देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे। पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।
देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे। पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।
- मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह विधानसभा क्षेत्र इछावर में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता शैलेंद्र पटेल अपने पुराने, तीखे अंदाज में नजर आए, जहाँ उन्होंने नाले की गंदगी निकालकर सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नगर परिषद कार्यालय में फेंक दी। इस घटना से सुस्त पड़ी कांग्रेस अचानक आक्रामक तेवर में दिखी। शैलेंद्र पटेल ने इस दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को भी कड़ी चेतावनी देते हुए उन्हें चूड़ी पहनाने की बात कही।1
- बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच, विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर नवीन सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय परिसर और प्राचीन खेड़ापति शनि मंदिर परिसर में एक वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना और हरी-भरी धरती के संकल्प को साकार करना था। सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा, विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष फूलचंद वर्मा, सचिव बिहारीलाल परमार, पार्षद तेजसिंह राठौर, रवि शर्मा, प्रवीण धाड़ीवाल, विशाल तिवारी, मनोज तिवारी, मनमोहन गुर्जर, राजेन्द्र सोलंकी, विकास चौरसिया सहित कई लोगों ने विद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों में पौधे रोपे। वहीं, खेड़ापति शनि मंदिर परिसर में सकल समाज के अध्यक्ष श्री नरेंद्र कुशवाह, मुकेश नामदेव, मनीष डोंगरे, मोंटू कौरी, मनीष गोस्वामी, राजीव गुप्ता, राजेन्द्र जैन, पूर्व पार्षद सुभाष नामदेव सहित अन्य सामाजिक लोगों ने पौधारोपण किया। रोपे गए पौधों में मुख्य रूप से नीम, पीपल, आंवला, जामुन और तुलसी शामिल थे, जो छायादार और औषधीय प्रजाति के थे। इस अवसर पर नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़-पौधों का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका एक बच्चे की तरह पालन-पोषण करना और उसे पेड़ बनाना ही हमारी असली जिम्मेदारी है। विद्यालय के छात्रों ने भी अपने द्वारा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई करने का संकल्प लिया, जिससे वृक्षारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण पर भी विशेष बल दिया जा सके।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पुनासा के मूंदी नगर स्थित शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान, मांधाता विधायक नारायण पटेल और नगर परिषद अध्यक्ष ज्योतिबाला चंद्रमोहन राठौर ने विद्यालय परिसर में स्थापित नवीन नलकूप का लोकार्पण किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए 50 पौधों का रोपण भी किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने पेड़-पौधे लगाने, जल संरक्षण करने तथा प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ ली। विद्यालय की छात्राओं ने नलकूप स्थापित करने के लिए विधायक और नगर परिषद का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, छात्राओं ने कन्या शाला मूंदी में विज्ञान संकाय प्रारंभ किए जाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी से अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा जल स्रोतों का संरक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।1
- ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा। Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया। YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे। Quora +1 प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा। Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया। YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे। प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता1
- मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से पत्रकार देवेंद्र सिंह मीना की रिपोर्ट है।1
- कन्नौद जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सोनखेड़ी में अवैध शराब बिक्री के खिलाफ महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को ग्राम सभा की बैठक में सोनखेड़ी की महिलाओं ने डायरी सिस्टम से जगह-जगह बिक रही अवैध शराब को बंद करने की मांग करते हुए सरपंच को आवेदन दिया। हालांकि, सरपंच ने ग्राम सभा की बैठक का बहिष्कार किया और वहाँ से चले गए। इसके बाद, सोनखेड़ी की बड़ी संख्या में महिलाएं कन्नौद स्थित एसडीएम कार्यालय पहुँचीं। उन्होंने एसडीएम कन्हैयालाल तिलवारी को ज्ञापन सौंपा और कड़ी चेतावनी दी कि यदि उनके द्वारा दी गई समय-सीमा में गाँव में अवैध रूप से बिक रही डायरी सिस्टम से शराब बंद नहीं हुई, तो वे आगे की कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगी। महिलाओं ने अपनी शिकायत में बताया कि ग्रामीण पुरुष शराब पीकर घर आते हैं, जिससे परिवार में आए दिन लड़ाई-झगड़े होते हैं और परिवार परेशान रहता है। उन्होंने तत्काल अवैध शराब की बिक्री बंद करने की मांग की। एसडीएम कन्हैयालाल तिलवारी ने महिलाओं को आश्वासन दिया कि उनका आवेदन तत्काल आबकारी विभाग को भेज दिया जाएगा और गाँव में बिक रही अवैध शराब को बंद कराया जाएगा।2
- देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे। पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।1