*दद्दा धाम में उमड़ा भक्ति का सैलाब: प्रखर कथावाचक पं. इंद्रेश उपाध्याय ने टेका मत्था* कटनी। आध्यात्मिक ऊर्जा के पुंज और लाखों अनुयायियों की आस्था के केंद्र 'दद्दा जी के मंदिर' में आज भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। देश के सुप्रसिद्ध कथा वाचक भागवत मर्मज्ञ एवं ओजस्वी आध्यात्मिक चिंतक पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने दद्दा धाम पहुँचकर ब्रह्मलीन संत शिरोमणि गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। भक्तिमय अगवानी और पूजन धाम की देहरी पर कदम रखते ही वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इंद्रेश जी ने सर्वप्रथम गुरु बृहस्पति दद्दा जी के भव्य मंदिर में शीश नवाया और तत्पश्चात समाधि स्थल पर विधिवत पूजन-अर्चन किया। मंदिर के विद्वान पुरोहितों द्वारा किए गए सस्वर वैदिक मंत्रोच्चारण और आरती की ध्वनियों ने समूचे परिसर को अलौकिक दिव्यता से भर दिया। इस पावन अवसर पर धाम के सेवादारों और गुरु-शिष्यों में भारी उत्साह देखा गया। पूज्य दद्दा जी के पुत्र डॉ. सुनील त्रिपाठी एवं पंडित नीरज देव प्रभाकर शास्त्री सहित उपस्थित गुरु-भाइयों ने उपाध्याय जी का आत्मीय स्वागत किया *संस्कार और चेतना का संदेश* दर्शन पूजन के उपरांत एक संक्षिप्त किंतु सारगर्भित चर्चा में पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने कहा: "दद्दा जी का जीवन सादगी और सेवा का जीवंत दर्शन है। यह पावन धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का वह स्रोत है जहाँ से संस्कारों की धारा प्रवाहित होती है।" उन्होंने धर्म की रक्षा और संस्कारों के संवर्धन को आज के युग की महती आवश्यकता बताया। उपाध्याय जी के आगमन से दद्दा जी के अनुयायियों में हर्ष की लहर व्याप्त है।
*दद्दा धाम में उमड़ा भक्ति का सैलाब: प्रखर कथावाचक पं. इंद्रेश उपाध्याय ने टेका मत्था* कटनी। आध्यात्मिक ऊर्जा के पुंज और लाखों अनुयायियों की आस्था के केंद्र 'दद्दा जी के मंदिर' में आज भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। देश के सुप्रसिद्ध कथा वाचक भागवत मर्मज्ञ एवं ओजस्वी आध्यात्मिक चिंतक पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने दद्दा धाम पहुँचकर ब्रह्मलीन संत शिरोमणि गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। भक्तिमय अगवानी और पूजन धाम की देहरी पर कदम रखते ही वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इंद्रेश जी ने सर्वप्रथम गुरु बृहस्पति दद्दा जी के भव्य मंदिर में शीश नवाया और तत्पश्चात समाधि स्थल पर विधिवत पूजन-अर्चन किया। मंदिर के विद्वान पुरोहितों द्वारा किए गए सस्वर वैदिक मंत्रोच्चारण और आरती की ध्वनियों ने समूचे परिसर को अलौकिक दिव्यता से भर दिया। इस पावन अवसर पर धाम के सेवादारों और गुरु-शिष्यों में भारी उत्साह देखा गया। पूज्य दद्दा जी के पुत्र डॉ. सुनील त्रिपाठी एवं पंडित नीरज देव प्रभाकर शास्त्री सहित उपस्थित गुरु-भाइयों ने उपाध्याय जी का आत्मीय स्वागत किया *संस्कार और चेतना का संदेश* दर्शन पूजन के उपरांत एक संक्षिप्त किंतु सारगर्भित चर्चा में पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने कहा: "दद्दा जी का जीवन सादगी और सेवा का जीवंत दर्शन है। यह पावन धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का वह स्रोत है जहाँ से संस्कारों की धारा प्रवाहित होती है।" उन्होंने धर्म की रक्षा और संस्कारों के संवर्धन को आज के युग की महती आवश्यकता बताया। उपाध्याय जी के आगमन से दद्दा जी के अनुयायियों में हर्ष की लहर व्याप्त है।
- *दद्दा धाम में उमड़ा भक्ति का सैलाब: प्रखर कथावाचक पं. इंद्रेश उपाध्याय ने टेका मत्था* कटनी। आध्यात्मिक ऊर्जा के पुंज और लाखों अनुयायियों की आस्था के केंद्र 'दद्दा जी के मंदिर' में आज भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। देश के सुप्रसिद्ध कथा वाचक भागवत मर्मज्ञ एवं ओजस्वी आध्यात्मिक चिंतक पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने दद्दा धाम पहुँचकर ब्रह्मलीन संत शिरोमणि गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। भक्तिमय अगवानी और पूजन धाम की देहरी पर कदम रखते ही वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इंद्रेश जी ने सर्वप्रथम गुरु बृहस्पति दद्दा जी के भव्य मंदिर में शीश नवाया और तत्पश्चात समाधि स्थल पर विधिवत पूजन-अर्चन किया। मंदिर के विद्वान पुरोहितों द्वारा किए गए सस्वर वैदिक मंत्रोच्चारण और आरती की ध्वनियों ने समूचे परिसर को अलौकिक दिव्यता से भर दिया। इस पावन अवसर पर धाम के सेवादारों और गुरु-शिष्यों में भारी उत्साह देखा गया। पूज्य दद्दा जी के पुत्र डॉ. सुनील त्रिपाठी एवं पंडित नीरज देव प्रभाकर शास्त्री सहित उपस्थित गुरु-भाइयों ने उपाध्याय जी का आत्मीय स्वागत किया *संस्कार और चेतना का संदेश* दर्शन पूजन के उपरांत एक संक्षिप्त किंतु सारगर्भित चर्चा में पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी ने कहा: "दद्दा जी का जीवन सादगी और सेवा का जीवंत दर्शन है। यह पावन धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का वह स्रोत है जहाँ से संस्कारों की धारा प्रवाहित होती है।" उन्होंने धर्म की रक्षा और संस्कारों के संवर्धन को आज के युग की महती आवश्यकता बताया। उपाध्याय जी के आगमन से दद्दा जी के अनुयायियों में हर्ष की लहर व्याप्त है।1
- कटनी खनिज विभाग की आधी रात में छापामार कार्यवाही में जमुवानी में लेटराइट खनिज का अवैध खनन और परिवहन में संलिप्त हाइवा जब्त1
- आपको पता है कि कटनी जिले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के द्वारा करोड़ों रुपए का राजस्व मध्य प्रदेश शासन को दिया जाता है बदले में मध्य प्रदेश शासन आरटीओ कार्यालय को ठेंगा दिखाने का कार्य कर रहा है वही आरटीओ कार्यालय में आए दिन बियर शराब की परियां चलती हैं वही आरटीओ कार्यालय की हालत खस्ता है जगह-जगह गंदगी शौचालय की हालत बाद से बस्तर आरटीओ से सवाल पूछने पर आरटीओ स्वयं करने तथा करने पर आमादा हो जाते हैं कटनी जिला प्रशासन भी इस परमैन छुपी सड़े हुए हैं1
- Post by शिकुमार कुशवाहा2
- Post by Deepak Tiwari (Sonu)2
- सतना - रामपुर बाघेलान तहसील क्षेत्र के चोरहटा गांव की आराजी क्रमांक 1434 एवं 1436 मे महान ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी के सरहंगो द्वारा किसानों को डरा धमकाकर कर गड़वाए जा रहे टावर , हरे भरे लहलहाते खेत में चलवाई जा रही जेसीबी मशीन , ग्रामीणो एवं अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों में नाराजगी , कलेक्टर से हुई शिकायत।3
- Post by Jagtapal Yadav g1
- कटनी रजिस्ट्री कार्यालय में वर्षों से जड़ जमाए भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: देश के सिपाही से भी मांगी रिश्वत, फिर आम जनता किसके भरोसे? कटनी। जिले के रजिस्ट्री कार्यालय में भ्रष्टाचार अब व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है — इसका ताज़ा और शर्मनाक उदाहरण तब सामने आया, जब देश की सीमाओं पर तैनात एक भारतीय सेना के जवान से ही खुलेआम रिश्वत वसूली गई। यह घटना न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही को भी उजागर करती है। बताया जा रहा है कि कटनी रजिस्ट्री कार्यालय में वर्षों से अवैध वसूली का खेल बेरोकटोक जारी है, लेकिन शिकायतों के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे भ्रष्ट कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं। पूरा मामला क्या है? प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित फौजी अपनी पत्नी के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि कानूनी शुल्क के अतिरिक्त उनसे जबरन रिश्वत मांगी गई। 🔹 पहले चरण में — रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर ₹2,500 की अवैध वसूली। 🔹 दूसरे चरण में — फाइल आगे बढ़ाने और काम शीघ्र कराने के लिए ₹2,000 और ऐंठ लिए गए। यानी सरकारी कार्यालय में खुलेआम रिश्वत की दर तय कर रखी है। फौजी का दर्द — सिस्टम पर करारा प्रहार पीड़ित जवान ने मीडिया से बातचीत में कहा — "हम जान हथेली पर रखकर देश की रक्षा करते हैं, लेकिन अपने ही जिले में सरकारी दफ्तरों के भ्रष्टाचार से जूझना पड़ता है। अगर एक फौजी को नहीं बख्शा जा रहा, तो आम नागरिक की हालत क्या होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।" उन्होंने आगे कहा — "रजिस्ट्री कार्यालय में रिश्वत के बिना कोई काम नहीं होता। यह भ्रष्टाचार वर्षों से चल रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। मजबूर होकर मैंने जिला रजिस्ट्रार को लिखित शिकायत दी है।" वर्षों से फल-फूल रहा भ्रष्टाचार, प्रशासन मौन स्थानीय लोगों का कहना है कि कटनी रजिस्ट्री कार्यालय में रिश्वतखोरी कोई नई बात नहीं है। यहां बिना अवैध वसूली के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं, जिससे कर्मचारियों को खुली छूट मिल गई है। अब सवाल — जब फौजी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या? यह घटना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब देश की सेवा करने वाले सैनिक से ही खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही है, तो आम आदमी को कौन बचाएगा? अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करता है या यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। 👉 कटनी की जनता और देश की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं।1