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तेजी से बदलती दुनिया में जो सीखेगा, वही जीतेगा: मोदी 🇮🇳 तेजी से बदलती दुनिया में जो सीखेगा, वही जीतेगा: मोदी 🇮🇳 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदलती दुनिया और सीखने की जरूरत पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वही आगे बढ़ेगा और जीतेगा, जो समय के साथ नई चीजें सीखने और खुद को बदलने के लिए तैयार रहेगा। यह संदेश युवाओं, विद्यार्थियों और हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो सफलता की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। 👍 वीडियो पसंद आए तो Like करें 🔄 Share जरूर करें 🔔 SBharat News को Subscribe करें 💬 अपनी राय Comment में जरूर बताएं।
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तेजी से बदलती दुनिया में जो सीखेगा, वही जीतेगा: मोदी 🇮🇳 तेजी से बदलती दुनिया में जो सीखेगा, वही जीतेगा: मोदी 🇮🇳 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदलती दुनिया और सीखने की जरूरत पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वही आगे बढ़ेगा और जीतेगा, जो समय के साथ नई चीजें सीखने और खुद को बदलने के लिए तैयार रहेगा। यह संदेश युवाओं, विद्यार्थियों और हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो सफलता की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। 👍 वीडियो पसंद आए तो Like करें 🔄 Share जरूर करें 🔔 SBharat News को Subscribe करें 💬 अपनी राय Comment में जरूर बताएं।
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- तेजी से बदलती दुनिया में जो सीखेगा, वही जीतेगा: मोदी 🇮🇳 तेजी से बदलती दुनिया में जो सीखेगा, वही जीतेगा: मोदी 🇮🇳 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदलती दुनिया और सीखने की जरूरत पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वही आगे बढ़ेगा और जीतेगा, जो समय के साथ नई चीजें सीखने और खुद को बदलने के लिए तैयार रहेगा। यह संदेश युवाओं, विद्यार्थियों और हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो सफलता की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। 👍 वीडियो पसंद आए तो Like करें 🔄 Share जरूर करें 🔔 SBharat News को Subscribe करें 💬 अपनी राय Comment में जरूर बताएं।1
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- आस्था और भक्ति की अनोखी मिसाल: 72 दिनों में दंडवत प्रणाम करते हुए हरिद्वार से गाजियाबाद पहुंचा शिवभक्त कहते हैं कि जब दिल में भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो इंसान के भीतर ऐसी शक्ति जाग जाती है, जिसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं होता। सावन के पवित्र महीने में ऐसी ही आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। शाहदरा निवासी हिमांशु प्रजापति भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए निकले। खास बात यह है कि हिमांशु ने यह यात्रा पैदल चलकर नहीं, बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की। हर कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद वह जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं और फिर उसी तरह अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। इस कठिन और लंबी यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन लगे। रास्ते की तमाम मुश्किलों, थकान और मौसम की चुनौतियों के बावजूद हिमांशु की आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही। हिमांशु की यह यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति और संकल्प को देखकर लोग इसे भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल बता रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हिमांशु दंडवत प्रणाम करते हुए अपने कंधे पर भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस कठिन यात्रा का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना है। हिमांशु की भक्ति यह संदेश देती है कि जब संकल्प मजबूत हो और मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है। कहते हैं कि जब दिल में भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो इंसान के भीतर ऐसी शक्ति जाग जाती है, जिसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं होता। सावन के पवित्र महीने में ऐसी ही आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। शाहदरा निवासी हिमांशु प्रजापति भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए निकले। खास बात यह है कि हिमांशु ने यह यात्रा पैदल चलकर नहीं, बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की। हर कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद वह जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं और फिर उसी तरह अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। इस कठिन और लंबी यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन लगे। रास्ते की तमाम मुश्किलों, थकान और मौसम की चुनौतियों के बावजूद हिमांशु की आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही। हिमांशु की यह यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति और संकल्प को देखकर लोग इसे भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल बता रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हिमांशु दंडवत प्रणाम करते हुए अपने कंधे पर भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस कठिन यात्रा का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना है। हिमांशु की भक्ति यह संदेश देती है कि जब संकल्प मजबूत हो और मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है।1