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पटवारियों ने शुरू की हड़ताल | किसानों का काम लटका : पड़ेगा असर | PV ऐप सत्यपान से परेशान पटवारी ​सारंगढ़ - राजस्व पटवारी संघ ने जिला मुख्यालय तहसील कार्यालय के पास 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल धरने में बैठे हैं। पटवारियों ने कहा पटवारी सत्यापन ऐप में आ रही तकनीकी समस्याओं, पटवारियों पर की जा रही दंडात्मक कार्रवाई और वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण न होने पर गहरा आक्रोश जताया है। ​PV ऐप की तकनीकी कमियां और निलंबन का विरोध ​पटवारी संघ का कहना है कि PV ऐप के माध्यम से फसल के भौतिक सत्यापन कार्य में लगातार व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। इसके बारे में पूर्व में भी ज्ञापन देकर शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा चुका था, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। ​संघ ने आरोप लगाया कि ऐप का बहिष्कार करने पर बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद जिलों में संघ पदाधिकारियों एवं पटवारियों का स्थानांतरण, निलंबन और कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी द्वेषपूर्ण कार्रवाइयां की जा रही हैं। संघ ने इन सभी प्रतिकूल कार्रवाइयों को तत्काल शून्य (निरस्त) करने की मांग की है। ​अन्य शासकीय कार्यों की अनदेखी का आरोप ​पटवारियों का कहना है कि वे डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, बकेट क्लेम, जनगणना (प्रथम चरण), लघु सिंचाई संगणना, एनएच सर्वे, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, स्वामित्व योजना, सेवा संकल्प शिविर और प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल PV ऐप को लेकर कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है। ​मुख्य मांगें: ​PV ऐप की तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए। ​बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद में पटवारियों पर की गई निलंबन, ट्रांसफर व नोटिस की कार्रवाई तत्काल रद्द हो। ​वर्षों से लंबित वेतन विसंगति को दूर किया जाए तथा पदोन्नति का अधिकार दिया जाए। ​वेतन विसंगति एवं पदोन्नति को अटकाने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। पटवारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर त्वरित सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो जिले के सभी पटवारी अनिश्चित कालीन आंदोलन करेंगे। हड़ताल के कारण राजस्व एवं अन्य शासकीय कार्यों में होने वाली किसी भी असुविधा और व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

6 hrs ago
user_पत्रकारिकता
पत्रकारिकता
Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
6 hrs ago

पटवारियों ने शुरू की हड़ताल | किसानों का काम लटका : पड़ेगा असर | PV ऐप सत्यपान से परेशान पटवारी ​सारंगढ़ - राजस्व पटवारी संघ ने जिला मुख्यालय तहसील कार्यालय के पास 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल धरने में बैठे हैं। पटवारियों ने कहा पटवारी सत्यापन ऐप में आ रही तकनीकी समस्याओं, पटवारियों पर की जा रही दंडात्मक कार्रवाई और वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण न होने पर गहरा आक्रोश जताया है। ​PV ऐप की तकनीकी कमियां और निलंबन का विरोध ​पटवारी संघ का कहना है कि PV ऐप के माध्यम से फसल के भौतिक सत्यापन कार्य में लगातार व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। इसके बारे में पूर्व में भी ज्ञापन देकर शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा चुका था, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। ​संघ ने आरोप लगाया कि ऐप का बहिष्कार करने पर बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद जिलों में संघ पदाधिकारियों एवं पटवारियों का स्थानांतरण, निलंबन और कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी द्वेषपूर्ण कार्रवाइयां की जा रही हैं। संघ ने इन सभी प्रतिकूल कार्रवाइयों को तत्काल शून्य (निरस्त) करने की मांग की है। ​अन्य शासकीय कार्यों की अनदेखी का आरोप ​पटवारियों का कहना है कि वे डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, बकेट क्लेम, जनगणना (प्रथम चरण), लघु सिंचाई संगणना, एनएच सर्वे, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, स्वामित्व योजना, सेवा संकल्प शिविर और प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल PV ऐप को लेकर कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है। ​मुख्य मांगें: ​PV ऐप की तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए। ​बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद में पटवारियों पर की गई निलंबन, ट्रांसफर व नोटिस की कार्रवाई तत्काल रद्द हो। ​वर्षों से लंबित वेतन विसंगति को दूर किया जाए तथा पदोन्नति का अधिकार दिया जाए। ​वेतन विसंगति एवं पदोन्नति को अटकाने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। पटवारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर त्वरित सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो जिले के सभी पटवारी अनिश्चित कालीन आंदोलन करेंगे। हड़ताल के कारण राजस्व एवं अन्य शासकीय कार्यों में होने वाली किसी भी असुविधा और व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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    पटवारियों ने शुरू की हड़ताल | किसानों का काम लटका : पड़ेगा असर | PV ऐप सत्यपान से परेशान पटवारी
​सारंगढ़ - राजस्व पटवारी संघ ने जिला मुख्यालय तहसील कार्यालय के पास 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल धरने में बैठे हैं। पटवारियों ने कहा पटवारी सत्यापन ऐप में आ रही तकनीकी समस्याओं, पटवारियों पर की जा रही दंडात्मक कार्रवाई और वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण न होने पर गहरा आक्रोश जताया है।  
​PV ऐप की तकनीकी कमियां और निलंबन का विरोध
​पटवारी संघ का कहना है कि PV ऐप के माध्यम से फसल के भौतिक सत्यापन कार्य में लगातार व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। इसके बारे में पूर्व में भी ज्ञापन देकर शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा चुका था, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।  
​संघ ने आरोप लगाया कि ऐप का बहिष्कार करने पर बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद जिलों में संघ पदाधिकारियों एवं पटवारियों का स्थानांतरण, निलंबन और कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी द्वेषपूर्ण कार्रवाइयां की जा रही हैं। संघ ने इन सभी प्रतिकूल कार्रवाइयों को तत्काल शून्य (निरस्त) करने की मांग की है।  
​अन्य शासकीय कार्यों की अनदेखी का आरोप ​पटवारियों का कहना है कि वे डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, बकेट क्लेम, जनगणना (प्रथम चरण), लघु सिंचाई संगणना, एनएच सर्वे, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, स्वामित्व योजना, सेवा संकल्प शिविर और प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल PV ऐप को लेकर कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है।  
​मुख्य मांगें:
​PV ऐप की तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए।  
​बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और महासमुंद में पटवारियों पर की गई निलंबन, ट्रांसफर व नोटिस की कार्रवाई तत्काल रद्द हो।  
​वर्षों से लंबित वेतन विसंगति को दूर किया जाए तथा पदोन्नति का अधिकार दिया जाए।  
​वेतन विसंगति एवं पदोन्नति को अटकाने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।  
पटवारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर त्वरित सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो जिले के सभी पटवारी अनिश्चित कालीन आंदोलन करेंगे। हड़ताल के कारण राजस्व एवं अन्य शासकीय कार्यों में होने वाली किसी भी असुविधा और व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • कलेक्टर जयश्री जैन ने ली समय-सीमा की बैठक, लंबित आवेदनों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश, सेवा सेतु शिविर के आवेदनों, पारस पोर्टल और सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की की समीक्षा, कलेक्टर जयश्री जैन ने ली समय-सीमा की बैठक, लंबित आवेदनों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश, सेवा सेतु शिविर के आवेदनों, पारस पोर्टल और सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की की समीक्षा, कलेक्टर जयश्री जैन ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा सेतु शिविरों में प्राप्त आवेदनों का तेजी से और गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को पारस पोर्टल पर योजनाओं की प्रगति समय पर अपडेट करने तथा सीएम हेल्पलाइन 1076, सेवा सेतु एप, जनदर्शन और जनचौपाल में प्राप्त शिकायतों एवं आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं बरतने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करते हुए शेष कार्य 31 अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का प्रचार-प्रसार बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने को कहा। इसके साथ ही जाति प्रमाण पत्र बनाने के कार्य में तेजी लाने, जल जीवन मिशन के बेहतर क्रियान्वयन तथा ई-ऑफिस के माध्यम से विभागीय कार्यों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग की एचपीवी वैक्सीनेशन, निक्षय पोषण योजना और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा लोक सेवा गारंटी, लंबित पेंशन प्रकरण, आयुष्मान योजना, पीएम आवास योजना शहरी तथा राजस्व विभाग के नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन और अन्य प्रकरणों की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में पंचायत, लोक निर्माण, शिक्षा, विद्युत, खाद्य, सहकारिता, नगरीय प्रशासन, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास तथा पशु चिकित्सा विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को कार्ययोजना बनाकर निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और योजनाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ वासु जैन, अपर कलेक्टर बीरेंद्र लकड़ा, अपर कलेक्टर के एस पैकरा, डिप्टी कलेक्टर प्रीतेश राजपूत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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    कलेक्टर जयश्री जैन ने ली समय-सीमा की बैठक, लंबित आवेदनों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश,

सेवा सेतु शिविर के आवेदनों, पारस पोर्टल और सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की की समीक्षा,
कलेक्टर जयश्री जैन ने ली समय-सीमा की बैठक, लंबित आवेदनों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश,
सेवा सेतु शिविर के आवेदनों, पारस पोर्टल और सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की की समीक्षा,
कलेक्टर जयश्री जैन ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा सेतु शिविरों में प्राप्त आवेदनों का तेजी से और गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को पारस पोर्टल पर योजनाओं की प्रगति समय पर अपडेट करने तथा सीएम हेल्पलाइन 1076, सेवा सेतु एप, जनदर्शन और जनचौपाल में प्राप्त शिकायतों एवं आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं बरतने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करते हुए शेष कार्य 31 अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का प्रचार-प्रसार बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने को कहा। इसके साथ ही जाति प्रमाण पत्र बनाने के कार्य में तेजी लाने, जल जीवन मिशन के बेहतर क्रियान्वयन तथा ई-ऑफिस के माध्यम से विभागीय कार्यों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग की एचपीवी वैक्सीनेशन, निक्षय पोषण योजना और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा लोक सेवा गारंटी, लंबित पेंशन प्रकरण, आयुष्मान योजना, पीएम आवास योजना शहरी तथा राजस्व विभाग के नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन और अन्य प्रकरणों की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में पंचायत, लोक निर्माण, शिक्षा, विद्युत, खाद्य, सहकारिता, नगरीय प्रशासन, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास तथा पशु चिकित्सा विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को कार्ययोजना बनाकर निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और योजनाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ वासु जैन, अपर कलेक्टर बीरेंद्र लकड़ा, अपर कलेक्टर के एस पैकरा, डिप्टी कलेक्टर प्रीतेश राजपूत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Churamani upadhyay
    Churamani upadhyay
    Local News Reporter डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
  • क्षेत्र के विकास को गति देते हुए आज विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया।
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    क्षेत्र के विकास को गति देते हुए आज विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया।
    user_Chhattisgarh
    Chhattisgarh
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • डभरा में नवरात्रि की धूम, नगर में सजे मां दुर्गा के दरबार, गरबा-डांडिया और भक्ति गीतों पर नृत्य प्रतियोगिता के साथ दशहरा पर होगा 45 से 50 फीट ऊंचे रावण का दहन, डभरा में नवरात्रि की धूम, नगर में सजे मां दुर्गा के दरबार, गरबा-डांडिया और भक्ति गीतों पर नृत्य प्रतियोगिता के साथ दशहरा पर होगा 45 से 50 फीट ऊंचे रावण का दहन, शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर सक्ती जिले के नगर पंचायत डभरा में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। नगर के विभिन्न वार्डों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित की गई हैं। आकर्षक ढंग से सजाए गए दुर्गा पंडाल और माता रानी के मनमोहक स्वरूप नवरात्रि की रौनक बढ़ा रहे हैं। पूरा नगर इन दिनों नवरात्रि के उल्लास में डूबा हुआ है। नगर के अलग-अलग वार्डों में मां दुर्गा के दरबार सजाए गए हैं, जहां माता रानी के विभिन्न स्वरूपों की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। नवरात्रि के अवसर पर नगर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर भी उत्साह बना हुआ है। नवरात्रि के दौरान डभरा में दो स्थानों पर अलग-अलग दिनों में गरबा नृत्य का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही 9 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए भक्ति गीतों पर आधारित नृत्य प्रतियोगिता और डांडिया नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। वहीं, श्रद्धा दर्शन द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही लोक गायिका प्रीति रात्रे भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से आयोजन में समां बांधेंगी। धार्मिक गीतों, गरबा और डांडिया के साथ नवरात्रि पर्व की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है। नवरात्रि के साथ ही नगर में दशहरा पर्व की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इस बार नगर पंचायत डभरा द्वारा लगभग 45 से 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण कराया जा रहा है। कारीगर पुतले को तैयार करने में जुटे हुए हैं। डभरा में दशहरा पर्व पर होने वाला रावण दहन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है। इस आयोजन को देखने के लिए नगर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में इस बार भी दशहरा पर्व को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना, गरबा-डांडिया, भक्ति गीतों पर नृत्य प्रतियोगिताओं और कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ डभरा में दशहरा पर्व की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक आयोजनों के संग नगर में त्योहारों की रौनक देखने को मिल रही है।
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    डभरा में नवरात्रि की धूम, नगर में सजे मां दुर्गा के दरबार, गरबा-डांडिया और भक्ति गीतों पर नृत्य प्रतियोगिता के साथ दशहरा पर होगा 45 से 50 फीट ऊंचे रावण का दहन,
डभरा में नवरात्रि की धूम, नगर में सजे मां दुर्गा के दरबार, गरबा-डांडिया और भक्ति गीतों पर नृत्य प्रतियोगिता के साथ दशहरा पर होगा 45 से 50 फीट ऊंचे रावण का दहन,
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर सक्ती जिले के नगर पंचायत डभरा में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। नगर के विभिन्न वार्डों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित की गई हैं। आकर्षक ढंग से सजाए गए दुर्गा पंडाल और माता रानी के मनमोहक स्वरूप नवरात्रि की रौनक बढ़ा रहे हैं। पूरा नगर इन दिनों नवरात्रि के उल्लास में डूबा हुआ है।
नगर के अलग-अलग वार्डों में मां दुर्गा के दरबार सजाए गए हैं, जहां माता रानी के विभिन्न स्वरूपों की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। नवरात्रि के अवसर पर नगर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर भी उत्साह बना हुआ है।
नवरात्रि के दौरान डभरा में दो स्थानों पर अलग-अलग दिनों में गरबा नृत्य का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही 9 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए भक्ति गीतों पर आधारित नृत्य प्रतियोगिता और डांडिया नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
वहीं, श्रद्धा दर्शन द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही लोक गायिका प्रीति रात्रे भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से आयोजन में समां बांधेंगी। धार्मिक गीतों, गरबा और डांडिया के साथ नवरात्रि पर्व की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।
नवरात्रि के साथ ही नगर में दशहरा पर्व की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इस बार नगर पंचायत डभरा द्वारा लगभग 45 से 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण कराया जा रहा है। कारीगर पुतले को तैयार करने में जुटे हुए हैं।
डभरा में दशहरा पर्व पर होने वाला रावण दहन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है। इस आयोजन को देखने के लिए नगर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में इस बार भी दशहरा पर्व को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है।
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना, गरबा-डांडिया, भक्ति गीतों पर नृत्य प्रतियोगिताओं और कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ डभरा में दशहरा पर्व की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक आयोजनों के संग नगर में त्योहारों की रौनक देखने को मिल रही है।
    user_Lala upadhyay
    Lala upadhyay
    Local News Reporter Sakti, Chhattisgarh•
    5 hrs ago
  • एक असहाय परिवार को संत रामपाल जी महाराज जी ने 8 लाख की बड़ी मदद की
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    एक असहाय परिवार को संत रामपाल जी महाराज जी ने 8 लाख की बड़ी मदद की
    user_MANNU SIDAR ji
    MANNU SIDAR ji
    Farmer बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • रायगढ़ में हाथी शावकों की मौत का सिलसिला: 10 माह में 11 जानें गईं, वन्यजीव संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल जंगल से जलस्रोतों तक मौत का मंजर; आखिर किसकी जवाबदेही तय होगी? वन विभाग की निगरानी, वन्यजीव प्रबंधन और सरकार की नीतियों पर उठे सवाल रायगढ़, । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को उजागर कर रही हैं। महज 10 माह के भीतर 11 हाथी शावकों की मौत की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। कभी चट्टान में फंसकर, कभी नदी में डूबकर और कभी तालाब में मृत मिले शावकों की ये घटनाएं एक बुनियादी सवाल खड़ा करती हैं—क्या हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? हाथी जैसे संवेदनशील और संरक्षित वन्यजीव की संतानों की लगातार मौतें केवल प्राकृतिक घटनाओं का आंकड़ा मानकर नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। प्रत्येक घटना की परिस्थितियों, संभावित कारणों और विभागीय कार्रवाई की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि समय रहते जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और प्रभावी निगरानी की गई होती, तो क्या इनमें से कुछ मौतों को रोका जा सकता था? इस सवाल का जवाब अब वन विभाग और राज्य सरकार को देना चाहिए। घटनाओं की समयरेखा: जनवरी से अक्टूबर तक 11 शावकों की मौत उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल से जुड़े क्षेत्रों में हाथी शावकों की मौत की घटनाएं इस प्रकार सामने आईं— 27 जनवरी: घरघोड़ा रेंज के कमतरा बीट में चट्टान में फंसकर एक हाथी शावक की मौत। 22 फरवरी: तमनार रेंज के झिंगोल परिसर में एक हाथी शावक की मौत। 11 मार्च: घरघोड़ा रेंज की कुरकुट नदी में दो हाथी शावकों के शव मिले। 23 अप्रैल: लैलूंगा रेंज के आमापाली में एक हाथी शावक की मौत। 8 मई: छाल रेंज के घोघरा डेम में एक हाथी शावक की मौत। 11 मई: छाल रेंज के तरकेला गांव में एक हाथी शावक की मौत। 22 मई की रात: छाल रेंज के पुसल्दा गांव में तालाब में नहाते समय एक हाथी शावक की मौत। 1 जून: खरसिया रेंज के गुरदा संगम में मांड नदी में डूबने से एक शावक की मौत। 30 सितंबर: तमनार रेंज के छैडोरिया गांव के तालाब में एक शावक का शव मिला। 13 अक्टूबर की सुबह: छाल रेंज के सारसमार गांव के खेत में एक हाथी शावक का शव मिला। इन घटनाओं का क्रम वन्यजीव संरक्षण के मौजूदा इंतजामों की समीक्षा की मांग करता है। हालांकि, सभी मौतों के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच से होना जरूरी है। सवाल वन विभाग से: हादसों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम? हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में वन विभाग की जिम्मेदारी केवल हाथियों की मौजूदगी का रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं है। संभावित खतरे वाले जलस्रोतों, नदी-नालों, दलदली स्थानों और मानव बस्तियों से सटे संवेदनशील इलाकों की पहचान करना, नियमित गश्त करना तथा हाथियों के झुंडों की गतिविधियों पर निगरानी रखना भी संरक्षण व्यवस्था का अहम हिस्सा है। यदि किसी क्षेत्र में बार-बार शावकों की मौत हो रही है, तो यह जांचना आवश्यक है कि वहां पहले से किसी जोखिम की पहचान की गई थी या नहीं। क्या संबंधित रेंज में नियमित निगरानी हो रही थी? क्या हाथियों के झुंडों की आवाजाही का रिकॉर्ड रखा गया? क्या जोखिम वाले जलाशयों और अन्य स्थानों के संबंध में कोई विशेष सुरक्षा योजना बनाई गई थी? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए। केवल घटनास्थल पर पहुंचकर शव बरामद करना और जांच की औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं है। संरक्षण व्यवस्था की असली परीक्षा मौत के बाद की कार्रवाई में नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने की तैयारी में होती है। सरकार भी जवाबदेही से बच नहीं सकती वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी केवल स्थानीय वनकर्मियों या किसी एक रेंज अधिकारी तक सीमित नहीं है। इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षित अमला, आधुनिक निगरानी व्यवस्था, संसाधन, वैज्ञानिक प्रबंधन और स्पष्ट जवाबदेही जरूरी है। ये व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है। यदि लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था प्रभावी नहीं है, तो इसकी समीक्षा उच्चस्तर पर होनी चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हाथियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए, उन पर कितना अमल हुआ और उनकी प्रभावशीलता का आकलन कैसे किया गया। यह भी जांच का विषय है कि क्या वन मंडलों के बीच समन्वय पर्याप्त है और क्या मैदानी कर्मचारियों को जोखिम की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। मौतों की वजह क्या है, और क्या इन्हें रोका जा सकता था? इन घटनाओं के आधार पर सभी मौतों को सीधे विभागीय लापरवाही का परिणाम घोषित करना उचित नहीं होगा। हाथी शावकों की मौत के पीछे प्राकृतिक दुर्घटना, भूभाग की स्थिति, पानी की गहराई, झुंड से बिछड़ना, बीमारी या अन्य कारण हो सकते हैं। लेकिन यही परिस्थितियां वैज्ञानिक जांच और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता को और बढ़ाती हैं। विशेष रूप से नदी और तालाबों में मिले शावकों के शवों के मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि मौत वास्तव में डूबने से हुई या कोई अन्य कारण था। इसी तरह खेत में मिले शव की मौत का कारण भी पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के आधार पर स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि जांच में लापरवाही, पूर्व चेतावनी की अनदेखी या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, यदि मौतें अप्रत्याशित प्राकृतिक दुर्घटनाओं के कारण हुईं, तब भी यह आकलन आवश्यक है कि भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है। अब जरूरी है जवाबदेही और ठोस कार्रवाई रायगढ़ जिले में हाथी शावकों की मौत की इन घटनाओं को अलग-अलग हादसों के रूप में देखने के बजाय समग्र वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। इसके लिए कुछ कदम तत्काल जरूरी हैं— स्वतंत्र जांच: सभी 11 बताई गई मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु के कारण और घटनास्थल की परिस्थितियों की समीक्षा की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान: नदी, तालाब, डैम और अन्य जोखिम वाले स्थानों का वैज्ञानिक आकलन कर निगरानी बढ़ाई जाए। विभागीय जवाबदेही: जहां लापरवाही के प्रमाण मिलें, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो। सार्वजनिक रिपोर्ट: वन विभाग घटनावार जांच की स्थिति, उठाए गए कदम और भविष्य की रोकथाम योजना सार्वजनिक करे। सरकारी समीक्षा: राज्य सरकार वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में प्रभावित वन क्षेत्रों की संरक्षण व्यवस्था का ऑडिट कराए। सबसे बड़ा सवाल: हाथियों की सुरक्षा के दावे जमीन पर कितने कारगर? रायगढ़ और धर्मजयगढ़ के वन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी के साथ आती है। ऐसे में शावकों की मौत की लगातार सामने आती घटनाएं इस व्यवस्था के परिणामों पर सवाल उठाती हैं। संरक्षण के दावे तभी सार्थक होंगे, जब उनके साथ प्रभावी निगरानी, पारदर्शी जांच और जवाबदेही भी दिखाई दे। 11 हाथी शावकों की मौत का दावा महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की मांग है। अब जरूरी है कि वन विभाग केवल मौतों का रिकॉर्ड रखने तक सीमित न रहे और राज्य सरकार भी जवाबदेही तय करने से पीछे न हटे। आखिरकार, सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हाथी शावक क्यों मरे; सवाल यह भी है कि उनकी सुरक्षा के लिए क्या किया गया, क्या नहीं किया गया और भविष्य में ऐसी मौतों को रोकने के लिए कौन जिम्मेदारी लेगा?
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    रायगढ़ में हाथी शावकों की मौत का सिलसिला: 10 माह में 11 जानें गईं, वन्यजीव संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल
जंगल से जलस्रोतों तक मौत का मंजर; आखिर किसकी जवाबदेही तय होगी? वन विभाग की निगरानी, वन्यजीव प्रबंधन और सरकार की नीतियों पर उठे सवाल
रायगढ़, । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को उजागर कर रही हैं। महज 10 माह के भीतर 11 हाथी शावकों की मौत की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। कभी चट्टान में फंसकर, कभी नदी में डूबकर और कभी तालाब में मृत मिले शावकों की ये घटनाएं एक बुनियादी सवाल खड़ा करती हैं—क्या हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
हाथी जैसे संवेदनशील और संरक्षित वन्यजीव की संतानों की लगातार मौतें केवल प्राकृतिक घटनाओं का आंकड़ा मानकर नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। प्रत्येक घटना की परिस्थितियों, संभावित कारणों और विभागीय कार्रवाई की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि समय रहते जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और प्रभावी निगरानी की गई होती, तो क्या इनमें से कुछ मौतों को रोका जा सकता था? इस सवाल का जवाब अब वन विभाग और राज्य सरकार को देना चाहिए।
घटनाओं की समयरेखा: जनवरी से अक्टूबर तक 11 शावकों की मौत
उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल से जुड़े क्षेत्रों में हाथी शावकों की मौत की घटनाएं इस प्रकार सामने आईं—
27 जनवरी: घरघोड़ा रेंज के कमतरा बीट में चट्टान में फंसकर एक हाथी शावक की मौत।
22 फरवरी: तमनार रेंज के झिंगोल परिसर में एक हाथी शावक की मौत।
11 मार्च: घरघोड़ा रेंज की कुरकुट नदी में दो हाथी शावकों के शव मिले।
23 अप्रैल: लैलूंगा रेंज के आमापाली में एक हाथी शावक की मौत।
8 मई: छाल रेंज के घोघरा डेम में एक हाथी शावक की मौत।
11 मई: छाल रेंज के तरकेला गांव में एक हाथी शावक की मौत।
22 मई की रात: छाल रेंज के पुसल्दा गांव में तालाब में नहाते समय एक हाथी शावक की मौत।
1 जून: खरसिया रेंज के गुरदा संगम में मांड नदी में डूबने से एक शावक की मौत।
30 सितंबर: तमनार रेंज के छैडोरिया गांव के तालाब में एक शावक का शव मिला।
13 अक्टूबर की सुबह: छाल रेंज के सारसमार गांव के खेत में एक हाथी शावक का शव मिला।
इन घटनाओं का क्रम वन्यजीव संरक्षण के मौजूदा इंतजामों की समीक्षा की मांग करता है। हालांकि, सभी मौतों के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच से होना जरूरी है।
सवाल वन विभाग से: हादसों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम?
हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में वन विभाग की जिम्मेदारी केवल हाथियों की मौजूदगी का रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं है। संभावित खतरे वाले जलस्रोतों, नदी-नालों, दलदली स्थानों और मानव बस्तियों से सटे संवेदनशील इलाकों की पहचान करना, नियमित गश्त करना तथा हाथियों के झुंडों की गतिविधियों पर निगरानी रखना भी संरक्षण व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
यदि किसी क्षेत्र में बार-बार शावकों की मौत हो रही है, तो यह जांचना आवश्यक है कि वहां पहले से किसी जोखिम की पहचान की गई थी या नहीं। क्या संबंधित रेंज में नियमित निगरानी हो रही थी? क्या हाथियों के झुंडों की आवाजाही का रिकॉर्ड रखा गया? क्या जोखिम वाले जलाशयों और अन्य स्थानों के संबंध में कोई विशेष सुरक्षा योजना बनाई गई थी?
इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए। केवल घटनास्थल पर पहुंचकर शव बरामद करना और जांच की औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं है। संरक्षण व्यवस्था की असली परीक्षा मौत के बाद की कार्रवाई में नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने की तैयारी में होती है।
सरकार भी जवाबदेही से बच नहीं सकती
वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी केवल स्थानीय वनकर्मियों या किसी एक रेंज अधिकारी तक सीमित नहीं है। इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षित अमला, आधुनिक निगरानी व्यवस्था, संसाधन, वैज्ञानिक प्रबंधन और स्पष्ट जवाबदेही जरूरी है। ये व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है।
यदि लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था प्रभावी नहीं है, तो इसकी समीक्षा उच्चस्तर पर होनी चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हाथियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए, उन पर कितना अमल हुआ और उनकी प्रभावशीलता का आकलन कैसे किया गया।
यह भी जांच का विषय है कि क्या वन मंडलों के बीच समन्वय पर्याप्त है और क्या मैदानी कर्मचारियों को जोखिम की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं।
मौतों की वजह क्या है, और क्या इन्हें रोका जा सकता था?
इन घटनाओं के आधार पर सभी मौतों को सीधे विभागीय लापरवाही का परिणाम घोषित करना उचित नहीं होगा। हाथी शावकों की मौत के पीछे प्राकृतिक दुर्घटना, भूभाग की स्थिति, पानी की गहराई, झुंड से बिछड़ना, बीमारी या अन्य कारण हो सकते हैं। लेकिन यही परिस्थितियां वैज्ञानिक जांच और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता को और बढ़ाती हैं।
विशेष रूप से नदी और तालाबों में मिले शावकों के शवों के मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि मौत वास्तव में डूबने से हुई या कोई अन्य कारण था। इसी तरह खेत में मिले शव की मौत का कारण भी पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के आधार पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
यदि जांच में लापरवाही, पूर्व चेतावनी की अनदेखी या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, यदि मौतें अप्रत्याशित प्राकृतिक दुर्घटनाओं के कारण हुईं, तब भी यह आकलन आवश्यक है कि भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है।
अब जरूरी है जवाबदेही और ठोस कार्रवाई
रायगढ़ जिले में हाथी शावकों की मौत की इन घटनाओं को अलग-अलग हादसों के रूप में देखने के बजाय समग्र वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। इसके लिए कुछ कदम तत्काल जरूरी हैं—
स्वतंत्र जांच: सभी 11 बताई गई मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु के कारण और घटनास्थल की परिस्थितियों की समीक्षा की जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान: नदी, तालाब, डैम और अन्य जोखिम वाले स्थानों का वैज्ञानिक आकलन कर निगरानी बढ़ाई जाए।
विभागीय जवाबदेही: जहां लापरवाही के प्रमाण मिलें, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो।
सार्वजनिक रिपोर्ट: वन विभाग घटनावार जांच की स्थिति, उठाए गए कदम और भविष्य की रोकथाम योजना सार्वजनिक करे।
सरकारी समीक्षा: राज्य सरकार वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में प्रभावित वन क्षेत्रों की संरक्षण व्यवस्था का ऑडिट कराए।
सबसे बड़ा सवाल: हाथियों की सुरक्षा के दावे जमीन पर कितने कारगर?
रायगढ़ और धर्मजयगढ़ के वन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी के साथ आती है। ऐसे में शावकों की मौत की लगातार सामने आती घटनाएं इस व्यवस्था के परिणामों पर सवाल उठाती हैं। संरक्षण के दावे तभी सार्थक होंगे, जब उनके साथ प्रभावी निगरानी, पारदर्शी जांच और जवाबदेही भी दिखाई दे।
11 हाथी शावकों की मौत का दावा महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की मांग है। अब जरूरी है कि वन विभाग केवल मौतों का रिकॉर्ड रखने तक सीमित न रहे और राज्य सरकार भी जवाबदेही तय करने से पीछे न हटे। आखिरकार, सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हाथी शावक क्यों मरे; सवाल यह भी है कि उनकी सुरक्षा के लिए क्या किया गया, क्या नहीं किया गया और भविष्य में ऐसी मौतों को रोकने के लिए कौन जिम्मेदारी लेगा?
    user_नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
  • दुर्ग में वाहन और मकानों में चोरी का खुलासा,दो आरोपी गिरफ्तार; दो विधि से संघर्षरत बालक भी शामिल। दुर्ग में वाहन और मकानों में चोरी का खुलासा,दो आरोपी गिरफ्तार; दो विधि से संघर्षरत बालक भी शामिल।
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    दुर्ग में वाहन और मकानों में चोरी का खुलासा,दो आरोपी गिरफ्तार; दो विधि से संघर्षरत बालक भी शामिल।
दुर्ग में वाहन और मकानों में चोरी का खुलासा,दो आरोपी गिरफ्तार; दो विधि से संघर्षरत बालक भी शामिल।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • लो अब तकनिकी सहायक भी बैठे धरने पर | कहा मोदी की गारंटी का गारंटी नहीं | गांवो मे विकास कार्य ठप ​सारंगढ़ - छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेशभर के तकनीकी सहायक कर्मचारी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल एवं धरना-प्रदर्शन के रहे। आज सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय के मेला ग्राउंड में तकनीकी सहायक लोग निम्न मांगो को लेकर धरने पर बैठे है ​प्रमुख मांगें: ​समायोजन एवं नियमित पद सृजन: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत 'विकसित भारत जी राम जी' (VB GRAM G) योजना में कार्यरत समस्त तकनीकी सहायकों का नियमित पद सृजित करते हुए समायोजन किया जाए। ​स्थायीकरण नियमावली लागू हो: नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक समस्त तकनीकी सहायकों की सेवा शर्तें पंचायत विभाग में कार्यरत ग्राम पंचायत सचिवों की भांति 'स्थायीकरण नियमावली' के तहत तत्काल लागू की जाएं। ​पदनाम में परिवर्तन: 'विकसित भारत जी राम जी' में कार्यरत तकनीकी सहायकों का पदनाम बदलकर "कनिष्ठ अभियंता" (VB GRAM G) किया जाए। ​तकनीकी सहायकों की मुख्य तकनीकी सहायको ने अधिकारियों के समक्ष अपनी विभिन्न व्यावहारिक एवं मानसिक समस्याओं को विस्तार से रखा है: ​मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न: मांग आधारित योजना को लक्ष्य आधारित बनाकर कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। मूल दायित्वों के अतिरिक्त अन्य कार्यों की जिम्मेदारी देकर उत्पीड़न किया जा रहा है। ​प्रधानमंत्री आवास योजना की अनुचित जवाबदेही: राज्य स्तर पर पर्याप्त सेटअप न होने के बावजूद जिला व जनपद स्तर पर तकनीकी सहायकों को ही शत-प्रतिशत आवास पूर्ण कराने की जिम्मेदारी देकर कार्रवाई, वेतन काटने या सेवा से पृथक करने की धमकी दी जाती है। ​समय पर वेतन न मिलना: महंगाई के इस दौर में समय पर वेतन भुगतान नहीं हो रहा है। कभी 2 माह, तो कभी 3-4 माह तक वेतन लंबित रहता है। इसके अलावा 3 साल बीत जाने के बाद भी वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिला है। ​ ​33 जिलों में रहेगा प्रभाव: ​संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के समस्त 33 जिलों के राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर यह सांकेतिक हड़ताल रहेगी। यदि समय रहते प्रशासन व सरकार द्वारा उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर समाधान नहीं निकाला गया, तो कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ सकता है।
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    लो अब तकनिकी सहायक भी बैठे धरने पर | कहा मोदी की गारंटी का गारंटी नहीं | गांवो मे विकास कार्य ठप
​सारंगढ़ - छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेशभर के तकनीकी सहायक कर्मचारी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल एवं धरना-प्रदर्शन के रहे। आज सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय के मेला ग्राउंड में तकनीकी सहायक लोग निम्न मांगो को लेकर  धरने पर  बैठे है 
​प्रमुख मांगें:
​समायोजन एवं नियमित पद सृजन: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत 'विकसित भारत जी राम जी' (VB GRAM G) योजना में कार्यरत समस्त तकनीकी सहायकों का नियमित पद सृजित करते हुए समायोजन किया जाए।  
​स्थायीकरण नियमावली लागू हो: नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक समस्त तकनीकी सहायकों की सेवा शर्तें पंचायत विभाग में कार्यरत ग्राम पंचायत सचिवों की भांति 'स्थायीकरण नियमावली' के तहत तत्काल लागू की जाएं।  
​पदनाम में परिवर्तन: 'विकसित भारत जी राम जी' में कार्यरत तकनीकी सहायकों का पदनाम बदलकर "कनिष्ठ अभियंता" (VB GRAM G) किया जाए।  
​तकनीकी सहायकों की मुख्य 
तकनीकी सहायको ने अधिकारियों के समक्ष अपनी विभिन्न व्यावहारिक एवं मानसिक समस्याओं को विस्तार से रखा है:  
​मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न: मांग आधारित योजना को लक्ष्य आधारित बनाकर कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। मूल दायित्वों के अतिरिक्त अन्य कार्यों की जिम्मेदारी देकर उत्पीड़न किया जा रहा है।  
​प्रधानमंत्री आवास योजना की अनुचित जवाबदेही: राज्य स्तर पर पर्याप्त सेटअप न होने के बावजूद जिला व जनपद स्तर पर तकनीकी सहायकों को ही शत-प्रतिशत आवास पूर्ण कराने की जिम्मेदारी देकर कार्रवाई, वेतन काटने या सेवा से पृथक करने की धमकी दी जाती है।  
​समय पर वेतन न मिलना: महंगाई के इस दौर में समय पर वेतन भुगतान नहीं हो रहा है। कभी 2 माह, तो कभी 3-4 माह तक वेतन लंबित रहता है। इसके अलावा 3 साल बीत जाने के बाद भी वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिला है।  
​ 
​33 जिलों में रहेगा प्रभाव:
​संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के समस्त 33 जिलों के राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर यह सांकेतिक हड़ताल रहेगी। यदि समय रहते प्रशासन व सरकार द्वारा उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर समाधान नहीं निकाला गया, तो कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ सकता है।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
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