हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल बीते रात चौपारण प्रखंड के बरवाडीह पहुँचे। उन्होंने जिला परिषद भाग-3 सह भाजपा पूर्वी मंडल अध्यक्ष के आवास पर आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत की। यह अवसर जिला परिषद के प्रथम पुत्र की शादी का था, जहाँ सांसद ने 'मड़वा छापरी' के मांगलिक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने होने वाले वर को उज्ज्वल और सफल दांपत्य जीवन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। सांसद के आगमन पर बरवाडीह के ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस शुभ अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति, समाजसेवी और राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों में सांसद प्रतिनिधि मुकुंद साव, चौपारण के सांसद प्रतिनिधि रामस्वरूप पासवान, पूर्वी मंडल उपाध्यक्ष अरविंद साव, पूर्व मंडल अध्यक्ष (चौपारण) गजाधर प्रसाद, चतरा जिला की पंचायत समिति सदस्य खुशबू कुमारी, और शिक्षक सुनील सिंहा तथा सुधीर कौशल प्रमुख थे। इनके अलावा, क्षेत्र के भारी संख्या में नौजवान और स्थानीय ग्रामीण भी इस शुभ कार्य के साक्षी बने। सांसद की मौजूदगी ने विवाह की खुशियों को और दोगुना कर दिया।
हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल बीते रात चौपारण प्रखंड के बरवाडीह पहुँचे। उन्होंने जिला परिषद भाग-3 सह भाजपा पूर्वी मंडल अध्यक्ष के आवास पर आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत की। यह अवसर जिला परिषद के प्रथम पुत्र की शादी का था, जहाँ सांसद
ने 'मड़वा छापरी' के मांगलिक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने होने वाले वर को उज्ज्वल और सफल दांपत्य जीवन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। सांसद के आगमन पर बरवाडीह के ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने उनका गर्मजोशी
से स्वागत किया। इस शुभ अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति, समाजसेवी और राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों में सांसद प्रतिनिधि मुकुंद साव, चौपारण के सांसद प्रतिनिधि रामस्वरूप पासवान, पूर्वी मंडल उपाध्यक्ष अरविंद साव, पूर्व मंडल अध्यक्ष (चौपारण) गजाधर प्रसाद, चतरा जिला की
पंचायत समिति सदस्य खुशबू कुमारी, और शिक्षक सुनील सिंहा तथा सुधीर कौशल प्रमुख थे। इनके अलावा, क्षेत्र के भारी संख्या में नौजवान और स्थानीय ग्रामीण भी इस शुभ कार्य के साक्षी बने। सांसद की मौजूदगी ने विवाह की खुशियों को और दोगुना कर दिया।
- हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल बीते रात चौपारण प्रखंड के बरवाडीह पहुँचे। उन्होंने जिला परिषद भाग-3 सह भाजपा पूर्वी मंडल अध्यक्ष के आवास पर आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत की। यह अवसर जिला परिषद के प्रथम पुत्र की शादी का था, जहाँ सांसद ने 'मड़वा छापरी' के मांगलिक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने होने वाले वर को उज्ज्वल और सफल दांपत्य जीवन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। सांसद के आगमन पर बरवाडीह के ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस शुभ अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति, समाजसेवी और राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों में सांसद प्रतिनिधि मुकुंद साव, चौपारण के सांसद प्रतिनिधि रामस्वरूप पासवान, पूर्वी मंडल उपाध्यक्ष अरविंद साव, पूर्व मंडल अध्यक्ष (चौपारण) गजाधर प्रसाद, चतरा जिला की पंचायत समिति सदस्य खुशबू कुमारी, और शिक्षक सुनील सिंहा तथा सुधीर कौशल प्रमुख थे। इनके अलावा, क्षेत्र के भारी संख्या में नौजवान और स्थानीय ग्रामीण भी इस शुभ कार्य के साक्षी बने। सांसद की मौजूदगी ने विवाह की खुशियों को और दोगुना कर दिया।4
- झारखंड के लातेहार जिले के रोन्हे़ं गांव में एक अनोखा विवाद देखने को मिल रहा है। यहां गांव के लोग, जो पहले मिलजुल कर रहते थे, अब दो-तीन गुटों में बंट गए हैं। यह बंटवारा जंगल लगाने, पौधे रोकने और लगाने जैसे कार्यों को लेकर हुआ है।1
- झारखंड के बालूमाथ थाना क्षेत्र के चेताग पंचायत के गेरेजा क्षेत्र में अनुसूचित भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण और खरीद-बिक्री को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। इस मामले में ग्रामीणों ने बालूमाथ थाना प्रभारी को एक आवेदन सौंपकर तत्काल जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र की यह जमीन अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहाँ ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी तरह की भूमि संबंधी गतिविधि नहीं की जा सकती। इसके बावजूद, कुछ लोग नियमों के विरुद्ध जाकर जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जब इन संबंधित व्यक्तियों से जमीन संबंधी जानकारी मांगी गई तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ व्यक्ति जमीन पर कब्जा करने और उसे बेचने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, भूमि के दस्तावेजों की गहन पड़ताल करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि अनुसूचित क्षेत्र की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर समाधान करने की अपील की है।2
- हजारीबाग में 30 जून 2026 को सिद्धू कान्हू मुर्मू चौक पर आदिवासी समाज द्वारा हूल दिवस बड़े धूमधाम, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित हुए और सभी ने माल्यार्पण कर महान क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सिद्धू-कान्हू के संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकार की मशाल को आज भी प्रज्वलित बताया। दरअसल, 30 जून 1855 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जब वीर क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू मुर्मू ने अंग्रेजी हुकूमत, जमींदारी शोषण और अन्याय के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका था। यह जल-जंगल-जमीन, स्वाभिमान, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज की एक ऐतिहासिक हुंकार थी। सिद्धू-कान्हू, भाई चांद-भैरव और बहनें फूलो-झानो के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और स्वाभिमान की अमिट मिसाल कायम की। यह क्रांति 1857 के सिपाही विद्रोह से दो साल पहले 30 जून 1855 को झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव में शुरू हुई थी। उस दिन लगभग 400 गांवों से 50,000 से अधिक आदिवासी इकट्ठा हुए थे, जहां सिद्धू-कान्हू ने अंग्रेजों के खिलाफ 'हूल' (विद्रोह) का बिगुल फूंका था। इस आंदोलन का प्रसिद्ध नारा "करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो" इतिहास में अमर है। अंग्रेजों और उनके चाटुकार जमींदारों द्वारा आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर कब्जे, अत्यधिक लगान, कर्ज के जाल और पुलिस-कचहरी द्वारा शासकों का साथ देने के कारण यह विद्रोह बेहद हिंसक और व्यापक था। इस लड़ाई में पारंपरिक हथियारों से लैस लगभग 20,000 आदिवासियों ने अपनी मातृभूमि के लिए शहादत दी, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को आदिवासियों की शक्ति का एहसास हुआ और उन्हें पीछे हटना पड़ा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता (चाईबासा) किस्टो कुमार बेसरा ने कहा कि महापुरुषों के संघर्ष से सीख लेकर समाज को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज उनके दिखाए मार्ग पर चलकर शिक्षा, अधिकार और एकता के लिए काम नहीं करेगा, तब तक श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी, और यह क्रांति अन्याय के खिलाफ खड़े होने तथा अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की सीख देती है। आदिवासी सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने कहा कि हूल दिवस आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है, तथा संगठन, संस्कृति और संघर्ष ही समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया। आदिवासी समाज के संयोजक रमेश कुमार हेम्ब्रोम ने बताया कि महापुरुषों का सपना अभी पूरी तरह साकार नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से महापुरुषों के वंशजों को गोद लेने और एस.पी.टी. एवं सी.एन.टी एक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग की। पवन तिग्गा ने कहा कि सिद्धू-कान्हू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक है, और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष तथा एकजुटता, जागरूकता बेहद जरूरी है। इस मौके पर आदिवासी सरना समिति के सचिव सुनिल लकड़ा, सुशील ओड़िया, महालाल हंसदा, मुखिया संझली मुर्मू, पूर्व मुखिया महादेव सोरेन, रवि लिंडा, पाहन बंधन टोप्पो, बंधन एक्का, निरज कुमार बेसरा, शिवजी टुडू, पप्पू एक्का, प्रदीप बेदिया, ललीता सोरेन, प्रतिमा सोरेन, मुखिया दयामनी टोप्पो, संजय टोप्पो, प्रमिला मुर्मू, अम्बिका टोप्पो, प्रदीप मुर्मू, सुधीर बासके, जगन कच्छप, आनन्द बासके, रघु हंसदा, कैलाश किस्कू, सुनील सोरेन, रिना सोरेन, बगुन सोरेन, मनी टोप्पो, सोहन किस्कू, प्रदीप कुमार मांझी, सोनी टोप्पो, अनामिका तिर्की, रीना तिर्की, रीना सोरेन, पप्पू एक्का, वीरेंद्र महली, बसंत सोरेन सहित आदिवासी समाज के हजारों महिला-पुरुष उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, गर्व और एकता से ओतप्रोत रहा, जिसने एक बार फिर संदेश दिया कि सिद्धू-कान्हू और अन्य वीर शहीदों का संघर्ष आज भी समाज को अपने अधिकारों, अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होने को प्रेरित करता है।1
- रांची में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल की जा रही है।1
- रेल सुरक्षा बल (RPF) ने अपने 'ऑपरेशन सतर्क' के तहत रांची रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 24 बोतल अवैध शराब बरामद की और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई दिनांक 29.06.2026 को फ्लाइंग टीम/रांची और आरपीएफ पोस्ट/रांची के अधिकारियों व जवानों द्वारा चलाए गए सघन जांच अभियान के दौरान की गई। जांच अभियान के दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-01 स्थित पार्सल कार्यालय गेट के पास एक युवक भूरे रंग का ट्रॉली बैग लिए संदिग्ध अवस्था में खड़ा पाया गया। संदेह होने पर उसे रोका गया और उसके सामान की तलाशी ली गई, जिसमें कुल 24 बोतल व्हिस्की बरामद हुईं। पकड़े गए युवक की पहचान विवेक कुमार सिंह (लगभग 19 वर्ष) पुत्र विपिन कुमार सिंह, निवासी बिहारी बीघा, थाना पंडारक, जिला पटना (बिहार) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह यह शराब रांची से खरीदकर बिहार में अधिक कीमत पर बेचने के उद्देश्य से ले जा रहा था। उप निरीक्षक रवि शेखर, आरपीएफ फ्लाइंग टीम/रांची द्वारा शराब की सभी बोतलों को विधिवत जब्त किया गया, जिनकी अनुमानित कीमत ₹19,000/- बताई गई है। रेलवे परिसर में प्रतिबंधित वस्तुओं के परिवहन पर रोक होने के कारण आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को दिनांक 30.06.2026 को बरामद शराब सहित उत्पाद विभाग, रांची के सुपुर्द कर दिया गया ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस कार्रवाई में फ्लाइंग टीम/रांची से उपनिरीक्षक रवि शेखर, आरक्षक प्रदीप और आरक्षक डी.के. जितरवाल, तथा आरपीएफ पोस्ट/रांची से उपनिरीक्षक रंजीत कुमार शामिल थे।1
- दिनांक 30.06.26 को हज़ारीबाग के पुलिस अधीक्षक ने ईचाक थाने का निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, हज़ारीबाग ज्ञान रंजन; पुलिस दारू अंचल के पुलिस निरीक्षक विमल कुमार लकड़ा; ईचाक थाना प्रभारी गौतम कुमार; और अन्य पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। निरीक्षण के क्रम में, पुलिस अधीक्षक महोदय ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मियों को कई आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने थाना की विधि व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इसके साथ ही, थाना में सभी पंजों का अवलोकन कर लंबित कांडों, वारंट, कुर्की, चरित्र सत्यापन और पासपोर्ट संबंधित मामलों की समीक्षा की तथा संबंधित पदाधिकारियों को इनके त्वरित निष्पादन हेतु आवश्यक निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक ने थाना क्षेत्र में फरार चल रहे सभी अभियुक्तों को तत्काल गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। अवैध मादक पदार्थ से संबंधित लंबित कांडों में भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, लोगों के बीच नशा के विरुद्ध व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और क्षेत्र में शांतिपूर्ण विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए आमजनों व जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने पर भी बल दिया गया।1
- हूल दिवस के पावन अवसर पर पूरा झारखंड श्रद्धापूर्वक नतमस्तक हो गया। इस महत्वपूर्ण दिवस पर, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अमर शहीद सिदो-कान्हू को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।1