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बलरामपुर में राघव एम्बुलेंस लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुँचाने के लिए 24x7 इमरजेंसी सेवा प्रदान कर रही है। यह सेवा ऑक्सीजन और दवाइयों जैसी आवश्यक सुविधाओं के साथ एक भरोसेमंद विकल्प प्रस्तुत करती है, खासकर तब जब हर मिनट जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है। राघव एम्बुलेंस बलरामपुर से अंबिकापुर और रायपुर तक अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके। आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता के लिए 9755525100 पर संपर्क किया जा सकता है।
Raghav Sony official
बलरामपुर में राघव एम्बुलेंस लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुँचाने के लिए 24x7 इमरजेंसी सेवा प्रदान कर रही है। यह सेवा ऑक्सीजन और दवाइयों जैसी आवश्यक सुविधाओं के साथ एक भरोसेमंद विकल्प प्रस्तुत करती है, खासकर तब जब हर मिनट जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है। राघव एम्बुलेंस बलरामपुर से अंबिकापुर और रायपुर तक अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके। आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता के लिए 9755525100 पर संपर्क किया जा सकता है।
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- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में गरीबों के हक का सरकारी चना सड़क किनारे सड़ा हुआ पाया गया है। यह पूरा मामला जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के नीलकंठपुर गांव का है, जहां नीलकंठपुर मोड़ के पास भारी मात्रा में अनाज फेंका गया था। वितरण न होने के कारण यह अनाज खराब हो गया। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने अधिकारियों और राशन दुकान संचालकों पर लापरवाही छिपाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, खाद्य अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि इस प्रकरण में दोषियों पर FIR दर्ज की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- बलरामपुर में राघव एम्बुलेंस लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुँचाने के लिए 24x7 इमरजेंसी सेवा प्रदान कर रही है। यह सेवा ऑक्सीजन और दवाइयों जैसी आवश्यक सुविधाओं के साथ एक भरोसेमंद विकल्प प्रस्तुत करती है, खासकर तब जब हर मिनट जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है। राघव एम्बुलेंस बलरामपुर से अंबिकापुर और रायपुर तक अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके। आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता के लिए 9755525100 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जों का मामला गरमाया हुआ है, जिससे आदिवासी समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। ग्राम पंचायत पस्ता और ग्राम बासेन में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-343 के किनारे शासकीय जमीनों पर कथित रूप से धड़ल्ले से मकान बनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी राज्यों से आए लोग यहां निवास कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस गंभीर मामले से अनजान बना हुआ है या अनदेखी कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, एनएच-343 के किनारे तेजी से अवैध कब्जों का खेल चल रहा है और स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट कर जमीनों की खरीद-बिक्री भी खुलेआम की जा रही है। इसी क्रम में, बासेन से सटे सियासरई क्षेत्र में शासकीय भूमि पर पहले कुछ आदिवासी परिवार झोपड़ी बनाकर रहते थे, जिन्हें वन विभाग ने हटाया था और इस संबंध में तहसील कार्यालय राजपुर में प्रकरण भी दर्ज हुआ था। आदिवासी परिवारों का आरोप है कि उन्हें हटाने के बाद, झारखंड से आए कुछ दबंग लोगों ने उसी जमीन पर कब्जा कर लिया। जब स्थानीय आदिवासी परिवारों ने इसका विरोध किया तो उन्हें न्याय नहीं मिला। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि थाना पस्ता में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उलटा उन्हीं पर अपराध कायम कर जेल भेज दिया गया। आदिवासी परिवारों ने प्रशासन पर बाहरी लोगों को संरक्षण देने और स्थानीय निवासियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले से नाराज होकर, आदिवासी परिवारों ने छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर को ज्ञापन सौंपकर सामाजिक हस्तक्षेप और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। श्री कुजूर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे मामले से बलरामपुर कलेक्टर को अवगत कराएंगे और जल्द से जल्द उचित कार्रवाई कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिले के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। बसंत कुजूर ने वन विभाग और राजस्व विभाग से गरीब परिवारों के साथ अन्याय बंद करने और बाहरी लोगों को संरक्षण न देने की मांग की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अक्सर केवल उन्हीं लोगों की बातें सुनते हैं, जो लेन-देन करने में सक्षम होते हैं। श्री कुजूर ने चेतावनी दी है कि आदिवासी पर अत्याचार करना बंद करो अन्यथा उग्र आंदोलन होगा।2
- सीतापुर में विधायक और तहसीलदार के बीच चल रहे विवाद को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाके में चर्चा तेज़ है, खासकर इसलिए कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तारी से पहले ही वापस कर दिया गया। यह घटना जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद की ओर इशारा कर रही है। इस पूरे मामले पर जनता की ओर से कई तीखे प्रश्न पूछे जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस विवाद की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि गिरफ्तारी की चर्चा के बाद आखिर कार्रवाई क्यों रुक गई, और क्या इस पर कोई राजनीतिक दबाव था। जनता का साफ कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मर्यादा और कानून का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए।2
- गढ़वा जिले के चिनियां थाना क्षेत्र के मसरा जंगल में मिले मानव कंकाल मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक जयमंगल कुमार सिंह को प्रेम प्रसंग के जाल में फंसाकर इस हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। दिनांक 27 मई 2026 को मसरा जंगल में मानव कंकाल मिलने की सूचना पर, गढ़वा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रंका रोहित कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया था। इस टीम में पुलिस निरीक्षक अभिजीत गौतम और चिनिया थाना प्रभारी बिक्कु कुमार रजक सहित कई पुलिस पदाधिकारी और सशस्त्र बल शामिल थे। घटनास्थल की घेराबंदी कर पुलिस ने वहां से कपड़े, मोबाइल, चप्पल और बेल्ट बरामद किए। आसपास के ग्रामीणों से पहचान कराने पर मृतक की शिनाख्त जयमंगल कुमार सिंह के रूप में हुई, जिसके बाद कंकाल को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए रिम्स रांची भेजा गया। तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने इस मामले में सुदामा सिंह और चुरामनी देवी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, प्रेम प्रसंग में फंसाकर चुरामनी देवी और उसके पति ने मिलकर जयमंगल कुमार सिंह की हत्या की साजिश रची थी। इस संबंध में चिनिया थाना कांड संख्या 18/26 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पूरे इलाके में इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सनसनी फैल गई है, जिससे प्रेम जाल में बुलाकर मौत की साजिश का पर्दाफाश हुआ है।1
- झारखंड के कोयला खनन क्षेत्रों में धूल और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के चलते सड़कों की हालत बेहद खराब है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पर्याप्त वृक्षारोपण नहीं किया गया है, और जो पेड़ पहले हरे-भरे थे, वे भी धूल की मोटी परत से काले पड़ चुके हैं। यह सब 'जनहित विकास' के नाम पर हो रहे प्रदूषण और कोयला खदानों के कारण बिगड़ते पर्यावरण की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है।1
- बलरामपुर पुलिस ने केंद्रीय पुलिस बलों में भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ के फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह दूसरे राज्यों के युवाओं को सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसी केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती कराने के लिए छत्तीसगढ़ के फर्जी निवासी प्रमाण पत्र बनवा रहा था। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब तहसीलदार ने 28 अप्रैल 2026 को थाना कोतवाली बलरामपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ में तैनात कांस्टेबल सुमित ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अपना छत्तीसगढ़ निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। जांच में पता चला कि उसने किसी अन्य व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों में छेड़छाड़ करके ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के ज़रिए आवेदन किया था। इसके बाद पुलिस ने 14 मई 2026 को राजस्थान के धौलपुर निवासी आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर और उसके सहयोगी आकाश सिंह को रायपुर से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विवेक सिंह तोमर ने खुद भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डोंगरगढ़ से छत्तीसगढ़ का निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था। वहीं, सह-आरोपी आकाश सिंह ने अपना नाम बदलकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करके बलरामपुर तहसील से निवासी प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। जांच के दौरान, पुलिस ने ओमप्रकाश चंद्रवंशी को भी गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में बताया कि गिरोह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी सिटीजन आईडी बनाकर दस्तावेजों में हेरफेर करता था और ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाता था। पुलिस ने आरोपी के पास से कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 3 से 4 लाख रुपये तक वसूलता था, जबकि दस्तावेज तैयार करने वालों को प्रति व्यक्ति 4 से 5 हजार रुपये दिए जाते थे। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से लगभग 20 से 25 फर्जी निवासी प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर कई गैर-निवासी युवक केंद्रीय सुरक्षा बलों में या तो भर्ती हो चुके हैं या भर्ती की प्रक्रिया में हैं। अब पुलिस संबंधित केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है।2