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राजस्थान के बाड़ी में अग्रवाल समाज के महिला मंडल ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उत्तम चंद बंसल को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से शहर में बढ़ते आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, इसके शीघ्र समाधान की मांग की गई है। महिला मंडल ने आवारा गायों, सांडों, कुत्तों और बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या का विशेष रूप से उल्लेख किया है। अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. निरमा सिंघल ने बताया कि शहर की लगभग हर गली, मोहल्ले और मुख्य चौराहों पर इन आवारा जानवरों का भारी जमावड़ा रहता है। इससे आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है और विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। डॉ. सिंघल के अनुसार, इन जानवरों के कारण कई दुर्घटनाएं और गंभीर घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं, जिसके चलते तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

7 hrs ago
user_रोहित वर्मा
रोहित वर्मा
Farmer Bari, Dholpur•
7 hrs ago

राजस्थान के बाड़ी में अग्रवाल समाज के महिला मंडल ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उत्तम चंद बंसल को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से शहर में बढ़ते आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, इसके शीघ्र समाधान की मांग की गई है। महिला मंडल ने आवारा गायों, सांडों, कुत्तों और बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या का विशेष रूप से उल्लेख किया है। अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. निरमा सिंघल ने बताया कि शहर की लगभग हर गली, मोहल्ले और मुख्य चौराहों पर इन आवारा जानवरों का भारी जमावड़ा रहता है। इससे आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है और विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। डॉ. सिंघल के अनुसार, इन जानवरों के कारण कई दुर्घटनाएं और गंभीर घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं, जिसके चलते तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

More news from Dholpur and nearby areas
  • बाड़ी SP विकास सांगवान के निर्देशों पर क्षेत्र में ए-श्रेणी की नाकाबंदी की गई। ASP श्रवण कुमार झोरड़ के नेतृत्व में बाड़ी, बाड़ी सदर, बसेड़ी, आंगई, सरमथुरा, नादनपुर और डांग बसई क्षेत्रों में यह कार्रवाई हुई, जिसमें DSP महेंद्र मीणा भी मौके पर उपस्थित रहे। ASP झोरड़ ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में नाकाबंदी की। इस दौरान बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों, ओवरलोड वाहनों, बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने वालों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के साथ-साथ मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही की गई। बाड़ी क्षेत्र में थानाप्रभारी देवेंद्र शर्मा और बाड़ी सदर थाना क्षेत्र में थानाप्रभारी मोहर सिंह मीणा ने बिजौली चौकी पर विशेष रूप से यह कार्यवाही सुनिश्चित की।
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    बाड़ी SP विकास सांगवान के निर्देशों पर क्षेत्र में ए-श्रेणी की नाकाबंदी की गई। ASP श्रवण कुमार झोरड़ के नेतृत्व में बाड़ी, बाड़ी सदर, बसेड़ी, आंगई, सरमथुरा, नादनपुर और डांग बसई क्षेत्रों में यह कार्रवाई हुई, जिसमें DSP महेंद्र मीणा भी मौके पर उपस्थित रहे।

ASP झोरड़ ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में नाकाबंदी की। इस दौरान बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों, ओवरलोड वाहनों, बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने वालों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के साथ-साथ मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही की गई। बाड़ी क्षेत्र में थानाप्रभारी देवेंद्र शर्मा और बाड़ी सदर थाना क्षेत्र में थानाप्रभारी मोहर सिंह मीणा ने बिजौली चौकी पर विशेष रूप से यह कार्यवाही सुनिश्चित की।
    user_रोहित वर्मा
    रोहित वर्मा
    Farmer Bari, Dholpur•
    1 hr ago
  • राजस्थान के धौलपुर जिले में, पंचायत बहादुरपुर के गांव भंवरे का पुरा के वार्ड संख्या 10 में ग्रामीण एक गंभीर सड़क समस्या से जूझ रहे हैं। शिकायत के अनुसार, नक्शा उपलब्ध होने के बावजूद भी रास्ता नहीं बन पा रहा है, क्योंकि खेत वाले दबंगई दिखाते हुए इसे रोक रहे हैं। बताया गया है कि करीब चार से पांच लोग रास्ते को अवरुद्ध कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से, स्कूली बच्चे भी पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। यह समस्या पिछले लगभग 15 से 20 सालों से बनी हुई है, जहां नक्शा होने के बावजूद भी सड़क का मार्ग बंद है।
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    राजस्थान के धौलपुर जिले में, पंचायत बहादुरपुर के गांव भंवरे का पुरा के वार्ड संख्या 10 में ग्रामीण एक गंभीर सड़क समस्या से जूझ रहे हैं। शिकायत के अनुसार, नक्शा उपलब्ध होने के बावजूद भी रास्ता नहीं बन पा रहा है, क्योंकि खेत वाले दबंगई दिखाते हुए इसे रोक रहे हैं। बताया गया है कि करीब चार से पांच लोग रास्ते को अवरुद्ध कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से, स्कूली बच्चे भी पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। यह समस्या पिछले लगभग 15 से 20 सालों से बनी हुई है, जहां नक्शा होने के बावजूद भी सड़क का मार्ग बंद है।
    user_GAGAN
    GAGAN
    बारी, धौलपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • धौलपुर जिले के सरमथुरा कस्बे में महाकालेश्वर पूजा सेवा समिति की नवीन कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। इस दौरान एडवोकेट योगेश कुमार शर्मा बोहरे को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि मोहन सिंह सिकरवार को मंत्री और गजानंद सोनी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। भक्ति और सेवा के संकल्प के साथ गठित हुई इस नवीन कार्यकारिणी को सेवा समिति द्वारा फूल-मालाएं पहनाकर और साफा बांधकर शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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    धौलपुर जिले के सरमथुरा कस्बे में महाकालेश्वर पूजा सेवा समिति की नवीन कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। इस दौरान एडवोकेट योगेश कुमार शर्मा बोहरे को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि मोहन सिंह सिकरवार को मंत्री और गजानंद सोनी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। भक्ति और सेवा के संकल्प के साथ गठित हुई इस नवीन कार्यकारिणी को सेवा समिति द्वारा फूल-मालाएं पहनाकर और साफा बांधकर शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
    user_विष्णु कुमार सोनी
    विष्णु कुमार सोनी
    सरमथुरा, धौलपुर, राजस्थान•
    28 min ago
  • प्रदेश में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET परीक्षा में हजारों विद्यार्थी शामिल होंगे। इनमें से बड़ी संख्या में छात्र ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं, जिन्हें अक्सर आर्थिक और परिवहन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी के मौसम और दूर-दराज के क्षेत्रों से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचने में होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए, छात्रों के आवागमन को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए और NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के महत्व को देखते हुए, विनम्र आग्रह किया गया है कि परीक्षा दिवस पर निःशुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही, प्रमुख मार्गों पर विशेष बसों का संचालन भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि किसी भी विद्यार्थी को आवागमन में कोई असुविधा न हो। राज्य सरकार द्वारा यह सुविधा प्रदान करने से छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी, जिससे उनके भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में वे बिना किसी बाधा के शामिल हो सकें। अतः, विद्यार्थियों के हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की कृपा का निवेदन किया गया है।
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    प्रदेश में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET परीक्षा में हजारों विद्यार्थी शामिल होंगे। इनमें से बड़ी संख्या में छात्र ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं, जिन्हें अक्सर आर्थिक और परिवहन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी के मौसम और दूर-दराज के क्षेत्रों से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचने में होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए, छात्रों के आवागमन को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए और NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के महत्व को देखते हुए, विनम्र आग्रह किया गया है कि परीक्षा दिवस पर निःशुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही, प्रमुख मार्गों पर विशेष बसों का संचालन भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि किसी भी विद्यार्थी को आवागमन में कोई असुविधा न हो। राज्य सरकार द्वारा यह सुविधा प्रदान करने से छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी, जिससे उनके भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में वे बिना किसी बाधा के शामिल हो सकें। अतः, विद्यार्थियों के हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की कृपा का निवेदन किया गया है।
    user_Bharat SING Meena
    Bharat SING Meena
    Voice of people सरमथुरा, धौलपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • धौलपुर के सैंपऊ रोड पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मचकुंड प्रसंग, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद और शुकदेव पूजन के साथ आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में उमड़े जनसैलाब से पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में सराबोर नज़र आया, जिससे श्रद्धालुओं में गहरा आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिला। कथा के सातवें और अंतिम दिन, पूज्य महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने धौलपुर स्थित मचकुंड तीर्थराज को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने राजा मुचुकुन्द और कालयवन वध प्रसंग का अत्यंत रसपूर्ण एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए समझाया कि कैसे कालयवन द्वारा मथुरा पर आक्रमण करने पर भगवान श्रीकृष्ण रणभूमि छोड़कर भागे और 'रणछोड़' कहलाए। यह भगवान की एक अद्भुत लीला थी, जिसके तहत कालयवन उनका पीछा करते हुए धौलपुर के मौनी सिद्ध पहाड़ पर स्थित एक गुफा में जा पहुँचा। गुफा के भीतर त्रेतायुग के प्रतापी सूर्यवंशी राजा मुचुकुन्द गहरी नींद में सो रहे थे, जिन्हें इंद्र देव से यह वरदान प्राप्त था कि जो भी उन्हें नींद से जगाएगा, वह उनकी पहली दृष्टि पड़ते ही भस्म हो जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी चतुराई से अपना पीतांबर सो रहे राजा मुचुकुन्द पर डाल दिया। अहंकार में अंधे कालयवन ने मुचुकुन्द को ही श्रीकृष्ण समझकर उन्हें लात मार दी, जिससे राजा मुचुकुन्द की आंखें खुल गईं और कालयवन जलकर भस्म हो गया। इस घटना के बाद, राजा मुचुकुन्द ने सम्मुख खड़े साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और राजपाठ तथा सांसारिक मोह त्यागकर प्रभु के चरणों में शरणागति ले ली। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि कालयवन वास्तव में मनुष्य के भीतर का 'अहंकार और वासना' है, जिसका अंत केवल ईश्वर की शरण में जाने पर ही संभव है। महाराज श्री ने भगवान कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का भी मार्मिक चित्रण किया, यह बताते हुए कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई दीवार नहीं होती। उन्होंने भावुकता से बताया कि कैसे सुदामा जी जब द्वारिका पहुँचे, तो प्रभु श्री कृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा को आगे बढ़ाते हुए नव योगेश्वर संवाद पर उन्होंने कहा कि राजा निमि और नौ योगेश्वरों के बीच का संवाद भागवत महापुराण का हृदय है, जिसमें योगेश्वरों ने बताया कि भगवान की भक्ति ही शाश्वत है। शुकदेव पूजन में कथाव्यास ने शुकदेव जी महाराज को साक्षात वैराग्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनके आगमन और पूजन से जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं। महाराज श्री ने सात दिनों के सार को समेटते हुए कहा कि भागवत श्रवण से केवल मोक्ष ही नहीं मिलता, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से व्यसन मुक्ति, माता-पिता की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कथा के परीक्षित महाराम शर्मा और उमा शर्मा सहित कमल, विमल, मनीष, यज्ञपति सूतैल, सियाराम शर्मा, गिरीश ब्रह्मा, पवन शर्मा, श्याम, रामू, मुकेश सूतैल और अन्य अनेक श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर कथा पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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    धौलपुर के सैंपऊ रोड पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मचकुंड प्रसंग, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद और शुकदेव पूजन के साथ आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में उमड़े जनसैलाब से पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में सराबोर नज़र आया, जिससे श्रद्धालुओं में गहरा आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिला।

कथा के सातवें और अंतिम दिन, पूज्य महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने धौलपुर स्थित मचकुंड तीर्थराज को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने राजा मुचुकुन्द और कालयवन वध प्रसंग का अत्यंत रसपूर्ण एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए समझाया कि कैसे कालयवन द्वारा मथुरा पर आक्रमण करने पर भगवान श्रीकृष्ण रणभूमि छोड़कर भागे और 'रणछोड़' कहलाए। यह भगवान की एक अद्भुत लीला थी, जिसके तहत कालयवन उनका पीछा करते हुए धौलपुर के मौनी सिद्ध पहाड़ पर स्थित एक गुफा में जा पहुँचा। गुफा के भीतर त्रेतायुग के प्रतापी सूर्यवंशी राजा मुचुकुन्द गहरी नींद में सो रहे थे, जिन्हें इंद्र देव से यह वरदान प्राप्त था कि जो भी उन्हें नींद से जगाएगा, वह उनकी पहली दृष्टि पड़ते ही भस्म हो जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी चतुराई से अपना पीतांबर सो रहे राजा मुचुकुन्द पर डाल दिया। अहंकार में अंधे कालयवन ने मुचुकुन्द को ही श्रीकृष्ण समझकर उन्हें लात मार दी, जिससे राजा मुचुकुन्द की आंखें खुल गईं और कालयवन जलकर भस्म हो गया। इस घटना के बाद, राजा मुचुकुन्द ने सम्मुख खड़े साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और राजपाठ तथा सांसारिक मोह त्यागकर प्रभु के चरणों में शरणागति ले ली। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि कालयवन वास्तव में मनुष्य के भीतर का 'अहंकार और वासना' है, जिसका अंत केवल ईश्वर की शरण में जाने पर ही संभव है।

महाराज श्री ने भगवान कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का भी मार्मिक चित्रण किया, यह बताते हुए कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई दीवार नहीं होती। उन्होंने भावुकता से बताया कि कैसे सुदामा जी जब द्वारिका पहुँचे, तो प्रभु श्री कृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा को आगे बढ़ाते हुए नव योगेश्वर संवाद पर उन्होंने कहा कि राजा निमि और नौ योगेश्वरों के बीच का संवाद भागवत महापुराण का हृदय है, जिसमें योगेश्वरों ने बताया कि भगवान की भक्ति ही शाश्वत है। शुकदेव पूजन में कथाव्यास ने शुकदेव जी महाराज को साक्षात वैराग्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनके आगमन और पूजन से जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं।

महाराज श्री ने सात दिनों के सार को समेटते हुए कहा कि भागवत श्रवण से केवल मोक्ष ही नहीं मिलता, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से व्यसन मुक्ति, माता-पिता की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कथा के परीक्षित महाराम शर्मा और उमा शर्मा सहित कमल, विमल, मनीष, यज्ञपति सूतैल, सियाराम शर्मा, गिरीश ब्रह्मा, पवन शर्मा, श्याम, रामू, मुकेश सूतैल और अन्य अनेक श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर कथा पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।
    user_ANURAG BAGHEL
    ANURAG BAGHEL
    Local News Reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • ब्रज भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की जोरदार मांग की गई है। इस मांग के पीछे प्रमुख तर्क यह दिया गया है कि यदि ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया, तो इस क्षेत्र के युवा शिक्षा और रोजगार के अवसरों में पिछड़ जाएंगे। यह चिंता व्यक्त की गई है कि ब्रज भाषा को उसका उचित स्थान न मिलने से युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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    ब्रज भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की जोरदार मांग की गई है। इस मांग के पीछे प्रमुख तर्क यह दिया गया है कि यदि ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया, तो इस क्षेत्र के युवा शिक्षा और रोजगार के अवसरों में पिछड़ जाएंगे। यह चिंता व्यक्त की गई है कि ब्रज भाषा को उसका उचित स्थान न मिलने से युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
    user_NATION MEDIA AB
    NATION MEDIA AB
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • धौलपुर के सैंपऊ रोड स्थित सिंगारा पैलेस में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मचकुंड प्रसंग, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद और शुकदेव पूजन के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में उमड़े जनसैलाब से पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में सराबोर नज़र आया। कथा व्यास पूज्य महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। कथा के सातवें दिन, महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने धौलपुर स्थित मचकुंड तीर्थराज के महत्व को उजागर करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने राजा मुचुकुन्द और कालयवन वध के प्रसंग को अत्यंत भावपूर्ण तरीके से सुनाया, जिसमें कालयवन के मथुरा पर आक्रमण करने पर भगवान श्रीकृष्ण को 'रणछोड़' कहा गया। यह भगवान की एक अनूठी लीला थी। कालयवन भगवान का पीछा करते हुए धौलपुर में मौनी सिद्ध के पहाड़ पर एक गुफा में पहुंचा, जहां त्रेतायुग के प्रतापी सूर्यवंशी राजा मुचुकुन्द विश्राम कर रहे थे। इंद्र देव से वरदान प्राप्त मुचुकुन्द की पहली दृष्टि से कालयवन जलकर भस्म हो गया, जब उसने अहंकारवश उन्हें श्रीकृष्ण समझकर लात मारी। इस घटना के बाद, राजा मुचुकुन्द ने साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर राजपाठ और सांसारिक मोह त्यागकर प्रभु के चरणों में शरणागति ले ली। कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि कालयवन वास्तव में मनुष्य के भीतर का अहंकार और वासना है, जिसका अंत केवल ईश्वर की शरण में जाने पर ही संभव है। महाराज ने भगवान कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई दीवार नहीं होती। उन्होंने बताया कि जब सुदामा जी द्वारिका पहुंचे, तो प्रभु श्रीकृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया। इस मर्मस्पर्शी प्रसंग को भजनों के माध्यम से सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा को समापन की ओर ले जाते हुए, कथाव्यास ने नव योगेश्वर संवाद पर भी चर्चा की, जिसे भागवत महापुराण का हृदय बताया गया, जिसमें योगेश्वरों ने राजा निमि के प्रश्नों का उत्तर देते हुए भगवान की भक्ति को शाश्वत बताया। शुकदेव पूजन में कथाव्यास ने शुकदेव जी महाराज को साक्षात वैराग्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनके आगमन और पूजन से जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं। कथा के परीक्षित महाराम शर्मा और उमा शर्मा सहित कमल, विमल, मनीष, यज्ञपति सूतैल, सियाराम शर्मा, गिरीश ब्रह्मा, पवन शर्मा, श्याम, रामू, मुकेश सूतैल और अन्य श्रद्धालुओं ने कथा पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। महाराज श्री ने सात दिनों के सार को समेटते हुए कहा कि भागवत श्रवण से केवल मोक्ष ही नहीं मिलता, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से व्यसन मुक्ति, माता-पिता की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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    धौलपुर के सैंपऊ रोड स्थित सिंगारा पैलेस में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मचकुंड प्रसंग, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद और शुकदेव पूजन के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में उमड़े जनसैलाब से पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में सराबोर नज़र आया। कथा व्यास पूज्य महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

कथा के सातवें दिन, महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने धौलपुर स्थित मचकुंड तीर्थराज के महत्व को उजागर करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने राजा मुचुकुन्द और कालयवन वध के प्रसंग को अत्यंत भावपूर्ण तरीके से सुनाया, जिसमें कालयवन के मथुरा पर आक्रमण करने पर भगवान श्रीकृष्ण को 'रणछोड़' कहा गया। यह भगवान की एक अनूठी लीला थी। कालयवन भगवान का पीछा करते हुए धौलपुर में मौनी सिद्ध के पहाड़ पर एक गुफा में पहुंचा, जहां त्रेतायुग के प्रतापी सूर्यवंशी राजा मुचुकुन्द विश्राम कर रहे थे। इंद्र देव से वरदान प्राप्त मुचुकुन्द की पहली दृष्टि से कालयवन जलकर भस्म हो गया, जब उसने अहंकारवश उन्हें श्रीकृष्ण समझकर लात मारी। इस घटना के बाद, राजा मुचुकुन्द ने साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर राजपाठ और सांसारिक मोह त्यागकर प्रभु के चरणों में शरणागति ले ली। कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि कालयवन वास्तव में मनुष्य के भीतर का अहंकार और वासना है, जिसका अंत केवल ईश्वर की शरण में जाने पर ही संभव है।

महाराज ने भगवान कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई दीवार नहीं होती। उन्होंने बताया कि जब सुदामा जी द्वारिका पहुंचे, तो प्रभु श्रीकृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया। इस मर्मस्पर्शी प्रसंग को भजनों के माध्यम से सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा को समापन की ओर ले जाते हुए, कथाव्यास ने नव योगेश्वर संवाद पर भी चर्चा की, जिसे भागवत महापुराण का हृदय बताया गया, जिसमें योगेश्वरों ने राजा निमि के प्रश्नों का उत्तर देते हुए भगवान की भक्ति को शाश्वत बताया। शुकदेव पूजन में कथाव्यास ने शुकदेव जी महाराज को साक्षात वैराग्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनके आगमन और पूजन से जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं। कथा के परीक्षित महाराम शर्मा और उमा शर्मा सहित कमल, विमल, मनीष, यज्ञपति सूतैल, सियाराम शर्मा, गिरीश ब्रह्मा, पवन शर्मा, श्याम, रामू, मुकेश सूतैल और अन्य श्रद्धालुओं ने कथा पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। महाराज श्री ने सात दिनों के सार को समेटते हुए कहा कि भागवत श्रवण से केवल मोक्ष ही नहीं मिलता, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से व्यसन मुक्ति, माता-पिता की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
    user_Mukesh Sootel
    Mukesh Sootel
    Local News Reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • राजस्थान के बाड़ी में अग्रवाल समाज के महिला मंडल ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उत्तम चंद बंसल को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से शहर में बढ़ते आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, इसके शीघ्र समाधान की मांग की गई है। महिला मंडल ने आवारा गायों, सांडों, कुत्तों और बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या का विशेष रूप से उल्लेख किया है। अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. निरमा सिंघल ने बताया कि शहर की लगभग हर गली, मोहल्ले और मुख्य चौराहों पर इन आवारा जानवरों का भारी जमावड़ा रहता है। इससे आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है और विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। डॉ. सिंघल के अनुसार, इन जानवरों के कारण कई दुर्घटनाएं और गंभीर घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं, जिसके चलते तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
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    राजस्थान के बाड़ी में अग्रवाल समाज के महिला मंडल ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उत्तम चंद बंसल को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से शहर में बढ़ते आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, इसके शीघ्र समाधान की मांग की गई है। महिला मंडल ने आवारा गायों, सांडों, कुत्तों और बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. निरमा सिंघल ने बताया कि शहर की लगभग हर गली, मोहल्ले और मुख्य चौराहों पर इन आवारा जानवरों का भारी जमावड़ा रहता है। इससे आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है और विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। डॉ. सिंघल के अनुसार, इन जानवरों के कारण कई दुर्घटनाएं और गंभीर घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं, जिसके चलते तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
    user_रोहित वर्मा
    रोहित वर्मा
    Farmer Bari, Dholpur•
    7 hrs ago
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