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ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  Quora +1 प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता

11 hrs ago
user_Sachinphotograpy Harsud
Sachinphotograpy Harsud
Photographer हरसूद, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
11 hrs ago

ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  Quora +1 प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता

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  • ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  Quora +1 प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता
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रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा। 

Wikipedia +2

माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं:

1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष)

जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया। 

YouTube·Tilak +4

दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे। 

Quora +1

प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता


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रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा। 
Wikipedia +2
माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं:
1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष)
जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया। 
YouTube·Tilak +4
दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे। 
प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता
    user_Sachinphotograpy Harsud
    Sachinphotograpy Harsud
    Photographer हरसूद, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • माननीय जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कुंवर दिव्यादित शाह के जन्मदिन को लेकर खारमंडल क्षेत्र में जगह-जगह व्यापक तैयारियां चल रही हैं, जहाँ गांव-गांव में खुशियों का माहौल बना हुआ है। प्रेम से लोग उन्हें 'छोटे बॉस' या 'बाबा सा' कहकर संबोधित करते हैं, जिससे उनकी गरिमा बनी रहती है। उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर हर जगह बैनर और फ्लेक्स लगाए जा रहे हैं। इस अवसर पर खारमंडल के सभी लोगों से आग्रह किया गया है कि वे अपने-अपने घरों पर दो-दो पौधे लगाएं, ताकि यह बच्चों और परिवार को याद रहे कि ये पौधे 'बाबा साहब' के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लगाए गए हैं। खारमंडल के देवली खुर्द, देवली कला, चिकतलाई सरमेश्वर, गधड़िया, तालियाधर जामुनिया कला, जामनिया खुर्द, मानपुरा और दूधकुंडिया जैसे सभी गांवों में हर्षोल्लास देखा जा रहा है। श्रीमान पिंटू भैया ने बताया कि वे जब गांवों का दौरा कर रहे हैं, तो उन्हें हर तरफ लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं दिख रहा, मानो वे बेहद हर्षोल्लास में हों। यह उत्साह श्री कुंवर दिव्यादित शाह द्वारा करवाए गए अनगिनत कार्यों का परिणाम है। देवली खुर्द के श्री आत्माराम यादव के अनुसार, इनमें सबसे महत्वपूर्ण कार्य नहर के पानी की व्यवस्था है, जिसे लोग 100 में से 100 अंक देते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि वे इस काम को कभी भूल नहीं सकते, क्योंकि जिन खेतों में पानी के लिए तरसते थे, वहाँ अब पानी पहुँच गया है, जिससे किसानों की खुशी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। 'छोटे बॉस' के बैनर हर जगह उनकी बढ़ती आस्था और जनसंपर्क को दर्शा रहे हैं। उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर सभी गांवों की ओर से उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई दी गई है।
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    माननीय जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कुंवर दिव्यादित शाह के जन्मदिन को लेकर खारमंडल क्षेत्र में जगह-जगह व्यापक तैयारियां चल रही हैं, जहाँ गांव-गांव में खुशियों का माहौल बना हुआ है। प्रेम से लोग उन्हें 'छोटे बॉस' या 'बाबा सा' कहकर संबोधित करते हैं, जिससे उनकी गरिमा बनी रहती है। उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर हर जगह बैनर और फ्लेक्स लगाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर खारमंडल के सभी लोगों से आग्रह किया गया है कि वे अपने-अपने घरों पर दो-दो पौधे लगाएं, ताकि यह बच्चों और परिवार को याद रहे कि ये पौधे 'बाबा साहब' के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लगाए गए हैं। खारमंडल के देवली खुर्द, देवली कला, चिकतलाई सरमेश्वर, गधड़िया, तालियाधर जामुनिया कला, जामनिया खुर्द, मानपुरा और दूधकुंडिया जैसे सभी गांवों में हर्षोल्लास देखा जा रहा है।

श्रीमान पिंटू भैया ने बताया कि वे जब गांवों का दौरा कर रहे हैं, तो उन्हें हर तरफ लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं दिख रहा, मानो वे बेहद हर्षोल्लास में हों। यह उत्साह श्री कुंवर दिव्यादित शाह द्वारा करवाए गए अनगिनत कार्यों का परिणाम है। देवली खुर्द के श्री आत्माराम यादव के अनुसार, इनमें सबसे महत्वपूर्ण कार्य नहर के पानी की व्यवस्था है, जिसे लोग 100 में से 100 अंक देते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि वे इस काम को कभी भूल नहीं सकते, क्योंकि जिन खेतों में पानी के लिए तरसते थे, वहाँ अब पानी पहुँच गया है, जिससे किसानों की खुशी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

'छोटे बॉस' के बैनर हर जगह उनकी बढ़ती आस्था और जनसंपर्क को दर्शा रहे हैं। उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर सभी गांवों की ओर से उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई दी गई है।
    user_Atmaram Yadav
    Atmaram Yadav
    Farmer खलवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे ग्रामीणों से भरा ट्रक सुंदरदेव और आडाखेड़ा जंगल के बीच अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी। ट्रक क्रमांक MP09 KD 2295 खकनार क्षेत्र के एक गांव से खालवा के पास चुनाखाल गांव की ओर जा रहा था, जिसमें लगभग 100 से 150 लोग सवार थे। इस हादसे में 30 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है, जिनमें से 6 गंभीर घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, किसी भी तरह की जनहानि की खबर नहीं है। हादसे की जानकारी मिलते ही खालवा पुलिस, तहसील प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुँच गईं। डायल-112 की आधा दर्जन गाड़ियां और 6 एंबुलेंस तुरंत तैनात की गईं। तहसीलदार विनोद कुमार यादव ने घटनास्थल पर पहुँचकर राहत कार्यों की निगरानी की। पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से घायलों को ट्रक से बाहर निकालकर खालवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रशासन द्वारा घायलों की एक प्रारंभिक सूची भी जारी की गई है, जिसमें नटेख (50 वर्ष), निर्मियाबाई पति रविजन (55 वर्ष), विवाहनी पिता पिपु (10 वर्ष), अक्षरा पिता कसलराम (10 वर्ष), नंदु पिता प्याराम (15 वर्ष), पामेद पिता सुका (18 वर्ष), झुगन पिता छेल्या (60 वर्ष), राकेश पिता संजू (20 वर्ष), पिंकोबाई पति अमर (52 वर्ष) और पियुष पिता बंधुकर (28 वर्ष) जैसे नाम शामिल हैं। खालवा पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और ट्रक पलटने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ओवरलोडिंग और तेज मोड़ पर असंतुलन को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
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    मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे ग्रामीणों से भरा ट्रक सुंदरदेव और आडाखेड़ा जंगल के बीच अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

ट्रक क्रमांक MP09 KD 2295 खकनार क्षेत्र के एक गांव से खालवा के पास चुनाखाल गांव की ओर जा रहा था, जिसमें लगभग 100 से 150 लोग सवार थे। इस हादसे में 30 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है, जिनमें से 6 गंभीर घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, किसी भी तरह की जनहानि की खबर नहीं है।

हादसे की जानकारी मिलते ही खालवा पुलिस, तहसील प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुँच गईं। डायल-112 की आधा दर्जन गाड़ियां और 6 एंबुलेंस तुरंत तैनात की गईं। तहसीलदार विनोद कुमार यादव ने घटनास्थल पर पहुँचकर राहत कार्यों की निगरानी की। पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से घायलों को ट्रक से बाहर निकालकर खालवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रशासन द्वारा घायलों की एक प्रारंभिक सूची भी जारी की गई है, जिसमें नटेख (50 वर्ष), निर्मियाबाई पति रविजन (55 वर्ष), विवाहनी पिता पिपु (10 वर्ष), अक्षरा पिता कसलराम (10 वर्ष), नंदु पिता प्याराम (15 वर्ष), पामेद पिता सुका (18 वर्ष), झुगन पिता छेल्या (60 वर्ष), राकेश पिता संजू (20 वर्ष), पिंकोबाई पति अमर (52 वर्ष) और पियुष पिता बंधुकर (28 वर्ष) जैसे नाम शामिल हैं।

खालवा पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और ट्रक पलटने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ओवरलोडिंग और तेज मोड़ पर असंतुलन को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
    user_Ramchandra Kasde
    Ramchandra Kasde
    Newspaper distribution खलवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पुनासा के मूंदी नगर स्थित शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान, मांधाता विधायक नारायण पटेल और नगर परिषद अध्यक्ष ज्योतिबाला चंद्रमोहन राठौर ने विद्यालय परिसर में स्थापित नवीन नलकूप का लोकार्पण किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए 50 पौधों का रोपण भी किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने पेड़-पौधे लगाने, जल संरक्षण करने तथा प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ ली। विद्यालय की छात्राओं ने नलकूप स्थापित करने के लिए विधायक और नगर परिषद का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, छात्राओं ने कन्या शाला मूंदी में विज्ञान संकाय प्रारंभ किए जाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी से अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा जल स्रोतों का संरक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पुनासा के मूंदी नगर स्थित शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान, मांधाता विधायक नारायण पटेल और नगर परिषद अध्यक्ष ज्योतिबाला चंद्रमोहन राठौर ने विद्यालय परिसर में स्थापित नवीन नलकूप का लोकार्पण किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए 50 पौधों का रोपण भी किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने पेड़-पौधे लगाने, जल संरक्षण करने तथा प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ ली। विद्यालय की छात्राओं ने नलकूप स्थापित करने के लिए विधायक और नगर परिषद का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, छात्राओं ने कन्या शाला मूंदी में विज्ञान संकाय प्रारंभ किए जाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी से अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा जल स्रोतों का संरक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
    user_Shahrukh mansuri333
    Shahrukh mansuri333
    पुनासा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • एंटी ऑल इंडिया न्यूज नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, रतलाम की बेटी इंसिया तैयब अली रावटी वाला कुवैत में अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों से पहचान बनाकर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि कुवैत के एक रेडियो चैनल पर उनका विशेष इंटरव्यू प्रसारित हुआ, जिसे पूरे खाड़ी क्षेत्र में खूब सराहा गया है, जिससे देश और समाज का मान बढ़ा है। बोहरा समाज से जुड़ी इंसिया ने क्लीनिकल साइकोलॉजी का अध्ययन किया है और वह मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों को परामर्श देकर उनके जीवन को बेहतर बनाने का काम कर रही हैं। कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के बीच अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर, वे अवसाद और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को लगातार प्रेरित कर सकारात्मक जीवन की ओर ले जाने का प्रयास करती हैं। इस रेडियो इंटरव्यू के दौरान इंसिया ने मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति, आत्मविश्वास से भरपूर बॉडी लैंग्वेज और सरल अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। इंटरव्यू के माध्यम से उन्होंने यह संदेश भी दिया कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और उन्हें अवसर मिलने पर वे देश और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं। रतलाम की इस बेटी की सफलता को बोहरा समाज की युवा पीढ़ी और बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा माना जा रहा है। समाज के लोगों ने उम्मीद जताई है कि इंसिया की यह उपलब्धि नई पीढ़ी को शिक्षा, आत्मविश्वास और समाजसेवा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
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    एंटी ऑल इंडिया न्यूज नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, रतलाम की बेटी इंसिया तैयब अली रावटी वाला कुवैत में अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों से पहचान बनाकर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि कुवैत के एक रेडियो चैनल पर उनका विशेष इंटरव्यू प्रसारित हुआ, जिसे पूरे खाड़ी क्षेत्र में खूब सराहा गया है, जिससे देश और समाज का मान बढ़ा है।

बोहरा समाज से जुड़ी इंसिया ने क्लीनिकल साइकोलॉजी का अध्ययन किया है और वह मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों को परामर्श देकर उनके जीवन को बेहतर बनाने का काम कर रही हैं। कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के बीच अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर, वे अवसाद और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को लगातार प्रेरित कर सकारात्मक जीवन की ओर ले जाने का प्रयास करती हैं।

इस रेडियो इंटरव्यू के दौरान इंसिया ने मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति, आत्मविश्वास से भरपूर बॉडी लैंग्वेज और सरल अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। इंटरव्यू के माध्यम से उन्होंने यह संदेश भी दिया कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और उन्हें अवसर मिलने पर वे देश और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं।

रतलाम की इस बेटी की सफलता को बोहरा समाज की युवा पीढ़ी और बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा माना जा रहा है। समाज के लोगों ने उम्मीद जताई है कि इंसिया की यह उपलब्धि नई पीढ़ी को शिक्षा, आत्मविश्वास और समाजसेवा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
    user_Masood Javed Qadri
    Masood Javed Qadri
    खंडवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • ANT ALL india News Netwark की रिपोर्ट के अनुसार, 'कॉकरोच जनता पार्टी' सोशल मीडिया पर एक नई सनसनी के रूप में उभरी है। अभिजीत दीपके द्वारा चलाए जा रहे एक अभियान के कारण यह पार्टी विशेष रूप से युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गई है, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी ध्यान आकर्षित किया है।
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    ANT ALL india News Netwark की रिपोर्ट के अनुसार, 'कॉकरोच जनता पार्टी' सोशल मीडिया पर एक नई सनसनी के रूप में उभरी है। अभिजीत दीपके द्वारा चलाए जा रहे एक अभियान के कारण यह पार्टी विशेष रूप से युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गई है, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी ध्यान आकर्षित किया है।
    user_Masood Javed Qadri
    Masood Javed Qadri
    खंडवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे। पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।
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    देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे।

पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई।

ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।
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    Rajendra shreevas
    Local News Reporter कन्नौद, देवास, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
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