजा मांडना और गीत गायन प्रतियोगिता में प्रतिभाओं का सम्मान* कार्यक्रम के अंत में संजा गीत गायन तथा गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को बैग और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गुलावता संकुल, द्वितीय स्थान उत्कृष्ट मॉडल स्कूल एवं तृतीय स्थान शासकीय विद्यालय, उड़नखेड़ी ने प्राप्‍त किया। इसी प्रकार गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय विद्यालय पासल्यामाता, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या विद्यालय सारंगपुर एवं तृतीय स्थान संदीपनी विद्यालय मऊ का रहा। इसके अतिरिक्त पाड़ल्यामाता, भ्याना, आमलारोड़ सहित अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया और उन्हें अपनी कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। सेवा सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम पिछले दो वर्षों से राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल की पहल पर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संजा जैसी पारंपरिक लोककलाओं को केवल घरों और आँगनों तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों, सार्वजनिक आयोजनों और नई पीढ़ी के बीच व्यापक पहचान दिलाना है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने इस अवसर पर लोकपरंपराओं को शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोककला, मालवी लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक हस्तकला से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आधुनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के जरिए भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शक्ति भी हैं। जब बेटियाँ शिक्षा, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों सशक्त होते हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने आयोजन में सहभागी सभी छात्राओं, शिक्षकों, माताओं-बहनों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी लोकसंस्कृति केवल अतीत की स्मृति बनकर न रह जाए, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की प्रेरणा बने। हमारी विरासत हमारा गौरव है, हमारी लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और हमारी बेटियाँ समृद्ध समाज की आधारशिला हैं। संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को दोहराने से नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाने से संभव है। संजा के मांडनों में उकेरी गई आकृतियाँ, मालवी लोकगीतों की गूँज और बालिकाओं की रचनात्मक भागीदारी मालवा की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।
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    लोक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प संजावली प्रतियोगिता में गूँजे मालवी लोकगीत, गोबर से सजीं परंपराओं की कलाकृतियाँ
मालवा की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार विभाग श्री गौतम टेटवाल की पहल पर सेवा सदन कार्यालय परिसर में संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों एवं विद्यालयों से आई छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संजा की पारंपरिक कलाकृतियों, मालवी लोकगीतों और लोकनृत्य के माध्यम से मालवा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि माताएँ-बहनें न होतीं तो हमारे तीज-त्योहारों और लोकपरंपराओं की सांस्कृतिक धारा को जीवित रखना कठिन हो जाता। हमारी माताओं, दादी-नानियों और बहनों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोकगीतों, पारंपरिक कलाओं, रीति-रिवाजों और संस्कारों को सहेजकर रखा है। संजावली जैसे आयोजन इसी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं।
राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर जैसे शहर में विलुप्त होती लोकपरंपराओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने कहा कि लोककला केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हमारी बेटियाँ अपनी दादी-नानी से लोकगीत सीखती हैं, अपने हाथों से संजा की आकृतियाँ बनाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेती हैं, तब एक पीढ़ी का अनुभव दूसरी पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनता है। ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं।
*संजा बाई की परंपरा में समाहित है माँ पार्वती की आराधना का भाव* 
मालवा-निमाड़ अंचल में संजा अथवा संजावली का पर्व विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष के दौरान लगभग 16 दिनों तक किशोरियाँ घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से संजा के मांडने और विभिन्न आकृतियाँ बनाती हैं। इन्हें फूलों, पत्तियों और प्राकृतिक सामग्रियों से सजाकर प्रतिदिन पारंपरिक संजा गीत गाए जाते हैं। यह परंपरा बालिकाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामूहिक सहभागिता और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर उदाहरण है। लोकमान्यता के अनुसार, संजा पर्व को माँ पार्वती से भी जोड़ा जाता है। लोककथा के एक प्रचलित रूप में माँ पार्वती के मायके आगमन और सखियों के साथ उनके स्नेहपूर्ण समय बिताने की कल्पना इस परंपरा से जुड़ी है। सखियाँ दीवारों पर सुंदर आकृतियाँ बनाकर उन्हें सजाती हैं और गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करती हैं। इसी प्रकार संजा से जुड़ी कुछ लोकमान्यताओं में कुंवारी कन्याओं की मनचाहे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के अलग-अलग रूप स्थानीय लोकजीवन और मौखिक परंपराओं में प्रचलित हैं।
संजा की आकृतियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक स्नेह, प्रकृति से जुड़ाव और स्त्री-जीवन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। गोबर, फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से यह परंपरा हमें स्थानीय संसाधनों के महत्व और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। संजावली प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ भाग लिया। छात्राओं ने “कौड़ियों बामन सांझ को क्यों लेने आयो” और “नानी सी गाड़ी गुड़कती जाए, जेमे बैठी संजाबाई” जैसे पारंपरिक संजा गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मालवी लोकसंस्कृति की मिठास से परिचित कराया। लोकगीतों की सहज लय, पारंपरिक शब्दावली और छात्राओं के उत्साह ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। भ्याना, गुलावता, धनौरा, पचोर, पाड़ल्यामाता, आमलारोड़, पांदा और संडावता सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों के शासकीय विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मालवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सांदीपनि विद्यालय की छात्राओं ने संजा गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। ग्रामीण अंचलों से आई बालिकाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति आज भी नई पीढ़ी के मन में जीवित है और उचित मंच मिलने पर वह अपनी प्रतिभा के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
*संजा मांडना और गीत गायन प्रतियोगिता में प्रतिभाओं का सम्मान* 
कार्यक्रम के अंत में संजा गीत गायन तथा गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को बैग और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गुलावता संकुल, द्वितीय स्थान उत्कृष्ट मॉडल स्कूल एवं तृतीय स्थान शासकीय विद्यालय, उड़नखेड़ी ने प्राप्‍त किया। इसी प्रकार गोबर से संजा मांडना बनाने की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय विद्यालय पासल्यामाता, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या विद्यालय सारंगपुर एवं तृतीय स्थान संदीपनी विद्यालय मऊ का रहा। इसके अतिरिक्त पाड़ल्यामाता, भ्याना, आमलारोड़ सहित अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया और उन्हें अपनी कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
सेवा सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम पिछले दो वर्षों से राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल की पहल पर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संजा जैसी पारंपरिक लोककलाओं को केवल घरों और आँगनों तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों, सार्वजनिक आयोजनों और नई पीढ़ी के बीच व्यापक पहचान दिलाना है। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने इस अवसर पर लोकपरंपराओं को शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोककला, मालवी लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक हस्तकला से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आधुनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के जरिए भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शक्ति भी हैं। जब बेटियाँ शिक्षा, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों सशक्त होते हैं। राज्यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री टेटवाल ने आयोजन में सहभागी सभी छात्राओं, शिक्षकों, माताओं-बहनों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी लोकसंस्कृति केवल अतीत की स्मृति बनकर न रह जाए, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की प्रेरणा बने। हमारी विरासत हमारा गौरव है, हमारी लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और हमारी बेटियाँ समृद्ध समाज की आधारशिला हैं।
संजावली प्रतियोगिता एवं कला महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति का संरक्षण केवल परंपराओं को दोहराने से नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाने से संभव है। संजा के मांडनों में उकेरी गई आकृतियाँ, मालवी लोकगीतों की गूँज और बालिकाओं की रचनात्मक भागीदारी मालवा की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।
    user_Raja Yadav
    Raja Yadav
    पचोर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • मटन मार्केट के पीछे खेत पर मधुमक्खियों का तांडव, पोलिया महाराज की पूजा कर रहे लोगो को किया घायल सुसनेर में आज शुक्रवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। मटन मार्केट के पीछे स्थित खेत पर 'घायल की चवदश' पर पोलिया महाराज की पूजा करने गए लोगों पर मधुमक्खियों ने अचानक हमला बोल दिया। ​मधुमक्खियों के अचानक हमले से मौके पर भगदड़ मच गई। इस हमले में लगभग एक दर्जन लोग मधुमक्खियों के काटने से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद 3 घायलों को पुराना बस स्टैंड स्थित सिविल अस्पताल सुसनेर लाया गया, जहां डॉक्टर नीलम जैन ने सभी का प्राथमिक उपचार कर उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया है। सभी घायलों का इलाज जारी है। शेष बचे लोग ज्यादा घायल नही थे इसलिए अस्पताल नही पहुंचे।
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    मटन मार्केट के पीछे खेत पर मधुमक्खियों का तांडव, पोलिया महाराज की पूजा कर रहे लोगो को किया घायल
सुसनेर में आज शुक्रवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। मटन मार्केट के पीछे स्थित खेत पर 'घायल की चवदश' पर पोलिया महाराज की पूजा करने गए लोगों पर मधुमक्खियों ने अचानक हमला बोल दिया। ​मधुमक्खियों के अचानक हमले से मौके पर भगदड़ मच गई। इस हमले में लगभग एक दर्जन लोग मधुमक्खियों के काटने से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद 3 घायलों को पुराना बस स्टैंड स्थित सिविल अस्पताल सुसनेर लाया गया, जहां डॉक्टर नीलम जैन ने सभी का प्राथमिक उपचार कर उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया है। सभी घायलों का इलाज जारी है। शेष बचे लोग ज्यादा घायल नही थे इसलिए अस्पताल नही पहुंचे।
    user_राकेश बिकुन्दीया
    राकेश बिकुन्दीया
    पत्रकार सुसनेर, 10 वर्षो का अनुभव सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • *#sarangpur ​संस्कृति और संस्कार का महाकुंभ: राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल की पहल पर सजी संजावली, बेटियों ने सहेजी परंपराएँ।*
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    *#sarangpur ​संस्कृति और संस्कार का महाकुंभ: राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल की पहल पर सजी संजावली, बेटियों ने सहेजी परंपराएँ।*
    user_पत्रकार सऊद खान
    पत्रकार सऊद खान
    सारंगपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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