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सीतापुर में विधायक और तहसीलदार के बीच चल रहे विवाद को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाके में चर्चा तेज़ है, खासकर इसलिए कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तारी से पहले ही वापस कर दिया गया। यह घटना जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद की ओर इशारा कर रही है। इस पूरे मामले पर जनता की ओर से कई तीखे प्रश्न पूछे जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस विवाद की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि गिरफ्तारी की चर्चा के बाद आखिर कार्रवाई क्यों रुक गई, और क्या इस पर कोई राजनीतिक दबाव था। जनता का साफ कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मर्यादा और कानून का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए।

17 hrs ago
user_जनता की ख़बर
जनता की ख़बर
Local News Reporter वाड्रफनगर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
17 hrs ago
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सीतापुर में विधायक और तहसीलदार के बीच चल रहे विवाद को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाके में चर्चा तेज़ है, खासकर इसलिए कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तारी से पहले ही वापस कर दिया गया। यह घटना जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद की ओर इशारा कर रही है। इस पूरे मामले पर जनता की ओर से कई तीखे प्रश्न पूछे जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस विवाद की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि गिरफ्तारी की चर्चा के बाद आखिर कार्रवाई क्यों रुक गई, और क्या इस पर कोई राजनीतिक दबाव था। जनता का साफ कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मर्यादा और कानून का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए।

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  • सीतापुर में विधायक और तहसीलदार के बीच चल रहे विवाद को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाके में चर्चा तेज़ है, खासकर इसलिए कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तारी से पहले ही वापस कर दिया गया। यह घटना जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद की ओर इशारा कर रही है। इस पूरे मामले पर जनता की ओर से कई तीखे प्रश्न पूछे जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस विवाद की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि गिरफ्तारी की चर्चा के बाद आखिर कार्रवाई क्यों रुक गई, और क्या इस पर कोई राजनीतिक दबाव था। जनता का साफ कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मर्यादा और कानून का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए।
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    सीतापुर में विधायक और तहसीलदार के बीच चल रहे विवाद को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाके में चर्चा तेज़ है, खासकर इसलिए कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तारी से पहले ही वापस कर दिया गया। यह घटना जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद की ओर इशारा कर रही है।

इस पूरे मामले पर जनता की ओर से कई तीखे प्रश्न पूछे जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस विवाद की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि गिरफ्तारी की चर्चा के बाद आखिर कार्रवाई क्यों रुक गई, और क्या इस पर कोई राजनीतिक दबाव था।

जनता का साफ कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मर्यादा और कानून का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए।
    user_जनता की ख़बर
    जनता की ख़बर
    Local News Reporter वाड्रफनगर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में गरीबों के हक का सरकारी चना सड़क किनारे सड़ा हुआ पाया गया है। यह पूरा मामला जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के नीलकंठपुर गांव का है, जहां नीलकंठपुर मोड़ के पास भारी मात्रा में अनाज फेंका गया था। वितरण न होने के कारण यह अनाज खराब हो गया। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने अधिकारियों और राशन दुकान संचालकों पर लापरवाही छिपाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, खाद्य अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि इस प्रकरण में दोषियों पर FIR दर्ज की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में गरीबों के हक का सरकारी चना सड़क किनारे सड़ा हुआ पाया गया है। यह पूरा मामला जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के नीलकंठपुर गांव का है, जहां नीलकंठपुर मोड़ के पास भारी मात्रा में अनाज फेंका गया था। वितरण न होने के कारण यह अनाज खराब हो गया।

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने अधिकारियों और राशन दुकान संचालकों पर लापरवाही छिपाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, खाद्य अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि इस प्रकरण में दोषियों पर FIR दर्ज की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • बलरामपुर में राघव एम्बुलेंस लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुँचाने के लिए 24x7 इमरजेंसी सेवा प्रदान कर रही है। यह सेवा ऑक्सीजन और दवाइयों जैसी आवश्यक सुविधाओं के साथ एक भरोसेमंद विकल्प प्रस्तुत करती है, खासकर तब जब हर मिनट जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है। राघव एम्बुलेंस बलरामपुर से अंबिकापुर और रायपुर तक अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके। आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता के लिए 9755525100 पर संपर्क किया जा सकता है।
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    बलरामपुर में राघव एम्बुलेंस लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुँचाने के लिए 24x7 इमरजेंसी सेवा प्रदान कर रही है। यह सेवा ऑक्सीजन और दवाइयों जैसी आवश्यक सुविधाओं के साथ एक भरोसेमंद विकल्प प्रस्तुत करती है, खासकर तब जब हर मिनट जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है। राघव एम्बुलेंस बलरामपुर से अंबिकापुर और रायपुर तक अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके। आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता के लिए 9755525100 पर संपर्क किया जा सकता है।
    user_Raghav Sony official
    Raghav Sony official
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जों का मामला गरमाया हुआ है, जिससे आदिवासी समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। ग्राम पंचायत पस्ता और ग्राम बासेन में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-343 के किनारे शासकीय जमीनों पर कथित रूप से धड़ल्ले से मकान बनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी राज्यों से आए लोग यहां निवास कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस गंभीर मामले से अनजान बना हुआ है या अनदेखी कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, एनएच-343 के किनारे तेजी से अवैध कब्जों का खेल चल रहा है और स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट कर जमीनों की खरीद-बिक्री भी खुलेआम की जा रही है। इसी क्रम में, बासेन से सटे सियासरई क्षेत्र में शासकीय भूमि पर पहले कुछ आदिवासी परिवार झोपड़ी बनाकर रहते थे, जिन्हें वन विभाग ने हटाया था और इस संबंध में तहसील कार्यालय राजपुर में प्रकरण भी दर्ज हुआ था। आदिवासी परिवारों का आरोप है कि उन्हें हटाने के बाद, झारखंड से आए कुछ दबंग लोगों ने उसी जमीन पर कब्जा कर लिया। जब स्थानीय आदिवासी परिवारों ने इसका विरोध किया तो उन्हें न्याय नहीं मिला। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि थाना पस्ता में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उलटा उन्हीं पर अपराध कायम कर जेल भेज दिया गया। आदिवासी परिवारों ने प्रशासन पर बाहरी लोगों को संरक्षण देने और स्थानीय निवासियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले से नाराज होकर, आदिवासी परिवारों ने छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर को ज्ञापन सौंपकर सामाजिक हस्तक्षेप और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। श्री कुजूर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे मामले से बलरामपुर कलेक्टर को अवगत कराएंगे और जल्द से जल्द उचित कार्रवाई कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिले के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। बसंत कुजूर ने वन विभाग और राजस्व विभाग से गरीब परिवारों के साथ अन्याय बंद करने और बाहरी लोगों को संरक्षण न देने की मांग की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अक्सर केवल उन्हीं लोगों की बातें सुनते हैं, जो लेन-देन करने में सक्षम होते हैं। श्री कुजूर ने चेतावनी दी है कि आदिवासी पर अत्याचार करना बंद करो अन्यथा उग्र आंदोलन होगा।
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    छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जों का मामला गरमाया हुआ है, जिससे आदिवासी समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। ग्राम पंचायत पस्ता और ग्राम बासेन में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-343 के किनारे शासकीय जमीनों पर कथित रूप से धड़ल्ले से मकान बनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी राज्यों से आए लोग यहां निवास कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस गंभीर मामले से अनजान बना हुआ है या अनदेखी कर रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, एनएच-343 के किनारे तेजी से अवैध कब्जों का खेल चल रहा है और स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट कर जमीनों की खरीद-बिक्री भी खुलेआम की जा रही है। इसी क्रम में, बासेन से सटे सियासरई क्षेत्र में शासकीय भूमि पर पहले कुछ आदिवासी परिवार झोपड़ी बनाकर रहते थे, जिन्हें वन विभाग ने हटाया था और इस संबंध में तहसील कार्यालय राजपुर में प्रकरण भी दर्ज हुआ था।

आदिवासी परिवारों का आरोप है कि उन्हें हटाने के बाद, झारखंड से आए कुछ दबंग लोगों ने उसी जमीन पर कब्जा कर लिया। जब स्थानीय आदिवासी परिवारों ने इसका विरोध किया तो उन्हें न्याय नहीं मिला। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि थाना पस्ता में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उलटा उन्हीं पर अपराध कायम कर जेल भेज दिया गया। आदिवासी परिवारों ने प्रशासन पर बाहरी लोगों को संरक्षण देने और स्थानीय निवासियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप लगाया है।

इस मामले से नाराज होकर, आदिवासी परिवारों ने छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर को ज्ञापन सौंपकर सामाजिक हस्तक्षेप और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। श्री कुजूर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे मामले से बलरामपुर कलेक्टर को अवगत कराएंगे और जल्द से जल्द उचित कार्रवाई कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिले के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं।

बसंत कुजूर ने वन विभाग और राजस्व विभाग से गरीब परिवारों के साथ अन्याय बंद करने और बाहरी लोगों को संरक्षण न देने की मांग की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अक्सर केवल उन्हीं लोगों की बातें सुनते हैं, जो लेन-देन करने में सक्षम होते हैं। श्री कुजूर ने चेतावनी दी है कि आदिवासी पर अत्याचार करना बंद करो अन्यथा उग्र आंदोलन होगा।
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • थाना म्योरपुर क्षेत्र के ग्राम गोविंदपुर के जंगल में एक व्यक्ति का शव मिला है। इस मामले में क्षेत्राधिकारी दुद्धी, श्री राजेश कुमार राय ने अपनी बाइट जारी की है।
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    थाना म्योरपुर क्षेत्र के ग्राम गोविंदपुर के जंगल में एक व्यक्ति का शव मिला है। इस मामले में क्षेत्राधिकारी दुद्धी, श्री राजेश कुमार राय ने अपनी बाइट जारी की है।
    user_Nitesh Kumar
    Nitesh Kumar
    Mandi Agent Mahuli•
    7 hrs ago
  • श्री आदित्य विक्रम बिरला मेमोरियल राज्य स्तरीय जूनियर बालक हैण्डबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 29, 30 और 31 तारीख को रेणुकूट फुटबॉल ग्राउंड में होगी। दर्शकों से इस आयोजन को अवश्य देखने का आग्रह किया गया है।
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    श्री आदित्य विक्रम बिरला मेमोरियल राज्य स्तरीय जूनियर बालक हैण्डबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 29, 30 और 31 तारीख को रेणुकूट फुटबॉल ग्राउंड में होगी। दर्शकों से इस आयोजन को अवश्य देखने का आग्रह किया गया है।
    user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार Dudhi, Sonbhadra•
    17 hrs ago
  • सोनभद्र पुलिस द्वारा राँग साइड ड्राइविंग के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस जागरूकता अभियान के तहत, पुलिस 'सेल्फी स्टेशन/फोटो बूथ' का उपयोग कर लोगों को सचेत कर रही है। इस पहल के संबंध में एएसपी मुख्यालय श्री अनिल कुमार ने अपनी बाइट दी है।
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    सोनभद्र पुलिस द्वारा राँग साइड ड्राइविंग के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस जागरूकता अभियान के तहत, पुलिस 'सेल्फी स्टेशन/फोटो बूथ' का उपयोग कर लोगों को सचेत कर रही है। इस पहल के संबंध में एएसपी मुख्यालय श्री अनिल कुमार ने अपनी बाइट दी है।
    user_Nitesh Kumar
    Nitesh Kumar
    Mandi Agent Mahuli•
    9 hrs ago
  • बलरामपुर पुलिस ने केंद्रीय पुलिस बलों में भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ के फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह दूसरे राज्यों के युवाओं को सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसी केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती कराने के लिए छत्तीसगढ़ के फर्जी निवासी प्रमाण पत्र बनवा रहा था। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब तहसीलदार ने 28 अप्रैल 2026 को थाना कोतवाली बलरामपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ में तैनात कांस्टेबल सुमित ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अपना छत्तीसगढ़ निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। जांच में पता चला कि उसने किसी अन्य व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों में छेड़छाड़ करके ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के ज़रिए आवेदन किया था। इसके बाद पुलिस ने 14 मई 2026 को राजस्थान के धौलपुर निवासी आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर और उसके सहयोगी आकाश सिंह को रायपुर से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विवेक सिंह तोमर ने खुद भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डोंगरगढ़ से छत्तीसगढ़ का निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। वहीं, सह-आरोपी आकाश सिंह ने अपना नाम बदलकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करके बलरामपुर तहसील से निवासी प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। जांच के दौरान, पुलिस ने ओमप्रकाश चंद्रवंशी को भी गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में बताया कि गिरोह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी सिटीजन आईडी बनाकर दस्तावेजों में हेरफेर करता था और ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाता था। पुलिस ने आरोपी के पास से कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 3 से 4 लाख रुपये तक वसूलता था, जबकि दस्तावेज तैयार करने वालों को प्रति व्यक्ति 4 से 5 हजार रुपये दिए जाते थे। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से लगभग 20 से 25 फर्जी निवासी प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर कई गैर-निवासी युवक केंद्रीय सुरक्षा बलों में या तो भर्ती हो चुके हैं या भर्ती की प्रक्रिया में हैं। अब पुलिस संबंधित केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
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    बलरामपुर पुलिस ने केंद्रीय पुलिस बलों में भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ के फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह दूसरे राज्यों के युवाओं को सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसी केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती कराने के लिए छत्तीसगढ़ के फर्जी निवासी प्रमाण पत्र बनवा रहा था।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब तहसीलदार ने 28 अप्रैल 2026 को थाना कोतवाली बलरामपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ में तैनात कांस्टेबल सुमित ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अपना छत्तीसगढ़ निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। जांच में पता चला कि उसने किसी अन्य व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों में छेड़छाड़ करके ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के ज़रिए आवेदन किया था। इसके बाद पुलिस ने 14 मई 2026 को राजस्थान के धौलपुर निवासी आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर और उसके सहयोगी आकाश सिंह को रायपुर से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विवेक सिंह तोमर ने खुद भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डोंगरगढ़ से छत्तीसगढ़ का निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। वहीं, सह-आरोपी आकाश सिंह ने अपना नाम बदलकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करके बलरामपुर तहसील से निवासी प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। जांच के दौरान, पुलिस ने ओमप्रकाश चंद्रवंशी को भी गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में बताया कि गिरोह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी सिटीजन आईडी बनाकर दस्तावेजों में हेरफेर करता था और ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाता था। पुलिस ने आरोपी के पास से कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 3 से 4 लाख रुपये तक वसूलता था, जबकि दस्तावेज तैयार करने वालों को प्रति व्यक्ति 4 से 5 हजार रुपये दिए जाते थे। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से लगभग 20 से 25 फर्जी निवासी प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर कई गैर-निवासी युवक केंद्रीय सुरक्षा बलों में या तो भर्ती हो चुके हैं या भर्ती की प्रक्रिया में हैं। अब पुलिस संबंधित केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
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