चंबा: आयुष ग्राम योजना के तहत गांव-गांव लगाए जाएंगे स्वास्थ्य शिविर, लोगों को बताए जाएंगे आयुष लाइफस्टाइल के लाभ। चंबा: आयुष ग्राम योजना के तहत गांव-गांव लगाए जाएंगे स्वास्थ्य शिविर, लोगों को बताए जाएंगे आयुष लाइफस्टाइल के लाभ। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश तीसा। नेशनल आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित आयुष ग्राम योजना के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से गांव-गांव आयुष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोगों को आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुष आधारित जीवनशैली के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तीसा डॉ. आशु गर्ग ने दी। उन्होंने बताया कि शिविरों के दौरान ग्रामीणों को रोगों से बचाव, संतुलित आहार, व्यहार,योग अभ्यास, दिनचर्या सुधार और आयुष पद्धतियों से स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। डॉ. गर्ग ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न पंचायतों और गांवों में कैंप आयोजित कर स्थानीय लोगों को निशुल्क परामर्श व जागरूकता सेवाएं प्रदान की जाएंगी। बाइट डॉ आशु गर्ग उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तीसा।
चंबा: आयुष ग्राम योजना के तहत गांव-गांव लगाए जाएंगे स्वास्थ्य शिविर, लोगों को बताए जाएंगे आयुष लाइफस्टाइल के लाभ। चंबा: आयुष ग्राम योजना के तहत गांव-गांव लगाए जाएंगे स्वास्थ्य शिविर, लोगों को बताए जाएंगे आयुष लाइफस्टाइल के लाभ। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश तीसा। नेशनल आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित आयुष ग्राम योजना के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से गांव-गांव आयुष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोगों को आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुष आधारित जीवनशैली के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तीसा डॉ. आशु गर्ग ने दी। उन्होंने बताया कि शिविरों के दौरान ग्रामीणों को रोगों से बचाव, संतुलित आहार, व्यहार,योग अभ्यास, दिनचर्या सुधार और आयुष पद्धतियों से स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। डॉ. गर्ग ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न पंचायतों और गांवों में कैंप आयोजित कर स्थानीय लोगों को निशुल्क परामर्श व जागरूकता सेवाएं प्रदान की जाएंगी। बाइट डॉ आशु गर्ग उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तीसा।
- Post by Dishant Bramnhotra1
- चंबा: नगर परिषद की कार्रवाई से परेशान रेहड़ी-पटरी वाले पहुंचे डीसी कार्यालय, लगाया उत्पीड़न का आरोप। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश चंबा। जिला मुख्यालय चंबा में रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदारों ने नगर परिषद पर लगातार परेशान करने के आरोप लगाए हैं। इसी को लेकर आज बड़ी संख्या में रेहड़ी वाले डीसी कार्यालय पहुंचे और अपनी शिकायत प्रशासन के समक्ष रखी। रेहड़ी वालों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से शहर में मेहनत-मजदूरी कर अपना रोजगार चला रहे हैं, लेकिन नगर परिषद द्वारा उन्हें बार-बार तंग किया जा रहा है। उनका आरोप है कि परिषद की कार्रवाई केवल उन्हीं पर की जा रही है, जबकि कई ऐसे लोग भी बाजार में काम कर रहे हैं जिनके पास कोई वैध परमिट नहीं है, लेकिन उन्हें हटाया नहीं जा रहा। रेहड़ी वालों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके साथ न्याय किया जाए और वर्षों से चल रहे उनके रोजगार को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही उन्होंने नगर परिषद की कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की है। डीसी कार्यालय में रेहड़ी वालों ने अपनी समस्याओं को लेकर ज्ञापन भी सौंपा और उचित समाधान की उम्मीद जताई। बाइट स्थानीय दुकानदार।2
- Post by Alladitta1
- कांगड़ा, 19 फरवरी। खोली गांव के साथ लगते सिम्वल खोला क्षेत्र में पोटली में बंद नवजात शिशु का शव मिलने से सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों ने कुत्तों को पोटली मिट्टी से निकालते देखा, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। जांच में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मात्र चार घंटे में मामले का खुलासा कर दिया। पता चला कि टांडा मेडिकल कॉलेज में चंबा के चुराह से आए दंपति के यहां जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ था, जिनमें से एक मृत पैदा हुआ। परिजनों ने स्थानीय टैक्सी चालक की मदद से शव को उक्त स्थान पर दबाया था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की जा रही है।1
- जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी इन दिनों जुकारू पर्व की रंगत में पूरी तरह सराबोर है। पर्व के दूसरे दिन मनाया जाने वाला दूवालू मेला आज बड़े उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित किया गया। धरती माता की आराधना, कृषि परंपराओं की शुरुआत और सामुदायिक एकता का प्रतीक यह दिन पांगी की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर देता है। ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ होता है पावन दिन। दूवालू मेले का दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हो जाता है। गांवों में सुबह-सुबह शंखनाद और पारंपरिक लोकधुनों के बीच लोग स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। घरों में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं पारंपरिक पंगवाली परिधान और आभूषणों से सुसज्जित होती हैं, जबकि पुरुष भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं। घर की पूजा के पश्चात लोग समूहों में धरती माता के पूजन स्थल की ओर प्रस्थान करते हैं। कई परिवार अपने खानदानी धरती माता स्थल पर जाते हैं, जहां पीढ़ियों से पूजा होती आ रही है। वहीं कई गांवों में समस्त प्रजामंडल एक ही स्थान पर एकत्र होकर सामूहिक पूजा-अर्चना करता है, जिससे सामुदायिक एकता और भाईचारे की भावना प्रकट होती है। धरती माता का शृंगार और विशेष अनुष्ठान। पूजा स्थल पर सबसे पहले धरती माता का विधिवत शृंगार किया जाता है। फूलों, धूप-दीप और पारंपरिक सामग्री से सजाकर उन्हें नमन किया जाता है। इसके बाद पूरी, मंडे और सत्तू का प्रसाद अर्पित किया जाता है। विशेष परंपरा के अनुसार आटे से बने बकरों की प्रतिमा धरती माता के चरणों में चढ़ाई जाती है। यह प्रतीकात्मक बलि समर्पण, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर वर्ष श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। कृषि चक्र की औपचारिक शुरुआत। धरती माता की पूजा के पश्चात खेतों में हल जोतने और बीज बोने की रस्म निभाई जाती है। पांगी घाटी में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिसके कारण यहां वर्ष में केवल एक ही मुख्य फसल उगाई जाती है। दूवालू मेला इस बात का संकेत है कि अब बर्फ पिघलने लगी है और ग्रीष्मकालीन खेती का समय आ गया है। किसान पारंपरिक औजारों के साथ खेतों में जाते हैं और प्रतीकात्मक रूप से हल चलाकर बीज बोते हैं। यह प्रकृति से जुड़ाव, श्रम और आशा का संदेश देता है कि आने वाला मौसम समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। लोकनृत्य, संगीत और सामुदायिक उल्लास। पूरे दिन गांवों में लोकनृत्य और पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देती है। महिलाएं गोल घेरा बनाकर पारंपरिक नृत्य करती हैं, जबकि पुरुष ढोल-नगाड़ों की थाप पर उत्साह से झूमते हैं। युवा पीढ़ी भी पूरे उत्साह से इस पर्व में भाग लेती है, जिससे परंपरा की निरंतरता बनी रहती है। शाम के समय जब लोग नाचते-गाते अपने घरों की ओर लौटते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और आनंदमय हो उठता है। दूवालू मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अवसर भी है। साच, कुमार और परमार भाटोरी में विशेष मान्यता। पांगी के साच, कुमार और परमार भाटोरी गांवों में दूवालू मेले का विशेष महत्व है। इन क्षेत्रों में आज विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर धरती माता की पूजा अगले दिन संपन्न होती है। इन गांवों में रात्रि के समय मोटे अनाज से बकरे की प्रतिमा बनाई जाती है। पूरी रात विशेष मंत्रोच्चार और पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह अनुष्ठान असुरी शक्तियों के नाश और क्षेत्र की रक्षा के लिए किया जाता है। रात के समय गांवों में एक गंभीर और रहस्यमयी वातावरण बना रहता है। परंपरा के अनुसार लोग घरों से बाहर नहीं निकलते और जब तक घर का मुखिया सुरक्षित वापस नहीं लौटता, तब तक घरों के द्वार बंद रखे जाते हैं। यह परंपरा आज भी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती है। संस्कृति, प्रकृति और विश्वास का अद्वितीय संगम। जुकारू पर्व का दूवालू मेला पांगी की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और सामूहिक जीवन शैली का जीवंत उदाहरण है। यह पर्व दर्शाता है कि यहां के लोग धरती को केवल संसाधन नहीं, बल्कि माता के रूप में पूजते हैं। तेजी से बदलते आधुनिक दौर में भी पांगी के लोग अपनी परंपराओं को पूरी श्रद्धा और गर्व के साथ निभा रहे हैं। दूवालू मेला न केवल कृषि और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और संजोने का प्रेरणास्रोत भी है।1
- चम्बा में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम… चम्बा सुरेंद्र ठाकुर उपायुक्त चम्बा मुकेश रेपसवाल ने पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल चम्बा में मरीजों के लिए बनाए जा रहे नए शौचालयों का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल के प्राचार्य डॉ. पंकज गुप्ता ने उपायुक्त का स्वागत किया और निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी। उपायुक्त ने पूर्व में पुराने शौचालयों की स्थिति का जायजा लेने के बाद लोक निर्माण विभाग को निविदा प्रक्रिया पूरी कर कार्य शीघ्र आरंभ करने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध रूप से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। Pangi Live News, चम्बा।1
- Post by Jahangir Kholi1
- चंबा: आयुष ग्राम योजना के तहत गांव-गांव लगाए जाएंगे स्वास्थ्य शिविर, लोगों को बताए जाएंगे आयुष लाइफस्टाइल के लाभ। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश तीसा। नेशनल आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित आयुष ग्राम योजना के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से गांव-गांव आयुष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोगों को आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुष आधारित जीवनशैली के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तीसा डॉ. आशु गर्ग ने दी। उन्होंने बताया कि शिविरों के दौरान ग्रामीणों को रोगों से बचाव, संतुलित आहार, व्यहार,योग अभ्यास, दिनचर्या सुधार और आयुष पद्धतियों से स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। डॉ. गर्ग ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न पंचायतों और गांवों में कैंप आयोजित कर स्थानीय लोगों को निशुल्क परामर्श व जागरूकता सेवाएं प्रदान की जाएंगी। बाइट डॉ आशु गर्ग उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी तीसा।1