मकर संक्रान्ती पर्व बुधवार को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारो की संख्या में श्रद्धालु तेलमोच्चो स्थित दामोदर नदी के तट पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। नदी में स्नान करने के बाद घाट पर मौजूद गरीबों, पुरोहितों को अन्न व द्रब्यदान कर पुण्य के भागी बने। तत्पश्चात मंदिरों में जाकर भगवान शिव एवं माता पार्वति का दर्शन व पूजन कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद लिया। पुजा समापन होने के पश्चात परिवार एवं मित्रो के साथ दही चुड़ा एवं तिलकुट ग्रहण किया। इस दौरान ब्रिज के दोनों और वाहनों का काफी भीड़ थी। आम लोगों का भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पार करने में लोगो को घंटो इन्तजार करना पड़ता था। इस अवसर पर बहुत से युवा साथी गाजेबाजे के साथ मकर संक्रान्ती का गीत गाते हुए नाचने में मसगुल थे। वहीं महिलाओं एवं किशोरीयों के द्वारा समुह बनाकर रंग-बिरंगे टुसु लेकर गीत गाते हुए नदी में जा रही थी। महिला समुह के द्वारा एक से बढ़कर एक आकर्षक टुसु का लेकर विसर्जन करने आ रहे थे। टुसु पर्व एक सप्ताह पुर्व से ही मनाया जाता है। रंगीन कागज से सजाया हुआ टुसु को महिलाएं रात्री के समय पुजा अर्चना कर टुसु गीत गाकर नृत्य करते है। और मकर संक्रान्ति के दिन नदी में विसर्जन कर देती है। स्नान करने के बाद नदी तट पर स्थित पहाड़ी शिव मंदिर में श्रद्धालुगण पहुंचकर पुजा अर्चना करते है। यहाँ मेला का भी आयोजन होता है। मेला के भीड़ में कोई अप्रिय घटना नहीं घटे इसके लिए बाघमारा वीडीओ लक्ष्मण प्रसाद यादव महुदा पुलिस एवं ग्राम रक्षा दल के साथ निगरानी करते हुए देखा गया। जिप सदस्य आशा देवी, मुखिया प्रतिनिधि बॉबी महतो, जिप प्रतिनिधि राजु महतो के द्वारा मेला में स्टेज लगाकर श्रद्धालुओं के बीच चुड़ा, दही, तिलकुल का वितरण किया।
मकर संक्रान्ती पर्व बुधवार को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारो की संख्या में श्रद्धालु तेलमोच्चो स्थित दामोदर नदी के तट पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। नदी में स्नान करने के बाद घाट पर मौजूद गरीबों, पुरोहितों को अन्न व द्रब्यदान कर पुण्य के भागी बने। तत्पश्चात मंदिरों में जाकर भगवान शिव एवं माता पार्वति का दर्शन व पूजन कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद लिया। पुजा समापन होने के पश्चात परिवार एवं मित्रो के साथ दही चुड़ा एवं तिलकुट ग्रहण किया। इस दौरान ब्रिज के दोनों और वाहनों का काफी भीड़ थी। आम लोगों का भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पार करने में लोगो को घंटो इन्तजार करना पड़ता था। इस अवसर पर बहुत से युवा साथी गाजेबाजे के साथ मकर संक्रान्ती का गीत गाते हुए नाचने में मसगुल थे। वहीं महिलाओं एवं किशोरीयों के द्वारा समुह बनाकर रंग-बिरंगे टुसु लेकर गीत गाते हुए नदी में जा रही थी। महिला समुह के द्वारा एक से बढ़कर एक आकर्षक टुसु का लेकर विसर्जन करने आ रहे थे। टुसु पर्व एक सप्ताह पुर्व से ही मनाया जाता है। रंगीन कागज से सजाया हुआ टुसु को महिलाएं रात्री के समय पुजा अर्चना कर टुसु गीत गाकर नृत्य करते है। और मकर संक्रान्ति के दिन नदी में विसर्जन कर देती है। स्नान करने के बाद नदी तट पर स्थित पहाड़ी शिव मंदिर में श्रद्धालुगण पहुंचकर पुजा अर्चना करते है। यहाँ मेला का भी आयोजन होता है। मेला के भीड़ में कोई अप्रिय घटना नहीं घटे इसके लिए बाघमारा वीडीओ लक्ष्मण प्रसाद यादव महुदा पुलिस एवं ग्राम रक्षा दल के साथ निगरानी करते हुए देखा गया। जिप सदस्य आशा देवी, मुखिया प्रतिनिधि बॉबी महतो, जिप प्रतिनिधि राजु महतो के द्वारा मेला में स्टेज लगाकर श्रद्धालुओं के बीच चुड़ा, दही, तिलकुल का वितरण किया।
- मकर संक्रान्ती पर्व बुधवार को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारो की संख्या में श्रद्धालु तेलमोच्चो स्थित दामोदर नदी के तट पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। नदी में स्नान करने के बाद घाट पर मौजूद गरीबों, पुरोहितों को अन्न व द्रब्यदान कर पुण्य के भागी बने। तत्पश्चात मंदिरों में जाकर भगवान शिव एवं माता पार्वति का दर्शन व पूजन कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद लिया। पुजा समापन होने के पश्चात परिवार एवं मित्रो के साथ दही चुड़ा एवं तिलकुट ग्रहण किया। इस दौरान ब्रिज के दोनों और वाहनों का काफी भीड़ थी। आम लोगों का भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पार करने में लोगो को घंटो इन्तजार करना पड़ता था। इस अवसर पर बहुत से युवा साथी गाजेबाजे के साथ मकर संक्रान्ती का गीत गाते हुए नाचने में मसगुल थे। वहीं महिलाओं एवं किशोरीयों के द्वारा समुह बनाकर रंग-बिरंगे टुसु लेकर गीत गाते हुए नदी में जा रही थी। महिला समुह के द्वारा एक से बढ़कर एक आकर्षक टुसु का लेकर विसर्जन करने आ रहे थे। टुसु पर्व एक सप्ताह पुर्व से ही मनाया जाता है। रंगीन कागज से सजाया हुआ टुसु को महिलाएं रात्री के समय पुजा अर्चना कर टुसु गीत गाकर नृत्य करते है। और मकर संक्रान्ति के दिन नदी में विसर्जन कर देती है। स्नान करने के बाद नदी तट पर स्थित पहाड़ी शिव मंदिर में श्रद्धालुगण पहुंचकर पुजा अर्चना करते है। यहाँ मेला का भी आयोजन होता है। मेला के भीड़ में कोई अप्रिय घटना नहीं घटे इसके लिए बाघमारा वीडीओ लक्ष्मण प्रसाद यादव महुदा पुलिस एवं ग्राम रक्षा दल के साथ निगरानी करते हुए देखा गया। जिप सदस्य आशा देवी, मुखिया प्रतिनिधि बॉबी महतो, जिप प्रतिनिधि राजु महतो के द्वारा मेला में स्टेज लगाकर श्रद्धालुओं के बीच चुड़ा, दही, तिलकुल का वितरण किया।1
- बाघमारा क्षेत्र के तेलमाचो स्थित दामोदर नदी घाट में 14 जनवरी को हजारों हजार की संख्या में महिला पुरुष बच्चे एवं वृद्धों ने मकर संक्रांति का पवान स्नान किया हालांकि मकर संक्रांति दो दिन होने के अनुमंजस होने के बावजूद लोगों ने 14 तारीख को ही पावन स्नान किया आईए आपको दिखाते हैं नदी घाट में किस तरह लोगों की भारी भीड़ जुटी थी1
- गुप्त रोग शीघ्रपतन शुक्राणु स्वप्नदोष मर्दाना ताकत संपर्क करें डॉक्टर पंकज कुमार 9572291304, 70910778981
- Post by Seema Kumari1
- आज बुधवार के दिन निरसा क्षेत्र अंतर्गत गोपालगंज स्थित जगन्नाथ मंदिर कमेटी के लिए आज का दिन काफी शुभ रहा क्योंकि आज मंदिर कमेटी तथा वर्तमान विधायक अरुप चटर्जी के अथक प्रयास के बाद आज जगन्नाथ मंदिर परिसर के छत पर शेड निर्माण को लेकर विधायक अरुप चटर्जी के द्वारा नारियल फोड़ कर शिलान्यास किया गया l विगत 14 वर्ष पूर्व विधायक अरुप चटर्जी के द्वारा ही उक्त मंदिर के आधारशिला रखी गई थी और एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था l इसके बाद आज इतने वर्ष बीत जाने के बाद फिर से उसी मंदिर में नया निर्माण कार्य शुरू होने की आधारशिला रखी गई l मौके पर उपस्थित जगन्नाथ मंदिर कमेटी के सचिव मनजीत सिंह ने बताया कि कई वर्षों से मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर के ऊपर छत पर निर्माण कार्य करने की बात लगातार कहीं जा रही थी जिसके बाद वर्तमान विधायक द्वारा इस कार्य का शिलान्यास आज नारियल फोड़ कर किया गया l मंदिर कमेटी के लोगों ने बताया कि विगत के विधानसभा चुनाव के दौरान जब विधायक अरुप चटर्जी अपना नामांकन करने के लिए धनबाद जा रहे थे तभी इस मंदिर में रुक कर भगवान जगन्नाथ से आशीर्वाद लिया और यह प्रण लिया कि अगर इस बार हम विजय होकर निरसा का विधायक बनता हूं तो एक वर्ष होते ही मैं इस मंदिर के ऊपर निर्माण कार्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दूंगा l ठीक उसी के अनुरूप ही विधायक बनने के एक वर्ष होते ही अपने तय वादे के अनुसार विधायक ने आज मंदिर के प्रथम तल पर एक भव्य शेड निर्माण तथा आगे चलकर गुंबद निर्माण के लिए भी कार्य करने की बात कही l मौके पर उपस्थित मंदिर कमेटी के सचिव मनजीत सिंह ने विधायक को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया इसके बाद सभी भक्तों तथा अतिथियों की उपस्थिति में नारियल फोड़कर इस निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया l2
- viral video pura dekhe 😂🤣🤣 https://youtube.com/shorts/RvNhEP0_04Y?si=NCd3cl2JwARMcJQq1
- पत्ता गोभी के कीड़े से गई जान जानिए पूरा मामला1
- झारखंड में आज भी परंपरागत और रोचक खेल है 'मुर्गा लड़ाई'। झारखंड के जनजातीय ओर ग्रामीण इलाकों में लगने वाले ग्रामीण हाट-बाजारों के अलावा कई अन्य स्थानों पर आज भी एक परंपरागत खेल 'मुर्गा लड़ाई' बेहद लोकप्रिय है। इसमें हारने वाला मुर्गा जीतने वाले मुर्गा के मालिक को मिल जाता, कई जिलों में इस लड़ाई को आदिवासियों की संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है. इस छेत्र के समाज के ग्रामीणों में ऐसी मान्यता है कि उनकी कई पीढ़ियों से ये मुर्गा लड़ाई म हुदा के भदवार टाँड़ राजा के जमाने होता आ रहा है। सबसे बड़ी बात है लाखो की संख्या में लोग आते है कोई अपनी घर परिवार को चलाने के लिए ठेला लगता है तो कोई कपड़ा बेचता है तो कोई गन्ना तो कोई होटल खोलकर अपना रोजगार करता है कुछ घंटों के इस मैले में। ये मुर्गा लड़ाई कोई भी कमिटी नही करती ओर न कोई इसका आयोजन कर्ता होता है झारखंड के हर जिले के अलावा उससे सटे कई राज्यो के लोग इस मेले में आते है। जिसे लोग बावड़ी मेला कहते है। करीब 20 फुट के घेरे में दो मुर्गो की लड़ाई होती है. लड़ाई के दौरान मुर्गे की पैंतरेबाजी देखने लायक होती है. लड़ाई में एक चक्र अमूमन सात से 10 मिनट तक चलता है. लड़ाई शुरू होने से पहले और लड़ाई के दौरान लोग मुर्गो पर दांव लगाते हैं. सट्टेबाज लोगों को उकसाते हुए चारों तरफ घूमते रहते हैं. इस दौरान मुर्गे को उत्साहित करने के लिए मुर्गा का मालिक तरह-तरह की आवाजें निकालता रहता है, जिसके बाद मुर्गा और खतरनाक हो जाता है. मुर्गा लड़ाई के लिए मुर्गा पालने के शौकीन लड़ाई में प्रशिक्षित मुर्गे उतारे जाते हैं. लड़ने के लिए तैयार मुर्गे के एक पैर में 'कत्थी' बांधा जाता है ऐसा नहीं कि यह कत्थी कोई व्यक्ति बांध सकता है. इसके बांधने की भी अपनी कला है. कत्थी बांधने का कार्य करने वालों को 'कातकीर' कहा जाता है जो इस कला में माहिर होता है. मुर्गे आपस में कत्थी द्वारा एक दूसरे पर वार करते रहते हैं. इस दौरान मुर्गा लहुलूहान हो जाता है. जो मुर्गा गिर या बैठ जाता इस लड़ाई में तभी समाप्त होती है जब तक मुर्गा घायल न हो जाए या मैदान छोड़कर भाग जाए. तब तक जीत हार का मान्य नही होता। जानकार बताते हैं कि मुर्गा को लड़ाकू बनाने के लिए खास तौर पर न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है बल्कि उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. लड़ाई के लिए तैयार किए जाने वाले मुर्गे को ताकतवर बनाने के लिए उन्हें सूखी मछली का घोल, किशमिश, उबला हुआ मक्का और विटामिन के इंजेक्शन तक दिए जाते हैं.1