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रायबरेली उन्नाव लालगंज हाईवे स्थित लालगंज सरेनी मार्ग निकट फ्लावर के नीचे की सर्विस नेम बता रही भ्रष्टाचार की कहानी।
RN Vishwkarma
रायबरेली उन्नाव लालगंज हाईवे स्थित लालगंज सरेनी मार्ग निकट फ्लावर के नीचे की सर्विस नेम बता रही भ्रष्टाचार की कहानी।
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- गंगा कटरी पूरी तरह बाढ से प्रभावित आने जाने के लिए कठिनाई उन्नाव ।आज हमारे संवाददाता बाढ क्षेत्र का भ्रमण कार्य क्रम में जयराज म ऊ, चंदरपुर ,सेढूपुर ,पसनियाखेडा, आदि गाँव का निरीक्षण किया एवं पीडितो से बात चीत भी की बाढ के कारण कटरी इलाके के लोगो को काफी कठिनाई का सामना करना पड रहा है हमारे संवाददाता को लोगो ने बताया कि विगत दिवस सासंद व विधायक जी आए थे उन्होने राहत सामाग्री प्रदान की थी। तथा साथ खडे रहने का वायदा किया।4
- उन्नाव गंगा घाट शिव मंदिर में नाग चोरी करने वाला चढ़ा पुलिस के हत्थे। देखें पूरी खबर।1
- उन्नाव में पूर्व MLC अजीत सिंह के चित्र को रखकर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि उन्नाव में पूर्व MLC अजीत सिंह के चित्र को रखकर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि1
- Post by Ramakant1
- सड़कें या गड्ढों का जाल? वायरल वीडियो ने विकास के दावों पर उठाए सवाल सड़कें या गड्ढों का जाल? वायरल वीडियो ने विकास के दावों पर उठाए सवाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में शहरों की बदहाल सड़कों और जगह-जगह बने बड़े गड्ढों की तस्वीरें सामने आई हैं। वीडियो में एक भारी वाहन सड़क पर बने गहरे गड्ढे में फंसा नजर आ रहा है, वहीं दूसरे दृश्य में सड़क की सतह बुरी तरह धंसी हुई दिखाई देती है। वीडियो के जरिए सड़क निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा गया है कि “सैटेलाइट से अंतरिक्ष की तस्वीर लेने से बेहतर है कि बुनियादी सिविल टेक्नोलॉजी से सड़कें बनाई जाएं।” वायरल वीडियो ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आखिर सड़कों की हालत इतनी खराब क्यों है? गड्ढों के कारण वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, हालांकि इसमें दिखाए गए स्थान और घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।2
- उद्घाटन के 5 महीने बाद गंगा एक्सप्रेसवे का टोल प्लाजा पानी में डूबा उन्नाव।उत्तर प्रदेश के 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद टोल प्लॉजा पर जलभराव की समस्या सामने आई है. उन्नाव के बशीरतगंज में टोल प्लाजा और एंट्री मार्ग पर करीब दो फीट पानी भर गया. इससे वाहन चालकों को परेशानी हुई. कुछ दिन पहले सड़क 10 फीट तक धंसी थी. बताया जा रहा है कि सोमवार को कुछ घंटे हुई बारिश के बाद बशीरतगंज क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट पर पानी जमा हो गया. एक्सप्रेसवे के साथ लगी सर्विस रोड भी जलमग्न हो गई. करीब दो फीट पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गईं. कई बाइक पानी में फंसकर बंद हो गईं, जिन्हें आसपास मौजूद लोगों की मदद से खींचकर जलभराव वाले हिस्से से बाहर निकाला जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर रही कि बारिश का पानी टोल प्लाजा के केबिन के अंदर तक पहुंच गया. टोल वसूलने वाला कर्मचारी कुर्सी पर पैर ऊपर रखकर बैठने को मजबूर नजर आया. एक्सप्रेसवे के कर्मचारियों ने जनरेटर लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया. दोपहर से देर रात तक पानी निकालने की कोशिश चलती रही, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बाद भी पूरी तरह जल निकासी नहीं हो सकी. गंगा एक्सप्रेसवे पर जलभराव का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही इसकी सड़क धंसने की घटना चर्चा में रही थी. करीब 12 से 14 दिन पहले मेरठ से प्रयागराज जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 42.1 के पास सड़क में करीब 10 फीट गहरा गड्डा हो गया था. इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे. गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. यह करीब 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार छह लेन का एक्सप्रेसवे है. इसकी लंबाई मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर है. इतनी बड़ी लागत और महत्व वाली परियोजना पर सड़क धंसने और जलभराव जैसी घटनाओं के बाद निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है. गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. उद्घाटन के लगभग 5 महीनें बाद ही सड़क में करीब 10 फीट गहरा गड्डा बनने और अब टोल प्लाजा के आसपास करीब दो फीट पानी भरने की घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है. फिलहाल बारिश के बाद सामने आई इन तस्वीरों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट और टोल प्लाजा पर पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी3
- दर्शन पुरवा के सेंटर पार्क की बदहाली पर फूटा जनता का गुस्सा, सैकड़ों क्षेत्रवासियों ने दिया धरना दर्शन पुरवा के सेंटर पार्क की बदहाली पर फूटा जनता का गुस्सा, सैकड़ों क्षेत्रवासियों ने दिया धरना कानपुर। दर्शन पुरवा स्थित सेंटर पार्क (पूर्व जिमखाना ग्राउंड) की शोचनीय स्थिति और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ आज स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। पार्क की बदहाली से नाराज सैकड़ों क्षेत्रवासियों, बच्चों, बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पार्क परिसर में ही शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। "पार्क बना सीवर और टूटी दीवारों का अड्डा" धरने का नेतृत्व कर रहे वकील योगेन्द्र अग्निहोत्री (पूर्व प्रत्याशी, 212 गोविंद नगर) ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, "हमारा पार्क आज सीवर के पानी और टूटी दीवारों का अड्डा बन चुका है। बच्चे नहीं खेल पा रहे, बुजुर्ग नहीं टहल पा रहे। बार-बार शिकायत के बाद भी जनप्रतिनिधि और प्रशासन चुप हैं। जनता अब चुप नहीं बैठेगी।" "संघर्ष शांतिपूर्ण, मांगें जायज" आंदोलन में शामिल दर्शन पुरवा सेंटर पार्क बचाओ समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण है और मांगें बेहद जायज हैं। उनका कहना था कि पार्क को दोबारा उस काबिल बनाया जाए जहां बच्चे खेल सकें और लोग सुकून से टहल सकें। सैकड़ों क्षेत्रवासियों का उमड़ा हुजूम कार्यक्रम में अवनीश सलूजा, रवि मिश्रा, अजय त्रिपाठी, नीरज त्रिपाठी, राजकुमार मिश्रा, प्रकाश जायसवाल, राम प्रकाश शर्मा, वरुण जायसवाल, दिनेश सिंह, रोहित बाजपेई, राजेश सविता, बब्बे भाई, राम प्रकाश गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, आशु खान सहित सैकड़ों क्षेत्रवासी मौजूद रहे। प्रमुख मांगें पार्क की दीवारों और परिसर की तुरंत मरम्मत कराई जाए। सीवर व्यवस्था दुरुस्त कर जलजमाव की समस्या हमेशा के लिए खत्म की जाए। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। संबंधित विभाग समयसीमा तय कर कार्ययोजना सार्वजनिक करे। 15 दिन का अल्टीमेटम प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को 15 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।1
- जनपद का प्रसिद्ध गंगा तट चंदरपुर बाढ के साथ साथ गंदगी का साम्राज्य उन्नाव। भयंकर वारिस कै दौरानसभी नदियों मे उफान रहता है माथा गंगा कहा पीछे रहती उन्होंने भी अपना विकराल रूप प्रकट किया विकास खण्ड बीघापुर में जयराज म ऊ व सुमेरपुर के चंदरपुर घाट सेढूपुर घाट पर बाढ का प्रकोप तो है ही सबसे कठिन समस्या है स्नान घाट व असमसान घाट पर गंदगी का साम्राज्य है जबकि स्वच्छ गंगा निर्मल गंगा का सरकार का नारा यहाँ खोखला दिखाई देता है घाट की स्थिति खराब है स्नान करने हेतु सही घाट नही है यही बगल में प्रसिद्ध चंदरपुर कुटी है । क्षेत्रीय समाज सेवी करूना यादव का कहना है कि यहाँ विकास के नाम पर कुछ भी नहीं है अब देखना है कि सरकार अपने नारे को कितना चरितार्थ करती हैं5