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आग लगने से किसान की गेहूं की फसल जलकर हुई राख बताया जा रहा है की कई बीघा गेहूं की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई आग में इतना भयानक रूप अपना लिया जिससे किसान को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की काफी कोशिश की लेकिन आग इतनी भयानक थी वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है
Eslam Ali
आग लगने से किसान की गेहूं की फसल जलकर हुई राख बताया जा रहा है की कई बीघा गेहूं की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई आग में इतना भयानक रूप अपना लिया जिससे किसान को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की काफी कोशिश की लेकिन आग इतनी भयानक थी वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है
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- यूपी में निजी स्कूलों की मनमानी: अभिभावकों पर थोपी जा रही निजी प्रकाशकों की किताबें, प्रशासन का आदेश बेअसर निजी स्कूलों के किताबों को लेकर मनमानी सामने आई है। मुरादाबाद प्रशासन के निर्देश के बावजूद कई स्कूल एनसीईआरटी लागू नहीं कर रहे हैं। कई स्कूल महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी सामने आई है। जिला प्रशासन के कक्षा आठवीं तक केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश के बाद भी अधिकांश स्कूलों में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के पदाधिकारियों के अनुसार 46 प्राइवेट स्कूलों में पूरी तरह निजी प्रकाशकों की किताबें ही लागू कर दी गई हैं। वहीं 27 स्कूलों में से कुछ स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें तो लगाई गई हैं, लेकिन उनके साथ निजी प्रकाशकों की अतिरिक्त किताबें भी अनिवार्य कर दी गई हैं। इससे अभिभावकों की जेब पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा किताबों की कीमतों में भारी अंतर भी सामने आया है। जहां एनसीईआरटी की एक किताब करीब 60 से 65 रुपये में उपलब्ध है। वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 250 से लेकर 700 रुपये तक में मिल रही है। एक ही कक्षा की किताबों का पूरा सेट अलग-अलग स्कूलों में 3000 से 5000 रुपये तक महंगा मिल रहा है। अभिभावकों का कहना हैं कि स्कूलों ने पहले से ही कुछ चुनिंदा बुक स्टॉल तय कर रखे हैं। वहां से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है। इन दुकानों पर न तो कोई छूट मिलती है और न ही बाहर से किताबें खरीदने की अनुमति दी जाती है। इससे काफी समस्याएं हो रही हैं। बेटे का एक निजी स्कूल में एडमिशन करना है।ट्रांसपोर्ट की फीस के अलावा किताबें इस साल महंगी हो गई है। कई स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए जानकारी ली। हर स्कूल में फीस, किताबों की कीमत अलग अलग है। कम पैसे खर्च होने वाले निजी स्कूल में एडमिशन को लेकर बात फाइनल हुई है।1
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