Shuru
Apke Nagar Ki App…
दिनांक 5.4.2026 को दोपहर 1:00 बजे के बाद बरसात के साथ आए ऑल किसानों में मचा हड़कम जिला हाथरस की सिकंदरा राव के गांव डंडेश्वरी में तेज बारिश के साथ ओले भी आए जिससे मजदूर वर्ग के लोग किसान बरसात से बहुत ज्यादा परेशान है खेतों में गेहूं कटने को पड़े हैं ।फसल पक गई है और घर पर एक दाना तक नहीं आया किसान भूखा मर रहा है और सरकार से गुहार लगा रहा है कि किसी भी तरीके से मुआवजा मिले तो दो वक्त का भजन मिले देखते हैं जिलाधिकारी को भी ज्ञापन देने के लिए किस इकट्ठे हो रहे हैं जिसमें सबसे पहले आगे आए डंडेश्वरी ग्राम पंचायत प्रधान विनय कुमार जिला पंचायत उमाशंकर गुप्ता जी एवं उनके साथ अन्य कार्यकर्ता।
Harsh Pundhir
दिनांक 5.4.2026 को दोपहर 1:00 बजे के बाद बरसात के साथ आए ऑल किसानों में मचा हड़कम जिला हाथरस की सिकंदरा राव के गांव डंडेश्वरी में तेज बारिश के साथ ओले भी आए जिससे मजदूर वर्ग के लोग किसान बरसात से बहुत ज्यादा परेशान है खेतों में गेहूं कटने को पड़े हैं ।फसल पक गई है और घर पर एक दाना तक नहीं आया किसान भूखा मर रहा है और सरकार से गुहार लगा रहा है कि किसी भी तरीके से मुआवजा मिले तो दो वक्त का भजन मिले देखते हैं जिलाधिकारी को भी ज्ञापन देने के लिए किस इकट्ठे हो रहे हैं जिसमें सबसे पहले आगे आए डंडेश्वरी ग्राम पंचायत प्रधान विनय कुमार जिला पंचायत उमाशंकर गुप्ता जी एवं उनके साथ अन्य कार्यकर्ता।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- ट्यूबवेल के ट्रांसफार्मर से निकली चिंगारी ने मचाया तांडव, दो बीघा गेहूं की फसल जलकर खाक हाथरस सासनी के गांव छौंड़ा गड़ाऊआ में एक किसान की दो बीघा गेहूं की फसल ट्यूबवेल के ट्रांसफार्मर से निकली चिंगारी के कारण जलकर राख हो गई। यह घटना मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे हुई, जिससे किसान को भारी नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार, मुकुंद खेड़ा मार्ग पर स्थित किसान मोनू कुमार पुत्र मदन लाल के खेत हैं। मोनू ने बताया कि खेत के पास में लगे ट्यूबवेल के ट्रांसफार्मर की केबल में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। इससे निकली चिंगारियों ने खेत में खड़ी सूखी गेहूं की फसल को तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब छह बीघा के चक में से दो बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। हालांकि, आसपास के खेतों में काम कर रहे किसानों और ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, जिससे शेष फसल को जलने से बचा लिया गया। पीड़ित किसान मोनू कुमार ने बताया कि इस अग्निकांड में उन्हें करीब 40 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। घटना की सूचना मिलने पर लेखपाल मौसीन खां ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और नुकसान का आकलन किया। किसान ने प्रशासन से जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है।3
- Post by Al hikma pharmacy1
- ग्रामीण बीर नगर नरऊ स्कूल के सामने बच्चे लोग परेशान होते हैं1
- *कमिशनखोरी और “कम रेट के बिल” का खेल—बरगवां में सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की नींव डाली जा रही!* *सबसे कम रेट में काम उठाने वालों को ठेका, फिर घटिया निर्माण से वसूली—जनता भुगत रही सजा* नई ताकत न्यूज नेटवर्क बरगवां ।।नगर परिषद बरगवां के वार्ड क्रमांक 2 में बन रही सड़क अब सिर्फ घटिया निर्माण का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह “कमिशनखोरी और कम रेट के बिल” के पूरे खेल का जिंदा उदाहरण बन चुकी है। आरोप है कि ठेका ऐसे लोगों को दिया जाता है जो सबसे कम रेट में काम लेने को तैयार होते हैं, और बाद में वही लागत बचाने के लिए सड़क में “भस्सी” मिलाकर घटिया निर्माण करते हैं। यानी खेल साफ है—ऊपर से कमिशन, नीचे से घटिया काम… और बीच में पिस रही है जनता! *कम रेट = घटिया क्वालिटी?* स्थानीय लोगों का कहना है कि जब काम ही अव्यवहारिक रूप से कम रेट में दिया जाएगा, तो ठेकेदार गुणवत्ता कहां से लाएगा? ऐसे में वह घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर अपनी जेब भरता है और सड़क कुछ ही महीनों में दम तोड़ देती है। *“बिल” का असली मतलब—भुगतान नहीं, बंदरबांट!* लोगों का आरोप है कि यहां “बिल” पास होने का मतलब काम की गुणवत्ता नहीं, बल्कि कमीशन की सेटिंग है। फाइलों में सड़क मजबूत दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत में पहली बारिश में ही उखड़ जाती है। *कौन है असली जिम्मेदार?* सवाल सिर्फ ठेकेदार पर नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी है जो ऐसे टेंडर पास करते हैं और आंख मूंदकर बिलों पर साइन करते हैं। बिना मिलीभगत के यह खेल संभव नहीं। *जनता का फूटा गुस्सा* वार्ड के लोग अब खुलकर कह रहे हैं कि यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है, जिसमें जनता के टैक्स के पैसे की लूट हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी जांच नहीं हुई, तो वे आंदोलन करेंगे। *अंतिम सवाल* क्या कमिशन और कम रेट के इस खेल पर लगाम लगेगी, या फिर बरगवां में “भस्सी वाली सड़क” भ्रष्टाचार का स्थायी प्रतीक बन चुकी है?1
- एक ब्यक्त के संतान ना होने के कारण बह आत्म हत्या करने को जंगल में गया . . . . . . . .1
- *एटा मेडिकल कॉलेज प्रकरण पत्रकार वनाम चिकित्सक* रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट एटा - (मार पीट की घटना का जीता जागता उदाहरण है वायरल वीडियो। ) दो दिन पूर्व जनपद के मेडिकल कॉलेज मे एक पत्रकार अपने बेटे का इलाज कराने जाते है उनके साथ एक अन्य पत्रकार भी थे, इलाज मे ना - नुकर पर पहले मेडिकल स्टाफ जिसमे चिकित्सक ओर नर्से शामिल है,ने पत्रकारों से अभद्रता करनी शुरू की बाद मे एक डॉक्टर ने सभी हदे पार करते हुए पत्रकार को अश्लील गालियां देते हुए मारपीट तक कर डाली,ये कृत्य अत्यंत निंदनीय है! विडिओ देख कर आप अनुमान लगा सकते है कि चिकत्सक़ किस विचारधारा के है! मेडिकल कॉलेज में अधिकांश गरीब तबके के लोग आते हैं, ये डॉक्टर उनके साथ केसा मानवीय व्यवहार करते होंगे! मेडिकल कॉलेज मैं अव्यवस्थाओं का यह कोई नया मामला नहीं है शान द्वारा जनपद एटा में स्ववित्त पोषित मेडिकल कॉलेज की स्थापना इसलिए की गई थी ताकि जनपद के वें युवा,जो चिकित्सा क्षेत्र में जाना चाहते हैं वह दूर दराज के जनपदों न जाकर यही शिक्षा प्राप्त करें और जनपद के लोगों को उच्च चिकित्सीय लाभ भी प्राप्त हो! किंतु वर्तमान हालात में ऐसा कहीं से भी प्रतीत नहीं हो रहा है कि इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र अपनी मेडिकल की पढ़ाई करके सेवा भाव से चिकित्सा क्षेत्र मेंअपनी सेवाएं दे पायंगे! मेडिकल कॉलेज में मानो तहजीब और अदब का नामोनिशान मिट गया है! अक्सर कर सीनियर डॉक्टरों द्वारा तिमारदारो के परिजनों के साथ अभद्रता की जाती है! ऐसी परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किसी दिन मेडिकल कॉलेज का प्रांगण गोलियों की तड़तडाहत से गूंजता हुआ दिखाई देगा। इस पूरे प्रकरण में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं चिकित्सीय अधिकारियों का रवैया तकलीफ दायक रहा, तब जब कि डॉक्टर द्वारा पत्रकार के साथ मारपीट के पूरे वीडियो एविडेंस उपलब्ध होते हुए वे आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की जगह, प्राचार्य डॉक्टर को माफ कर देने की बात को ज्यादा तरजीह देते नजर आए। खबरों के फ्लैश होने से और वीडियो के वायरल होने से जिलाधिकारी द्वारा मेडिकल कॉलेज में हो रही अवस्थाओं पर जो तीन सदस्य टीम का गठन किया गया वो जरूर जख्मों पर मरहम का काम कर गया। पुलिस द्वारा पत्रकार के विरुद्ध क्रॉस एफ आई आर करने क़ो आप समझ सकते है ये मानवीय संवेदना क़ो झकझोर देने वाला कार्य है? मैं पूछता हूँ जनपद की पुलिस से क्या सादा वर्दी में गए किसी पुलिसकर्मी के साथ ऐसी वद- सलूकी होती तब भी क्या पुलिस क्रास एफआईआर दर्ज करती? पुलिस द्वारा दर्ज की गई दोनों एफ आई आर मे कोई सत्यता नहीं है! पत्रकारों की तरफ से भी सिर्फ मारपीट का अभियोग दर्ज होना चाहिए था, और डॉक्टरों की तरफ से किसी भी प्रकार की कोई शिकायत दर्ज न होकर उन पर सिर्फ विधि अनुसार कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए थी।1
- एटा ब्रेकिंग:- निलंबन का ढोल,आदेश गोल—मेडिकल कॉलेज में कार्रवाई या सिर्फ “लॉलीपॉप”? पत्रकार-डॉक्टर विवाद में डॉ. मुकेश परमार को निलंबित करने का दावा,लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं,कार्रवाई पर खड़े हुए गंभीर सवाल। आउटसोर्सिंग से नियुक्त डॉक्टर पर निलंबन की कार्यवाही,जबकि नियमों के तहत संविदा समाप्त या बर्खास्तगी होनी चाहिए—प्रबंधन की मंशा पर भी उठे सवाल। विवादित डॉक्टर को पूर्व में अवैध वसूली और मरीजों को निजी अस्पताल भेजने के आरोप में कई बार हटाए जाने के बावजूद दोबारा तैनाती,आखिर संरक्षणदाता कौन? तीन-तीन निजी अस्पताल संचालित होने की जानकारी के बाद भी जिम्मेदारों की चुप्पी,आखिर क्यों? प्राचार्य का मौखिक फरमान—मेडिकल कॉलेज में पत्रकारों की एंट्री और जानकारी पर रोक,क्या छुपाए जा रहे हैं अंदर के “काले कारनामे”? सूत्रों के अनुसार अवैध वसूली, प्राइवेट रेफर और दो दिन ड्यूटी के बदले पुरे माह की सैलरी में हिस्सेदारी जैसे गंभीर खेलों की चर्चा तेज। मेडिकल कॉलेज की इस मौखिक कार्रवाई पर उठे तीखे सवाल…1
- *थाना सहपऊ क्षेत्र के गंदे नाले मे शव मिलने की सूचना पर थाना सहपऊ पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम हेतु मोर्चरी भेजा गया। मृतक व आरोपी दोनो पडोसी है। परिजनो की तहरीर पर अभियोग पंजीकृत कर आरोपियो की गिरफ्तारी हेतु टीम गठित करने आदि के सम्बन्ध मे CO सादाबाद की बाइट-* 👇🏻1
- Post by HEMANT KAUSHIK1