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झारखंड के रातू प्रखंड की गुडू पंचायत में कुरमाली भाषा परिषद् ने स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय ठेबले उरांव की 68वीं पुण्यतिथि जयंती मनाई। इस अवसर पर लोगों ने स्वर्गीय उरांव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर पाहन द्वारा पूजा-अर्चना और ठेबले उरांव के चित्र पर माल्यार्पण के साथ सरकार की ओर से रेखांकित जगह पर एक जतरा मेले की भी शुरुआत की गई। परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव को महात्मा गांधी का अनुयायी और भगवान बिरसा मुंडा का मार्गदर्शक बताया। उनका जन्म 1863 में राजधानी रांची से 22 किलोमीटर दूर रातू थाना क्षेत्र के गुडू गांव में हुआ था, और उनके पिता जीतू उरांव एक किसान थे। ठेबले उरांव ने 1900 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज का गठन किया और उसके अध्यक्ष बने। वे 1919 में कांग्रेस के सदस्य भी बने और 1928 में झारखंड के लिए अलग प्रांत की मांग रखी। इसके बाद 1931 में उन्होंने छोटानागपुर किसान सभा का गठन कर एक संगठन बनाया। स्वाधीनता के बाद वे रांची के सांसद भी रहे और बिहार सरकार में सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। हालांकि, इन सभी योगदानों के बावजूद, ठेबले उरांव इतिहासकारों के कारण गुमनाम रहे। अब कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव के जीवन गाथा की खोज कर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का स्थान दिलाने का बीड़ा उठाया है। श्री महतो ने विधानसभा में उनके चित्र लगाने और उनके पैतृक गांव गुडू में एक स्मारक समिति गठित कर आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की बात कही है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड सरकार से मिलकर रातू रोड का नाम ठेबले उरांव के नाम पर करने, रातू का विकास करने, उनके वंशजों का उत्थान करने के साथ-साथ आदमकद प्रतिमा, सांस्कृतिक भवन, कला केंद्र भवन और उनके इतिहास को प्राथमिक विद्यालय से एम.ए. तक की पढ़ाई में किताबों में शामिल करने जैसी कई मांगें रखी जाएंगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो का आदिवासी रीति-रिवाज और संस्कृति नृत्य-गीत व ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मेले में कई गांव के खोड़हे धारी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और इस दौरान नृत्य-संगीत के साथ छऊ नृत्य का भी आयोजन किया गया। डॉ. राजाराम महतो के अलावा शिव शंकर नील कंठ, लक्ष्मण उरांव, कृष्ण भगत, जौरा उरांव, देवचरण उराँव, मुकेश कुमार, सिकंदर महतो और मुखिया अनिल उराँव सहित कई लोगों ने कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर ठेबले उरांव के वंशज और ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

1 hr ago
user_Sanjay kumar
Sanjay kumar
Newspaper publisher बुरमू, रांची, झारखंड•
1 hr ago

झारखंड के रातू प्रखंड की गुडू पंचायत में कुरमाली भाषा परिषद् ने स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय ठेबले उरांव की 68वीं पुण्यतिथि जयंती मनाई। इस अवसर पर लोगों ने स्वर्गीय उरांव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर पाहन द्वारा पूजा-अर्चना और ठेबले उरांव के चित्र पर माल्यार्पण के साथ सरकार की ओर से रेखांकित जगह पर एक जतरा मेले की भी शुरुआत की गई। परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव को महात्मा गांधी का अनुयायी और भगवान बिरसा मुंडा का मार्गदर्शक बताया। उनका जन्म 1863 में राजधानी रांची से 22 किलोमीटर दूर रातू थाना क्षेत्र के गुडू गांव में हुआ था, और उनके पिता जीतू उरांव एक किसान थे। ठेबले उरांव ने 1900 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज का गठन किया और उसके अध्यक्ष बने। वे 1919 में कांग्रेस के सदस्य भी बने और 1928 में झारखंड के लिए अलग प्रांत की मांग रखी। इसके बाद 1931 में उन्होंने छोटानागपुर किसान सभा का गठन कर एक संगठन बनाया। स्वाधीनता के बाद वे रांची के सांसद भी रहे और बिहार सरकार में सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। हालांकि, इन सभी योगदानों के बावजूद, ठेबले उरांव इतिहासकारों के कारण गुमनाम रहे। अब कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव के जीवन गाथा की खोज कर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का स्थान दिलाने का बीड़ा उठाया है। श्री महतो ने विधानसभा में उनके चित्र लगाने और उनके पैतृक गांव गुडू में एक स्मारक समिति गठित कर आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की बात कही है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड सरकार से मिलकर रातू रोड का नाम ठेबले उरांव के नाम पर करने, रातू का विकास करने, उनके वंशजों का उत्थान करने के साथ-साथ आदमकद प्रतिमा, सांस्कृतिक भवन, कला केंद्र भवन और उनके इतिहास को प्राथमिक विद्यालय से एम.ए. तक की पढ़ाई में किताबों में शामिल करने जैसी कई मांगें रखी जाएंगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो का आदिवासी रीति-रिवाज और संस्कृति नृत्य-गीत व ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मेले में कई गांव के खोड़हे धारी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और इस दौरान नृत्य-संगीत के साथ छऊ नृत्य का भी आयोजन किया गया। डॉ. राजाराम महतो के अलावा शिव शंकर नील कंठ, लक्ष्मण उरांव, कृष्ण भगत, जौरा उरांव, देवचरण उराँव, मुकेश कुमार, सिकंदर महतो और मुखिया अनिल उराँव सहित कई लोगों ने कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर ठेबले उरांव के वंशज और ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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  • झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में बिना किसी वीवीआईपी काफिले के एक आम नागरिक की तरह सड़कों पर उतरकर शहर की यातायात व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वे कांटाटोली चौक पहुंचे और वहां के ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था तथा अवैध पार्किंग की गंभीर स्थिति को करीब से देखा। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही स्थिति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
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    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में बिना किसी वीवीआईपी काफिले के एक आम नागरिक की तरह सड़कों पर उतरकर शहर की यातायात व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वे कांटाटोली चौक पहुंचे और वहां के ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था तथा अवैध पार्किंग की गंभीर स्थिति को करीब से देखा। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही स्थिति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
    user_Ranchi Club Tv
    Ranchi Club Tv
    Media house कांके, रांची, झारखंड•
    31 min ago
  • रांची की यातायात व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से, SSP राकेश रंजन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अल्बर्ट एक्का चौक से अंजुमन प्लाजा तक के क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और फुटपाथ पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। SSP राकेश रंजन ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
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    रांची की यातायात व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से, SSP राकेश रंजन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अल्बर्ट एक्का चौक से अंजुमन प्लाजा तक के क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और फुटपाथ पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। SSP राकेश रंजन ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
    user_Devanand Sinha Sinha
    Devanand Sinha Sinha
    कांके, रांची, झारखंड•
    1 hr ago
  • भाजपा प्रवक्ता राफिया नाज ने डॉ. इरफ़ान अंसारी पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस को भी खरी-खरी सुनाई।
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    भाजपा प्रवक्ता राफिया नाज ने डॉ. इरफ़ान अंसारी पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस को भी खरी-खरी सुनाई।
    user_Nation24 news
    Nation24 news
    News Anchor कांके, रांची, झारखंड•
    7 hrs ago
  • अजय तिर्की ने गृहमंत्री के पद की भूमिका पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा है कि यह पद देश को एकजुट करने के लिए होता है, न कि समाज को बांटने के लिए।
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    अजय तिर्की ने गृहमंत्री के पद की भूमिका पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा है कि यह पद देश को एकजुट करने के लिए होता है, न कि समाज को बांटने के लिए।
    user_News Express 11
    News Express 11
    Local News Reporter कांके, रांची, झारखंड•
    8 hrs ago
  • हाजीपुर में एक महिला BPSC टीचर बनने के तुरंत बाद, अपने पति को छोड़कर एक प्रेमी के साथ चली गई। जब इस मामले पर बबीता मिश्रा ने सवाल पूछे, तो कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति के पसीने छूट गए। एक बच्चे ने खुलासा किया कि उसने अपनी माँ को नेपाल में एक 'अंकल' के साथ देखा था।
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    हाजीपुर में एक महिला BPSC टीचर बनने के तुरंत बाद, अपने पति को छोड़कर एक प्रेमी के साथ चली गई।

जब इस मामले पर बबीता मिश्रा ने सवाल पूछे, तो कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति के पसीने छूट गए। एक बच्चे ने खुलासा किया कि उसने अपनी माँ को नेपाल में एक 'अंकल' के साथ देखा था।
    user_Aakash Kumar paswan
    Aakash Kumar paswan
    Artist तांडवा, चतरा, झारखंड•
    48 min ago
  • झारखंड के रातू प्रखंड की गुडू पंचायत में कुरमाली भाषा परिषद् ने स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय ठेबले उरांव की 68वीं पुण्यतिथि जयंती मनाई। इस अवसर पर लोगों ने स्वर्गीय उरांव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर पाहन द्वारा पूजा-अर्चना और ठेबले उरांव के चित्र पर माल्यार्पण के साथ सरकार की ओर से रेखांकित जगह पर एक जतरा मेले की भी शुरुआत की गई। परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव को महात्मा गांधी का अनुयायी और भगवान बिरसा मुंडा का मार्गदर्शक बताया। उनका जन्म 1863 में राजधानी रांची से 22 किलोमीटर दूर रातू थाना क्षेत्र के गुडू गांव में हुआ था, और उनके पिता जीतू उरांव एक किसान थे। ठेबले उरांव ने 1900 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज का गठन किया और उसके अध्यक्ष बने। वे 1919 में कांग्रेस के सदस्य भी बने और 1928 में झारखंड के लिए अलग प्रांत की मांग रखी। इसके बाद 1931 में उन्होंने छोटानागपुर किसान सभा का गठन कर एक संगठन बनाया। स्वाधीनता के बाद वे रांची के सांसद भी रहे और बिहार सरकार में सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। हालांकि, इन सभी योगदानों के बावजूद, ठेबले उरांव इतिहासकारों के कारण गुमनाम रहे। अब कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव के जीवन गाथा की खोज कर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का स्थान दिलाने का बीड़ा उठाया है। श्री महतो ने विधानसभा में उनके चित्र लगाने और उनके पैतृक गांव गुडू में एक स्मारक समिति गठित कर आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की बात कही है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड सरकार से मिलकर रातू रोड का नाम ठेबले उरांव के नाम पर करने, रातू का विकास करने, उनके वंशजों का उत्थान करने के साथ-साथ आदमकद प्रतिमा, सांस्कृतिक भवन, कला केंद्र भवन और उनके इतिहास को प्राथमिक विद्यालय से एम.ए. तक की पढ़ाई में किताबों में शामिल करने जैसी कई मांगें रखी जाएंगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो का आदिवासी रीति-रिवाज और संस्कृति नृत्य-गीत व ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मेले में कई गांव के खोड़हे धारी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और इस दौरान नृत्य-संगीत के साथ छऊ नृत्य का भी आयोजन किया गया। डॉ. राजाराम महतो के अलावा शिव शंकर नील कंठ, लक्ष्मण उरांव, कृष्ण भगत, जौरा उरांव, देवचरण उराँव, मुकेश कुमार, सिकंदर महतो और मुखिया अनिल उराँव सहित कई लोगों ने कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर ठेबले उरांव के वंशज और ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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    झारखंड के रातू प्रखंड की गुडू पंचायत में कुरमाली भाषा परिषद् ने स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय ठेबले उरांव की 68वीं पुण्यतिथि जयंती मनाई। इस अवसर पर लोगों ने स्वर्गीय उरांव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर पाहन द्वारा पूजा-अर्चना और ठेबले उरांव के चित्र पर माल्यार्पण के साथ सरकार की ओर से रेखांकित जगह पर एक जतरा मेले की भी शुरुआत की गई।

परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव को महात्मा गांधी का अनुयायी और भगवान बिरसा मुंडा का मार्गदर्शक बताया। उनका जन्म 1863 में राजधानी रांची से 22 किलोमीटर दूर रातू थाना क्षेत्र के गुडू गांव में हुआ था, और उनके पिता जीतू उरांव एक किसान थे। ठेबले उरांव ने 1900 ई. में छोटानागपुर उन्नति समाज का गठन किया और उसके अध्यक्ष बने। वे 1919 में कांग्रेस के सदस्य भी बने और 1928 में झारखंड के लिए अलग प्रांत की मांग रखी। इसके बाद 1931 में उन्होंने छोटानागपुर किसान सभा का गठन कर एक संगठन बनाया। स्वाधीनता के बाद वे रांची के सांसद भी रहे और बिहार सरकार में सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। हालांकि, इन सभी योगदानों के बावजूद, ठेबले उरांव इतिहासकारों के कारण गुमनाम रहे।

अब कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने ठेबले उरांव के जीवन गाथा की खोज कर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का स्थान दिलाने का बीड़ा उठाया है। श्री महतो ने विधानसभा में उनके चित्र लगाने और उनके पैतृक गांव गुडू में एक स्मारक समिति गठित कर आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की बात कही है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड सरकार से मिलकर रातू रोड का नाम ठेबले उरांव के नाम पर करने, रातू का विकास करने, उनके वंशजों का उत्थान करने के साथ-साथ आदमकद प्रतिमा, सांस्कृतिक भवन, कला केंद्र भवन और उनके इतिहास को प्राथमिक विद्यालय से एम.ए. तक की पढ़ाई में किताबों में शामिल करने जैसी कई मांगें रखी जाएंगी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुरमाली भाषा परिषद् के अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो का आदिवासी रीति-रिवाज और संस्कृति नृत्य-गीत व ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मेले में कई गांव के खोड़हे धारी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और इस दौरान नृत्य-संगीत के साथ छऊ नृत्य का भी आयोजन किया गया। डॉ. राजाराम महतो के अलावा शिव शंकर नील कंठ, लक्ष्मण उरांव, कृष्ण भगत, जौरा उरांव, देवचरण उराँव, मुकेश कुमार, सिकंदर महतो और मुखिया अनिल उराँव सहित कई लोगों ने कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर ठेबले उरांव के वंशज और ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
    user_Sanjay kumar
    Sanjay kumar
    Newspaper publisher बुरमू, रांची, झारखंड•
    1 hr ago
  • बुढ़मू थाना क्षेत्र के ठाकुरगांव-बुढ़मू मुख्य पथ पर रविवार रात एक सड़क दुर्घटना में दो नाबालिगों की दुखद मौत हो गई। मृतकों की पहचान नामकुम थाना अंतर्गत लोवाड़ीह निवासी तुमिल खाखा के 17 वर्षीय पुत्र आयुष खाखा और अनूप लिंडा की 16 वर्षीय पुत्री सायना अंजलि लिंडा के रूप में हुई। ये दोनों आपस में मौसेरे भाई-बहन थे, जिन्होंने हाल ही में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए अपने नाना विलियम के घर बुढ़मू के सिदरौल आए हुए थे। मिली जानकारी के अनुसार, रविवार रात दोनों ठाकुरगांव की दिशा में चाउमीन और कोल्ड ड्रिंक लेने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक तेज गति और नियंत्रण खोने के कारण एक पेड़ से जा टकराई, जिससे घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद बुढ़मू पुलिस ने दोनों नाबालिगों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया था। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं, और पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
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    बुढ़मू थाना क्षेत्र के ठाकुरगांव-बुढ़मू मुख्य पथ पर रविवार रात एक सड़क दुर्घटना में दो नाबालिगों की दुखद मौत हो गई। मृतकों की पहचान नामकुम थाना अंतर्गत लोवाड़ीह निवासी तुमिल खाखा के 17 वर्षीय पुत्र आयुष खाखा और अनूप लिंडा की 16 वर्षीय पुत्री सायना अंजलि लिंडा के रूप में हुई। ये दोनों आपस में मौसेरे भाई-बहन थे, जिन्होंने हाल ही में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए अपने नाना विलियम के घर बुढ़मू के सिदरौल आए हुए थे।

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार रात दोनों ठाकुरगांव की दिशा में चाउमीन और कोल्ड ड्रिंक लेने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक तेज गति और नियंत्रण खोने के कारण एक पेड़ से जा टकराई, जिससे घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद बुढ़मू पुलिस ने दोनों नाबालिगों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया था। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं, और पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
    user_Sanjay kumar
    Sanjay kumar
    Newspaper publisher बुरमू, रांची, झारखंड•
    1 hr ago
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