अजमेर जिले के पीसांगन क्षेत्र में खसरा संख्या 2867 पर स्थित केशोलाव तालाब पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा न तो तालाब की भूमि के सीमाज्ञान की कार्रवाई की गई है और न ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम उठाया गया है, जिससे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज इस तालाब भूमि पर अतिक्रमण जारी है, और संबंधित विभागों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। उनकी मुख्य चिंता है कि यदि समय रहते सीमांकन कर अतिक्रमण नहीं हटाए गए, तो तालाब का मूल स्वरूप और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ सकते हैं, जिसका जल संरक्षण और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। क्षेत्रवासियों ने सरकार द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण के निर्देशों के बावजूद पीसांगन के केशोलाव तालाब मामले में प्रशासनिक उदासीनता को समझ से परे बताया है, जो कई सवाल खड़े करती है। जनता ने सीधा सवाल उठाया है: "जब शिकायतें प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं, तो फिर खसरा संख्या 2867 स्थित केशोलाव तालाब पर हो रहे अतिक्रमणों को रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? आखिर प्रशासन की यह चुप्पी किसके हित में है?" अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कब तक प्रभावी कदम उठाकर तालाब भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराएगा।
अजमेर जिले के पीसांगन क्षेत्र में खसरा संख्या 2867 पर स्थित केशोलाव तालाब पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा न तो तालाब की भूमि के सीमाज्ञान की कार्रवाई की गई है और न ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम उठाया गया है, जिससे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज इस तालाब भूमि पर अतिक्रमण जारी है, और संबंधित विभागों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। उनकी मुख्य चिंता है कि यदि समय रहते सीमांकन कर अतिक्रमण नहीं हटाए गए, तो तालाब का मूल स्वरूप और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ सकते हैं, जिसका जल संरक्षण और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। क्षेत्रवासियों ने सरकार द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण के निर्देशों के बावजूद पीसांगन के केशोलाव तालाब मामले में प्रशासनिक उदासीनता को समझ से परे बताया है, जो कई सवाल खड़े करती है। जनता ने सीधा सवाल उठाया है: "जब शिकायतें प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं, तो फिर खसरा संख्या 2867 स्थित केशोलाव तालाब पर हो रहे अतिक्रमणों को रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? आखिर प्रशासन की यह चुप्पी किसके हित में है?" अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कब तक प्रभावी कदम उठाकर तालाब भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराएगा।
- अजमेर जिले के नागेलाव गांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना का खुलासा हुआ है, जहाँ एक बेटे ने अपनी ही विधवा माँ के लाखों के जेवर चोरी कर लिए। इस मामले में बड़े बेटे राजू गुर्जर ने गत 9 जून को पीसांगन थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। राजू ने बताया था कि वह अपनी विधवा मां मनभर देवी के साथ गांव में रहता है, और उनकी मां मनरेगा में मजदूरी करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 8 जून को मां को पैसों की जरूरत पड़ने पर अलमारी खोली गई तो उसमें से ढाई तोला सोने की ठुसी, 1 किलो वजनी चांदी की कणकती, आधा किलो की दूसरी कणकती, 250 ग्राम चांदी के पायजेब और 2,21,000 रुपये नकद गायब मिले। यह नकदी खेत की फसल बेचकर आई बताई गई थी। राजू ने शिकायत में बताया कि लोहे की अलमारी पीछे से मशीन से कटी हुई थी और यह वारदात 30 मई से 7 जून के बीच हुई थी, जिसमें कुल 17 लाख 21 हजार रुपये की चोरी (15 लाख रुपये के जेवरात और 2 लाख 21 हजार रुपये नकद) बताई गई थी। जिला पुलिस उप अधीक्षक अजमेर ग्रामीण दीपेंद्र सैनी ने बताया कि मामले की जांच हैड कांस्टेबल महेश कुमार मीणा को सौंपी गई थी। थानाधिकारी सरोज चौधरी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम, जिसमें एएसआई फूलसिंह गुर्जर, हैड कांस्टेबल महेश कुमार मीणा, कांस्टेबल सुखराम सेवदा, जगदीश मीणा और दिनेश चौधरी शामिल थे, की तकनीकी जांच और पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि चोरी करने वाला कोई और नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता राजू का छोटा भाई सेठाराम उर्फ सेठु ही था। पुलिस ने आरोपी सेठाराम उर्फ सेठु पुत्र स्व. भंवरलाल गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर विधवा मां के 15 लाख रुपये कीमत के सभी सोने-चांदी के जेवरात बरामद कर लिए गए, साथ ही वारदात में इस्तेमाल किया गया कटर भी जब्त किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि 2,21,000 रुपये नकदी चोरी होने की बात झूठी थी; आरोपी ने केवल गहने चुराए थे। उसने बाहरी चोरों द्वारा वारदात किए जाने का आभास देने के लिए अलमारी को पीछे से खुद मशीन से काटा था। पुलिस के अनुसार, रील्स बनाने के शौक और 'शौक मौज' की लत के कारण सेठाराम ने इस वारदात को अंजाम दिया था। डिप्टी दीपेंद्र सैनी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है और उससे अन्य वारदातों में उसकी संलिप्तता के बारे में भी पूछताछ की जा रही है। इस घटना से विधवा मां की मेहनत की कमाई पर सगे बेटे की नीयत खराब होने को लेकर गांव में गहरा रोष है, जिसने रिश्तों को तार-तार कर दिया है।4
- अजमेर जिले में चोरी, नकबजनी, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला, आईपीएस के निर्देश पर पीसांगन पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लालचंद कायल और उप अधीक्षक पुलिस (वृत्त ग्रामीण) दीपेंद्र सैनी प्रो. आरपीएस के पर्यवेक्षण में तथा थानाधिकारी श्रीमती सरोज चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने एक शातिर नकबजन अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से करीब 15 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषण सहित चोरी का पूरा माल बरामद किया है। यह मामला तब सामने आया जब दिनांक 09.06.2026 को पीसांगन थाने में श्री राजू पुत्र श्री भंवरलाल ने शिकायत दर्ज कराई। प्रार्थी ने बताया कि दिनांक 08.06.2026 को उसके नागलाव स्थित घर में उसकी माता मनभर देवी को रुपयों की आवश्यकता होने पर जब उन्होंने अलमारी खोली तो उसमें से 2.5 तोला वजनी सोने की ठुसी, 1 किलो वजनी चांदी की कणकती, आधा किलो वजनी एक अन्य छोटी चांदी की कणकती, 250 ग्राम वजनी चांदी के पायजेब और खेत की फसल से आए 2,21,000 रुपये नकदी गायब थे। अलमारी को पीछे से मशीन से काटा गया था। इस संबंध में प्रकरण संख्या 111/2026 धारा 331 (3), 305 (ए) बीएनएस 2023 के तहत दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। गठित पुलिस टीम ने वारदात के तरीके के आधार पर पुराने मुल्जिमों का डेटाबेस तैयार किया, संदिग्ध जगहों पर दबिश दी और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों का गहनता से निरीक्षण कर आरोपियों के आने-जाने के रास्तों की जानकारी जुटाई। टीम ने एक योजनाबद्ध, तकनीकी और पेशेवर रणनीति अपनाते हुए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से संदिग्धों की गतिविधियों पर बारीक नजर रखी। जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपी अत्यंत शातिर तरीके से काम करते थे, जिसके भय और दबाव के कारण स्थानीय लोग भी उनके बारे में सूचना देने से कतराते थे, जिससे उनकी गिरफ्तारी एक चुनौती बन गई थी। माल और मुल्जिमान की तलाश के दौरान, दिनांक 11.06.2026 को साक्ष्य संकलन करते हुए एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। थाने लाकर वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से गहन पूछताछ की गई, जिसमें आरोपी ने परिवादी के मकान में हुई चोरी की वारदात को कबूल किया। अनुसंधान के दौरान आरोपी की निशानदेही पर चोरी किए गए सोने-चांदी के जेवरात और लोहे की अलमारी काटने में प्रयुक्त लोहे के कटर को बरामद किया गया। पुलिस आरोपी से अन्य चोरी और नकबजनी की वारदातों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है और महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना है। पीसांगन पुलिस थाने में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लालचंद कायल और उप पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दीपेंद्र सैनी आईपीएस ने इस पूरे मामले का खुलासा किया।2
- अजमेर जिले के पीसांगन क्षेत्र में खसरा संख्या 2867 पर स्थित केशोलाव तालाब पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा न तो तालाब की भूमि के सीमाज्ञान की कार्रवाई की गई है और न ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम उठाया गया है, जिससे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज इस तालाब भूमि पर अतिक्रमण जारी है, और संबंधित विभागों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। उनकी मुख्य चिंता है कि यदि समय रहते सीमांकन कर अतिक्रमण नहीं हटाए गए, तो तालाब का मूल स्वरूप और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ सकते हैं, जिसका जल संरक्षण और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। क्षेत्रवासियों ने सरकार द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण के निर्देशों के बावजूद पीसांगन के केशोलाव तालाब मामले में प्रशासनिक उदासीनता को समझ से परे बताया है, जो कई सवाल खड़े करती है। जनता ने सीधा सवाल उठाया है: "जब शिकायतें प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं, तो फिर खसरा संख्या 2867 स्थित केशोलाव तालाब पर हो रहे अतिक्रमणों को रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? आखिर प्रशासन की यह चुप्पी किसके हित में है?" अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कब तक प्रभावी कदम उठाकर तालाब भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराएगा।1
- नारी जन जागृति संस्थान और राष्ट्रीय महिला परिषद ने संयुक्त रूप से ब्यावर में बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए एक विशेष निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है। यह चार दिवसीय शिविर ब्यावर की बेटियों को कराटे के दांव-पेंच सीखने के साथ-साथ पारंपरिक रूप से लाठी और तलवार चलाने का अद्भुत हुनर भी प्रदान कर रहा है। इस पहल के माध्यम से, बेटियां अपना अभेद्य कवच स्वयं तैयार कर रही हैं और समाज को निडर होने का महत्वपूर्ण संदेश दे रही हैं।1
- बिजयनगर शहर में अब 'आशियाना आयुर्वेदिक दवाखाना' खुल गया है, जहाँ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके मस्सा, बवासीर, फिशर और नासूर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बिना किसी ऑपरेशन, चीर-फाड़ या सर्जरी के पूरी तरह से आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार प्रदान किया जाता है। यह विशेष उपचार ब्यावर के प्रसिद्ध वैद्य अफजल पठान द्वारा किया जाता है, जिन्हें पिछले 10 वर्षों का अनुभव है और वे सैकड़ों मरीजों का सफल इलाज कर चुके हैं। दावा किया गया है कि बवासीर का जड़ से इलाज मात्र 20 मिनट में किया जाता है, और पूरी बीमारी 10-15 दिनों के भीतर जड़ से खत्म हो जाती है। यदि आपको या आपके किसी परिचित को इन समस्याओं में से कोई भी है, तो तुरंत वैद्य अफजल पठान से 7568464605 पर संपर्क कर सकते हैं। क्लिनिक 27 मिल से 400 मीटर अंदर, बिजयनगर रोड पर पवन बोरवेल के सामने, कृष्णा ऑटो पार्ट्स के पास, रूप कॉम्प्लेक्स, बिजयनगर में स्थित है।1
- रियांबड़ी नगर पालिका द्वारा राज्य सरकार के निर्देश पर शहर सेवा शिविर अभियान का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आमजन की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान करना है। मेड़ता विधानसभा विधायक लक्ष्मण राम कलरु ने अभियान की योजना के बारे में विस्तार से बताया, जबकि तहसीलदार अशोक कुमार ने विभिन्न नागरिक सेवाओं की जानकारी दी, जो एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इस शिविर में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पट्टा संबंधी कार्य, सफाई, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी, बिजली तथा कर संबंधी समस्याओं सहित विभिन्न जनसमस्याओं का तुरंत निस्तारण किया जाएगा। नगर पालिका प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी समस्याओं और आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविर में उपस्थित होकर सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाएं। अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता को राहत पहुँचाना और प्रशासन व जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। इस अवसर पर नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी धर्मेंद्र कुमार, तहसीलदार, महेंद्रनाथ योगी, सत्यनारायण वैष्णव, टोनी बना, अशोक माली, राहुल भाटी, अभिषेक माली, मुकेश धारु, सुनील दगदी सहित बड़ी संख्या में महिलाएँ और ग्रामीण मौजूद रहे।3
- राजस्थान में स्वच्छता को लेकर लापरवाही के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही की गई है। इस कार्रवाई के तहत बूंदी की तीन पंचायत समितियों में कुल 31 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। इस बड़ी कार्यवाही पर शिक्षा मंत्री ने भी मीडिया को बाइट दी।1
- पीसांगन पंचायत समिति की डोडियाना ग्राम पंचायत में सरपंच पुत्र पर पिछले छह वर्षों से सरपंच के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने और विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें प्रकाशित होने के बाद एक पत्रकार को धमकाने का आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, सरपंच पुत्र कल्लू खां चीता द्वारा सरपंच की जगह लगातार काम किए जाने और अलादीन के मकान से तेजाजी स्थान तक निर्माण कार्य नहीं होने के बावजूद भुगतान उठाने जैसी शिकायतें प्रिंट मीडिया में प्रकाशित की गई थीं। इसके बाद दैनिक नवज्योति के पत्रकार कैलाश चिड़िवाल को सरपंच पुत्र द्वारा धमकाने का प्रयास करने का आरोप है। इस मामले को लेकर पीड़ित पत्रकार ने पत्रकार संघ में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले छह वर्षों में ग्राम पंचायत और पंचायत समिति की बैठकों में सरपंच की जगह सरपंच पुत्र ने ही उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायत के दस्तावेजों पर सरपंच के हस्ताक्षर करवाने संबंधी शिकायत की भी जांच करवाने की मांग की गई है। पत्रकार संघ और एडवोकेट संघ ने सामूहिक रूप से पीसांगन के उपखंड अधिकारी और विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सरपंच पुत्र की ग्राम पंचायत में भूमिका की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। शुक्रवार शाम को मांगलियावास पुलिस थाने में भी इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाने की बात कही गई है।1